बुधवार, 8 नवंबर 2023

दीपावली में रात्रि 8 से 10 बजे तक ही केवल ग्रीन पटाखे का प्रयोग की अनुमति




 दीपावली में रात्रि 8 से 10 बजे तक ही केवल ग्रीन पटाखे का प्रयोग की अनुमति

गया । जिला पदाधिकारी गया डॉ त्यागराजन एसएम एवं वरीय पुलिस अधीक्षक आशीष भारती की अध्यक्षता में दीपावली, काली पूजा एवं लोक आस्था के महान पर्व छठ में प्रशासनिक व्यवस्था, विधि व्यवस्था,  यातायात व्यवस्था,  दीपावली एवं छठ पर्व पर अवैध पटाखों के निर्माण, बिक्री एवं इसके उपयोग पर रोक सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बैठक का आयोजन समाहरणालय सभाकक्ष में की गई।

     जिला पदाधिकारी तथा वरीय पुलिस अधीक्षक ने जिला वासियों को दीपावली एवं छठ पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए अपील किया कि दीपावली में रात्रि 8 से 10 बजे तक ही केवल ग्रीन पटाखे का प्रयोग की अनुमति है।  इसके अलावा सभी प्रकार की पताका को प्रतिबंधित किया गया है। किसी भी हाल में 125 डिसेबल से ऊपर की आवाज वाले पटाखे पूरी तरह प्रतिबन्धित है। शांत क्षेत्र यथा अस्पताल, शैक्षिक संस्थान, न्यायालय, जैविक उद्यान परिसर इत्यादि के 100 मीटर के दायरे में शोर उत्पन्न करने वाले किसी भी प्रकार के पटाखे का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।

        बैठक में जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिस प्रकार दुर्गा पूजा में व्यवस्था थी, वही व्यवस्था दीपावली एवं छठ में लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी प्रकार का मूर्ति बिना लाइसेंस के नही बैठाए जाएंगे, इसके सभी थाना प्रभारी सुनिश्चित करावे तथा मूर्ति प्रतिमाओं का विसर्जन का रूट लाइन/ तिथि और समय सभी आयोजन समिति से थाना प्रभारी प्राप्त करते हुए सूची बनाये, ताकि सभी मूर्तियों के विसर्जन के दौरान नजर रखी जा सके।    

            दीपावली के अवसर पर एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देश के आलोक में केवल ग्रीन पटाखे का प्रयोग की अनुमति है। ज़िले के सभी क्षेत्रों में अवैध पटाखों के निर्माण, बिक्री, भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए गए हैं। डीएम ने सभी एसडीएम एवं थाना को निर्देश दिया कि अपने क्षेत्र में अवैध पटाखा निर्माण, भंडारण तथा बिक्री पर सघन छापेमारी अभियान चलावे। इसके साथ ही सभी थानाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्र में कोई भी अवैध पटाखा का भंडारण अथवा बिक्री नहीं हो, इसे सुनिश्चित करवाये।

          उन्होंने नगर आयुक्त तथा नगर पंचायत सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी को निर्देश दिया कि अपने क्षेत्र अंतर्गत महत्वपूर्ण घाटों की साफ-सफाई करवाएं इसके साथ ही खतरनाक घाटों को चिन्हित करते हुए कोई हताहत या घटना ना हो, इसे देखते हुए आवश्यक कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि घाटों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी का अधिष्ठापन, चेंजिंग रूम, पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था, एंट्री एवं एग्जिट प्वाइंट की बेहतरीन व्यवस्था, छठ घाटों के जाने हेतु रास्तों में पर्याप्त रोशनी के साथ-साथ रास्ता को समतल बनाने, छठ घाटों के रास्ते तथा घाटों में जर्जर तार/ लूज वायर /लटकी हुई तार ना रहे, ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने सहित अन्य व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिए।

      गया नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत कुल 26 छठ घाट एवं तालाब है, जहां लोक आस्था का महान पर्व छठ पूजा पर अर्घ्य देने जाते हैं।  डीएम ने ज़िले के सभी छठ घाटों/ तालाबो सभी आवयश्क तैयारियां करवाने को कहा। जो तालाब खतरनाक है, उसे खतरनाक घाट घोषित करते हुए बैरिकेटिंग करवाये। तालाब/ पोखर में श्रद्धालुओं ज्यादा पानी के गहराई में न जाये इसे लेकर सभी संबंधित पदाधिकारी अगले 2 दिनों में छठ घाट का विजिट कर ज्यादा गहरा पानी जहां से प्रारंभ है, उसे बैरिकेटिंग करवा दी, ताकि लोग ज्यादा गहरा पानी में पूजा करने न जा सके।

     साफ सफाई का पूरा पुख्ता इंतजाम रखे। नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि जिस घाट में पानी नहीं है, वहां पर्याप्त जेसीबी मशीन लगा कर कुंड का निर्माण करवाये।

          धनतेरस को लेकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था, यातायात व्यवस्था तथा आगजनी से बचाव के लिए निर्देश दिए गए। सभी थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया कि वे धनतेरस पर्व को लेकर नियमित पेट्रोलिंग करावे। अग्निशमन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि फायर ब्रिगेड की वाहन एवं संबंधित कर्मियों को पूरी तरह तैयार रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

           बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने बताया कि किसी प्रकार की मूर्ति का अधिष्ठापन बिना लाइसेंस के ना होने, मूर्ति विसर्जन के लिये तिथि समय और रुट लाइन अपने थाना को उपलब्ध कराने संबंधित लोगों से अनुरोध किया। जिले में दीपावली एवं छठ के अवसर पर  केवल ग्रीन पटाखे छोड़ने के बारे में बताया गया है इसके साथ ही समय भी निर्धारित है।

        उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक यातायात को निर्देश दिया कि शहरी क्षेत्रों के लिए ट्रैफिक प्लान आज ही तैयार करें साथ ही टिकारी रोड, किरानी घाट इत्यादि स्थानों पर भीड़ से बचाव हेतु प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों, पुलिस उपाधीक्षक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को निर्देश दिया कि पेट्रोलिंग को नियमित रूप से करते हुए संबंधित निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करावे। बिहार वासियों के लिए दीपावली एवं छठ पूजा का काफी महत्व है। छठ घाटों पर आम जनों की सुविधाएं के लिए पूरी नजर रखने के लिये पर्याप्त संख्या में वाच टावर लगवाना सुनिश्चित करे। घाट पर पटाखा पूरी तरह प्रतिबंधित है। सभी घाटों पर पर्यपत गोताखोर की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। नगर निगम क्षेत्र में  देवघाट, सीताकुंड, पंचदेव घाट, सूर्यकुंड, रूक्मिणी एव सूर्यपोखर मानपुर में नाव सहित एसडीआरएफ की टीम मौजूद रहेगी।

        बैठक में नगर आयुक्त, उप विकास आयुक्त, सहायक समाहर्ता, अपर समाहर्ता राजस्व, अनुमंडल पदाधिकारी सदर, पुलिस उपाधीक्षक नगर, पुलिस उपाधीक्षक वजीरगंज, ज़िला आपूर्ति पदाधिकारी, डीसीएलआर सदर, ज़िला जन सम्पर्क पदाधिकारी, ज़िला आपदा पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता बिजली/ पीएचईडी, ज़िला अग्निशमन पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।


आलोक कुमार


मंगलवार, 7 नवंबर 2023

1844 में जर्मनी के बर्लिन शहर से फादर योहनेस एंव जेलिस्ता गोस्सनर साहब आए थे छोटानागपुर में


रांची.अविभाजित बिहार अंतर्गत छोटानागपुर में चार जर्मन मिशनरियों के आगमन का178 वां वर्ष पूरा हो गया. इन चार मिशनरियों में एमिल शत्स, फ्रद्रिक वत्स, अगस्तुस ब्रांत और ई. थियोडोर यानके शामिल थे.वे 1844 में जर्मनी के बर्लिन शहर से फादर योहनेस एंव जेलिस्ता गोस्सनर साहब के निर्देशानुसार पूरे परिवार के साथ पहली बार छोटानागपुर में प्रथम ईसाई धर्म प्रचारक के रूप में रांची पहुंचे और दो नंवबर 1945 को वर्तमान बेथेसदा स्कूल समीप जीइएल चर्च कंपाउंड स्मारक पत्थर पास अपना शिविर लगाया.

          यही से छोटानागपुर में गोस्सनर एवंजेलिकल लूथेरान (जीइएल)चर्च का कार्य शुरू हुआ.फादर गोस्सनर ने इन चार मिशनरियों को वर्मा देश के मेरगुई शहर में सुसमाचार का प्रचार करने के लिए भेजा था. लेकिन, तत्कालीन समस्याओं के कारण वे छोटानागपुर पहुंच गए. उन्होंने यहां शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सहायता का कार्य आरंभ किया.इसी क्रम में 25 जून,1846 को मर्था नामक बालिका का प्रथम बार बपतिस्मा हुआ. वृहद रूप में जीइएल चर्च छोटानागपुर व असम के मसीहियों ने छोटानागपुर में मसीही बनने वाले प्रथम चार उरांव, हेथाकोटा के पाहन नवीन डोमन तिर्की, चिताकुनी के केसो भगत व बंधु उरांव और करंदा के घूरन उरांव को स्मरण किया.नौ जून 1850 को चार उरांव हेथाकोटा के पाहन नवीन डोमन तिर्की, चिताकुनी के केसो भगत व बंधु उरांव और करंदा के घूरन उरांव ,1851 में दो मुंडा, एक अक्टूबर 1855 को नौ बंगाली व आठ जून 1866 को दोर खड़िया सहित 10 मई 1868 हो परिवार ने जीइएल चर्च कलीसिया में बपतिस्मा लिया. इसी दौरान पहली बार प्रथम गिरजाघर के रूप में 18 नंवबर, 1851 में रांची ख्रीस्त गिरजाघर का शिलान्यास रखा गया.इन चार मिशनरियों ने काफी लंबे समय तक छोटानागपुर में सुसमाचार प्रचार किया. 10 जुलाई, 1919 में जीइएल चर्च स्वायत्त हो गया.चर्च का संचालन छोटानागपुर के भारतीय लोगों के हाथ में आई. प्रथम भारतीय प्रेसीडेंट पादरी हानुक दत्तो लकड़ा व सचिव पीटर हुरद बने.

       173 साल पूर्व 09.06.1850 को बपतिस्मा संस्कार ग्रहण कर मसीही धर्म स्वीकार किया था़.इस अवसर पर जीइएल चर्च के सदस्यों ने क्राइस्ट चर्च, मेन रोड में लगे स्मारक पत्थर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें स्मरण किया़ धन्यवादी आराधना भी हुई़

इस अवसर पर बिशप जॉनसन लकड़ा ने कहा कि यह दिन प्रथम वयस्क बपतिस्मा दिवस है़ फादर गोस्सनर ने बर्मा के करेन में सुसमाचार प्रचार के लिए चार मिशनरियों को भेजा था. लेकिन ईश्वर की इच्छा से वे चारों दो नवंबर 1845 को छोटानागपुर पहुंचे.पांच वर्षों तक सेवा कार्य से अथक जुड़े रहे़ उनके कठिन परिश्रम का परिणाम था कि छोटानागपुर के चार वयस्क व्यक्तियों ने नौ जून 1850 को बपतिस्मा लेकर प्रभु का वचन ग्रहण किया.

बिशप ने कहा कि उन मिशनरियों ने जब इस बात की जानकारी फादर गोस्सनर को दी, तब उन्होंने एक बड़े गिरजाघर के निर्माण का सुझाव दिया. इसके लिए 13 हजार रुपये दिये़ उन दिनों यह रांची का सबसे बड़ा भवन था.चार मसीहियों से शुरू हुई यह संख्या पिछले साल की जनगणना तक तीन लाख, 81 हजार 487 तक पहुंच गयी.

वर्तमान में इस चर्च का विस्तार 12 राज्यों में है़ बिशप ने कहा कि पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके विश्वास की रक्षा करें. धन्यवादी आराधना में रेव्ह सीमांत तिर्की, रेव्ह बेंजामिन टोपनो, रेव्ह एमएस मंजर, रेव्ह ममता बिलुंग, रेव्ह अनूप जॉली भेंगरा और अन्य मौजूद थे.शाम को हुई आत्मिक जागृति सभा में मॉडरेटर बिशप जोहन डांग ने संदेश दिया.

आलोक कुमार

जो हमारी बात सुनेगा, वहीं कुर्सी पर राज करेगा

 आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं ने विधानसभा का किया घेराव

5 सूत्रीय मांगें नहीं मानी गई तो वो चुनाव में ऐसे लोगों को वोट नहीं देंगी

 उनका कहना है कि जो हमारी बात सुनेगा, वहीं कुर्सी पर राज करेगा


पटना.बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र मंगलवार 6 नवंबर से शुरुआत हो चुकी है.मंगलवार 7 नवंबर को सत्र का दूसरा दिन है.दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा के बाहर आंगनबाड़ी सहायिका और सेविकाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया.गेट के बाहर सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी सेविका पहुंच गईं और अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया.

    अखिल भारतीय सेविका/सहायिका कर्मचारी संघ के बैनर तले 29 सिंतबर से बेमियादी हड़ताल पर हैं. प्रदेश अध्यक्ष कुमारी रंजना ने अपनी 5 सूत्री मांगों के बारे में कहा कि 1. बिहार सरकार के द्वारा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि 10000 सुनिश्चित किया जाए. 2. केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए ग्रेड सी एवं ग्रेड डी में समायोजित किया जाए. 3.जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं होता है तब तक सेविकाओं को 25000 एवं सहायिका को 18000 मानदेय राशि दी जाए.4. योग्य सहायिका और सेविका की बहाली के लिए अतिरिक्त पहली प्राथमिकता दी जाए. 5. सेविका से महिला प्रवेशिका में बहाली करने में प्राथमिकता दी जाए.

      प्रदेश अध्यक्ष कुमारी रंजना ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार अपने ही वादे से फिरने के बाद सत्ता की हनक मजलूम आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं पर उतार रही है.इससे नाराज होकर शुक्रवार 3 नवंबर को आंगनवाड़ी सेविकाओं ने पटना के हृदय स्थल डाक बंगला चौक को पूरी तरह से जाम कर दिया और  अपने माँगो को लेकर जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया. वहीं आंगनबाड़ी सेवक सेविकाओ के धरना प्रदर्शन के कारण पटना का हार्ट कहे जाने वाला डाकबंगला चौराहा जाम और चौराहे पर यातायात व्यवस्था ठप्प  हो गई.

    उसी दिन पटना जिला के जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह को ज्ञापन दिया.ज्ञापन लेने के बाद जिलाधिकारी ने कहा कि आपकी मांगों को सरकार के समक्ष पहुंचा देंगे और उसकी जानकारी संघ को देंगे.जानकारी देने के सवाल पर आंगनबाड़ी सेविकाओं ने कहा कि 6 नवंबर से विधानसभा की शीतकालीन सत्र होने वाला है.हमलोग प्रदर्शन करेंगे.इस लिए आप 5 नवंबर तक जानकारी देंगे कि सरकार का क्या रुख है.

       सरकार का क्या रूख पता नहीं चलने के कारण मंगलवार 7 नवंबर को अपनी पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी पटना में स्थित बिहार विधानसभा का घेराव करने पहुँची.इन महिलाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. इस दौरान कई महिलाएं बेहोश हो गई. बिहार विधानसभा के 6 से 10 नवंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां 70 मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात है.बिहार में संचालित 1.14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में तैनात करीब 2.15 लाख आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका के मानदेय में बढ़ोतरी करने की मांग को लेकर हड़ताल पर है.जिसके आंगनवाड़ी केंद्र पिछले 39 दिनों से बंद हैं. इन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से नीतीश बाबू ने उनका मानदेय दोगुना करने का वायदा किया था, लेकिन वादा पूरा करने की जगह बिहार सरकार इन आंदोलनकारी महिलाओं पर सख्ती कर रही है.सरकार इनके आंगनवाड़ी केंद्रों पर नोटिस चिपका रही हैं कि अगर उन्होंने ये नहीं खोले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.इससे नाराज आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपना आंदोलन तेज कर दिया.

         इस दौरान सदन में बिहार विधान सभा में बीजेपी नेता विजय सिन्हा बोले, “गाँव-समाज में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली आंगनवाड़ी सेविका बहनों पर महागठबंधन सरकार का लाठी चार्ज करवाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.महागठबंधन की सरकार इनकी आवाज को दबाना चाहती है. सरकार विधानसभा में भी आंगनवाड़ी सेविकाओं के विषय पर जवाब देने से पीछे हट रही है.”

        गौरतलब है कि बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सेविका और सहायिकाओं ने शनिवार (4 नवंबर,2023) को सांसद सुशील कुमार सिंह को अपनी माँगों का ज्ञापन सौंपा था. सेविका और सहायिकाएँ इस दौरान, ‘लाल साड़ी करे पुकार, हम नहीं सहेंगे अत्याचार’ का नारा लगाती रहीं.

   सांसद सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहानुभूति आपके साथ है. लोकसभा का एक सत्र चलने वाला है. वो 17वीं लोकसभा के कार्यकाल में अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे. अगर मौका मिलता है, तो मजबूती से उनकी मांग उठाएंगे. इस बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे.


आलोक कुमार

सोमवार, 6 नवंबर 2023

36 बच्चों को प्रथम परमप्रसाद मिला

फर्स्ट होली कम्युनियन समारोह

आगरा.आगरा महाधर्मप्रांत में उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित जिले शामिल हैं: आगरा, अलीगढ़, औरैया, बदायूँ, बुलन्दशहर, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहगढ़, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हाथरस, कन्नौज, मैनपुरी, मथुरा और राजस्थान में, भरतपुर और धौलपुर.आगरा महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप रापी मंजलि है.रविवार को गोरखपुर में थे.वहां सिरो मालाबार बिशप का बिशप अभिषेक समारोह था.

आगरा महाधर्मप्रांत में रोमन कैथोलिक सेंट मेरी चर्च, नोएडा  है.इस के प्रधान पल्ली पुरोहित फादर फिलिप कोरिया है.यहां रविवार का विशेष दिवस था.यहां पर 36 बच्चों को प्रथम परमप्रसाद मिला. इसमें लड़के 18 और लड़कियां 18 थी.प्रथम परमप्रसाद समारोही मिस्सा करने वालों में फादर एल्विन पिंटो, फादर फिलिप कोरिया, फादर स्टीफन स्वामी, फादर अजय फ्रांसिस, फादर सुनिल डी'मेलो थे.समारोही मिस्सा में 36 बच्चों ने पहली बार परमप्रसाद ग्रहण किए.सबसे पहले बच्चों को परमप्रसाद दिया गया. दाखरस में प्रसाद को डूबो कर बच्चों को ख्रीस्त का शरीर और रक्त दिया गया.उसके बाद बच्चों के माता पिता को ख्रीस्त का शरीर और रक्त दिया गया. फिर गिरजा घर में आए अन्य कैथोलिक भाई -बहनों को दिया गया.

     बताया गया कि समारोही मिस्सा में जाने के पूर्व बच्चे अपने माता- पिता के साथ लाइन में जुलूस के शक्ल में चर्च में गए.उसके बाद वेदी सेवक और पुरोहित गए.पुरोहित और बच्चों का स्वागत किया गया.बच्चों ने पाठ पढ़ा और बारी-बारी से निवेदन पढ़े.आखिरी में धन्यवाद प्रस्ताव बच्चों ने दिया.फिर उनको फर्स्ट होली कम्युनियन का सर्टिफिकेट दिया गया.इस तरह फर्स्ट होली कम्युनियन समारोह खत्म हुआ.


आलोक कुमार 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह पहला मौका था, जब कोई बल्लेबाज टाइम आउट हुआ


भविष्य में कौन बनेगा करोड़पति का सवाल एंजेलो मैथ्यूज बन गए

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह पहला मौका था, जब कोई बल्लेबाज टाइम आउट हुआ

क्रिकेट के 146 सालों में पहली बार हुआ ऐसा

और एंजेलो मैथ्यूज ने शाकिब अल हसन कैच आउट कराया

दिल्ली .बांग्लादेश के खिलाफ मैच में ऽ एंजेलो मैथ्यूज टाइम आउट हो गए.अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह पहला मौका था, जब कोई बल्लेबाज टाइम आउट हुआ.एंजेलो मैथ्यूज ने विपक्षी टीम के कप्तान शाकिब अल हसन से भी बात की, लेकिन शाकिब भी अपनी अपील वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए.अंपायरों ने कहा कि मैथ्यूज आउट हो चुके हैं. अंपायर और मैथ्यूज के बीच काफी देर तक बहस होती रही, लेकिन अंत में उन्हें वापस जाना पड़ा.मैथ्यूज टाइम आउट हो गए.ऐसे में मैथ्यूज को बिना कोई गेंद खेले ही पवेलियन जाना पड़ा. धनंजय डिसिल्वा बल्लेबाजी के लिए आए तो श्रीलंकाई पारी आगे बढ़ी.
    मैथ्यूज 25वें ओवर में सदीरा समरविक्रमा के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए थे. उनका हेलमेट सही नहीं था और उसे पहनने में दिक्कत हो रही थी.ऐसे में उन्होंने पवेलियन से दूसरा हेलमेट मंगवाया, इस दौरान बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन ने मैथ्यूज के खिलाफ आउट की अपील कर दी.अंपायर मराइस इरास्मस और रिचर्ड इलिंगवर्थ ने मैथ्यूज को आउट करार दे दिया. मैथ्यूज कुछ देर तक अंपायर से बहस करते रहे और फिर वापस लौट गए.
    श्रीलंका के एंजेलो मैथ्यूज इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में टाइम आउट होने वाले पहले बल्लेबाज़ बने. वर्ल्ड कप 2023 का 38वां मुकाबला श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है, जिसमें एंजेलो मैथ्यूज को वक़्त पर अगली गेंद का सामना ना कर पाने के चलते टाइम आउट करार दिया गया. बांग्लादेश की ओर से कप्तान शाकिब ने टाइम आउट की अपील की थी.

क्या है टाइम आउट का नियम?

क्रिकेट के नियम में 40.1.1 के अनुसार, बल्लेबाजी टीम का जब कोई विकेट गिरता है या फिर रिटायर होता है। इसके बाद 3 मिनट के भीतर नए बल्लेबाज को अगली बॉल खेलनी होती है.यदि क्रीज नया बल्लेबाज ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे टाइम आउट नियम के तहत आउट दिया जाता है.

क्रिकेट में एक बल्लेबाज को दस तरीकों से आउट किया जा सकता

एक बल्लेबाज को दस तरीकों से आउट किया जा सकता है - पांच बहुत सामान्य है और पांच बहुत दुर्लभ हैं. तो क्रिकेट में आउट होने के आपके दस तरीके, उन लोगों के लिए जो अपनी अगली ट्रिविया रात को ब्लिट्ज करने के लिए तैयार हैं, ये हैं कैच, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू, स्टंप्ड, हिट विकेट, रन आउट, टाइम आउट, गेंद को संभालना, फील्डिंग में बाधा डालना, और हिट करना। दो बार गेंद . बर्खास्तगी का 11वाँ रूप है रिटायर्ड आउट। रिटायर्ड हर्ट नहीं हुए.

आलोक कुमार
 

करीब 51 मंडल, जिला व प्रखंड स्तर के भाजपा नेता और आर.एस.एस. कार्यकर्ता आज कांग्रेस का दामन थाम लिये


कांग्रेस के रडार पर है भाजपा : डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह



पटना। भाजपा उन्माद फैलाकर राजनीतिक रोटी सेकने वाली पार्टी है। इसलिए हमारी सीधी लड़ाई उसकी उन्माद की राजनीति से है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं भाजपा में खलबली मच गई। अबतब पूर्व विधायक समेत करीब एक दर्जन से अधिक भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और कई हमारे सम्पर्क में हैं।

        ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रदेश पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित मिलन समारोह में कही। मालूम हो कि पटना के करीब 51 मंडल, जिला व प्रखंड स्तर के भाजपा नेता और आर.एस.एस. कार्यकर्ता आज कांग्रेस का दामन थाम लिये। इसके लिए सदाकत आश्रम में खास तौर पर मिलन समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ता को तवज्जो देने की परम्परा रही है। हमारी पार्टी में कार्यकर्ता ही सब कुछ है। हमारी सोंच है कि नेता को भी कार्यकर्ता की तरह व्यवहार करना चाहिए तभी देश का भला होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा छोड़कर आने वाले कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में स्वागत किया और उम्मीद जतायी कि इससे पार्टी की जड़ मजबूत होगी।

          सोमवार को जो लोग भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए उसमें मुख्य रूप से पटना मण्डल भाजपा अध्यक्ष कुणाल, मण्डल सचिव धर्मेन्द्र कुमार, भाजपा प्रवक्ता शालिनी कुमारी, विकास कुमार, राजेन्द्र प्रसाद, लीला देवी केशरी, शिव कुमार एवं ललन प्रसाद यादव शामिल हैं। भाजपा से आने वाले ज्यादातर कार्यकर्त्ता चुनावी अनुभव रखने वाले हैं जो प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस में आई नयी जान से प्रेरित होकर इसका दामन थाम लिया।

इस अवसर पर पटना महानगर कांग्रेस अध्यक्ष शशि रंजन ने दावा किया कि आने वाले दिनों में करीब 500 भाजपा कार्यकर्त्ता कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं जिसकी मुहिम जारी है। मंच का संचालन ब्रजेश प्रसाद मुनन ने किया।

           इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के कई नेता शरीक हुए जिसमें प्रमुख हैं-विधायक बिजेन्द्र चैधरी, आनन्द शंकर, संतोष मिश्रा, ब्रजेश पाण्डेय, कपिल देव प्रसाद यादव, राजकुमार राजन, निर्मल वर्मा, राजेश राठौड़, शशि रंजन, विनोद शर्मा, कैलाश पाल, लाल बाबू लाल, विनोद यादव, डा0 सत्यजीत सिन्हा, असित नाथ तिवारी, सुमन कुमार मल्लिक, संजय यादव, धर्मवीर शुक्ला, असफर अहमद, ज्ञान रंजन, राजेश कुमार सिन्हा, निधि पाण्डेय।


आलोक कुमार

 

रविवार, 5 नवंबर 2023

गोरखपुर धर्मप्रांत में हर्ष का माहौल




गोरखपुर के बिशप का ताजपोशी

गोरखपुर. नवनियुक्त बिशप का धर्माध्यक्षीय अभिषेक (एपिस्कोपल ऑर्डिनेशन) 5 नवम्बर को सुबह नौ बजे से किया गया. इसके बाद पवित्र यूखरिस्तीय पूजा हुआ. पूजा समापन के बाद नवनियुक्त बिशप का पदभार ग्रहण समारोह पूरे विधि विधान एवं भव्य तरीके से किया गया. इसके बाद धर्माध्यक्ष (बिशप) का उपस्थित जनों द्वारा अभिनन्दन समारोह आयोजित की गयी. धर्माध्यक्षीय अभिषेक (एपिस्कोपल ऑर्डिनेशन) समारोह का नेतृत्व सिरो मालाबार चर्च के मेजर आर्चबिशप  महामहिम जॉर्ज कार्डिनल अलनचेरी द्वारा किया गया. उनके साथ आगरा के  आर्चबिशप राफी मंजली और  बिशप थॉमस थुरुथीमट्टम सीएसटी धर्माध्यक्षीय अभिषेक के सह-समारोही अनुष्ठाता थे.

     इस अवसर पर आर्चविशप लियोपोल्ड गिरेली अपोस्टोलिक नुनशियो यानी भारत एवं नेपाल के लिए पोप फ्रांसिस के प्रतिनिधि और वेटिकन सिटी के राजदूत बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहकर नये धर्माध्यक्ष का अभिनन्दन किया. इसके अलावा भारत के विभिन्न धर्मप्रान्तों के कई आर्चबिशप, बिशप, धर्मसंघीय वरिष्ठ अधिष्ठाता, प्रान्तीय अधिष्ठाता, मेजर सेमिनरी के रेक्टर, विभिन्न धर्मप्रान्तों से बड़ी संख्या में पुरोहित एवं धर्म बहनें भाग लिये. इस अवसर पर गोरखपुर धर्म प्रान्त के सभी सदस्य, शहर के महापौर एवं प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे.

आज गोरखपुर धर्मप्रांत में हर्ष का माहौल है.एक बार फिर सिरो मालाबार के फादर मैथ्यू नेलिकुन्नेल बिशप बने हैं. इस तरह नवाभिषेक्ति बिशप मैथ्यू नेलिकुन्नेल तीसरे धर्मप्रांत के बिशप बने. इनसे पूर्व बिशप डोमिनिक कोक्कट थे.जो बनारस धर्मप्रांत से अलग होने के बाद 1984 में गोरखपुर धर्मप्रांत के प्रथम बिशप बने थे.उनके सेवानिवृत एमेरिटस होने के बाद बिशप थॉमस थुरुथिमट्टम बिशप बने.2006 में गोरखपुर धर्मप्रांत के द्वितीय बिशप बने थे.उनके सेवानिवृत एमेरिटस होने पर फादर मैथ्यू नेलिकुन्नेल बिशप बने है.2023 में गोरखपुर धर्मप्रांत के तीसरे बिशप बने है.

   बता दें कि गोरखपुर धर्मप्रांत नेपाल सीमा पर है.बनारस धर्मप्रांत से अलग होने के बाद 1984 से 2023 तक गोरखपुर धर्मप्रांत में तीन बिशप बने है.पोप फ्रांसिस ने 26 अगस्त 2023 को फादर मैथ्यू नेलिकुन्नेल को उत्तर प्रदेश में गोरखपुर धर्मप्रांत का बिशप नियुक्त किया था.नियुक्ति की औपचारिक घोषणा इतालवी समय के अनुसार दोपहर 12 बजे वेटिकन में और भारतीय समय के अनुसार अपराह्न 3ः30 बजे केरल के कोच्चि के उपनगर कक्कानाड में चर्च के मुख्यालय सेंट थॉमस माउंट में की गई.

        कलीसिया के प्रमुख कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी ने धर्मसभा के सदस्यों की उपस्थिति में नियुक्ति की घोषणा की.इससे पहले, सिरो मालाबार चर्च की 31वीं धर्मसभा ने सेंट थेरेसा कांग्रेगेशन के सदस्य फादर नेलिकुनेल को गोरखपुर के बिशप थॉमस थुरुथिमट्टम, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, की जगह लेने के लिए चुना था. स्वशासी चर्च पोप की सहमति से अपना बिशप नियुक्त कर सकता है.कार्डिनल और बिशप थुरुथिमट्टम द्वारा नए बिशप को एपिस्कोपल कार्यालय का प्रतीक चिन्ह सौंपा गया था.

              नवनिर्वाचित बिशप का जन्म 13 नवंबर, 1970 को केरल के इडुक्की जिले के मारियापुरम के सेंट मेरी चर्च के पैरिशियन वर्की और मेरी नेलिकुन्नेल की पहली संतान के रूप में हुआ था.स्कूल की पढ़ाई के बाद, वह ख्रीस्त ज्योति प्रांत, पंजाब-राजस्थान के मंडली के माइनर सेमिनरी में शामिल हो गए. उन्होंने अपना पहला करियर 1990 में बनाया और आखिरी आठ साल बाद. उन्हें 30 दिसंबर 1998 को कोठामंगलम के बिशप जॉर्ज पुन्नकोट्टिल द्वारा पुरोहित नियुक्त किया गया था.

    समन्वय के बाद, उन्होंने सहायक सेमिनरी मास्टर, सेमिनरी के रेक्टर, पल्ली पुरोहित और स्कूल प्रबंधक जैसी विभिन्न क्षमताओं में मंडली की सेवा की.2005 में वह उच्च अध्ययन के लिए रोम चले गए जहाँ उन्होंने दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. फिर उन्हें लिटिल फ्लावर मेजर सेमिनरी, अलुवा में शिक्षक नियुक्त किया गया. बाद में, उन्होंने जर्मनी में रेगेन्सबर्ग धर्मप्रांत में तीन साल तक पास्टोरल मंत्रालय संभाला.2015 में उन्हें ख्रीस्त ज्योति प्रांत, पंजाब-राजस्थान का प्रोविंशियल चुना गया. 2018 में कार्यकाल पूरा करने के बाद, उन्हें लिटिल फ्लावर मेजर सेमिनरी का रेक्टर नियुक्त किया गया.निर्वाचित बिशप अपनी मातृभाषा मलयालम के अलावा अंग्रेजी, हिंदी, जर्मन और इतालवी जैसी कई भाषाओं में पारंगत हैं.


नेपाल सीमा पर गोरखपुर धर्मप्रांत 1984 में डोमिनिक कोक्कट के साथ बनाया गया था, जो इसके पहले बिशप के रूप में उसी मंडली के सदस्य थे. 2006 में बिशप थुरुथिमट्टम ने उनकी जगह ली.


आलोक कुमार


 

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