“जान है तो जहान—सुरक्षित बचपन, मजबूत भारत”
“टीकाकरण और जागरूकता से बदल रही है बच्चों की दुनिया”
रिपोर्टः आलोक कुमार
“जान है तो जहान” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दर्शन है। जब तक देश के बच्चे सुरक्षित, स्वस्थ और जीवित नहीं रहेंगे, तब तक किसी भी विकास का दावा अधूरा ही रहेगा। यही कारण है कि आज भारत सरकार और अनेक गैर-सरकारी संस्थाएं बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण और बाल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही हैं।
पिछले तीन दशकों में भारत ने बाल मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 1990 से 2024 के बीच 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में लगभग 79% की गिरावट आई है—यह 127 से घटकर 27 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। इसी तरह नवजात मृत्यु दर (NMR) भी 57 से घटकर 17 तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि यूं ही नहीं मिली; इसके पीछे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण अभियान और जन-जागरूकता की बड़ी भूमिका है।
अगर बिहार की बात करें, तो यहां भी स्थिति में सुधार देखने को मिला है। 2009 में जहां शिशु मृत्यु दर (IMR) 52 थी, वहीं NFHS-5 (2019-20) में यह घटकर 46.8 हो गई और हाल के वर्षों में यह 27-32 के बीच आंकी जा रही है। यह राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचने का संकेत है। लेकिन यह भी सच है कि कुपोषण और बाल मृत्यु दर अभी भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं, खासकर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों में।
यहीं से “बाल संरक्षण” की अवधारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बाल संरक्षण का मतलब सिर्फ बच्चों को हिंसा या शोषण से बचाना नहीं है, बल्कि उनके जीवन, स्वास्थ्य और समुचित विकास के अधिकार को सुनिश्चित करना भी है। एक स्वस्थ बच्चा ही आगे चलकर एक सशक्त नागरिक बन सकता है।
इस संदर्भ में टीकाकरण (Immunization) बाल संरक्षण का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक उपाय बनकर सामने आता है। भारत सरकार का यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) बच्चों को 12 गंभीर और जानलेवा बीमारियों से मुफ्त सुरक्षा प्रदान करता है। इनमें पोलियो, खसरा, रूबेला, टेटनस और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियां शामिल हैं।
टीकाकरण का सबसे बड़ा लाभ है—जीवन की सुरक्षा। एक छोटा सा टीका बच्चे को मृत्यु के खतरे से बचा सकता है। इसके साथ ही यह विकलांगता को भी रोकता है। उदाहरण के तौर पर पोलियो से लकवा और खसरे से अंधापन जैसी स्थायी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है।
इसके अलावा टीकाकरण कुपोषण और बीमारी के दुष्चक्र को तोड़ने में भी मदद करता है। बार-बार बीमार होने वाला बच्चा न तो ठीक से बढ़ पाता है और न ही उसका मानसिक विकास सही तरीके से हो पाता है। टीके उसे स्वस्थ रखते हैं, जिससे उसका संपूर्ण विकास संभव हो पाता है।
टीकाकरण का एक और महत्वपूर्ण पहलू है “सामुदायिक सुरक्षा” (Herd Immunity)। जब किसी समुदाय के अधिकांश बच्चों को टीका लग जाता है, तो बीमारियों का प्रसार स्वतः ही कम हो जाता है। इससे उन बच्चों को भी सुरक्षा मिलती है जो किसी कारणवश टीका नहीं लगवा पाते।
भारत में एक बच्चे को “पूर्ण प्रतिरक्षित” तब माना जाता है जब उसे जन्म के पहले वर्ष में सभी आवश्यक टीके समय पर मिल जाते हैं। यह केवल एक स्वास्थ्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि बच्चे का मौलिक अधिकार है और माता-पिता की जिम्मेदारी भी।
इस दिशा में जमीनी स्तर पर भी सराहनीय कार्य हो रहे हैं। पटना नगर निगम के वार्ड नंबर-1 स्थित शबरी कॉलोनी, दीघा मुसहरी में कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के सामुदायिक स्वास्थ्य एवं ग्रामीण विकास केंद्र द्वारा टीकाकरण कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया गया। इसका सकारात्मक असर यह हुआ कि जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत में सुधार हुआ और मृत्यु दर में कमी आई।
एक समय था जब स्वास्थ्यकर्मी गांवों में जाते थे और उन्हें यह सुनने को मिलता था कि “बबुआ मु गया है”—यानी बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि उस दर्दनाक हकीकत का प्रतीक था, जिसमें जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण मासूम जानें चली जाती थीं। आज वही स्थिति बदल रही है, और इसका श्रेय टीकाकरण व स्वास्थ्य जागरूकता को जाता है।
कानूनी स्तर पर भी भारत ने बाल संरक्षण के लिए मजबूत कदम उठाए हैं। POCSO Act 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act) बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) भी बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है। ये कानून बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंततः, यह समझना होगा कि किसी भी राष्ट्र की असली ताकत उसकी आने वाली पीढ़ी होती है। अगर बच्चे सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित होंगे, तभी देश प्रगति करेगा। “जान है तो जहान” का अर्थ यही है कि पहले जीवन की रक्षा हो, फिर विकास की बात हो।
आज जरूरत है कि हर माता-पिता, हर समाज और हर संस्था इस जिम्मेदारी को समझे। टीकाकरण को आदत बनाए, जागरूकता फैलाए और यह सुनिश्चित करे कि कोई भी बच्चा स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे।
जब हर बच्चा सुरक्षित होगा, तभी भारत वास्तव में महान बनेगा।
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