ईसा मसीह के जीवन की यह पावन गाथा
ईसा मसीह के जीवन की यह पावन गाथा
रिपोर्टः आलोक कुमार
मानव इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक है। ईसा मसीह के जन्म के पश्चात् उनके माता-पिता मरियम और जोसेफ मिस्र से लौटकर नाजरेथ में बस गए। यही वह स्थान था जहाँ प्रभु यीशु ने अपना बचपन और युवावस्था (लगभग 12 से 30 वर्ष की आयु तक) व्यतीत की। इसके बाद 30 से 33 वर्ष की आयु के बीच उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन, उपदेश और चमत्कारों के माध्यम से मानवता को प्रेम, करुणा और क्षमा का संदेश दिया।
यह दृश्य अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण था। लोगों ने खजूर की डालियाँ लहराकर और अपने वस्त्र मार्ग में बिछाकर उनका स्वागत किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में पाम संडे (खजूर रविवार) मनाया जाता है। यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है—एक ऐसा समय जब हम अपने हृदय रूपी घर को प्रभु के लिए तैयार करते हैं।
पटना के कुर्जी पल्ली स्थित संत माइकल प्राइमरी स्कूल परिसर में भी इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोग एकत्र हुए। यहाँ मुख्य अनुष्ठानकर्ता फादर जोशी मथियस ने खजूर की डालियों पर पवित्र जल का छिड़काव किया। उनके साथ फादर सेल्विन जेवियर और फादर लॉरेंस पास्काल भी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं को खजूर की डालियाँ वितरित की गईं, जिन्हें हाथों में लेकर सभी ने भक्ति-भाव से जुलूस निकाला और प्रेरितों की रानी ईश मंदिर में प्रवेश कर पवित्र मिस्सा में भाग लिया।
इसी प्रकार चुहड़ी पल्ली में माँ मरियम के ग्रोटो से खजूर रविवार की शोभायात्रा निकाली गई। पुरोहितों द्वारा खजूर की डालियों को आशीष देकर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। “होसन्ना” के गीतों के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात् गिरजाघर में फादर हरमन रफायल, फादर मनोज तिर्की और फादर अमित रोशन द्वारा मिस्सा बलिदान चढ़ाया गया।
अपने संदेश में फादर ललित ने कहा कि पाम संडे हमें विनम्रता, सेवा और प्रेम का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्ची महानता दूसरों की सेवा में निहित है। हमें अपने भीतर के अहंकार को त्यागकर भाईचारे, क्षमा और करुणा की भावना को अपनाना चाहिए, ताकि समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।



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