बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

ओबीसी-ईबीसी आयोग बनाया

 


पटना.बिहार प्रदेश जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश उपाध्यक्ष सह मुख्यालय प्रभारी डॉ नवीन कुमार आर्य हैं.उनको बिहार में अति पिछड़ा जाति आयोग का अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार आर्य बने.बनाया गया.बिहार सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए ओबीसी-ईबीसी आयोग बनाया है.वहीं नीतीश सरकार, हाईकोर्ट से पुनर्विचार याचिका वापस ले लिया.

 बिहार नगर निकाय चुनाव 2022 का रास्ता अति पिछड़ों के आरक्षण के साथ साफ कर दिया गया है. चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार और अन्य की पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई की. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अति पिछडे वर्ग के राजनीतिक पिछड़ेपन के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया गया है.                                       

    नगर निकाय चुनाव को चार अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया था. उच्च न्यायालय ने उस वक्त भी आदेश दिया था कि बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रिपल टेस्ट कराकर आयोग गठन करे. उसके बाद चुनाव कराएं. चुनाव स्थगित हो जाने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था. बिहार सरकार के इलेक्शन कमीशन की ओर से वकील संजीव निकेश ने बताया कि सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को स्टेटमेंट दिया गया कि हम डेडिकेटेड कमीशन बना रहे हैं. उस स्टेटमेंट को हाईकोर्ट ने एक्सेप्ट किया है. इसे एक्सेप्ट करके कमीशन की ओर से जो रिपोर्ट आएगी उसका ऑब्जरवेशन किया जाएगा. डेडिकेटेड कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर ही चुनाव होगा.         

   सरकार ने कोर्ट को बताया कि अति पिछडे़ वर्ग के राजनीतिक पिछड़ेपन के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया गया है. बिहार में नगर निकाय का चुनाव कराया जा सकेगा.सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता विकास सिंह एवं वरीय अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने रखा. बिहार के नगर निकाय चुनावों में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ दिए जाने के मसले पर पटना हाईकोर्ट में आज बुधवार को सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार व अन्य की पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई की.

    राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अति पिछडे़ वर्ग के राजनीतिक पिछड़ेपन के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया गया है. हाईकोर्ट ने नगर निकाय आरक्षण मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले को ईबीसी कमीशन के समक्ष भेजने के लिए कहा है और ईबीसी कमीशन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के आलोक में रिपोर्ट देना है.

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ईबीसी आयोग का रिपोर्ट आने के बाद ही, बिहार में नगर निकाय का चुनाव कराया जा सकेगा. हाईकोर्ट ने इस मामले को राज्य सरकार के अंडरटेकिंग के आलोक में निष्पादित कर दिया. सुनवाई में राज्य सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता विकास सिंह एवं वरीय अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने रखा.

  वरीय अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश में त्रुटि बताते हुए  कोर्ट को बताया कि आरक्षण का प्रावधान केवल ईबीसी के लिए है न कि ओबीसी के लिए. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव आयोग से जानना चाहा कि ओबीसी और ईबीसी के अलावा सामान्य वर्ग का चुनाव क्यों नहीं कराया जा सका?

   इस पर आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने बताया कि  बार बार चुनाव कराना अपने आप में एक बेहद कठिन कार्य है. उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ की गई कोर्ट की टिप्पणियों को पारित फैसले से हटाने की गुहार की. 

   बता दें कि नगर निकाय चुनाव में ईबीसी आरक्षण पर 4 अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था. इसमें कोर्ट ने निकाय चुनाव में ईबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी थी. इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव चुनाव को स्थगित कर दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी.

   उल्लेखनीय है कि बिहार में नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना पहले ही जारी हो गई थी. उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर चुके थे. 10 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए थे. उम्मीदवार चुनाव प्रचार में जोर-शोर से लगे थे। इसी बीच पटना हाई कोर्ट के फैसले से सब कुछ फंस गया. 

माननीय हाईकोर्ट के द्वारा अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ईबीसी आयोग का रिपोर्ट आने के बाद ही, बिहार में नगर निकाय का चुनाव कराया जा सकेगा. हाईकोर्ट ने इस मामले को राज्य सरकार के अंडरटेकिंग के आलोक में निष्पादित कर दिया.अब नगर निकाय के प्रत्याशियों को उम्मीद हो गयी है कि जल्द ही निकाय का चुनाव हो सकेगा.सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राय,राजकुमार राय, उमेश कुमार,मुक्ति प्रकाश,पैक्स अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद आदि प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के प्रति आभार व्यक्त किया कि जल्द ही बिहार में अति पिछड़ा जाति आयोग गठित कर उसका अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार आर्य को बना दिया.

आलोक कुमार


मल्लिकार्जुन खड़गे को निर्वाचित घोषित

 


पटना.आज बुधवार का दिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लिए ऐतिहासिक है. 24 साल के बाद अध्यक्ष का पद गांधी परिवार से दूर चला गया है.यह 22 साल के बाद लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव होने के बाद संभव हो सका. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर आमने-सामने थे.कांग्रेसियों का झुकाव शुरू से ही मल्लिकार्जुन खडगे के पक्ष में ही था.जो अंत तक रहा.अंततःमल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने प्रति़द्वदी शशि थरूर को भारी अंतर से पराजित कर दिया.खड़गे ने अपने प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 6,825 मतों के अंतर से पराजित किया. खड़गे को 7,897 वोट मिले तथा थरूर को 1,072 वोट हासिल हुए.चुनाव में 9,385 वोट पड़े थे और इनमें से 416 वोट अवैध करार दिए गए. कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने मल्लिकार्जुन खड़गे को निर्वाचित घोषित किया.

       कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के नये अध्यक्ष बन गये हैं. उन्होंने एक मात्र प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 6,825 वोटों के भारी अंतर से पराजित कर कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा किया। कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर 24 वर्षों के बाद कोई गैर गांधी परिवार का सदस्य बैठा है. सामान्यतः कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से बनता रहा है, इसलिए एक आम धारणा है कि कांग्रेस गांधी परिवार की पार्टी है. वोटों की गिनती नई दिल्ली में सुबह 10 बजे से आरम्भ हुई. 17 अक्टूबर को देशभर के  68 बूथों पर हुए मतदान के बाद सभी राज्यों के बैलेट बॉक्स को दिल्ली में इकट्ठा किया गया. आज गिनती शुरू होने से पहले बैलेट बॉक्स से सभी बैलेट पेपर निकाल कर मिलाया गया और फिर उनकी गिनती की गयी. मतगणना के दौरान शशि थरूर ने मतदान और बैलेट बॉक्स में गड़बड़ी के आरोप लगाया. लेकिन मतगणना पूरी होने के बाद शशि थरूर ने अपनी हार स्वीकार कर ली.

    कांग्रेस चुनाव को लेकर काफी लम्बे समय से गहमागहमी चल रही थी. सीताराम केसरी के 24 साल बाद कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खड़गेे के रूप में पहला गैर गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मिल गया है. चुनाव के दौरान कांग्रेस के 9,900 में से 9,500 डेलीगेट ने वोटिंग किया था. कांग्रेस में इससे पहले अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 1939, 1950, 1977, 1997 और 2000 में चुनाव हुए थे. 2000 के चुनाव में सोनिया गांधी ने जितेंद्र प्रसाद को हराकर अध्यक्ष पद हासिल किया था.गांधी परिवार से करीबी और कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के चलते खड़गे  की दावेदारी पहले ही मजबूत मानी जा रही थी. मतदान से पहले सोनिया गांधी ने कहा था कि मैं इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रही थी.

     80 साल के खड़गेे ने शशि थरूर को बड़े अंतर से अध्यक्ष चुनाव में पराजित किया है.कई राजनीतिक ड्रामेबाजी के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था. शशि थरूर सोनिया गांधी की अनुमति लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने अपना आधिकारिक मल्लिकार्जुन खड़गे को बनाया इसलिए यह पहले से ही तय था कि वही कांग्रेस के अगले अध्यक्ष बनने वाले हैं.

     थरूर ने चुनाव नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली और खड़गे को बधाई दी.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को पार्टी के नए अध्यक्ष निर्वाचित हो गए.थरूर ने एक बयान में कहा, अंतिम फैसला खड़गे के पक्ष में रहा, कांग्रेस चुनाव में उनकी जीत के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देना चाहता हूं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का अध्यक्ष बनना बड़े सम्मान, बड़ी जिम्मेदारी की बात है, मैं मल्लिकार्जुन खड़गे को इस चुनाव में उनकी सफलता के लिए बधाई देता हूं.‘

   कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंध्र प्रदेश के अडोनी में ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि नए अध्यक्ष यह तय करेंगे कि ‘मेरी भूमिका क्या है और मुझे क्या जिम्मेदारी दी जाएगी.‘ अध्यक्ष पद के चुनाव के नतीजे घोषित होने से पहले पत्रकारों से बात कर रहे राहुल ने एक बार कहा, यह खड़गे को तय करना है लेकिन बाद में अपने शब्दों को सुधारते हुए उन्होंने कहा, जो कोई भी चुना जाएगा, वह सज्जन फैसला करेंगे. राहुल से जब पूछा गया कि क्या वह नए अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे, उन्होंने कहा, जाहिर है.राहुल गांधी के इस बयान ने विपक्षी पार्टियों को सवाल उठाने के मौका दे दिया.

कांग्रेस की निवर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर पहुंचकर उन्हें बधाई दी. चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद सोनिया गांधी 10 राजाजी मार्ग स्थित खड़गे के आवास पर पहुंचीं. उनकी बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस दौरान उनके साथ थीं.

      अध्यक्ष अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष पद पर श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्वाचित होने पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामना दी है.

डा0 मदन मोहन झा ने बधाई देते हुए कहा कि श्री खड़गे पार्टी के सर्वाधिक अनुभवी नेताओं में से एक हैं गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले खड़गे प्रखंड स्तर से कांग्रेस की राजनीति में शामिल हुए. विधायक और सांसद तो हुए ही केन्द्र सरकार में रेल और श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे. उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है.उनका अब तक का राजनीतिक जीवन सादगीपूर्ण और उच्च आदर्शों वाला रहा है.  

    कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा, सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, डा0 समीर कुमार सिंह, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, डा0 अशोक कुमार, अनुशासन समिति के अध्यक्ष कृपानाथ पाठक, विधान पार्षद प्रेमचन्द्र मिश्रा, मीडिया विभाग के चेयरमेन राजेश राठौड़, सदस्यता प्रभारी ब्रजेश प्रसाद मुनन,कुमार आशीष, ब्रजेश पाण्डेय, असितनाथ तिवारी, लाल बाबू लाल, ज्ञान रंजन,राजेश कुमार सिन्हा, मृणाल अनामय,जय प्रकाश चौधरी, राजेश मिश्रा, उदय शंकर पटेल, रवि गोल्डन, उदय शंकर पटेल, रवि गोल्डन,सिसिल साह, पंकज यादव ने भी श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने पर बधाई दिया है.

   खड़गेे गांधी परिवार के शुरू से वफादार रहे हैं. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले खड़गे ने एक लंबी पारी यूनियन पॉलिटक्स की भी खेली. साल 1969 में वह एमएसके मिल्स एम्प्लॉईज यूनियन के कानूनी सलाहकार बन गए।.वह संयुक्त मजदूर संघ के एक प्रभावशाली नेता थे, जिन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए किए गए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया. कांग्रेसी नेता खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और गुलबर्गा के सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। फिर गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे. साल 1969 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा और 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल असेंबली सीट से विधायक बने. खड़गे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए. इस दौरान उन्होंने गुंडू राव, एसएम कृष्णा और वीरप्पा मोइली की सरकारों में विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला. वह दो बार गुलबर्गा से कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी रहे हैं.

   अध्‍यक्ष के तौर पर कांग्रेस की कमान संभालने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे को कई चुनावी परीक्षाओं से गुजरना होगा. इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं.ऐसे में खड़गे के कार्यकाल की शुरुआत इन दो चुनावी परीक्षाओं से होगी. चुनावी परीक्षाओं का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा क्योंकि अगले साल की शुरुआत में कर्नाटक में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. अगले साल से ही 2024 में होने वाले आम चुनावों की सरगर्मी तेज हो जाएगी. जाहिर है खड़गे से बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षाएं भी होंगी.

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2022

बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से उठाव एवं निस्तारण

 बायो मेडिकल वेस्ट का प्रॉपर तरीके से करायें उठाव एवं निस्तारण: जिलाधिकारी

उल्लंघन करने वाले अस्पतालों एवं जांच घरों के विरुद्ध नियमानुकूल करें कार्रवाई


बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला परामर्श समिति की बैठक सम्पन्न हुयी. इस बैठक में बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से उठाव एवं निस्तारण आदि बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया.इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, सिविल सर्जन सहित बिहार पोलुशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी आदि उपस्थित रहे.

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट का प्रॉपर तरीके से उठाव एवं निस्तारण करना अति आवश्यक है.बायो मेडिकल वेस्ट लोगों के लिए हानिकारक है तथा इससे कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है. अधीक्षक, जीएमसीएच एवं सिविल सर्जन बायो मेडिकल वेस्ट का समुचित तरीके से निस्तारण करना सुनिश्चित करेंगे. साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट स्टोरेज के लिए भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने कहा कि जिले के सभी सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों, जांच घरों द्वारा उक्त कानून का अनुपालन करना अनिवार्य है. उक्त कानून का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों, जांच घरों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित की जाय.

समीक्षा के क्रम में बताया गया कि खुले में बायो मेडिकल वेस्ट से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है. इसके लिए पोलुशन कंट्रोल बोर्ड से लाइसेंस लेना अनिवार्य हैं अस्पतालों को. इसके साथ ही डोमेस्टिक बायो मेडिकल वेस्ट का भी सही तरीके से उठाव करना तथा निस्तारण करना भी जरूरी है.

अधीक्षक, पीएमसीएच द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन संबंधित एजेंसी द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट का उठाव कर प्रॉपर तरीके से निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है.सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों द्वारा इसके लिए उचित कार्रवाई की जा रही है. अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का समुचित तरीके से निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है.

जिलाधिकारी ने नगर निगम आयुक्त, बेतिया, सभी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी सहित सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बायो मेडिकल वेस्ट का दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाव, निस्तारण करना सुनिश्चित करेंगे.


आलोक कुमार

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न

 अंतर्जातीय विवाह एवं निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना का व्यापक स्तर पर करायें प्रचार-प्रसार: जिलाधिकारी

मुख्यमंत्री अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 61 तथा मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 15 लाभुकों को किया गया लाभान्वित

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक सम्पन्न


बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना एवं मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित किया जाए ताकि लाभुक इससे लाभान्वित हो सके. उन्होंने कहा कि उक्त दोनों योजनाएं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं है, इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बरती जाय तथा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. जिलाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे.

   सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा बताया गया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना अंतर्गत जिले के 61 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.इसी तरह मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना अंतर्गत जिले के 15 लाभुकों को स्वीकृत आवेदन के आलोक में लाभान्वित किया गया है.

   उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन को और अधिक व्यापक बनाने तथा अंतर्जातीय विवाह करने वाली महिला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन राशि एक लाख रूपये राष्ट्रीयकृत बैंक का सावधि जमा प्रमाण पत्र के माध्यम से अनुदान देने का प्रावधान है, जिसे तीन साल के लिए फिक्स्ड किया जाता है.

मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के अंतर्गत निःशक्त वर या वधू को 01 लाख रुपये अनुदान राशि, वर/वधु दोनों निःशक्त होने की स्थिति में 02 लाख रूपये की अनुदान राशि का प्रावधान है. निःशक्त एवं अंतर्जातीय विवाह की स्थिति में दोनों योजनाओं का लाभ देय है. राशि तीन साल की अवधि के लिए फिक्स्ड की जाती है.

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, श्री अनिल कुमार, सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, श्री ब्रजभूषण कुमार आदि उपस्थित रहे.

दिव्यांग अवधेश राम ने कहा कि बगहा प्रखंड एक का 2012-13 का कन्या विवाह योजना का पैसा अभी तक वितरण नहीं किया गया है.9 साल के बाद भी हम लोगों को राशि नहीं मिली है. आवेदक आवेदन डालकर इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि डीएम साहब अभी आ सकता हूं.

आलोक कुमार


पदाधिकारियों के साथ बैठक



गया. जिला  पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने समाहरणालय सभाकक्ष में शिक्षा विभाग के तमाम पदाधिकारियों के साथ बैठक किया.

    बैठक में जिला पदाधिकारी ने तमाम प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सुदूरवर्ती विद्यालयों तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों पर विशेष नजर रखें. वहां हर हाल में शिक्षक उपस्थित रहे, किसी भी हाल में एक दिन भी मध्यान भोजन (एमडीएम) बंद ना रहे, प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे, पठन-पाठन नियमित रूप से चले.इन सभी चीजों को आवश्यक रूप से देखते रहे.

    सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित रूप से जांच करें. उन्होंने कहा कि हाई स्कूल में एडमिशन के नाम पर अवैध राशि वसूल की जाती है. इन सभी चीजों पर निगरानी रखते हुए संबंधित शिक्षक अथवा प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई करें.

    उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि बिना किसी ठोस कारण के किसी भी शिक्षक को किसी अन्य विभाग अथवा प्रखंड में प्रतिनियुक्ति नहीं करें.यदि ऐसा पाए जाने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के साथ-साथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    किसी भी विद्यालय में एमडीएम 1 दिन भी एमडीएम बंद ना हो यह सुनिश्चित कराएं.यदि कहीं से सूचना मिलती है कि किसी विद्यालय में एमडीएम बंद है तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

    सभी सरकारी विद्यालयों में लगाए गए स्मार्ट क्लास को अच्छे से संचालन करावे.सरकारी विद्यालय के विकास के लिए स्थानीय विधायक की अध्यक्षता में नियमित बैठक करावे.

        जर्जर स्थिति वाले विद्यालय भवन में किसी भी स्थिति में पठन-पाठन नहीं करावे। अगर कोई घटना होती है तो संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे.

  जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कहा कि वैसे सरकारी विद्यालय जो किसी हाईवे के किनारे, जीटी रोड के किनारे अथवा अति व्यस्ततम सड़क के किनारे जो स्कूल है.वहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था रखें. विद्यालय आने के दौरान अथवा विद्यालय से छुट्टी के उपरांत घर जाने के दौरान सड़क पार कराने के लिए स्वयं शिक्षक/ प्रधानाध्यापक उपस्थित रहकर बच्चों को  रोड क्रॉस कराएंगे.

        उन्होंने जिले के सभी शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई करावे. उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया कि हर बुधवार तथा बृहस्पतिवार को तमाम पदाधिकारी फील्ड विजिट में रहेंगे तथा अपने अधीनस्थ सभी सरकारी विद्यालयों का पूरी गुणवत्तापूर्ण निरीक्षण करेंगे. साथ ही उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा विभिन्न विद्यालयों का किए गए जांच से संबंधित प्रतिवेदन लेते हुए संबंधित विद्यालय पर कठोर कार्रवाई करेंगे.

        अंत में जिला पदाधिकारी ने कहा कि अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का अवश्य निर्वहन करें. प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में जो भी बैठक आयोजित की जाती है, उसमें अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे.आपदा संबंधित कार्यों को प्राथमिकता पर निर्वहन करें.


आलोक कुमार


डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा

  


पटना.पूरे बिहार में डेंगू का कहर जारी है. डेंगू अपना पांव तेजी से पसारता जा रहा है. इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी पटना से आ रही है जहां डेंगू के डंक का शिकार आज फिर एक मासूम हो गया. सोमवार को गांधी मैदान स्थित रूबन मेमोरियल के गायनी एवं चाइल्ड हास्पिटल में एक 9 वर्षीय आरव राज की मौत हो गई. दलदली रोड निवासी लोजपा (रामविलास) के पूर्व प्रवक्ता कृष्ण कुमार कल्लू के आरव राज बड़े बेटे थे.आरव राज को गत कई दिन से बुखार था और गंभीर अवस्था में दो दिन पूर्व उसे रूबन में भर्ती कराया गया था.

      इसके पूर्व पूर्व रविवार को नालंदा मेडिकल कालेज सह अस्पताल में डेंगू पीड़ित चार माह की बच्ची की मौत हो गई.इससे पहले 10 अक्टूबर को मसौढ़ी के 10 वर्षीय बच्चे तथा शनिवार को नालंदा के पांच वर्षीय बच्चे की मौत हुई थी. डेंगू से चार बच्चों की मौत के बाद डॉक्टर बच्चों को मच्छरों से बचाने की सलाह दे रहे हैं. वहीं स्वास्थ्य विभाग को इन मौतों की जानकारी नहीं है.इस तरह की घटनाओं सेपरिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.इससे पहले भी तीन दिनों के भीतर तीन बच्चों की मौत डेंगू से हो चुकी है.

  अब तक डेंगू से 5 लोगों की जान जा चुकी है. डेंगू से स्थिति और भयावह होती जा रही है.पटना में 213 नए मामले सामने आए हैं. डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 3155 हो गयी है. डेंगू के बढ़ते केसेज को देखते हुए जिला प्रशासन ने सिविल सर्जन कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया है. जहां स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं.कंट्रोल रूम नंबर 0612-2951964 पर फोन कर सकते हैं. 

     बता दें कि पटना नगर निगम में छह अंचल है. नूतन राजधानी अंचल,पाटलिपुत्र अंचल ,कंकड़बाग अंचल,बांकीपुर अंचल, अजीमाबाद अंचल,पटना सिटी अंचल है.उन अंचलों में कार्यरत कार्यालयों के बाबुओं की खिदमत करने वाले अर्दलियों को क्षेत्र में स्प्रे करने के लिए भेज दिया है.    

       इस समय पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड नम्बर-22 A  में फेकू राम स्प्रे कर रहे हैं.उनके बगल में वार्ड इंस्पेक्टर है.जो राजधानी में कहर बरपाने वाले डेंगू के शिकार हो गये थे.प्लेटलेट्स कम होने के बाद चिकित्सक के क्लिनिक में सलाइन चढ़ाये.पांच दिन के बाद कर्तव्य निभाने आए हैं.इस समय प्रेशर में है पल पल की जानकारी मोबाइल से ऊपर के अधिकारियों को दी जा रही है.    हालात यह है नारियल का कच्चा फल डाभ जिसका पानी पीया जाता है,उसका दाम तेज है.डाभ बेचने वाले शख्स के परिजन डेंगू के शिकार कर सलाइन चढ़वा रहा है.डेंगू के बुखार में नारियल का पानी रामबाण का काम करता है.नारियल के पानी में कई मिनरल्स और पोषक तत्व होते है जो शरीर को फिट रखते हैं.    

       मखदुमपुर बगीचा में रहने  वाले लोगों ने जलजमाव वाले एरिया में ब्लींचिग पावडर छिड़काव करने की मांग की है.यदुवंशी नगर में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उनके घर में चार लोग डेंगू से बेहाल हैं.पॉश एरिया फेयर फील्ड कॉलोनी में बहुत लोग डेंगू से परेशान हैं.

    बताया गया कि खानपान और दिनचर्या में बदलाव सेहतमंद व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है. इसे देखते हुए ज्यादातर लोग आजकल बीमारियों के प्रति जागरूक रहने लगे हैं. पहले खतरनाक मानी जाने वाली बीमारी डेंगू के आम होने के बाद लोगों में प्लेटलेट्स को लेकर जागरूकता आई है और इसी का फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं. सामान्य बीमारियों में भी डॉक्टर सीबीसी टेस्ट करवाते हैं और उसमें प्लेटलेट्स कम होना बताकर इन्हें चढ़ाने के नाम पर कमाई करते हैं.

      जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक सीधे प्लेटलेट चढ़ाने के बजाय यह जांचना जरूरी है कि किस वजह से ये कम हुए हैं. हर मरीज को इन्हें चढ़ाने की जरूरत नहीं होती. उसकी मॉनीटरिंग अच्छे से की जाए तो दवाइयों के जरिए ये बढ़ाए जा सकते हैं. यहां तक कि मरीज को बार-बार प्लेटलेट चढ़ाने पर नुकसान भी हो सकता है. इसका असर प्लेटलेट्स चढ़ाने के बावजूद इसमें वृद्धि नहीं होने के रूप में सामने आता है. पिछले दिनों जिस डेंगू और चिकनगुनिया की दहशत फैली थी, उन बीमारियों में भी अधिकतम 5 फीसदी मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है.

मलेरिया हो या डेंगू किसी भी वायरल इन्फेक्शन से शरीर में प्लेटलेट्स कम हो ही जाते हैं. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति में 1.5 लाख से 4 लाख प्लेटलेट होना चाहिए, लेकिन यदि ये एक लाख, 90 हजार या उससे कम भी हैं, तब भी इंसान को कोई खतरा नहीं होता. उधर, पैथोलॉजी लैब और डॉक्टर लोगों में ऐसा डर पैदा कर देते हैं कि मरीज को प्लेटलेट चढ़वाना जरूरी लगने लगता है.

    खासकर डेंगू जैसी बीमारी में तो प्लेटलेट कम होने को जान पर खतरा मान लिया जाता है.डॉक्टरों के मुताबिक प्लेटलेट 20 हजार भी पहुंच जाएं तो घबराने की बात नहीं है.बिना चढ़ाए भी इन्हें बढ़ाया जा सकता है, केवल कुछ बीमारियां या स्थितियों में ही प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी हो जाता है.

      ग्रेपफ्रूट पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन फल है. इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है. यह फल बुखार निवारक के रूप में भी काम करता है और शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली व्हाइट ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. 

 लेकिन शाम के वक्त फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। डेंगू में हल्के फुल्के आहार लेना ही जरूरी होता है. जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसमें आप खिचड़ी या अन्य हल्के-फुल्के आहार के साथ दही का सेवन कर सकते हैं.

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, रसभरी, गोजी बेरी और ब्लैकबेरी जैसे जामुन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों को बेअसर करते हैं और इस प्रकार प्लेटलेट काउंट में कमी से निपटने में मदद करते हैं. जामुन को आहार में शामिल करने से प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

पपीते का रस प्लेटलेट्स को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा पपीते की पत्तियां बुखार दूर करती हैं.इसलिए सुबह और रात में पपीते का पत्तों का रस पी सकते हैं। डेंगू के मरीज के लिए पपीता बहुत असरकारक होता है.

डेंगू बुखार के समय टमाटर, कद्दू, गाजर, खीरा, चुकंदर आदि का अधिक सेवन करना चाहिए। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर ये सब्जियां मरीज के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं.इसके अलावा सब्जियों को हल्का पकाकर या उबालकर ही खाना चाहिए.

 डेंगू के मरीज को प्रोटीन की जरूरत होती है. इसलिए उसे अंडे, दूध और डेयरी के पदार्थों का सेवन करना चाहिए. अगर मरीज को नॉनवेज खा सके तो मछली, चिकन और मीट अपने खाने में शामिल करें.

संतरा, पपीता, अमरूद, कीवी, आलूबुखारा, तरबूज जैसे फलों को डेंगू के बुखार आने पर खाना चाहिए. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इन फलों को खाने से मरीज को खूब पेशाब होगी.जिसके चलते वायरस पेशाब के जरिए बाहर निकल जाएगा.

 नींबू का रस डेंगू के मरीज की यूरिन के जरिए शरीर में मौजूद वायरस और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है.इसके अलावा नींबू का रस शरीर के भारीपन को भी दूर करता है.डेंगू बुखार आने पर शरीर का एनर्जी लेवल बहुत कम हो जाता है.इसलिए मरीज को दलिया देनी चाहिए और यह आसानी पच भी जाती है.

डेंगू बुखार के आने पर अदरक और इलायची से बनी हर्बल टी को मरीज को पीना चाहिए.

अधिक से अधिक पानी पीना डेंगू के मरीज के लिए बहुत फायदेमंद होता है. डेंगू के मरीज को सूप देना चाहिए. इससे उसकी हड्डियों का दर्द भी कम होगा और मुंह का स्वाद भी ठीक रहेगा.

आलोक कुमार

सोमवार, 17 अक्टूबर 2022

2 दिनों के अंदर नए ट्रांसफार्मर लगवाना सुनिश्चित कराएं

 


 गया. अल्प वर्षापात के लेकर बिहार सरकार द्वारा घोषित किये गए सुखाड़ को लेकर ज़िले के विभिन्न राजस्व ग्राम में डोर टू डोर किए जा रहे सर्वेक्षण तेजी से किया जा रहा है, ताकि सुखाड़ से प्रभावित व्यक्ति को सरकार द्वारा किए जा रहे लाभ को उपलब्ध कराया जा सके.

       इसी परिपेक्ष में आज जिला पदाधिकारी डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा परैया प्रखंड का निरीक्षण किया गया। परैया प्रखंड में 06 पंचायत सुखाड़ प्रभावित चिन्हित किए गए हैं. उन सभी पंचायतों के सभी राजस्व ग्राम का किये रहे सर्वे का निरीक्षण किया.

    सुखाड़ सर्वेक्षण का स्वयं जिलाधिकारी द्वारा निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही जिले के कई वरीय अधिकारियों को सुखाड़ वाले प्रखंडों में नामित किया गया है जो सीधे तौर पर नीचे के पदाधिकारियों से समन्वय करते हुए निगरानी रखेंगे.

    परैया प्रखंड के परैयाखुर्द पंचायत के ग्राम परैयाखुर्द जो सूखाग्रस्त इलाका है, इन इलाकों का सर्वेक्षण करने के कार्य का डीएम द्वारा निरीक्षण किया गया. उन्होंने उपस्थित सर्वेक्षणकर्ता को निर्देश दिया कि वार्ड वार घूम घूम कर प्रत्येक घर का सर्वेक्षण कार्य गुणवत्ता पूर्ण करें. उन्होंने उपस्थित सर्वेक्षण कर्ता  से आज के रिपोर्ट की जानकारी लिया कि कितने घरों का आज सर्वेक्षण किया गया.बताया गया कि वार्ड संख्या 09 में कुल 170 घरों को चिन्हित करते हुए आपदा सम्पूर्ति पोर्टल के लिए पर्याप्त का दीदार को देखते हुए मिलान किया गया.

       


जिला पदाधिकारी ने सभी सर्वेक्षण कर्ताओं को कठोर निर्देश दिया है कि जिनको भी जो दायित्व दी गई है वह फील्ड में जा करके वास्तविक सर्वेक्षण करें, न कि कागजी प्रक्रिया करें.ऐसे लापरवाही करने वाले सर्वेक्षणकर्ता कर्मियों के विरूद्ध आपदा अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

       ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि इस टोले में विगत 1 सप्ताह से ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण बिजली बाधित है जिला पदाधिकारी में कार्यपालक अभियंता ग्रामीण बिजली विभाग को निर्देश दिया कि 2 दिनों के अंदर नए ट्रांसफार्मर लगवाना सुनिश्चित कराएं.

       कई ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से अनुरोध किया कि जमीन का एलपीसी निर्गत करने में अंचल कार्यालय में काफी लंबित रखा जा रहा है. जिला पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी को निर्देश दिया कि कागजातों का जांच करते हुए तेजी से एलपीसी निर्गत करना सुनिश्चित करें.


आलोक कुमार


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