रविवार, 21 अगस्त 2022

जनप्रतिनिधियों के शिकायतों सुझावों की जानकारी देनी थी.

  


चंडीः नालंदा जिले के चंडी प्रखंड परिसर स्थित सभागार में उप विकास आयुक्त श्री वैभव श्रीवास्तव के अध्यक्षता में माननीय जन प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की बैठक हुई.सभी माननीय जन प्रतिनिधियों ने चंडी के पंचायतों से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की स्थानीय स्तर पर हो रही खामियों की जानकारी दी.

बताते चलें कि इस बैठक के पूर्व कई विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर द्वारा प्रखंड स्तर पर चल रही योजनाओं के निरीक्षण करने के आदेश दिए गए थे. निरीक्षणोपरांत उन्हें उक्त बैठक में जनप्रतिनिधियों के शिकायतों/ सुझावों की जानकारी देनी थी.

उप विकास आयुक्त के आगमन के पूर्व कई जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने इस प्रखंड में अपने संबंधित कर्मियों/अधिकारियों के साथ बैठक कर रखा था.

माननीय जन प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी समस्याएं बताई जिसे उप विकास आयुक्त ने गौर से सुना.ज्यादातर शिकायतें नल-जल,बिजली तथा कल्याणकारी योजनाओं के लिए भू-अनुपलब्धता की थी.

चंडी प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष ने कचड़ा प्रबंधन तथा पंचायत सरकार भवन हेतु भूमि अनुपलब्धता की बात बताई.उप  विकास आयुक्त ने अंचलाधिकारी को निर्देशित किया.सालेपुर पंचायत में वार्ड नं.5,6,13 एवं 14 में सात निश्चय के कार्यों के भुगतान लंबित की शिकायत भी की गई.

माधोपुर पंचायत के वार्ड न.14 में आंगनवाड़ी भवन निर्माण के लिए भूमि अनुपलब्धता की बात बतायी गयी,जिस पर उप विकास आयुक्त ने भूमि चिन्हित करने का आदेश अंचलाधिकारी को दिया.उन्होंने कहा कि अगर चिन्हित जमीन अतिक्रमित पायी जाती है तो उसे अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी.

महकार पंचायत के प्राथमिक विद्यालय गौरी के विद्यालय भवन जर्जर होने की शिकायत की गई. सिरनामा पंचायत के वार्ड न.13,14 एवं 15 में नल-जल की समस्या बताई गई.माधोपुर के वार्ड नं.11 में करीब 50 घरों में जलापूर्ति नहीं होने की बात बतायी गई.

माननीया चंडी प्रमुख ने प्रखंड के विकास के लिए पदाधिकारियों/कर्मियों के सहयोग सही ढंग से नहीं मिलने की शिकायत की जिस पर उप विकास आयुक्त ने काफी गंभीरता से लिया तथा सभी को निर्देश दिया कि माननीय जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य करें .सालेपुर पंचायत में इंदिरा आवास में बिना आवास बने तृतीय किश्त भुगतान की भी शिकायत की गई जिसकी जांच करवाने की बात उप विकास आयुक्त ने कही.

उप विकास आयुक्त ने पंचायती राज के द्वारा चल रही नल-जल की समीक्षा माननीय जन प्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायत पत्र के आलोक में किया तथा आवश्यक निर्देश दिया.माननीया अध्यक्ष जिला परिषद ने अमरौरा पंचायत में आंगनवाड़ी केंद्र संचालन में गड़बड़ी की बात कही जिस पर उप विकास आयुक्त ने जिला स्तर से जांच के आदेश दिए.

उप विकास आयुक्त ने माननीय जन प्रतिनिधियों से मिली शिकायत तथा नल-जल के अद्यतन प्रतिवेदन में मेल नहीं रहने पर तथा जानकारी नहीं रहने पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी,चंडी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा.

उक्त बैठक में अपर समाहर्ता श्री मंजीत कुमार सहित कई जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.


आलोक कुमार


शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

लोक का चुनाव प्रभारी मनोनीत


पटना: इस समय गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से भाजपा नेता मनसुख वसावा सांसद हैं, उन्होंने साल 2014 के चुनाव इस सीट पर कांग्रेस के जैयशभाई पटेल को 153, 273 वोटों से हराया था.लोकसभा चुनाव को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल ने बिहार कांग्रेस सेवादल के संगठन प्रभारी श्री राज कुमार पूर्वे को गुजरात राज्य के भरूच लोक का चुनाव प्रभारी मनोनीत किया है.

इनके मनोनयन पर बधाई देने वालों में बिहार कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, राज किशोर सिंह, महामंत्री श्री ब्रह्मदेव चौरसिया, श्री रामबाबू साह, जसमीन अंसारी, विपिन झा, इजहार अंसारी, प्रेमनाथ राय शर्मा, मोहम्मद ऐनुल, आर0 के0 मंडल, विनोद मंडल, राजीव पाण्डेय आदि प्रमुख हैं.


आलोक कुमार 

वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित !

 पटना: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. इस समय भारत खतरे में है.आजकल भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कवायद तेज है.उसके लिए एक मसौदा तैयार किया जा रहा है.फिलहाल जो यहां मसौदा का प्रारूप बना है उसके अनुसार भारत के हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.यानी मतदान नहीं कर सकेेंगे.एक तरह से राजनीतिक हत्या कर दी जाएगी.



बता दें कि फरवरी 2022 में आयोजित माघ मेले के दौरान संगम तट पर संत सम्मेलन में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के साथ भारत को अपने संविधान के साथ हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए धर्म संसद में प्रस्ताव पारित हुआ था. तीन प्रस्ताव पारित किए गए थे.तीर्थराज प्रयागराज की धरती से हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने का साधु-संतों ने संकल्प लिये थे तो उस समय जोरदार जयघोष गूंजने लगे थे.इस दौरान संतों ने कहा था कि जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा, तब तक विश्व गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकेगा.    

तब प्रयागराज धर्म संसद में यह तय किया गया कि संत और धर्मगुरु इसके लिए एक मसौदा तैयार करेंगे जो एक राष्ट्र के गठन की स्थिति में ‘संविधान‘के रूप में गाइडबुक के रूप में कार्य करेगा.इस दौरान सनातनी हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए इस्लामी जिहाद के खिलाफ संतों से एकजुटता का आह्वान किया गया था.कहा गया कि अब अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का फर्क मिट जाना चाहिए.यह धर्म संसद महावीर मार्ग स्थित ब्रह्मर्षि आश्रम ट्रस्ट शिविर में आयोजित थी.  

इस संदर्भ में बताया गया कि हिंदू राष्ट्र के संविधान का मसौदा तैयार हो चुका है. मसौदे में विषयों को शामिल करने के साथ-साथ आम जनता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा.अभी तक 32 पृष्ठों का मसौदा तैयार किया गया है, प्रस्तावित गाइडबुक 750 पृष्ठों की होगी. यह विद्वानों व संतों के बीच मतैक्य स्थापित कर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है. इस मौजूदा मसौदे में कई चौंकाने वाली बातें हैं.    

इस कथित ड्राफ्ट में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.मसौदे में दिल्ली के बजाय वाराणसी को भारत की राजधानी बनाने का प्रस्ताव है. मसौदे के निर्माताओं के अनुसार वाराणसी सर्वज्ञता का केंद्र रहा है और इसलिए इसे हिंदू राष्ट्र में राजधानी बनाया जाना चाहिए. हालांकि शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि नाम केवल चर्चा के लिए है और अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. संभव है कि राजधानी के लिए उज्जैन जैसी कोई दूसरी जगह भी मानी जा सकती है.                        

वाराणसी में 30 संतों और विद्वानों ने इसे तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसमें मुस्लिमों और ईसाइयों को मताधिकार नहीं दिया गया है.विधि विशेषज्ञों एवं सनातन धर्म के विशेषज्ञों के सहयोग से ‘हिन्दू राष्ट्र संविधान निर्माण समिति‘ने इस मसौदे पर लोगों से विचार-विमर्श कर 2023 में प्रयागराज में होने वाले माघ मेले में इस प्रारूप को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है.मसौदे पर उनकी राय जानने के लिए लोगों के बीच जाएंगे.

अब धार्मिक विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने इसके लिए एक दस्तावेज तैयार किया है.यह शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप के नेतृत्व में उस विस्तृत दस्तावेज का एक हिस्सा है. कहा जा रहा है कि हिंदू राष्ट्र के संविधान के पहले मसौदे में शिक्षा, कानून-व्यवस्था, रक्षा, मतदान प्रणाली, रक्षा, राज्य के मुखिया के अधिकारों के बारे में बताया गया है.  

हिंदू राष्ट्र के संविधान में कहा गया है कि सभी लोगों को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा. खेती को टैक्स फ्री किया जाएगा. इस ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात मताधिकार को लेकर है. फिलहाल जो प्रारूप बना है उसके अनुसार हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का अधिकार नहीं होगा. यानी हिंदुओं जिसमें सिख, बौद्ध, जैन भी हैं, वो ही वोट दे सकेंगे. स्वामी आनंद स्वरूप कहते हैं ‘ ऐसा ही तो दूसरे देशों में है.तो फिर भारत में क्यों नहीं? इस्लामिक देश क्या वहां रहने वाले हिंदुओं को मत का अधिकार देते हैं? इस प्रारूप में वोट देने की आयु 16 वर्ष और चुनाव लड़ने की 25 वर्ष करने का भी प्रस्ताव किया गया है.

इस संविधान के कवर पेज पर अखंड भारत का नक्शा लगाया गया है. कवर पेज में कुछ मंदिरों के ऊपर भगवा झंडा फहराते हुए दिखाया गया है. ब्रिटिश कालीन नियम खत्म कर दिए जाएंगे. सब कुछ वर्ण व्यवस्था के आधार पर चलाया जाएगा. हर जाति के लोगों को सुविधा और सुरक्षा मिलेगी.

आलोक कुमार


गुरुवार, 18 अगस्त 2022

शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया

 स्मृति भवन में दशरथ मांझी द्वारा उपयोग में लाये गए छेनी हथौड़ा को रखने के लिए  लगाए गए डिस्प्ले यूनिट का हुआ लोकार्पण


गया:पर्वत पुरूष दशरथ मांझी के 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दशरथ मांझी महोत्सव, 2022 का आयोजन मोहड़ा प्रखंड के गहलोर पंचायत में आज किया गया.कार्यक्रम में सर्वप्रथम जिलाधिकारी, गया डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा कार्यक्रम के उपस्थित मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो देकर स्वागत किया गया. कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया.

स्वागत भाषण में जिला पदाधिकारी, गया डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा बताया गया की आज माउन्टेन मैन के नाम से जग में विख्यात दशरथ मांझी की स्मृति में आयोजित दशरथ मांझी महोत्सव में उपस्थित माननीय पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी, माननीय मंत्री, ग्रामीण कार्य विभाग श्री श्रवण कुमार, माननीय मंत्री, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग श्री संतोष कुमार सुमन, मंचासीन माननीय सांसद, माननीय विधायक एवं गणमान्य व्यक्ति, देवियों, सज्जनों, बच्चों एवं मीडिया के प्रतिनिधिगण। इस कार्यक्रम में अपना बहुमूल्य समय देकर शामिल होने के लिए हम आप सबो का हार्दिक अभिनंदन करते हैं.

अपनी कर्मठता एवं दृढ़ संकल्प इच्छा शक्ति के द्वारा गया जिला के साथ-साथ बिहार को गौरवान्वित करने वाले पर्वत पुरूष दशरथ मांझी के सम्मान में आयोजित इस महोत्सव में मैं सर्वप्रथम गेहलौर की धरती का नमन करता हूँ, जिसने ऐसे जीवट पुरुष को जन्म दिया.

दशरथ मांझी (1929-2007) गया जिला के गेहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे. केवल हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली.22 वर्षों के परिश्रम के बाद, दशरथ मांझी के बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को लगभग 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर कर दिया.वे जिस गांव में रहते थे, वहां से पास के कस्बे जाने के लिए एक पूरा पहाड़ (गहलोर पर्वत) पार करना पड़ता था. उनके गांव में उन दिनों न बिजली थी, न पानी. ऐसे में छोटी से छोटी जरूरत के लिए उस पूरे पहाड़ को या तो पार करना पड़ता था, या उसका चक्कर लगाकर जाना पड़ता था. पति के लिए खाना ले जाने के क्रम में उनकी पत्नी फगुनी देवी पहाड़ के दर्रे में गिर गयीं और उनका निधन हो गया. उनकी पत्नी की मौत दवाइयों के अभाव में हो गया, क्योंकि बाजार दूर था. इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले दम पर पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकालेंगे और अतरी व वजीरगंज की दूरी को कम करेंगे.

17 अगस्त, 2007 को 73 साल की उम्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में कैंसर से पीड़ित दशरथ माँझी का निधन हो गया. बिहार सरकार के द्वारा राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. वे ‘माउंटेन मैन‘ के रूप में विख्यात हैं. उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में ‘पद्म‘ के लिए उनके नाम का प्रस्ताव रखा.

आज उनकी कृति वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बन गया है. उनकी कृति ने अपने यश का डंका न सिर्फ भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में बजा रखा है.आज वॉलीवुड, हॉलीवुड के बड़े-बड़े निर्माताओं ने उन पर कई फिल्में बनायी, जो अत्यंत लोकप्रिय है. ‘पहाड़ से उँचा आदमी‘, ‘डिजाइन्ड वाई लव‘,"THE MAN WHO MOVED THE MOUNTAIN", MANJHI-THE MOUNTAIN MAN" फिल्म ने काफी लोकप्रियता हासिल की.

’जिलाधिकारी ने बताया की कार्यक्रम से पूर्व मोहड़ा प्रखंड में जिला स्तरीय जनता दरबार का आयोजन किया गया है, जिसमे आमजन द्वारा बढ़ चढ़ कर भाग लिया गया.प्राप्त आवेदनों में अधिकतर आवेदन का निष्पादन ऑन द स्पॉट किया गया.’

 माननीय मुख्यमंत्री द्वारा गेहलौर में 3 किमी लंबी एक सड़क हॉस्पिटल, पंचायत भवन, किसान भवन, ओ०पी०, समाधि स्थल बनवाया तथा गहलौर का पर्यटकीय विकास किया एवं वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करवाया गया है. पहाड़ काटने के प्रयोग में लाए गए हथौड़ा और छेनी को गेहलौर में बिहार सरकार द्वारा निर्मित स्मृति भवन में पर्यटकों को देखने के उद्देश्य से निर्माण कराया गया.


बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम, पटना द्वारा दशरथ मांझी स्मारक स्थल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण कार्य में चारदीवारी का निर्माण, गेट का निर्माण कार्य, समाधि स्थल का कार्य, सोलर लाइट का अधिष्ठापन एवं पार्किंग का निर्माण कार्य कराया गया है. साथ ही जन सुविधा का निर्माण, पानी का प्याऊ ट्यूबवेल एवं पहुंच पथ का निर्माण एवं दशरथ मांझी मूर्ति का स्थापना कार्य कराया गया है. साथ ही पर्वत पुरुष दशरथ मांझी स्मृति भवन का निर्माण कार्य करवाया गया है.

कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमण्डल, गया द्वारा रॉक कट सड़क के दूसरी तरफ पूर्वी छोर पर प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य एवं स्मारक स्थल पर कानॉपी निर्माण कार्य कराया गया है, इन सभी योजनाओं में 146.26 लाख रूपये खर्च किया गया है.  

 


वर्ष 2022 में दशरथ मांझी स्मारक स्थल एवं इसके आस-पास के जगहों पर बंद पड़े सभी सोलर लाईट को इलेक्ट्रीक कनेक्शन कराते हुए चालू कराया गया है.साथ ही हाईमास्ट लाइट के सभी खराब बल्ब को बदल दिया गया है. स्मारक स्थल पर टूटे हुए टाइल्स को हटाकर नया टाइल्स लगाया गया. स्मृति भवन में दशरथ मांझी द्वारा उपयोग में लाए गए छेनी हथौड़ा को रखने के लिए डिस्प्ले यूनिट का निर्माण एवं स्मृति भवन का मरम्मती कार्य कराया गया है. इस कार्य के लिए लगभग 06 लाख रुपये व्यय हुआ है. रॉक कट सड़क के दोनों किनारों में डेकोरेटेड प्लांट लगाया जा रहा है.


सरकार आम लोगों की सुविधा एवं बिहार के विकास के लिए कृतसंकल्प है. हर घर में नल का जल, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन की व्यवस्था कर रही है। सभी वृद्धजनों को पेंशन प्रदान कर रही है, युवाओं को शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास के लिए राज्यव्यापी कार्यक्रम चलाया जा रहा है. शराबबंदी से समाज में खुशनुमा माहौल बना है. बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा, विकास की मुकम्मल व्यवस्था की गयी.महिलाओं को रोजगार में 35 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा गया है.

आनेवाली पीढ़ी दशरथ मांझी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेती रहेगी.उनके कार्यवीरता की गाथा युग-युगान्तर तक गायी जाती रहेगी। इन्हीं शब्दों के साथ अपनी वाणी को विराम देते है.


आलोक कुमार

जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक

 जिलाधिकारी ने पितृ तर्पण के लिए आने वाले यात्रियों के बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रेलवे के पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए स्टेशन परिसर का घूम घूम कर निरीक्षण किया..

गया: पितृपक्ष मेला 2022 के अवसर पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं जो खासकर विभिन्न ट्रेन के माध्यम से आएंगे उनकी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को बेहतर तथा सुगमता बनाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम तथा वरीय पुलिस अधीक्षक हरप्रीत कौर की अध्यक्षता में रेलवे स्टेशन के सभागार में रेलवे स्टेशन के तमाम वरीय पदाधिकारियों जीआरपी आरपीएफ तथा जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

बैठक में स्टेशन मैनेजर गया ने बताया कि वर्तमान समय में 84 जोड़ी ट्रेन का परिचालन है. 15 हजार से 16 हजार यात्री प्रतिदिन गया रेलवे स्टेशन से यात्रा कर रहे हैं. पितृपक्ष मेला के समय लगभग 30000 से 35000 यात्री प्रतिदिन गया जिला आते हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा हरियाणा राज्य से ज्यादातर तीर्थयात्री आते हैं. बैठक में बताया गया कि ज्यादातर ट्रेनें रात्रि 09 से सुबह 04 बजे समय के बीच ही आती है. यात्रियों की सुविधा के लिए फुल 40 टॉयलेट की व्यवस्था है जिसमें 20 रेलवे स्टेशन के अंदर तथा 20 रेलवे स्टेशन के बाहर में है. जिला पदाधिकारी ने सभी शौचालयों को नियमित साफ-सफाई अच्छे तरीके से साफ सफाई करते रहने का निर्देश दिए.

जिला पदाधिकारी ने रेलवे प्रशासन को निर्देश दिया कि भीड़ नियंत्रण को बेहतर तरीके से अनुपालन कराएंगे. सभी तीर्थ यात्रियों के साथ कुशल व्यवहार अपनाएं. विभिन्न जीआरपी, आरपीएफ तथा अन्य पदाधिकारियों को अच्छे तरीके से प्रतिनियुक्ति करें.

जिला पदाधिकारी ने जिला परिवहन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी सदर तथा पुलिस उपाधीक्षक यातायात को निर्देश दिया कि आपस में समन्वय स्थापित करते हुए विभिन्न ऑटो रिक्शा इत्यादि का क्षेत्रवार दर निर्धारण कर ले तथा विभिन्न ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा पर निर्धारित दर को प्रदर्शित करा दें ताकि यात्री उसी अनुरूप भुगतान कर सके. रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर में भी पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम लगा दें तथा लगातार अनाउंसमेंट करते रहें. रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर तथा अंदर के परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखें.

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक हरप्रीत कौर ने निर्देश दिया कि रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर में कम से कम 4 स्थानों पर वॉच टावर बनवाने इसके लिए उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक नगर को जगह चिन्हित करने का निर्देश दिए. रेलवे प्रशासन द्वारा लगाए गए सीसीटीवी का निरंतर निगरानी रखने का निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन द्वारा यात्रियों को मेला क्षेत्र में जाने के लिए निशुल्क टैक्सी अथवा वाहन, यात्री सुविधा के लिए देने के लिये बड़ा जगह चिन्हित करते हुए उसने कम से कम चार काउंटर बनाए ताकि यात्रियों के भीड़ का दबाव कम पड़े.


जिला पदाधिकारी ने स्टेशन मैनेजर को स्पष्ट निर्देश दिया कि तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए  स्टेशन परिसर के अंदर एवं स्टेशन परिसर के बाहर पर्याप्त साफ-सफाई, पेयजल की उत्तम व्यवस्था, शौचालयों की निरंतर साफ-सफाई अनिवार्य रूप से करावे.

इसके उपरांत स्टेशन के बाहरी परिसर का घूम घूम कर निरीक्षण किया. उन्होंने टूटी नालियों के ढक्कन को मरम्मत कराने का निर्देश दिया.किन किन स्थानों पर विभिन्न विभागों के लगाए जाने वाले शिविर के बारे में अवगत हुए.

आलोक कुमार

मंगलवार, 16 अगस्त 2022

तिरंगा जिम्मेदारी और एकता का प्रतीक : भक्तचरण दास

  * तिरंगा जिम्मेदारी और एकता का प्रतीक : भक्तचरण दास

* कांग्रेस ने फहराया तिरंगा, निकाला तिरंगा मार्च

* कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष ने फ़हराया तिरंगा, निकला तिरंगा मार्च


पटना:प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने 76 वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र ध्वज को प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने फहराया. इस दौरान बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्तचरण दास एवं सह प्रभारी बृजलाल खबरी भी मौजूद रहें.

इसके बाद कांग्रेस सेवादल ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा को सलामी दी. झंडोतोलन के उपरांत प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने संबोधन में कहा कि कांग्रेस ने देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए बहुत संघर्ष किये हैं. आज देश में तिरंगा शान से फहराया जा रहा है तो इसमें लाखों वीरों की शहादत की देन है. भारतीयों का आत्मबोध लेकर हमने इस तिरंगे के नीचे पूरे देश को एकजुट किया है.उन्होंने पंडित नेहरू और महात्मा गांधी के महत्व को बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को इस तिरंगे की गौरव यात्रा को बताना बेहद जरूरी हो चुका है.देश में आजादी के दीवानों का सर्वाेच्च प्रतीक इस तिरंगे को विश्व में सर्वाेच्च बनाएं रखने की जिम्मेदारी हम सब की है.

झंडोतोलन के उपरांत सदाकत आश्रम से राजापुल होते हुए राजेन्द्र समाधि स्थल तक सैंकड़ो कि संख्या में कांग्रेसजनों के द्वारा तिरंगा मार्च का आयोजन किया गया जिसका नेतृत्व बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने किया. समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के उपरांत बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्तचरण दास ने कहा कि कांग्रेस ने देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है और आज जब राष्ट्र की एकता को जाति-धर्म के नाम पर तोड़ने की साजिश की जा रही है तो डटकर वैसे तत्वों के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी है.

झंडोतोलन और तिरंगा मार्च में भक्त चरण दास, ब्रिज लाल खबरी, डॉ. मदन मोहन झा, अजित शर्मा, अखिलेश प्रसाद सिंह, कन्हैया कुमार, डॉ. शकील अहमद, चन्दन बागची, कौकब कादरी, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, राजेश राठौड़, शकील अहमद खान, आबिदुर रहमान, विजय शंकर दुबे, सिद्धार्थ सिंह, राजेश कुमार, प्रतिमा कुमारी दास , मुरारी प्रसाद गौतम, ब्रजेश प्रसाद मुनन, श्रीमती ज्योति, नरेन्द्र कुमार, हरखू झा, कुमार आशीष, लाल बाबु लाल, अमिता भूषण, प्रमोद कुमार सिंह, भावना झा, बंटी चौधरी, जया मिश्रा, अमित कुमार टून्ना, आनंद माधव, विनय वर्मा, गजानंद शाही, राजेश कुमार सिन्हा, ज्ञान रंजन, गुंजन पटेल, चुन्नू सिंह, असित नाथ तिवारी, कुंतल कृष्णा, संजीव कर्मवीर, नागेन्द्र प्रसाद विकल, प्रवीन कुशवाहा, शरबत जहाँ फ़ातेमा, जमाल अहमद भल्लू, अम्बुज किशोर झा, शशि कुमार सिंह, सौरभ सिन्हा, कमल देव नारायण शुक्ला, शशि कान्त तिवारी, राज कुमार राजन, ललन यादव, अशोक गगन, अनुराग चन्दन, जीतेन्द्र प्रसाद सिंह, मोती लाल शर्मा, अजय सिंह, कपिलदेव प्रसाद यादव, अरबिंद लाल रजक, मिन्नत रहमानी, मृणाल अनामय, उदय शंकर पटेल, रामायण प्रसाद यादव, केशर अली खान, रेखा देवी, अनीता राम, असफर अहमद, वशी अख्तर, सुनील चौधरी, उमा कान्त सिंह, मंजीत आनंद साहू, मुकुल यादव, ब्रज किशोर कुशवाहा, आशुतोष शर्मा, शशि रंजन, कुंदन गुप्ता, दुर्गा प्रसाद, संतोष श्रीवास्तव, सुनील कुमार सिंह, गुरुदयाल सिंह, अमरेन्द्र सिंह, रीता सिंह, रूपम यादव, सुधा मिश्रा, अनोखा देवी, निधि पाण्डेय, रवि गोल्डन, आर. एन. चौधरी, मोनी देवी, सुनीता साक्षी, जया लक्ष्मी, सिसिल शाह, अरुण पाठक, शारीफ रंगरेज, राजेंद्र चौधरी, मोहम्मद शाहनवाज, निरंजन कुमार सहित सैंकड़ों कांग्रेसजन मौजूद रहें.

आलोक कुमार

हाजत में ही सोनमंती ने दम तोड़ दिया

गया: इस जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर नीमचक बथानी थाने के हाजत में सोनमंती देवी नामक एक महिला की मौत हो गई है.पुलिस हाजत में दम तोड़ने वाली महिला को थाने की पुलिस ने बीती 13 अगस्त से पकड़ रखा था.इस बीच 15 अगस्त को साढ़े तीन बजे सोनंमती देवी के परिजनों को भनक लगी की हाजत में ही सोनमंती ने दम तोड़ दिया है.

जानकार लोगों का कहना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के मुताबिक पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती है. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर पुलिस को नजदीकी न्यायालय के समक्ष पेश करना जरूरी होता है.जो नीमचक बथानी थानाध्यक्ष के द्वारा नहीं किया गया.वहीं पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक अगर पुलिस किसी व्यक्ति को हिरासत में या गिरफ्तार करके थाने लाती है तो उसको समय पर भोजन कराना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसके लिए पुलिस को भत्ता भी मिलता है.परिजनों का आरोप है कि सोनमंती देवी से परिवार वालों से नहीं मिलने दिया जा रहा था.

तीन दिनों से पुलिस हिरासत में रहने वाली सोनमंती देवी को नीमचक बथानी थाना की पुलिस न तो उसे रिहा कर रही थी और न ही उसे जेल भेज रही थी. इस बीच 15 अगस्त को साढ़े तीन बजे सोनंमती देवी के परिजनों को भनक लगी की हाजत में ही सोनमंती ने दम तोड़ दिया है.महिला की मौत की भनक लगते ही नीमथू गांव के सैकड़ों लोगों ने थाने घेर लिया. यही नहीं जब थाने के घेराव और पुलिस व आम लोगों की बातचीत का गांव के युवकों ने वीडियो बनाना शुरू किया तो पुलिस ने उन पर पुलिसिया धौंस दिखाते हुए वीडियो डिलिट करने की बात कही पर लेकिन गांव के युवकों ने पुलिस वालों को यह कहते हुए धमकाया कि यदि वीडियो डिलिट करने पर मजबूर किया गया तो परिणाम भुगतने को भी तैयार रहें. यह बात सुनते ही थाने की पुलिस बैकफुट पर आ गई.                        

फिलहाल थाने के बाहर बवाल चल ही रहा है.पुलिस ने इलाके के मौजिज लोगों को बुला कर इस मामले को रफादफा कराने में जुटी है. बैठकों का दौर जारी है. एसडीओ और डीएसपी मौके पर पहुंच गए हैं. डीएसपी का कहना है कि मामले की तहकीकात की जा रही है. उसे थाने में ही क्यों तीन दिनों से रखा जा रहा था. इस बात की जानकारी ली जा रही है.साथ महिला के मौत के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है.

इस मामले के संदर्भ में कहा जा रहा है कि बीती 12 अगस्त को सोनी कुमारी की हत्या कर दी गई थी. संबंधित मामले में सोनी कुमारी के मायके वालों ने सोनी की ससुराल के छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था.छह में से एक सोनी की सास सोनमंती देवी आरोपी थी.इसके ऊपर बहु को जहर पिलाने का आरोप था. इस पर पुलिस ने सोनमंती देवी को 13 अगस्त को पकड़ कर थाने ले आई थी. बीती 13 अगस्त से वह थाने में ही थी. आरोप है कि सोनमंती देवी को उसके परिवार वालों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा था.इस बीच 15 अगस्त को साढ़े तीन बजे सोनंमती देवी के परिजनों को भनक लगी की हाजत में ही सोनमंती ने दम तोड़ दिया है.महिला की मौत की सूचना पर नीमथू गांव के लोग भड़क गए. गांव के हर उम्र के लोग थाने पहुंच गए और थाने का घेराव कर गांव के लोग बवाल करने लगे.इधर सोनमंती देवी के पति का कहना है कि थाने के बड़ा बाबू ने जबरन हाथ पकड़ कर सादे कागज पर दस्तखत करा लिया है. वहीं उसकी बेटी का आरोप है कि पुलिस वालों ने उसकी मां को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई.इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करने की जरूरत है.एक घर के दो लोगों की मौत का मसला है.

"कानून द्वारा शासित एक सभ्य समाज में कस्टडी में मौत सबसे बुरे अपराधों में से एक है। जब एक पुलिसकर्मी किसी नागरिक को गिरफ्तार करता है, तब क्या उसके जीवन के मौलिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं? क्या नागरिक के जीवन के अधिकार को उसकी गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया जा सकता है? वास्तव में, इन सवालों का जवाब ठोस तरीके से "नहीं" होना चाहिए।"

-डीके बसु बनाम सुप्रीम कोर्ट ऑफ वेस्ट बंगाल AIR 1997 SC 610. धारा 176 (1) सीआरपीसी में कहा गया है कि एक मजिस्ट्रेट, जिसे अप्राकृतिक मौत के मामलों में पूछताछ करने का अधिकार है, वह पुलिस अधिकारी द्वारा की जा रही जांच के अलावा मौत के कारणों की जांच कर सकता है.यह एक सामान्य, सशक्तीकरण का प्रावधान है, जो मजिस्ट्रेट को इस प्रकार की जांच करने का विवेक देता है. एक अन्य तथ्य यह है कि ऐसी पूछताछ या जांच कार्यकारी मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है.वहीं 2005 के संशोधन के बाद डाली गई धारा 176 (5) में मजिस्ट्रेट को इस तरह की जांच का अध‌िकार देती है, व्यक्ति की मृत्यु के 24 घंटे के भीतर, शरीर को निकटतम सिविल सर्जन के पास जांच के लिए भेज दिया जाए. यदि ऐसा करना संभव नहीं है, तो लिखित रूप में कारण दर्ज किए जाने चाहिए.


आलोक कुमार


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