गुरुवार, 31 जुलाई 2025

बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल

 "न्याय संकल्प शिविर" का भव्य आयोजन


पटना. बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस लीगल सेल द्वारा आज "न्याय संकल्प शिविर" का भव्य आयोजन पटना स्थित राजीव गांधी सभागार, सदाकत आश्रम में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.कार्यक्रम की अध्यक्षता लीगल सेल के प्रदेश अध्यक्ष श्री विकास कुमार झा ने की.मंच पर विशिष्ट उपस्थिति रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बिहार प्रभारी श्री कृष्णा अल्लावरू जी एवं भारतीय युवा कांग्रेस लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रूपेश सिंह भदौरिया जी की.

     कार्यक्रम का संचालन सह-अध्यक्ष अधिवक्ता नंद कुमार सागर ने किया जिन्होंने अधिवक्ताओं को चुनाव में आदर्श आचार संहिता, कागजी प्रक्रिया और उम्मीदवारों को विधिक सहायता देने के लिए प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.उन्होंने कहा कि यह अधिवक्ता अब केवल कानूनी मदद तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि चुनावी अनियमितताओं और प्रशासनिक हस्तक्षेप की निगरानी भी जिम्मेदारीपूर्वक करेंगे.

    श्री अंबुज दीक्षित (बिहार प्रभारी, IYC लीगल सेल) एवं चितवन गोदारा ने अधिवक्ताओं को चुनावी कानून, शिकायत निवारण प्रक्रिया और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग से संबंधित कानूनी उपायों पर गहन प्रशिक्षण दिया. कार्यक्रम में गया से अधिवक्ता सतींदर कुमार यादव अपने साथ कई अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष रूप से मंच पर उपस्थित रहे, उन्होंने गया जिले से युवा अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी का परिचय दिया.कार्यक्रम में सह-अध्यक्ष अधिवक्ता नदीम इमाम, गौहर इमाम, राजदेव यादव, सुरभि भारती, शिखा रॉय, तौक़ीर रज़ा, इब्रार आलम, कमलेश पासवान सहित बिहार के सैकड़ों युवा अधिवक्ताओं ने भाग लिया और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया.

     श्री कृष्णा अल्लावरू जी ने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एक सशक्त, प्रशिक्षित और संगठित वकीलों की टीम तैयार कर मैदान में उतरेगी और उन्हें पूर्ण समर्थन प्रदान किया जाएगा.श्री रूपेश सिंह भदौरिया जी ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे सत्ता दल द्वारा की जाने वाली हर प्रकार की चुनावी अनियमितताओं पर पैनी निगाह रखें  और संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा हेतु सजग रहें.


आलोक कुमार

बुधवार, 30 जुलाई 2025

पीयूसीएल प्रशासन से मांग करता है कि ननो को अविलम्ब रिहा करे एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें

 


दुर्ग . छतीसगढ़ में दुर्ग है.पिछले दिनों 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में यात्रा की तैयारी कर रहे 2 नन एवं उनके साथ के बालिग युवतियों को एवं स्टेशन छोड़ने आए एक व्यक्ति को कानून-पुलिसेत्तर (कानून व पुलिस से ऊपर सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य कर रहे संविधान विरोधी) तत्वों/गिरोह द्वारा जबरन हंगामा कर-धार्मिक अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरत-हिंसा फैलाने में माहिर संगठनों द्वारा प्रताड़ित कर झूठा आरोप गढ़ा गया और एफआईआर कर 2 ननों को जेल में डाल दिया गया. मानव तस्करी तब माना जाता है, जब किसी अपराधी गिरोह द्वारा किसी को शारीरिक शोषण (श्रम व अन्य प्रकार से ) खरीदी -बिक्री किया जाता है.

           लेकिन शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जाने वाले ईसाई संस्थाओं के नन द्वारा बालिग लड़कियों को ईसाई संस्थानिक जगह पर खाना बनाने के लिए उचित परिश्रमिक पर जा रहे थे.  इन लड़कियों को सही जगह ले जाने एवं स्टेशन छोड़ने आए व्यक्ति व नन पर जबरन मानव तस्करी का आरोप लगाना एवं धर्मांतरण का आरोप लगाना, इन गिरोहों का आम काम है. इससे ये राजनैतिक लाभ लेने ध्रुवीकरण करने का काम करने के लिए कुख्यात हैं.

                   बस-ट्रेन में रोजाना लाखों लोग अपनी स्वेच्छा से अपने काम- धाम के लिए विभिन्न जगहों पर आना- जाना करते हैं.इनमे से किसी धार्मिक अल्पसंख्यक को सूंघकर ये अपराधी तत्व अशांति फैलाने का काम करते हैं.यदि किसी को कहीं पर कोई कानूनन असंगत बात लगता है, तो वह अपनी शिकायत पुलिस- कानून को कर सकता है, लेकिन हल्ला- बवाल पैदाकर पुलिस को धौंस-धपट दिखाकर कोई भी कानून को प्रभावित नहीं कर सकता. लेकिन यह सब कुछ पुलिस न सिर्फ मूकदर्शक बनकर देखता है वरन सहजरूप से वह इन तत्वों को सक्रिय सहयोग देता है.

              पीयूसीएल की जानकारी में इस मामले में जो तथ्य सामने आया है वह यह है कि,सिस्टर प्रीती मेरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस 25/07/2025 सुबह आगरा से दुर्ग रेलवे स्टेशन इसलिए आएं ताकि वे तीन लड़िकियों को अपने कान्वेंट में खाना पकाने का काम के लिए ले जा सके.ये तीन आदिवासी लड़िकियां जिनका उम्र 19 वर्ष से अधिक था,  नारायणपुर और ओरछा आसपास के थे. उन्हें, उनके ही परिचित सुकमन मंडावी, पूर्व योजना अनुसार, उनके और उनके माता पिता के सहमति से बस द्वारा 25/07/2025 के सुबह करीब 8 बजे दुर्ग पहुंचाए ताकि वे सिस्टरगण के साथ आगरा जा सके.आगरा जाने, सुकमन को छोड़, सभी के लिए सिस्टरगण द्वारा टिकट बुक हो चुका था जो सिस्टरगण के पास था. सुकमन को दुर्ग से वापस अपना घर जाना था. जब सुकमन और ये तीनों लड़कियां प्लेटफार्म में प्रवेश किये तो टीटीई ने उनसे प्लेटफार्म टिकट के लिए पूछताछ किये.जिसपर उन्होंने बताया की टिकट सिस्टर लोगों के पास हैं और वे उनके साथ आगरा जा रहें हैं.

     पूछताछ के दौरान एक बजरंगदली भी था जिसने तुरंत अपने साथियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन में बुलाया और सभी को रेलवे पुलिस थाने में सुबह करीब 8.30 - 9.00 बजे ले गये.

रेलवे पुलिस थाने में बजरंगदली सिस्टरगण एवं सुकमन पर तरह-तरह के आरोप, धर्म परिवर्तन और मानव तस्करी का आरोप लगाते, नारें बाजी करतें हुए पुलिस पर मानव तस्करी और धर्मपरिवर्तन के आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के लिए दबाव बनाते रहें. इसमें ज्योति शर्मा और रवि निगम प्रमुख भूमिका निभाए.ज्योति शर्मा एवं उनके साथी-बजरंगी,  तीनों आदिवासी लड़कियों और सुकमन के फोन एवं उनका झोला का जबरदस्ती पूर्वक परिक्षण करतें हुए तरह तरह के आरोप और धमकी के साथ-साथ मारपीट भी किये. वे लोग सिस्टरगनो को भी गाली एवं मारने की धमकी दिए.सुकमन, जो उन तीनों लड़िकियों की मदद करने आया था, उस पर दलाल होने का आरोप भी लगाया गया. इस दौरान एक लड़की  इतना परेशान हो गयी की वह वापस जाने की बात कहने लगी.ये सिलसिला शाम 5 बजे तक चलता रहा.बजरंगियों के अलावा और किसी को भी सिस्टरगण, सुकमन और लड़िकियों से मिलने या बात करने नहीं दिया गया. रेलवे पुलिस बस मूक दर्शक बने रहें मानो थाना में अब बजरंगियों का कब्जा हो गया हो. रेलवे पुलिस सिस्टरगण के पक्ष में आएं लोगोँ से कहतें रहें की बजरंगियों के चले जाने पर वे इन सबको छोड़ देंगे और आगरा जाने की टिकट भी कर देंगे. 

     मगर बजरंगियों के दबाव के चलते वे 5.30 बजे शाम को दो सिस्टर और सुकमन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दिया गया . रेलवे थाना से उन्हें मोहन नगर पुलिस थाना ले जाया गया और वहां से शाम 6 बजे के बाद मजिस्ट्रेट के पास ले गए जो उन्हें रिमांड में दुर्ग जेल भेज दिए. उन लड़कियों को शेल्टर होम भेज दिया गया.

पीयूसीएल प्रशासन से मांग करता है कि, ननो को अविलम्ब रिहा करे एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें.


मंगलवार, 29 जुलाई 2025

एक बार फिर दक्षिणपंथियों के निशाने पर ईसाई समुदाय के नन

 


दुर्ग.एक बार फिर दक्षिणपंथियों के निशाने पर ईसाई समुदाय के नन और लोग आ गए हैं. बता दें कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों द्वारा ईसाई समुदाय, विशेष रूप से नन और अन्य सदस्यों को निशाना बनाते  हैं. इस बार दुर्ग में कथित अंजाम देने में सफल हो गए.ये घटनाएं धार्मिक और राजनीतिक तनावों को दर्शाती हैं, जहां दक्षिणपंथी विचारधाराएं अक्सर ईसाई धर्म के साथ जुड़ जाती हैं और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देती हैं.

 दुर्ग रेलवे स्टेशन से आगरा जाने की तैयारी में दो नन सहित एक युवक को बजरंग दल के लोगों ने शुक्रवार की सुबह घेर लिया. दोनों नन के साथ तीन लड़कियां भी थीं, जो नारायणपुर एवं ओरछा क्षेत्र की है.बजरंग दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि तीनों लड़कियों का मानव तस्करी कर मतांतरण के लिए ले जाने की तैयारी थी.दुर्ग रेलवे स्टेशन पर घंटों गहमागहमी के बाद जीआरपी ने दोनों नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस एवं युवक सुकमन मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.लड़कियों को फिलहाल सखी सेंटर ले जाया जा रहा है.

       इस संदर्भ में  भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है.सीबीसीआई ने ननों के उत्पीड़न की निंदा की, सरकार से तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है.

 विस्तार से भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) के प्रवक्ता ने बताया कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में दो कैथोलिक धार्मिक महिलाओं की गिरफ्तारी और कथित शारीरिक हमले की कड़ी निंदा की है और इसे देश भर में ननों को निशाना बनाकर उत्पीड़न, झूठे आरोपों और मनगढ़ंत मामलों की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति का हिस्सा बताया है.

सीबीसीआई के अनुसार, ननों के साथ आई लड़कियों के माता-पिता के लिखित सहमति पत्र मौजूद होने के बावजूद यह घटना घटी.सभी लड़कियाँ कानूनी रूप से वयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है.सम्मेलन ने उन रिपोर्टों पर विशेष रूप से चिंता व्यक्त की जिनमें कहा गया था कि घटना के दौरान ननों के साथ शारीरिक हमला किया गया था.

सीबीसीआई ने चिंता जताई है कि ईसाई धार्मिक महिलाओं पर असामाजिक तत्वों द्वारा नज़र रखी जा रही है, जो उन्हें रेलवे स्टेशनों पर घेर लेते हैं, भीड़ को उकसाते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं.सम्मेलन ने कहा कि ये कार्रवाइयाँ न केवल इन महिलाओं की गरिमा और शील के लिए, बल्कि उनके जीवन के लिए भी गंभीर खतरा हैं.

उत्पीड़न की इन लगातार घटनाओं को "संविधान का गंभीर उल्लंघन" बताते हुए, सीबीसीआई ने राज्य सरकारों से सभी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है.इसके अतिरिक्त, सम्मेलन ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है.

कैथोलिक चर्च ने इस मुद्दे को सभी उपयुक्त मंचों पर उठाने और धार्मिक ननों और पादरियों की गरिमा का हनन करने, धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने या अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध शत्रुता फैलाने के किसी भी प्रयास के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने का संकल्प लिया है.

न्याय और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, सीबीसीआई ने अधिकारियों से धार्मिक महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को बनाए रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया.संगठन ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने और भारत में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है.


सोमवार, 28 जुलाई 2025

14वीं पुण्यतिथि पर विशेष:

 14वीं पुण्यतिथि पर विशेष:

कुष्ठ रोगियों के मसीहा ‘बाबा’ ब्रदर क्रिस्टुदास को श्रद्धांजलि

बाबा क्रिस्टुदास की विरासत आज भी जीवित है

रक्सौल.सुंदरपुर, बिहार. कुष्ठ रोगियों के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देने वाले समाजसेवी और "कुष्ठ रोगियों के मसीहा" के रूप में विख्यात ब्रदर क्रिस्टुदास की 14वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. 27 जुलाई 2011 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था.

केरल के कोट्टायम जिले के एडमावुकु गांव में 1937 में जन्मे ब्रदर क्रिस्टुदास ने जीवन के शुरुआती दिनों में ही मानव सेवा का मार्ग चुना.1970 के दशक में वे कोलकाता के पास टीटागढ़ स्थित सेंट मदर टेरेसा के कुष्ठ रोग केंद्र में निदेशक रहे. वहीं से प्रेरित होकर वे बिहार आए, जो उस समय कुष्ठ रोग से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में था.

लिटिल फ्लावर अस्पताल की स्थापना

1982 में ब्रदर क्रिस्टुदास ने पूर्वी चंपारण के रक्सौल प्रखंड के सुंदरपुर गांव में लिटिल फ्लावर लेप्रोसी वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना की. इस संस्था के तहत 200 बेड वाले लिटिल फ्लावर लेप्रोसी हॉस्पिटल ने हजारों कुष्ठ रोगियों को मुफ्त इलाज और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की. उनकी करुणा और समर्पण के कारण मरीज उन्हें प्यार से ‘बाबा’ कहकर पुकारते थे.

नेपाल और यूपी तक फैली सेवा की पहुंच

उनकी सेवाओं की चर्चा बिहार तक सीमित नहीं रही।.नेपाल और उत्तर प्रदेश से भी कुष्ठ रोगी सुंदरपुर पहुंचने लगे। समाजसेविका कविता भट्टराई 'माताजी', जिन्हें क्रिस्टुदास ने अपने निधन से पहले संस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी, आज भी उसी सेवा भाव से अस्पताल का संचालन कर रही हैं.

कुष्ठ रोग नियंत्रण की दिशा में योगदान

डॉ. गिरीश चंद्र के अनुसार, "आज 10 हजार की आबादी में मुश्किल से एक-दो मरीज ही मिलते हैं.यह बाबा क्रिस्टुदास जैसे लोगों की अथक मेहनत का परिणाम है कि कुष्ठ रोग अब नियंत्रित श्रेणी में आ चुका है." ब्रदर क्रिस्टुदास की पुण्यतिथि पर सुंदरपुर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई और उनके मानव सेवा कार्यों को याद किया गया। स्थानीय लोगों ने कहा, "बाबा का सपना था कि समाज कुष्ठ रोग से मुक्त हो और मरीज सम्मानजनक जीवन जी सकें."बाबा क्रिस्टुदास की विरासत आज भी जीवित है.

आलोक कुमार

Publisher ID: pub-4394035046473735



शनिवार, 26 जुलाई 2025

फादर जेरोम डिसूजा का निधन

कैपुचिन फादर जेरोम डिसूजा का अंतिम संस्कार संपन्न

फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था 

लखनऊ. फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था.आज 25 जुलाई को लखनऊ में फादर जेरोम डिसूजा, कैपुचिन का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ.जिसका संचालन बरेली, उत्तर प्रदेश, भारत के बिशप इग्नाटियस डिसूजा और कई कैपुचिन, डायोकेसन पुरोहित और कई शिक्षकों और विश्वासियों द्वारा किया गया था.

दुःखद निधन

फादर जेरोम डिसूजा कैपुचिन (87) का  23 जुलाई को बरेली में निधन हो गया.वे एक संत पुरोहित थे और उन्होंने कैपुचिन संप्रदाय, चर्च और समाज की अनेक पदों पर सेवा की. वे गोवा के मोंटे दे गिरिम में एक कुशल शिक्षक, आगरा के सेंट पीटर्स कॉलेज में प्रधानाचार्य और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित हार्टमैन कॉलेज में भी प्रधानाचार्य थे; वे न्यूज़ीलैंड में एक मिशनरी और बांग्लादेश के मैमनसिंह में क्लोइस्टर्ड सिस्टर्स के पादरी थे, और बरेली, उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त हुए.

   

 Publisher ID: pub-4394035046473735

शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन

 

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन कर दिया जाता है. मिशनरी प्रबंधन की सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति उजागर,दर्जनों कर्मचारियों को इस रणनीति के तहत नौकरी से बाहर कर देने की खबर......

पटना.राजधानी पटना में है मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा संचालित कुर्जी होली फैमिली अस्पताल.यहां कार्यरत कर्मी हलकान और परेशान हैं.यहां के कर्मी जानते हैं कि कभी भी यहां की प्रबंधन की मनमर्जी के शिकार होकर स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन नौकरी से निष्कासन कर दिया जाएगा.यहां के अगस्टीन,वर्गीस,अशोक,सत्यनारायण आदि कर्मियों पर निष्कासन की कैची चल गई है.ये सबके सब ईसाई मिशनरी संस्था की प्रबंधक की ‘सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति‘ के शिकार हो चुके हैं.

        जानकार लोगों का कहना है कि कुर्जी होली फैमिली अस्पताल की प्रबंधक ने तारा टोप्पों को जबरन नौकरी से निकालने के बाद काफी बवाल हुआ था,तब से कर्मचारियों को  प्रत्यक्ष रूप से नहीं निकाला जाता हैं.उनको मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उनसे इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया जाता है.यहां तक घरेलू जांच कमिटी गठित कर जबरन मानसिक प्रताड़ना देना शुरू कर दिया जाता है.उनसे कहा जाता है कि अगर इस्तीफा नहीं देते हैं तो आपको वेतन व अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा. इस्तीफा देने से इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है. उनके लिए विदाई सम्मान या फेयरवेल कार्यक्रम नहीं होता है, भले ही उनकी सेवा अवधि लंबी क्यों न हो.


1. मलहम लगाना -शुरुआत में कर्मचारी को समझाया जाता है कि “आपके लिए यह बेहतर होगा”

2. दबाव में कहा जाता है – “इस्तीफा नहीं देंगे तो कानूनी कार्रवाई होगी”

3.धमकी - "3 माह का वेतन और अन्य लाभ नहीं मिलेंगे”

4. मजबूरी में इस्तीफा- "कर्मचारी को दिखाया जाता है कि बाहर का रास्ता ही विकल्प है"

5. कोई फेयरवेल नहीं -"वर्षों की सेवा के बावजूद कोई सार्वजनिक विदाई नहीं होती"

यह प्रबंधन की चालाकी है. स्वेच्छा से इस्तीफा दिया.यह दिखाने से संस्था कानूनी झंझट से बचती है.कर्मचारी न्याय की लड़ाई नहीं लड़ पाते क्योंकि दस्तावेजों में ‘इस्तीफा’ होता है यह नैतिक सवाल है कि क्या यह स्वैच्छिक इस्तीफा है या ढका-छिपा निष्कासन?सेवा करने वाले कर्मचारियों को इस तरह बाहर करना क्या क्रूरता नहीं? प्रासंगिक उदाहरण है कि यही नीति उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ हाल में उपयोग में लाई गई..जैसे दूध में गिरी मक्खी को निकाल फेंकना..यह नीति केवल अस्पताल या मिशनरी संस्था नहीं, कई अन्य एनजीओ और संस्थानों में भी प्रचलित है.

मांगें

1. ऐसे संस्थानों में लेबर लॉ और मानवाधिकार आयोग की जांच हो

2. निकाले गए कर्मचारियों को न्याय व हर्जाना मिले

3. पारदर्शी टर्मिनेशन पॉलिसी अनिवार्य हो

4. धर्म आधारित संस्थाओं की जवाबदेही तय हो


आलोक कुमार


Publisher ID: pub-4394035046473735

गुरुवार, 24 जुलाई 2025

उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर

 

बिहार में फिर गूंजा भूमि अधिकार का सवाल: तीन डिसमिल को लेकर जन सुराज का प्रदर्शन तेज

17 साल बाद भी लागू नहीं हुई बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें, चुनावी मौसम में गरमाया मुद्दा

पटना. बिहार में आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने का वादा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि सुधार के लिए डी. बंदोपाध्याय आयोग का गठन किया था, जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी. रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन दी जानी चाहिए.

प्रारंभ में सरकार ने दस डिसमिल जमीन देने की बात कही, जिसे बाद में पांच डिसमिल और अंततः तीन डिसमिल तक सीमित कर दिया गया.मगर 17 साल बाद भी इन सिफारिशों को जमीन पर उतारने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

अब ‘जन सुराज’ ने उठाया मोर्चा

राज्य में चुनावी माहौल के बीच ‘जन सुराज’ संगठन ने इस मुद्दे को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है.संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन डिसमिल भूमि आवंटन को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.

जन सुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतुनी ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा है, “हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक बिहार के हर भूमिहीन परिवार को तीन डिसमिल जमीन नहीं दिलवा देते.”

राजनीतिक खामोशी पर सवाल

विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार ने भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. यह रिपोर्ट राज्य के भूमिहीन, दलित, वंचित और आदिवासी समुदायों के लिए एक उम्मीद की किरण मानी जा रही थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह निष्क्रिय पड़ी है.

भूमिहीनों की दशा जस की तस

बिहार में लाखों परिवार आज भी बिना वैध आवासीय भूमि के झुग्गियों, सरकारी जमीनों या जल-जंगल की जमीन पर रह रहे हैं. न बिजली, न पानी, न स्थायी अधिकार—उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर है.


भूमि अधिकार फिर बना चुनावी मुद्दा

चुनाव नजदीक आते देख तीन डिसमिल जमीन का सवाल फिर गूंज रहा है.जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक गरीबों को जीने लायक जमीन नहीं दी जाएगी, तब तक विकास की बात अधूरी रहेगी.

आलोक कुमार 

Publisher ID: pub-4394035046473735

The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

चिंगारी प्राइम न्यूज़

 About Us | चिंगारी प्राइम न्यूज़ Chingari Prime News एक स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ और विचार मंच है, जिसका उद्देश्य सच्ची, तथ्यपरक और ज़मी...

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post