सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव 2025

 नई दिल्ली.नई दिल्ली, (आलोक कुमार).
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का लंबा इंतजार आज खत्म हो गया. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव के विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी. तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है. राज्य में दो चरणों में वोटिंग कराने का निर्णय लिया गया है.

      भारत निर्वाचन आयोग की सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक ऐलान किया गया. चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई.


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का कार्यक्रम

पहला चरण (121 विधानसभा क्षेत्र)

गजट अधिसूचना जारी करने की तिथि: 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)

नामांकन भरने की अंतिम तिथि: 17 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)

नामांकन की जांच की तिथि: 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार)

उम्मीदवारों की नाम वापसी की अंतिम तिथि: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)

मतदान की तिथि: 06 नवंबर 2025 (गुरुवार)

मतगणना की तिथि (दोनों चरण): 14 नवंबर 2025 (शुक्रवार)

बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में राज्य के 18 जिलों में मतदान होगा. इन महत्वपूर्ण जिलों की सूची इस प्रकार है:

उत्तर बिहार और मध्य बिहार के प्रमुख जिले:

गोपालगंज,सिवान,सारण,मुजफ्फरपुर,वैशाली, समस्तीपुर,दरभंगा,बेगुसराय,सहरसा,मधेपुरा और खगड़िया

दक्षिण-पश्चिमी और मगध क्षेत्र के जिले:

बक्सर,भोजपुर,पटना,नालंदा,शेखपुरा,मुंगेर और लखीसराय.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पहले फेज में 6 नवंबर को किन 121 सीटों पर होगी वोटिंग

पहले चरण में इन 121 विधानसभा सीटों पर होगी वोटिंग

1. आलमनगर

2.  बिहारीगंज

3. सिंहेश्वर (SC)

4.  मधेपुरा

5.  सोनबरसा (SC)

6. सहरसा

7.  सिमरी बख्तियारपुर

8.  महिषी

9.  कुशेश्वर स्थान (SC)

10.  गौरा बौराम

11.  बेनीपुर

12.  अलीनगर

13.  दरभंगा ग्रामीण 

14.  दरभंगा

15.  हायाघाट

16.  बहादुरपुर

17.  केवटी

18.  जाले

19. गायघाट

20.  औराई

21.  मीनापुर

22. बोचहां (SC)

23.  सकरा (SC)

24.  कुढ़नी 

25. मुजफ्फरपुर

26. कांटी

27.  बरुराज

28.  पारू

29.  साहेबगंज

30.  बैकुंठपुर

31. बरौली

32.  गोपालगंज

33.  कुचायकोट

34. भोरे (SC)

35.  हथुआ

36.  सीवान

37.  जीरादेई

38.  दरौली (SC)

39.  रघुनाथपुर

40.  दरौंदा

41.  बड़हरिया

42.  गोरियाकोठी

43.  महाराजगंज 

44.  एकमा

45.  मांझी

46.  बनियापुर

47.  तरैया

48.  मढ़ौरा

49.  छपरा

50.  गरखा (SC)

51.  अमनौर

52.  परसा

53.  सोनपुर

54. हाजीपुर

55. लालगंज

56.  वैशाली

57.  महुआ

58. राजा पाकर (SC)

59. राघोपुर

60. महनार

61.  पातेपुर (SC)

62.  कल्याणपुर (SC)

63.  वारिसनगर

64.  समस्तीपुर

65.  उजियारपुर

66.  मोरवा

67.  सरायरंजन

68.  मोहिउद्दीननगर

69.  विभूतिपुर

70.  रोसड़ा (SC)

71. हसनपुर

72. चेरिया-बरियारपुर

73. बछवाड़ा

74. तेघरा

75. मटिहानी

76.  साहेबपुर कमाल

77. बेगूसराय

78. बखरी (SC)

79. अलौली (SC)

80.  खगड़िया

81.  बेलदौर

82. परबत्ता

83. तारापुर

84. मुंगेर

85. जमालपुर

86.  सूर्यगढ़ा

87. लखीसराय

88.  शेखपुरा

89.  बरबीघा

90.  अस्थावां

91. बिहारशरीफ

92. राजगीर (SC)

93.  इस्लामपुर

94.  हिलसा

95.  नालंदा

96.  हरनौत

97.  मोकामा

98.  बाढ़

99.  बख्तियारपुर

100. दीघा

101.  बांकीपुर

102.  कुम्हरार

103.  पटना साहिब

104.  फतुहा

105.  दानापुर

106.  मनेर

107.  फुलवारी (SC)

108. मसौढ़ी (SC)

109.  पालीगंज

110.  विक्रम

111.  संदेश 

112.  बड़हरा

113. आरा

114. अगिआंव (SC)

115. तरारी

116. जगदीशपुर

117. शाहपुर

118.  ब्रह्मपुर

119. बक्सर

120. डुमरांव

121.  राजपुर (SC)


आलोक कुमार

रविवार, 5 अक्टूबर 2025

शांति की अपील करने वाले वांगचुक को इसका जिम्मेदार ठहराना अन्याय

 


असहमति का अपराधीकरण सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी

शांति की अपील करने वाले वांगचुक को इसका जिम्मेदार ठहराना अन्याय 

लद्दाख.भारतीय लोकतंत्र पर गहरे सवाल खड़े करती है. लद्दाख की जनता के अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए संघर्षरत वांगचुक को “राष्ट्रविरोधी” ठहराना केवल अन्यायपूर्ण ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के साथ खिलवाड़ है.यह वही प्रवृत्ति है जिसने वयोवृद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी जैसे निर्दोष को जेल की यातना के हवाले कर उनकी जान ले ली थी. 

     सरकार का दायित्व जनता की जायज मांगों को सुनना और संवाद करना है, न कि आलोचना को अपराध मानना. लद्दाखियों की राज्य के दर्जे की मांग या पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा के प्रयास किसी भी तरह राष्ट्रविरोधी नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की उस भावना से जुड़े हैं जिसे प्रधानमंत्री स्वयं बढ़ावा देते हैं. 24 सितंबर 2025 की हिंसा निंदनीय है, लेकिन शांति की अपील करने वाले वांगचुक को इसका जिम्मेदार ठहराना अन्याय है. 

     लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ को कुचलना सरकार की कमजोरी का प्रतीक है.भारत को यह समझना होगा कि सरकार की आलोचना राष्ट्र विरोधी नहीं है. असहमति को कुचलना लोकतंत्र को खोखला करना है.सरकार को चाहिए कि तुरंत वांगचुक और अन्य गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई सुनिश्चित करे और लद्दाखियों की न्यायोचित मांगों पर संवेदनशील संवाद शुरू करें.यही एक लोकतांत्रिक राष्ट्र की पहचान है.

       कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की. साथ ही, केंद्र को चेतावनी दी कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और अन्य प्रमुख मांगों को पूरा करने में उसकी विफलता हिमालयी क्षेत्र के लोगों को "अलग-थलग" कर रही है.

        केडीए सदस्य सज्जाद करगिली ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजे गए वांगचुक और लेह में हिरासत में लिए गए अन्य युवा नेताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की.उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

     करगिली ने कहा, ‘ऐसे समय में जब राष्ट्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, संवेदनशील क्षेत्र लद्दाख के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार लोगों में अलगाव और असुरक्षा की भावना को बढ़ाएगा.'उन्होंने कहा कि सरकार को ‘लोगों के साथ समझदारी से पेश आना चाहिए.’


आलोक कुमार

शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

जिले में विकास कार्यों को नई गति एवं दिशा मिलेगी


15 विकासात्मक योजनाओं का शिलान्यास

पटना.मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज मुंगेर जिले में लगभग 12690 करोड़ रुपए की लागत से प्रगति यात्रा के दौरान घोषित 15 विकासात्मक योजनाओं का शिलान्यास किया.

माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन योजनाओं से जिले में विकास कार्यों को नई गति एवं दिशा मिलेगी, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार होगा एवं उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा.

इसके अतिरिक्त माननीय मुख्यमंत्री जी ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लाभार्थियों, जीविका दीदियों, विद्युत उपभोक्ताओं तथा अन्य योजनाओं के लाभार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए.इसके पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री जी ने स्थानीय लोगों से भी संवाद किया तथा उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना तथा उन पर सम्यक कार्रवाई के लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025

'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की 25 लाख लाभुक महिलाओं को 10 हजार रुपये प्रति लाभुक

  'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की 25 लाख लाभुक महिलाओं को 10 हजार रुपये प्रति लाभुक 


पटना .माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1,  अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' से 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की 25 लाख लाभुक महिलाओं को 10 हजार रुपये प्रति लाभुक की दर से 2500 करोड़ रुपये की राशि का अंतरण किया.

     उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' का शुभारंभ 26 सितम्बर 2025 को किया गया था और उस दिन 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के अंतर्गत राज्य की 75 लाख महिला लाभुकों को 10 हजार प्रति लाभुक की दर से 7500 करोड़ की राशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गयी थी. यानि अब तक कुल 1 करोड़ लाभुक महिलाओं के खाते में अब तक 10 हजार करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है. आज एक करोड़वीं लाभार्थी श्रीमती अंजु कुमारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर अपना अनुभव साझा किया तथा प्रसन्नता व्यक्त की.

     माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' का मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देना है. इसके तहत आर्थिक सहायता के रूप में 10000 रु० की प्रारंभिक राशि दी जा रही है। महिलाओं द्वारा रोजगार शुरू करने के बाद आकलन कर 2 लाख रु० तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस योजना के क्रियान्वयन से महिलाओं की स्थिति और ज्यादा मजबूत होगी, वे आत्मनिर्भर बनेंगी। स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता पर केंद्रित इस योजना के माध्यम से राज्य एवं देश के आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा.

आलोक कुमार


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

गांधी , शास्त्री एवं प्रजापति मिश्र को उनकी जयंती पर नमन किए कांग्रेसजन

 


गांधी , शास्त्री एवं प्रजापति मिश्र को उनकी जयंती पर नमन किए कांग्रेसजन

पटना . बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 157 वीं जयंती, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के 121 वीं जयंती और बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहें स्व. पंडित प्रजापति मिश्र के 127 वीं जयंती के मौके पर उनके प्रतिमा एवं तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया. जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम  ने की.

   अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में राजेश राम  ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री के बताए आदर्शों पर चलकर ही हमारा देश एकजुट रहेगा . गांधी के विचारों को जिंदा रखने के लिए सभी कांग्रेस जन को आगे आना होगा और देश में गांधीवाद को प्रबलता से अपनाना होगा.स्व.  शास्त्री को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. शास्त्री ने राजनीतिक शुचिता की जो मिसाल पेश की है वो राजनीतिक व्यक्तियों के लिए आदर्श है.उन्होंने बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष स्व. प्रजापति मिश्र को नमन करते हुए उन्हें महान विभूति बताया.

    इस अवसर  पर  कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता डा0 मदन मोहन झा,  पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक,पूर्व विधान पार्षद प्रेमचन्द्र मिश्रा,  विधायक  प्रतिमा कुमारी दास  , नरेन्द्र कुमार, ब्रजेश प्रसाद मुनन, राजेश राठौड़, भावना झा, अमिता भूषण, डा0 संजय यादव, नागेन्द्र कुमार विकल, राजेश कुमार सिन्हा, कुमार आशीष, अफरोज खान, शकीलुर रहमान,शशि रंजन,वैद्यनाथ शर्मा, सत्येन्द्र कुमार सिंह, ललन यादव, कमलेश कमल, असफर अहमद, सूरज सिंह यादव, संजय पाण्डेय, अरविन्द लाल रजक, मनोज मेहता,   संतोष श्रीवास्तव,  उदय शंकर पटेल,अश्विनी कुमार, शशिकांत तिवारी, मो0 शाहनवाज, डा0 विनोद यादव, वसी अख्तर, सुधा मिश्रा, यशवंत कुमार चमन, राजनन्दन कुमार,उर्मिला सिंह नीलू, सुनील कुमार सिंह, मृणाल अनामय, सैयद कामरान हुसैन,दुर्गा प्रसाद, विमलेश तिवारी, राम शंकर पान, नदीम अंसारी, सत्येन्द्र प्रसाद, अर्जुन पासवान, मिहिर कुमार झा, बद्री प्रसाद यादव, पवन कुसरी, संजय कुमार श्रीवास्तव, विनीता भगत, सुभाष झा सहित अन्य कांग्रेसजन मौजूद थे.


आलोक कुमार

बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

“शिक्षा की सौगात या चुनावी शगुन?”

 


चुनावी मौसम में शिक्षा की सौगात

“शिक्षा की सौगात या चुनावी शगुन?”

पटना.बुधवार को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने बिहार में 19 नए केवी स्कूल खोलने की मंजूरी दी है. इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स पर दी. बता दें कि ये सभी 19 स्कूल बिहार के जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में खोले जाएंगे.जब नीतीश कुमार एनडीए से बाहर थे, तब पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने की मांग उठाई जाती रही, लेकिन केंद्र सरकार ने उसे ठुकरा दिया.अब जबकि बिहार में चुनावी बयार बह रही है, केंद्र ने अचानक 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी है.यह फैसला निस्संदेह शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, लेकिन समय पर सवाल खड़े करता है.

पांच साल में क्यों नहीं?

सुधि जनों का कहना है कि यदि यही विद्यालय पिछले पांच सालों में खुल जाते तो जनता अपने आप केंद्र की नीयत समझ जाती. अब चुनाव से ठीक पहले इस घोषणा से सरकार "हमाम में नंगा" दिखने लगी है.जाहिर है, राजनीतिक लाभ-हानि का समीकरण इस फैसले के पीछे छिपा हुआ है.फिर भी, इस निर्णय से इनकार नहीं किया जा सकता कि बिहार को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाई मिलेगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि राज्य के 16 जिलों में ये विद्यालय स्थापित होंगे. इससे न केवल स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा बल्कि शिक्षा का स्तर भी ऊंचा उठेगा.

देश में बनेंगे कुल 57 नए केवी

जानकारी के लिए बता दें कि कैबिनेट की बैठक में देशभर में कुल 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए 5862 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इनमें से सबसे ज्यादा 19 केवी स्कूल बिहार में खोले जाएंगे. सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पूरे देश में फिलहाल 1288 केवी संचालित किए जा रहे हैं, इनमें से 3 विदेश में स्थित हैं, बाकी देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद हैं. इन स्कूलों में 13 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.

किन-किन जिलों में खुलेंगे विद्यालय

ये 19 विद्यालय बिहार के 16 जिलों में स्थापित होंगे। प्रस्तावित सूची में शामिल हैं — सीतामढ़ी, कटिहार, कैमूर (भभुआ), झंझारपुर, मधुबनी, शेखपुरा, मधेपुरा, पटना (वाल्मी, दीघा क्षेत्र), अरवल, पूर्णिया, भोजपुर (आरा), मुज़फ्फरपुर (बेला इंडस्ट्रियल एरिया), मुंगेर, दरभंगा-नंबर 3, भागलपुर (नगर क्षेत्र), बिहारशरीफ (नालंदा), बोधगया आदि.

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह वास्तविक विकास की पहल है या महज चुनावी रणनीति? जनता को फैसला करना है कि उन्हें शिक्षा का वादा चाहिए या समय पर विकास की गारंटी.


आलोक कुमार

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मंगलवार, 30 सितंबर 2025

“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”

 “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”


पटना. “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” – इस वाक्य का साक्षात रूप है कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी. आज से ठीक सौ वर्ष पहले, 30 सितंबर 1925 को वाशिंगटन डी.सी. में डॉ. अन्ना डेंगेल ने जो बीज बोया था, वह आज सेवा, करुणा और समर्पण का विशाल वृक्ष बन चुका है.

    डॉ. डेंगेल का दर्द उस समय से जुड़ा है, जब रावलपिंडी में उन्होंने मुस्लिम महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्त्री रोग संबंधी सेवाओं के अभाव में मरते देखा.यह पीड़ा उन्हें विवश कर गई कि स्त्रियों की सेवा, चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक ऐसी सोसाइटी बने, जो जाति, धर्म और लिंग से ऊपर उठकर केवल मानवता के लिए काम करे.

       भारत की धरती से उनका रिश्ता भी बेहद खास रहा.1939 में पटना सिटी की पादरी की हवेली में जब उनका स्वागत “होली फैमिली” कहकर किया गया, तब उन्होंने उसी नाम से माइनर हॉस्पिटल की नींव रख दी. यही अस्पताल आगे चलकर कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के रूप में मानव सेवा का केंद्र बना. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि यहां नर्सिंग ट्रेनिंग प्राप्त करने वालों में मदर टेरेसा जैसी महान आत्मा भी शामिल थीं.

     मिशन सिस्टर्स ने केवल अस्पताल ही नहीं खोले, बल्कि “मानवता की मशाल” को फैलाने का अभियान छेड़ा. दिल्ली के ओखला में 1953 का होली फैमिली हॉस्पिटल, रांची के मंदार और कोडरमा के अस्पताल, मुंबई और पूना के मिशन केंद्र—ये सब उनके अथक परिश्रम के प्रतीक हैं. उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र रहा – न्याय, शांति और करुणा. 

    हालांकि बीते दशकों में कई संस्थानों का प्रबंधन अन्य संगठनों को सौंपना पड़ा. मंदार का नर्सिंग स्कूल अब कॉन्स्टेंट लिवेन्स स्कूल ऑफ नर्सिंग बन गया है, मुंबई का अस्पताल उर्सुलाइन ऑफ मैरी इमैक्युलेट के पास है, वहीं दिल्ली और झारखंड के अस्पताल भी नए हाथों में चले गए.लेकिन मिशन सिस्टर्स का योगदान किसी इमारत से नहीं, बल्कि उस भावना से मापा जाता है जिन्होंने समाज में बोई.

    आज भी सिस्टर नशा मुक्ति केंद्रों, वैकल्पिक चिकित्सा केंद्रों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी हुई है. समग्र उपचार मिशन और आयुष्य सेंटर जैसी पहलें उसकी सेवा-पथ की नई दिशाएं खोल रही हैं.

       सौ साल पूरे होने पर हमें याद रखना चाहिए कि यह संस्था केवल ईंट-पत्थर की इमारतों का नाम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता की परंपरा है. डॉ. अन्ना डेंगेल ने जिस आग को सौ साल पहले जलाया था, वह आज भी सिस्टरों के समर्पित जीवन में उजाला फैलाती है.

        आज का दिन सिर्फ एक संस्थान की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस विचार की पुनः स्मृति है कि – समाज में असली धर्म वही है, जो मानव सेवा से जुड़ा हो.डॉ. अन्ना डेंगेल को नमन, और कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी को उनकी शताब्दी पर हार्दिक बधाई!


आलोक कुमार

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