प्रभु यीशु को “होसान्ना” कहकर पुकारते हैं
रिपोर्टः आलोक कुमार
ईसा मसीह के जीवन की यह पावन गाथा मानव इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक है। उनके जन्म के पश्चात् मरियम और जोसेफ मिस्र से लौटकर नाजरेथ में बस गए। यही वह स्थान था जहाँ प्रभु यीशु ने अपना बचपन और युवावस्था (लगभग 12 से 30 वर्ष की आयु तक) व्यतीत की।इसके बाद 30 से 33 वर्ष की आयु के बीच उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में प्रेम, करुणा और क्षमा का अद्भुत संदेश दिया। लगभग दो हजार वर्ष पूर्व की यह ऐतिहासिक घटना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
जब हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर को नमन करते हैं, तो उनके पुत्र प्रभु यीशु को “होसान्ना” कहकर पुकारते हैं। यह पुकार मानव हृदय में आशा और उद्धार की आकांक्षा का प्रतीक है।
🌿 “होसान्ना” का जयघोष और ऐतिहासिक क्षण
पवित्र बाइबल के अनुसार, जब प्रभु यीशु येरुसलेम में प्रवेश कर रहे थे, तब लोग उनके आगे-पीछे चलते हुए पुकार रहे थे—
“दाऊद के पुत्र को होसन्ना! धन्य है वह जो प्रभु के नाम पर आता है।”
लोगों ने खजूर की डालियाँ लहराकर और अपने वस्त्र मार्ग में बिछाकर उनका स्वागत किया। यही घटना आज “पाम संडे” (खजूर रविवार) के रूप में मनाई जाती है।
यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर भी है—एक ऐसा समय जब हम अपने हृदय को प्रभु के लिए तैयार करते हैं।
🙏 पवित्र सप्ताह की शुरुआत
पाम संडे के साथ ही पवित्र सप्ताह की शुरुआत होती है, जो प्रभु यीशु के दुःखभोग, क्रूस पर बलिदान और पुनरुत्थान की ओर ले जाता है।
यह सप्ताह हमें सिखाता है—
त्याग
सेवा
प्रेम
बलिदान
प्रभु यीशु ने न केवल शारीरिक रोगों को चंगा किया, बल्कि आत्माओं को भी शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाया।
🕊️ पटना और आसपास में श्रद्धा का माहौल
पटना के कुर्जी पल्ली स्थित संत माइकल प्राइमरी स्कूल परिसर में इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए।
फादर जोशी मथियस ने खजूर की डालियों को आशीषित किया, वहीं फादर सेल्विन जेवियर और फादर लॉरेंस पास्काल भी उपस्थित रहे।
चुहड़ी पल्ली में माँ मरियम के ग्रोटो से शोभायात्रा निकाली गई। “होसान्ना” के गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मोतिहारी के संत फ्रांसिस असीसी चर्च में भी विशेष प्रार्थना सभा आयोजित हुई, जहाँ फादर ललित ने प्रेम, विनम्रता और सेवा का संदेश दिया।
डुमरांव में बिशप जेम्स शेखर के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने जुलूस निकालकर प्रभु को शांति के राजा के रूप में स्वीकार किया।
✨ संदेश: जीवन में उतारें प्रभु के आदर्श
अंततः, पाम संडे हमें यह सिखाता है कि प्रभु यीशु का स्वागत केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने जीवन में उनके आदर्शों को अपनाकर करना चाहिए।
👉 प्रेम
👉 दया
👉 क्षमा
👉 सेवा
जब हम सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं—
“हे पिता, हमारी प्रार्थना स्वीकार कर”
तब हमारा जीवन भी प्रभु की कृपा से आलोकित हो उठता है।




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