इस अवसर पर विकास आयुक्त, सहायक समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी राजगीर ,सहायक अभियंता पीएचडी ,पांडा समिति के सदस्यगण आदि उपस्थित थे ।
आलोक कुमार
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
इस अवसर पर विकास आयुक्त, सहायक समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी राजगीर ,सहायक अभियंता पीएचडी ,पांडा समिति के सदस्यगण आदि उपस्थित थे ।
आलोक कुमार
सांसद ने सामाजिक न्याय के पुरोधा के पर विस्तृत विचार को रखा. इस मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी के साथ अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधियों ने अपना विचार व्यक्त किया.इस अवसर पर लोककला संस्कृति पर आधारित बेहतरीन गीत संगीत एवं नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गई. विद्यालय में उपस्थित खचाखच भरे भीड़ ने बाल कलाकारों की गई प्रस्तुति पर तालियां बजाकर बच्चों का अपाजाही की.
इस अवसर पर डूमर के मुखिया मनीष कुमार ठाकुर, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील शर्मा, बीके प्रभा,वीके अमन, हरदेव मंडल यूथ पावर अध्यक्ष हरि प्रसाद मंडल आदि वार्ताओं ने उनके जीवन व व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला.
आलोक कुमार
पूर्णिया.पूर्णिया धर्मप्रांत के बिशप मिल गया है.अभी तक पूर्णिया धर्मप्रांत के प्रशासक पद पर फादर सहायराज कॉन्स्टेंटाइन कार्यरत थे.उनके पदस्थापन के 801 दिनों के बाद बिशप की घोषणा की गयी है.मगर उक्त प्रशासक को बिशप के पद पर पदोन्नत नहीं किया गया.इस बीच संत पिता फ्रांसिस ने पूर्णिया सामाजिक सेवा केंद्र के निदेशक फ्रांसिस तिकी को बिशप के रूप में नियुक्त किया है.इस तरह पटना महाधर्मप्रांत के सभी धर्मप्रांतों में बिशप बहाल हो गये हैं.
बता दें कि फादर फ्रांसिस तिर्की का जन्म 24 जुलाई 1961 को कोलोदिया में हुआ था.रांची के सेंट अल्बर्ट कॉलेज में दर्शनशास्त्र और मैंगलोर के सेंट जोसेफ इंटरडियोसेसन सेमिनरी में धर्मशास्त्र का अध्ययन करने के बाद, उन्होंने कनाडा के हैलिफैक्स में कोडी इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट से सामाजिक सेवाओं में डिप्लोमा प्राप्त किया. उन्हें 17 मई 1993 को दुमका के पुरोहित के लिए एक पुरोहित नियुक्त किया गया था, जो धर्मप्रांत के विभाजन के बाद पूर्णिया धर्मप्रांत में शामिल हो गए थे.उन्होंने तिनपहाड़ में सहायक पल्ली पुरोहित, दुमका धर्मप्रांत (1993-1994) दुमका के सामाजिक विकास केंद्र के प्रशासक (1994-1997),रांची में सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ सोशल सर्विस में अध्ययन (1998-1999) 1999 से, निदेशक 2004तक थे.पूर्णिया के समाज सेवा केंद्र,पूर्णिया के डायोसेसन प्रशासक (2004-2007), पूर्णिया के विकर जनरल (2007-2021), 2007 से, एसटी-एससी (अनुसूचित जनजाति-जाति) के लिए श्रम आयोग के प्रमुख और पूर्णिया धर्मप्रांत के जनसंपर्क अधिकारी के प्रमुख, 2013 2015 तक रहे.
आलोक कुमार
दस साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने अपनी गलत नीतियों से सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का काम किया
पटना। केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार किसानों को फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाएगी। इससे 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित होगी। न्याय के पथ पर यह कांग्रेस की पहली गारंटी है। डॉ. उदित राज (पूर्व सांसद), राष्ट्रीय चेयरमैन, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस द्वारा जारी वक्तव्य ।
हम शांतिपूर्वक दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए मोदी सरकार द्वारा रास्ते रोकने और बल प्रयोग की कड़ी भर्त्सना करते हैं। हमारा सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर किसानों से झूठ बोला एवं वादाखिलाफी की, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश से माफी माँगनी चाहिए।
मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया
दस साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का काम किया है। मोदी सरकार का पिछले दस साल का कार्यकाल देश पर अन्याय काल रहा। आज महंगाई आसमान छू रही है और बेरोजगारी चरम पर है। हर साल दो करोड़ नौकरियों के वादे के विपरीत केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की संख्या घटी है, करीब 30 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या यूपीए सरकार में 33 28,027 थी, जो आज मोदी सरकार में घटकर 31,67,143 रह गई है। कोरोना महामारी आने से पहले ही बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर दर्ज की गई थी। लोगों की आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिसका नतीजा है कि 2022-23 में घरेलू बचत को खर्च कर जीवनयापन कर रहे हैं और घरेलू बचत घटकर 50 साल के निचले स्तर पर आ गई। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपये का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए लगभग सात गुना बढ़ गया है। यूपीए सरकर में 2004-2014 के बीच यह आठ लाख करोड़ रूपये था, मोदी सरकार में 2014-2023 के बीच यह साढ़े पचपन लाख करोड़ रूपये हो गया है। यही हाल बट्टे खाते में डाले गए बैंक ऋणों का भी है। यूपीए सरकार में 2.2 लाख करोड़ रूपये के बैंक ऋण माफ किए गए थे, जो मोदी सरकार में 14.56 लाख करोड़ रूपये हो गए।
भाजपा द्वारा जीडीपी के आंकड़ों में फेरबदल के बावजूद यूपीए कार्यकाल में वृद्धि दर ज्यादा तेज थी। 2004-2014 के बीच औसत वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत थी, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह 2014-2024 के बीच 5.9 प्रतिशत थी। नोटबंदी और ख़राब जीएसटी कार्यान्वयन जैसी गलत आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप 2016 से जीडीपी वृद्धि में लगातार गिरावट आई और 2019 में कोरोना महामारी से पहले ही वृद्धि दर गिरकर 3.9 प्रतिशत पर आ गई। मध्यम वर्ग और गरीबों द्वारा किए जाने वाले उपभोग में कमी आई। कम खपत का सीधा मतलब आय का न बढ़ना है। निजी कॉर्पोरेट निवेश यूपीए के समय की तुलना में बहुत कम है। भारत की जीडीपी के प्रतिशत के रूप में सकल एफडीआई प्रवाह 2023-24 की पहली छमाही में घटकर केवल एक प्रतिशत रह गया, जबकि शुद्ध एफडीआई गिरकर 0.6 प्रतिशत हो गया। पिछले चार वर्षों के दौरान 33 हजार से अधिक एमएसएमई बंद हो गए हैं, छोटे और मध्यम उद्यमों का पंजीकरण तेजी से कम हुआ है। सार्वजनिक ऋण 2014 में 58.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023 में 173.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। यूपीए कार्यकाल के अंतिम वर्ष में शिक्षा बजट सकल घरेलू उत्पाद का 4.6 प्रतिशत था, जो अब घटकर जीडीपी का मात्र 2.9 प्रतिशत रह गया है। भूख और कुपोषण में वृद्धि बेहद चिंता का विषय है ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 125 देशों में से 111 वें स्थान पर आ गया है।
यूपीए सरकार में पेट्रोल की कीमत 71 रुपये प्रति लीटर थी, वहीं कच्चे तेल के सस्ते हो जाने के बावजूद मोदी सरकार में पेट्रोल की कीमत 96 रुपये प्रति लीटर के पार है। यूपीए सरकार में डीजल की कीमत 57 रुपये प्रति लीटर थी, वह आज 90 रुपये पर पहुंच गई है। यूपीए सरकार में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये थी आज सिलेंडर की कीमत एक हजार रुपये के पास है। आज किसान की औसत आय मात्र 27 रुपये प्रतिदिन है। किसान उर्वरक, कीटनाशक व कृषि उपकरण पर जीएसटी और महंगे डीजल का बोझ झेल रहे हैं।
तीन काले कानून वापस लेते समय मोदी सरकार ने किसानों से एमएसपी के लिए कानून बनाने का जो वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया। आज किसान अपने हकों के लिए आंदोलन करना चाह रहे हैं तो सरकार उन्हें दमनपूर्वक रोक रही है। भाजपा की केंद्र सरकार तथा हरियाणा-राजस्थान-उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली को इस प्रकार पुलिस छावनी में तब्दील कर रखा है, जैसे कि किसी दुश्मन ने दिल्ली की सत्ता पर हमला बोल दिया हो। मोदी सरकार का यह रवैया आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजी शासन द्वारा अपनाए जाने वाली दमनकारी नीतियों की याद दिला रहा है। हमारा सवाल है कि देश के अन्नदाता प्रधानमंत्री और देश की सरकार से न्याय न मांगे, तो कहां जाएं। जब किसान आंदोलन पूरी तरह शांतिप्रिय है तो फिर किसान की राह में कीलें और कंटीली तारें क्यों बिछाई गई हैं।
प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान, ब्रजेश पाण्डेय, राजेश राठौड़, ब्रजेश प्रसाद मुनन, आनंद माधव, प्रमोद कुमार सिंह उपस्थित थे।
आलोक कुमार
बेतिया. पश्चिम चंपारण जिले में श्रम संसाधन विभाग है. विभाग के जिला नियोजनालय, पश्चिम चंपारण, बेतिया के प्रांगण में 21.02.2024 को जॉब कैंप का आयोजन किया जाना है.इस दिन पूर्वाह्न 11.00 बजे से अपराह्न 04.00 बजे तक इच्छुक अभ्यर्थी जॉब कैंप में नियोजक से जॉब के विषय में जानकारी प्राप्त कर अपना आवेदन/बायोडाटा जमा कर सकते हैं. इच्छुक अभ्यर्थी का एनसीएस पोर्टल पर निबंधन कराना अनिवार्य है.
जिला नियोजन पदाधिकारी, श्री अंकित राज द्वारा बताया गया कि जिलाधिकारी, श्री दिनेश कुमार राय के दिशा-निर्देश के आलोक में लगातार जिले में जॉब कैंप, रोजगार-सह-मार्गदर्शन मेला का आयोजन कर बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार मुहैया कराने का कार्य किया जा रहा है. इसी कड़ी में पुनः 21 फरवरी 2024 को भी जिला नियोजनालय, बेतिया के प्रांगण में जॉब कैंप का आयोजन किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि डिसेट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा टेक्नीशियन के पद पर कार्य करने के लिए इच्छुक कुल-20 अभ्यर्थियों का चयन किया जायेगा. कंपनी द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को 15600-17000 रूपया प्रतिमाह मानदेय प्रदान की जायेगी. इस पद पर कार्य करने के लिए अभ्यर्थियों को इंटर/आईटीआई/डिप्लोमा पास होना जरूरी है.कार्यस्थल फरीदाबाद पलवल होगा.
उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए जिला नियोजनालय में दूरभाष संख्या-06254-295737 पर हेल्प सेंटर बनाया गया है. अभ्यर्थी विशेष जानकारी के लिए हेल्प सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं.
आलोक कुमार
उन्होंने कहा कि हम मिलकर एक निष्पक्ष समाज का निर्माण कर सकते हैं जहां हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान हो और दुनिया शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलती है.एकता परिषद के संस्थापक और शांतिवाहक कार्यकर्ता पी वी राजगोपाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विकास के नाम पर हम दुनिया भर में भूमि अधिकारों और भूमि संरक्षण, महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर नीति सुधार की वकालत कर रहे हैं जो भूमिहीन किसानों और आदिवासियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं.उन्होंने वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के कल्याण के लिए प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करने के लिए चिंता दिखाई.
विश्व शांति सभी देशों और लोगों के बीच और उनके भीतर स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श है. विश्व शांति पूरी पृथ्वी में अहिंसा स्थापित करने का एक विचार है, जिसके तहत देश या तो स्वेच्छा से या शासन की एक प्रणाली के जरिये इच्छा से सहयोग करते हैं, ताकि युद्ध को रोका जा सके. हालांकि कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग विश्व शांति के लिए सभी व्यक्तियों के बीच सभी तरह की दुश्मनी के खात्मे के सन्दर्भ में किया जाता है. संभावना जबकि विश्व शांति सैद्धांतिक रूप से संभव है, कुछ का मानना है कि मानव प्रकृति स्वाभाविक तौर पर इसे रोकती है. यह विश्वास इस विचार से उपजा है कि मनुष्य प्राकृतिक रूप से हिंसक है या कुछ परिस्थितियों में तर्कसंगत कारक हिंसक कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे. तथापि दूसरों का मानना है कि युद्ध मानव प्रकृति का एक सहज हिस्सा नहीं हैं और यह मिथक वास्तव में लोगों को विश्व शांति के लिए प्रेरित होने से रोकता है. विश्व शांति के सिद्धांत विश्व शांति कैसे प्राप्त की जा सकती है, इसके लिए कई सिद्धांतों का प्रस्ताव किया गया है. इनमें से कई नीचे सूचीबद्ध हैं. विश्व शांति हासिल की जा सकती है, जब संसाधनों को लेकर संघर्ष नहीं हो. उदाहरण के लिए, तेल एक ऐसा ही संसाधन है और तेल की आपूर्ति को लेकर संघर्ष जाना पहचाना है.इसलिए, पुनः प्रयोज्य ईंधन स्रोत का उपयोग करने वाली प्रौद्योगिकी विकसित करना विश्व शांति हासिल करने का एक तरीका हो सकता है.लोकतांत्रिक शांति सिद्धांत विवादास्पद डेमोक्रेटिक शांति सिद्धांत के समर्थकों का दावा है कि इस बात के मजबूत अनुभवजन्य साक्ष्य मौजूद हैं कि लोकतांत्रिक देश कभी नहीं या मुश्किल से ही एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध छेड़ते हैं.
आलोक कुमार
आलोक कुमार
“सराय में जगह नहीं थी…” से “कब्रिस्तान में जगह नहीं है…” तक — एक करुण सामाजिक यथार्थ ईसाई धर्मग्रंथों के अनुसार, येसु मसीह का जन्म बेथलहम मे...