गुरुवार, 21 सितंबर 2023

रैम्प का निर्माण कराया गया

 

जिलाधिकारी ने सेमरा के नवनिर्मित रेफरल अस्पताल एवं थाना का किया औचक निरीक्षण

जिलाधिकारी, श्री दिनेश कुमार राय ने आज बगहा-02 प्रखंड के सेमरा स्थित नवनिर्मित रेफरल अस्पताल एवं थाना का औचक निरीक्षण किया

सेमरा. पश्चिम चंपारण में है सेमरा.नवनिर्मित रेफरल अस्पताल, सेमरा दो तल पर स्थित है। मरीजों की सुविधा   के लिए  रैम्प का निर्माण कराया गया है। दोनों ही तल पर रिसेप्शन काउंटर बना हुआ है। विभिन्न प्रकार के अलग-अलग रूम निर्मित पाए गए। कमरों की पहचान  के लिए  साईनेजेज लगे हुए पाए गए।

 निरीक्षण के दौरान उपस्थित एमओआईसी द्वारा बताया गया कि बिजली की सुविधा नहीं रहने के कारण, सुचारू रूप से अस्पताल प्रारम्भ नहीं हो पाया है। पृच्छा के क्रम में बताया गया कि जनरेटर भी उपलब्ध नहीं है। मानव संसाधन के संदर्भ में बताया गया कि समीप के संस्थानों से प्रतियुक्ति करके संचालित कराया जा रहा है।

जिलाधिकारी द्वारा सिविल सर्जन को अविलंब प्रावधानों के आलोक में पहल करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अस्पताल परिसर तथा समूचे अस्पताल की समुचित साफ-सफाई सुनिश्चित करने  के लिए  निर्देशित किया गया। इस अवसर पर एसडीएम, बगहा, डॉ0 अनुपमा सिंह, एएसडीएम, बगहा, श्री सरफराज नवाज सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


आलोक कुमार


सिवागंगाई धर्मप्रांत के नवनियुक्त धर्माध्यक्ष लूर्दू आनन्दम

 सिवागंगाई धर्मप्रांत के नवनियुक्त धर्माध्यक्ष लूर्दू आनन्दम 


तमिलनाडु. सिवागंगाई धर्मप्रांत के नवनियुक्त धर्माध्यक्ष लूर्दू आनन्दम मदुराई महाधर्मप्रांत के पुरोहित हैं और इस समय पवित्र रोजरी पल्ली के पल्ली पुरोहित के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं.नवनियुक्त धर्माध्यक्ष लूर्दू आनन्दम का जन्म 15 अगस्त 1958 को सिवागंगाई धर्मप्रांत के तिरूवरंगम में हुआ था. मदुराई के अरूल अनन्दर कॉलेज से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई के बाद, उन्होंने तिरूचिरापल्ली के संत पौल सेमिनरी से ईशशास्त्र की पढ़ाई की. बाद में, जर्मनी के फ्रेईबर्ग स्थित अल्बर्ट लुदविग युनिवर्सिटी से डॉक्ट्रेट की उपाधि हासिल की.नवनियुक्त धर्माध्यक्ष लूर्दू आनन्दम का पुरोहिताभिषेक 6 अप्रैल 1986 को मदुराई महाधर्मप्रांत के लिए हुआ.

सेंट बेनेडिक्ट मठ अरुल नगर, करुंगलाकुडी, चोलापुरम सिवागंगाई .यह मदुरै महाधर्मप्रांत था.उसके बाद मदुरै महाधर्मप्रांत को पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 3 जुलाई 1987 को विभाजित कर सिवागंगाई धर्मप्रांत का निर्माण करने का आदेश दिया.सिवागंगाई  धर्मप्रांत की स्थापना 25 जुलाई 1987 हो गई.सिवागंगाई धर्मप्रांत के प्रथम बिशप एस.एडवर्ड फ्रांसिस डीडी थे.उनके बाद दूसरे बिशप डॉ. जेबामलाई सुसैमानिकम डीडी बने.

प्रेरितिक प्रशासक स्टीफन एंटनी पिल्लई

सिवागंगाई धर्मप्रांत के प्रेरितिक प्रशासक स्टीफन एंटनी पिल्लई का जन्म 25 सितंबर 1945 को हुआ था.उनका पुरोहिताभिषेक 27 जनवरी 1971 को हुआ था.उनका एपिस्कोपल ऑर्डिनेशन 15 मई 2005 को हुआ.

सेंट बेनेडिक्ट मठ अरुल नगर, करुंगलाकुडी, चोलापुरम सिवागंगाई .यह मदुरै महाधर्मप्रांत था.उसके बाद मदुरै महाधर्मप्रांत को पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 3 जुलाई 1987 को विभाजित कर सिवागंगाई  धर्मप्रांत का निर्माण करने का आदेश दिया.सिवागंगाई धर्मप्रांत की स्थापना 25 जुलाई 1987 हो गई.सिवागंगाई धर्मप्रांत के प्रथम बिशप एडवर्ड फ्रांसिस डीडी थे.दूसरे बिशप डॉ. जेबामलाई सुसैमानिकम डीडी बने.उनके बाद सन्त पापा फ्राँसिस ने तमिल नाड स्थित सिवागंगाय धर्मप्रान्त के प्रेरितिक प्रशासक धर्माध्यक्ष डॉ. जेबामलाई सुसैमानिकम डीडी द्वारा प्रस्तुत त्याग पत्र को स्वीकार कर लिया है। 

बिशप एमेरिटस डॉ. जेबामलाई सुसैमानिकम डीडी 

अब सिवागंगाई धर्मप्रांत के बिशप एमेरिटस डॉ. जेबामलाई सुसैमानिकम डीडी के व्यक्तिगत विवरण जान लें. उनका जन्म 25 सितम्बर 1945 को हुआ था.उनका पुरोहिती दीक्षा 27 जनवरी 1971को हुआ था. एपिस्कोपल ऑर्डिनेशन15 मई 2005 को हुआ था.

आलोक कुमार


पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 भोला पासवान शास्त्री की 109 वीं जयन्ती

 पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 भोला पासवान शास्त्री की 109 वीं जयन्ती आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनायी गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंत्री श्री कृपानाथ पाठक ने की। 

सर्वप्रथम स्व0 भोला पासवान शास्त्री के तैल चित्र पर कांग्रेस नेताओं ने माल्यापर्ण किया। इस अवसर पर स्व0 भोला पासवान शास्त्री के प्रति श्रद्धाँजलि अर्पित करते हुए पूर्व मंत्री श्री कृपानाथ पाठक ने कहा कि भोला पासवान शास्त्री, बिहार के ही नहीं, बल्कि देश के बड़े कद्दावर नेता थे। वे तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे एवं इन्दिरा गाँधी के कार्यकाल में केन्द्रीय मंत्री भी थे। श्री  पाठक ने कहा कि स्व0 भोला पासवान शास्त्री की इमानदारी.कृतज्ञ परायणता एवं देशभक्ति की मिशाल देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।

आज कृतज्ञ देश स्व0 शास्त्री के देश निर्माण में योगदान को स्मरण कर उनकी स्मृति को शत-शत नमन करती है। इस अवसर पर विधान परिषद् में कांग्रेस दल के नेता  डा0 मदन मोहन झा ,विधान पार्षद प्रेम चन्द्र मिश्रा, मीडिया चेयरमैन राजेश राठौड़,  ब्रजेश प्रसाद मुनन, लाल बाबू लाल, आलोक हर्ष, सुबोध कुमार, डॉ. संजय कुमार यादव, डॉ. बिनोद शर्मा,  रीता सिंह, मोहन शर्मा, अरबिंद लाल रजक,  मृणाल अनामय, नीतू सिंह निषाद, प्रदुमन कुमार यादव, हसीब खान, राहुल पासवान, विश्वनाथ बैठा, सत्येन्द्र पासवान, गोरख नाथ, मिहिर झा, विमलेश तिवारी, यशवंत कुमार चमन, अब्दुल बक्सी, वसीम अहमद, इंद्र मोहन झा, विकाश कुमार, महेश यादव, डॉ. जवाहर लाल चौधरी, रमाशंकर पाण्डेय ने भी स्व0 भोला पासवान शास्त्री के चित्र पर माल्यापर्ण किया।


आलोक कुमार

 

बुधवार, 20 सितंबर 2023

दिक्कत है कि ये लोग तो लागू करेंगे नहीं: मुख्यमंत्री

 

पटना । मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत की। महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा इसका क्रेडिट लेने के पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम तो शुरू से ही महिला आरक्षण के पक्षधर रहे हैं। संसद में मेरा दिया गया भाषण देख लीजिए। संसद और विधानसभा सब जगह महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन दिक्कत है कि ये लोग तो लागू करेंगे नहीं।

      यह तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। हर 10 साल पर जनगणना होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। यह हमेशा समय पर होना चाहिए। हमने कहा कि इसमें जाति आधारित गणना भी होनी चाहिए। महिलाओं को सबसे पहले 50 प्रतिशत का आरक्षण हमने ही दिया। वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में और वर्ष 2007 में नगर निकायों में हमने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। हमने बड़ी संख्या में बहाली भी शुरू की। प्रारंभिक शिक्षक नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण हमने दिया। बाद में सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत सीट आरक्षित कर दी गई। पुलिस में भी महिलाओं को 35 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया ।

    आज बिहार में पुलिस में जितनी भागीदारी महिलाओं की है उतनी देश में कहीं नहीं है। स्वयं सहायता समूह में बड़ी संख्या में महिलाएं जीविका दीदियों के माध्यम से शामिल हुईं। महिलाओं के लिए बिहार में काफी काम किए गए हैं। हमारी मांग है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण मिलना चाहिए । मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2008 से वर्ष 2012-13 तक हम मुख्य सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में 9:30 बजे आया करते थे, अभी अपने आवासीय कार्यालय से ही कार्य का निष्पादन करते हैं। हमें जानकारी मिली है कि सचिवालय में लोग अपने कार्यालय देर से आ रहे हैं तो हम इसका निरीक्षण करने आए हैं। अब हम सप्ताह में तीन दिन मुख्य सचिवालय स्थित कार्यालय और दो दिन मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित कार्यालय आएंगे और निरीक्षण करेंगे, उसके बाद अपने आवासीय कार्यालय में बैठेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ मौजूद थे।


आलोक कुमार

कतरीसराय में दूसरा जन संवाद कार्यक्रम प्रखंड कार्यालय परिसर में

नालंदा। कतरीसराय में दूसरा जन संवाद कार्यक्रम प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से कतरी एवं मैरा बरीठ पंचायत के लोग शामिल हुए। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी।

    लघु वृत्तचित्र के माध्यम से विगत वर्षों में प्रखण्ड में किये गए विकास कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी दी गई।पुलिस अधीक्षक ने कतरीसराय ओपी को शीघ्र सामान्य थाना के रूप में परिवर्तित करने की बात कही। डायल 112 के बारे में बताया गया।

   उप विकास आयुक्त द्वारा ग्रामीण विकास से संबंधित योजनाओं के साथ साथ बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, कुशल युवा कार्यक्रम आदि के बारे में जानकारी दी गई। डीपीएम जीविका द्वारा जीविका समूहों के गठन, उनके आर्थिक उन्नयन एवं स्वावलंबन के लिए, विभिन्न योजनाओं के तहत किये जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। जीविका समूह, ग्राम संगठन एवं संकुल के कार्यकलापों के बारे में विस्तार से बताया गया।

   जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा परिवहन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा  पेंशन एवं विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी दी।उन्होंने विभाग द्वारा संचालित शांति कुटिर एवं सेवा कुटिर के बारे में भी बताया।

    कृषि विभाग के पदाधिकारी द्वारा कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया गया। जैविक खेती के साथ साथ उर्वरक की उपलब्धता के बारे में भी बताया गया। लोगों को बताया गया कि उर्वरक से संबंधित समस्या के लिए जिला कृषि नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या 06112-231143 पर जानकारी दी जा सकती है। आकस्मिक फसल योजना के तहत वैकल्पिक फसलों के बारे में जानकारी दी गई।फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में किसानों को जागरूक किया गया।इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी दी गई।

   जिला आपदा शाखा प्रभारी द्वारा विभिन्न प्रकार की आपदा के प्रबंधन एवं पूर्व तैयारी के बारे में जानकारी दी गई। विभिन्न प्रकार की आपदा से संबंधित मुआवजा/अनुग्रह अनुदान के बारे में जानकारी दी गई। आपदा से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या  06112-233168 पर देने को कहा गया।

    कार्यपालक अभियंता द्वारा ग्रामीण विद्युतीकरण, एग्रीकल्चर फीडर/ट्रांसफार्मर/कनेक्शन आदि के बारे में जानकारी दी गई।ऊर्जा बचत के लिए लोगों को जागरूक किया गया। बिजली से संबंधित शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया।

     अपर समाहर्त्ता द्वारा भूमि एवं राजस्व विभाग के माध्यम से दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। ऑनलाइन दी जाने वाली सेवाओं के बारे में बताया गया। बताया गया कि जमीन से संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने हेतु सभी अंचल में आधुनिक अभिलेखागार बनाया गया है। भूमि विवाद से संबंधित मामलों को लेकर आवश्यक प्रावधानों एवं किये जा रहे कार्यों के बारे में बताया गया।

     विभिन्न योजनाओं के स्थानीय लाभुकों द्वारा भी अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभुक मिथिलेश कुमार तथा शौचालय एवं आवास योजना के लाभार्थी पंकज कुमार द्वारा योजना के माध्यम से उनके जीवन मे आये बदलाव के बारे में बताया गया।

   स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रखंड में एक बस स्टैंड, कन्या उच्च विद्यालय तथा विवाह भवन की आवश्यकता के बारे में बताया गया। दरवेशपुरा पुल से कटौना तक सकरी नदी के तटबंध के किनारे बोल्डर पिचिंग का कार्य करने तथा नदी से सिंचाई की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया गया। कुक्कुट पालन एवं मत्स्यपालन की असीम संभावनाओं को देखते हुए  इसको बढ़ावा देने को कहा गया। कतरीसराय मुख्य सड़क से जल निकासी की स्थाई व्यवस्था का अनुरोध किया गया।

    इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्त्ता, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, स्थानीय मुखियागण आदि उपस्थित थे।

आलोक कुमार

जिलाधिकारी ने कतरीसराय में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के साथ की बैठक

 जिलाधिकारी ने कतरीसराय में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के साथ की बैठक

जन संवाद में प्रखंड से संबंधित बताई गई समस्याओं/आवश्यकताओं के आलोक में योजना को लेकर की गई चर्चा, संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को दिया गया आवश्यक दिशा निर्देश

 नालंदा। आज कतरी सराय के कटौना एवं प्रखण्ड कार्यालय में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों एवं आम लोगों द्वारा प्रखंड से संबंधित मुख्य समस्याओं/आवश्यकताओं के बारे में बताया गया। इन समस्याओं के समाधान तथा अन्य आवश्यकताओं से संबंधित योजनाओं की फिजिबिलिटी को लेकर जिलाधिकारी ने प्रखंड सभागार में जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक किया।

    सकरी नदी से मुंशी पइन तक नदी का पानी पहुंचाने के लिए नदी के किनारे स्लुइस गेट का निर्माण तथा पइन की उड़ाही के लिए कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग को स्थल निरीक्षण कर योजना का प्रारूप तैयार करने का निर्देश  दिया गया। पावापुरी से छाछुबिगहा सड़क निर्माण  में भू-अर्जन से संबंधित बाधाओं को दूर करने के लिए दरवेशपुरा में 28 सितंबर को विशेष शिविर लगाने का निर्देश भूमि सुधार उप समाहर्त्ता को दिया गया।

  छाछु बिगहा से कटौना होते हुए दरियापुर तक सड़क निर्माण के लिए फिजिबिलिटी सर्वे करने का निर्देश कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल बिहार शरीफ को दिया गया। वादी गाँव मे खराब नलकूपों की मरम्मती का निर्देश कार्यपालक अभियंता लघु जल संसाधन विभाग को दिया गया।

   कतरी पंचायत में पंचायत सरकार भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश अंचलाधिकारी को दिया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल के निर्माण के लिए भी जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया। कतरीसराय में बस स्टैंड के निर्माण के लिए भी उपयुक्त स्थल चिन्हित करने को कहा गया।

   जैविक खेती के उत्पादों की बिक्री के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था का निर्देश कृषि विभाग को दिया गया।बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्त्ता, विभिन्न संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि गण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।


आलोक कुमार

सोमवार, 18 सितंबर 2023

केरल के “रिचर्ड हे” और पश्चिम बंगाल के “जॉर्ज बेकर” दो एंग्लो-इंडियन सांसद

 

पटना. पटना संसदीय क्षेत्र के सांसद रविशंकर प्रसाद है.जब केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद थे,तब उन्होंने देश भर में केवल 296 एंग्लो इंडियन होने का दावा पेश कर संवैधानिक अधिकारों से एंग्लो इंडियन समुदाय को वंचित करने का खेला कर दिया. भारतीय संविधान का 126वां संविधान संशोधन विधेयक का 104वां संशोधन.इस विधेयक के तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया.इस विधेयक के तहत लोक सभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि को 10 वर्ष और बढ़ाया गया.इसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में 25 जनवरी, 2030 तक सीटों का आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान किया गया.12 दिसंबर, 2019 को राज्य सभा में पारित किया गया.लोक सभा द्वारा यह विधेयक इससे पूर्व पारित किया जा चुका था.पूर्व में इस आरक्षण की समय सीमा 25 जनवरी, 2020 तक थी. इस संविधान संशोधन विधेयक द्वारा संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रदत्त आरक्षण को समाप्त कर दिया गया है. आरक्षण के तहत एंग्लो-इंडियन समुदाय के 2 सदस्य लोक सभा में प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे.यूपी के दोनों सदनों ने भी अपने इकलौते एंग्लो इंडियन सदस्य डॉ. डेंजिल जे. गोडिन की अपील को अनसुना करते हुए इस विधेयक पर मुहर लगा दी. 25 जनवरी के बाद उनकी नुमाइंदगी खत्म हो गयी. आज भी एंग्लो इंडियन समुदाय खफा है.एंग्लो इंडियनों के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व 2020 में केंद्र सरकार के अनुचित रवैये द्वारा यह कहकर छीन लिया गया कि ‘2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, एंग्लो इंडियनों की संख्या केवल 296 है.पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एंग्लो-इंडियनों के संवैधानिक अधिकार पर पूर्ण ग्रहण लगा दिया.फेडरेशन ऑफ एंग्लो इंडियन असोसिएशन (एफएआईएआई) के प्रेजिडेंट और पूर्व सांसद केरल के पूर्व सांसद चार्ल्स डायस ने कहा कि एफएआईएआई के अनुमान के अनुसार, देश भर में लगभग 4 लाख एंग्लो इंडियन फैले हुए हैं. गोवा और दमन के आर्कबिशप, डॉ. फ़िलिप नेरी फ़ेराओ को जो एनीमेशन सेंटर, महाबलीपुरम, चेन्नई, तमिलनाडु में नेशनल एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया की 31वीं पूर्ण सभा द्वारा सीसीबीआई के नए अध्यक्ष के रूप में चुना गया. इसके अलावे भारत में कैथोलिक बिशप परिषद (सीसीबीआई) के पदेन अध्यक्ष फेराओ हैं, कथित तौर पर इस मुद्दे का समर्थन करने के लिए सहमत हुए. महासंघ ने देश के विभिन्न इलाकों में एंग्लो इंडियंस की पहचान करने और उन्हें पुनर्गठित करने में भी सीसीबीआई से मदद मांगी. समूह ने एंग्लो इंडियंस की संख्या का पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण करने की योजना बनाई है, जो एफएआईएआई को एंग्लो- इंडियंस के लिए संसद में दो नामांकित सीटों को बहाल करने के लिए केंद्र को याचिका दायर करने में मदद करेगा.इस पर कार्य जारी है. बताया जाता है कि एंग्लो इंडियंस में “कई लोग बेरोजगार हैं, किराए के मकानों में रह रहे हैं. हम एक छोटे से अल्पसंख्यक हैं जिनमें बहुत सी विकलांगताएँ हैं. पहचान का संकट है और आवाज की कमी के कारण, उनकी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए कोई जगह नहीं है, केरल के पूर्व सांसद चार्ल्स डायस जो एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने कहा. डायस के साथ दिल्ली महाधर्मप्रांत के एक पुरोहित, फादर निकोलस डायस भी थे, जो एंग्लो इंडियनों के लिए पुरोहित के रूप में कार्य करते हैं. फादर निकोलस बेनौलीम के रहने वाले हैं और उन्हें कार्डिनल फेराओ ने पुरोहित नियुक्त किया था.

  सवाल यह है कि क्या केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के दावे के अनुरूप देश भर में 296 एंग्लो इंडियन ही बचे हैं? यूपी के इकलौते एंग्लो इंडियन सदस्य डॉ. डेंजिल जे. गोडिन कहते हैं कि जब जनगणना के प्रारूप में एंग्लो इंडियन का कॉलम ही नहीं है तो यह गिनती कहां से हो गई? यूपी में ही 50 हजार से अधिक इनकी संख्या है. इस कानून को लागू होने के लिए आधे राज्यों का अनुमोदन जरूरी है. चूंकि, इसमें एससी-एसटी का भी आरक्षण जुड़ा है, इसलिए कमोबेश हर राज्य से सहमति मिलती नजर आ रही है. केरल विधानसभा ने जरूर प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा है कि एंग्लो इंडियन का आरक्षण बरकरार रखा जाए.  डेंजिल जे. गोडिन कहते हैं कि आजादी के बाद बहुत से एंग्लो इंडियन यहां से चले गए थे. जो यहां रुके उन्होंने इसे अपना देश माना और इसके विकास में अपना योगदान दे रहे हैं. 1965 और 1971 की लड़ाई लड़ने वालों में भी एंग्लो इंडियंस थे जिन्हें इनकी बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कारों से नवाजा गया. संविधान की मूल मंशा और भरोसे के तहत हमारा प्रतिनिधित्व बनाए रखा जाना चाहिए। फेडरेशन ऑफ एंग्लो इंडियन असोसिएशन के प्रेजिडेंट और पूर्व सांसद चार्ल्स डायस का कहना है कि 3.47 लाख से अधिक एंग्लो इंडियन उनके संगठन ने ही चिह्नित किए हैं.इसमें पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों के आंकड़े ही नहीं है. कुछ लोगों ने जनगणना के दौरान गलती से धर्म के कॉलम में एंग्लो इंडियन लिख दिया और कानून मंत्री ने उसे आंकड़े के तौर पर पेश कर दिया. आखिर जनगणना में जाति के आंकड़े हैं नहीं और एंग्लो इंडियन धर्म होता नहीं, तो यह संख्या कहां से आई? सरकार इतनी जल्दबाजी में थी कि उसने हमारे प्रतिनिधियों से बात करना जरूरी नहीं समझा. सरकार ने आगे बढ़ाने की जगह उनसे बात रखने का मंच भी छीन लिया. जब संविधान सभा का गठन हुआ तो एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर फ्रेंक एंथोनी को भी संविधान सभा का सदस्य बनाया गया.एंथोनी ने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और नेहरू से प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल उठाया था. इसके बाद आर्टिकल 331 जोड़ा गया. यह कहता है कि राष्ट्रपति अधिकतम दो सदस्य इस समुदाय से नामित कर सकते हैं. संविधान का अनुच्छेद 133 कहता है कि अगर राज्यपाल को लगता है कि एंग्लो इंडियन का पर्याप्त प्रतिनिधित्व विधानसभा में नहीं है तो वे एक व्यक्ति को नामित कर सकते हैं। यूपी, उत्तराखंड, बिहार, आंध्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, एमपी, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और बंगाल में इनके प्रतिनिधि नामित हैं. भारत की संसद; लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर बनती है. देश में लोकसभा के लिए अधिकतम 552 सदस्य (530 राज्य $ 20 केंद्र शासित प्रदेश $ 2 एंग्लो इंडियन) हो सकते हैं, लेकिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लोकसभा के लिए केवल 543 सदस्य चुने जाते हैं और यदि चुने गए 543 सांसदों में एंग्लो इंडियन समुदाय का कोई सदस्य नहीं चुना जाता है तब भारत का राष्ट्रपति इस समुदाय के 2 सदस्यों का चुनाव कर सकता है.




एंग्लो इंडियन किन्हें कहा जाता है?


संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत एंग्लो इंडियन ऐसे किसी व्यक्ति को माना जाता है जो भारत में रहता हो और जिसका पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों. यह शब्द मुख्य रूप से ब्रिटिश लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि भारत में काम कर रहे हों और भारतीय मूल के हों.  एंग्लो-इंडियन एकमात्र समुदाय है जिसके प्रतिनिधि लोकसभा के लिए नामित होते हैं क्योंकि इस समुदाय का अपना कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं है. यह अधिकार फ्रैंक एंथोनी ने जवाहरलाल नेहरू से हासिल किया था. एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व लोकसभा में दो सदस्यों द्वारा किया जाता है. अनुच्छेद 331 के तहत राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के दो सदस्य नियुक्त करते हैं. इसी प्रकार विधान सभा में अनुच्छेद 333 के तहत राज्यपाल को यह अधिकार है कि (यदि विधानसभा में कोई एंग्लो इंडियन चुनाव नहीं जीता है) वह 1 एंग्लो इंडियन को सदन में चुनकर भेज सकता है. बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, उत्तराखंड और केरल जैसे राज्यों में विधान सभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय का एक-एक सदस्य नामित है. जबकि वर्तमान में लोकसभा में 2 सदस्य भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नामित हैं इनके नाम नीचे लिस्ट में हैं.




लोकसभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय के सभी नामित सदस्यों की सूची इस प्रकार है;


नामित होने का वर्ष 1951-52 सदस्य का नाम फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो, निर्दलीय.1957 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो, निर्दलीय (IPG). 1962 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय (IPG). 1967 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय (IPG). 1971 फ्रैंक एंथोनी व मार्जोरी गॉडफ्रे,नामित, यूनाइटेड इंडिपेंडेंट पार्लियामेंट्री ग्रुप. 1977 ए.ई.टी.बैरो,निर्दलीय व रूडोल्फ रॉड्रिक्स,जनता पार्टी.1980 फ्रैंक एंथोनी व ए.ई. टी.बैरो,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1984. फ्रैंक एंथोनी व ए.ई.टी.बैरो ,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1989.जॉस फर्नांडीज व पॉल मंतोष,जनता दल.1991फ्रैंक एंथोनी (1993 तक),रॉबर्ट ई विलियम्स व शीला एफ ईरानी (1995-1996),भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.1996,नील ओ ब्रायन व हेडविग रेगो,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,1998.बीट्रिक्स डिसूजा व नेविल फोली,समता पार्टी.1999 बीट्रिक्स डिसूजा, समता पार्टी व डेन्ज़िल बी एटकिंसन, भारतीय जनता पार्टी.2004 इंग्रिड मैक्लोड व फ्रांसिस फैन्थोम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.2009 इंग्रिड मैक्लोड व चार्ल्स डायस,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस.2014 जॉर्ज बेकर व रिचर्ड हे,भारतीय जनता पार्टी.वर्तमान में, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के दो एंग्लो-इंडियन सांसद थे.ये हैं केरल के “रिचर्ड हे” और पश्चिम बंगाल के “जॉर्ज बेकर”. संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक कोई एंग्लो इंडियन सदन में मनोनीत होने के 6 महीने के अंदर किसी पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं. सदस्यता लेने के बाद वो सदस्य पार्टी व्हिप से बंध जाते हैं और उन्हें पार्टी के मुताबिक सदन में काम करना पड़ता है.


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