बुधवार, 6 अप्रैल 2022

गेंद जनता के पाले में

 पटना. पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल में  वार्ड नम्बर- 22 ए के वार्ड पार्षद हैं दिनेश कुमार.इस वार्ड पार्षद के पार्षद प्रतिनिधि हैं नीरज कुमार. वार्ड 22 ए में गंगा विहार कॉलोनी है.यहां पर पांच सौ मकान है.इस गंगा विहार के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.

कॉलोनी के मो.आरिफ ने समस्याओं का जिक्र करने के दरम्यान कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गरीबों की प्यास बुझाने के लिए 2015 में जब महागठबंधन के साथ सरकार बनाई थी, उस समय उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मिल सके इसकी शुरुआत की थी. इस योजना को शुरू हुए 7 साल से अधिक हो गए, लेकिन अभी भी यह योजना पूरी तरह से धरातल पर नहीं दिख नहीं रही है. राजधानी पटना में ही यह योजना दम तोड़ रही है.

उन्होंने कहा कि इस बहुआंकाक्षी सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने का प्रयास 2016 में गंगा विहार कॉलोनी में भी किया गया.आईटीआई छात्रावास के बगल में जलापूर्ति केंद्र सह जलमिनार से पाइप का संयोजन किया गया.पॉश एरिया फेयरफील्ड कॉलोनी में पाइप बिछाकर गंगा विहार कॉलोनी में अंत किया गया.

उन्होंने कहा कि जलापूर्ति चालू होने के बाद हर घर नल का जल पहुंचने से लोग खुश थे.यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2017 तक चला.इसके बाद प्रोजेक्ट का पानी आना बंद हो गया .इससे लोग नाखुश हो गये.साल में एक बार मटरगश्ती करने वाले वार्ड पार्षद दिनेश कुमार से शिकायत की गयी.तब उन्होंने फेयरफील्ड कॉलोनी शुरू और गंगा विहार कॉलोनी अंत पाइप खोलकर जांच कराएं. जांचोपरांत पता चला कि पाइप में पानी बहाव हो रहा है,परंतु घरों तक नहीं पहुंच रहा है.पांच साल से परेशान हैं.

रोज़ा तोड़वाने के समय के पूर्व मो.नौशाद ने कहा कि शुद्ध पेयजल के साथ जल निकासी की भी समस्या है.बरसात
के दिनों में दु:ख बढ़ जाता है.ठेंहुना भर पानी का भराव हो जाता है.इसी में महिला,पुरूष,बच्चों के साथ पालतू जानवरों को भी आवाजाही करने को बाध्य होते हैं.

वहीं लोग कहते हैं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के द्वारा तीन  खंभा गाढ़कर कर्तव्य पूरा कर लिया है. दो साल के बाद भी तार तानकर उर्जा घरों तक पहुंचाने का कार्य नहीं किया जा रहा है.बांस के सहारे तार लाया गया है.

जानकार लोगों का कहना है कि पटना नगर निगम के वार्ड पार्षदों को एक करोड़ विकास कार्य करने को मिला है.पर वार्ड पार्षद दिनेश कुमार गंगा विहार कॉलोनी में विकास कार्य करना ही नहीं चाहते हैं.इससे लोग आक्रोशित हैं.

बिहार में सीएम नीतीश (CM Nitish) का ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना (Saat Nischay Yojana) के तहत 'हर घर नल का घर योजना ' के क्रियान्वयन में लेट लतीफी के कारण अभी तक कई वार्डों में पाइप भी नहीं बिछाए गए हैं. कई वार्डों में पाइप बिछाए गए तो उसमें से पानी ही गायब है. ऐसे में पानी के लिए लोग तरस रहे हैं.

इस संदर्भ में 22 ए के भावी प्रत्याशी उमेश कुमार कहते हैं कि वर्त्तमान वार्ड पार्षद दिनेश कुमार जन उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतर रहे हैं. उनका कहना है कि अब गंगा विहार कॉलोनी के लोगों को सोचना होगा. उनका विकास कौन करेगा ? कौन पटना नगर निगम के द्वारा प्रदत राशि का उपयोग जन विकास कार्य में लगा सकता है .गेंद जनता के पाले में है . कुछ दिनों के बाद ही चुनाव होने वाला है .

आलोक कुमार

सोमवार, 4 अप्रैल 2022

क्रिस्म मास में पुरोहित लेते है वादा साथ-साथ रहने का

 


पटना.प्रभु येसु ख्रीस्त ने अंतिम ब्यालू के समय बलिदान चढ़ाने की शक्ति दी, जब उसने रोटी और दाखरस को स्वयं के शरीर और रक्त में परिवर्तित करते हुए कहा, 'यह मेरी स्मृति में किया करो.' इन शब्दों के द्वारा उसने उन्हें खीस्तयाग अर्पित करने को कहा. बारह प्रेरित प्रथम धर्माध्यक्ष और पुरोहित थे.वे स्वयं महापुरोहित येसु ख्रीस्त द्वारा अभिषिक्त किए गए थे.प्रेरितों के कार्यकलाप और धर्मग्रंथ के दूसरे भागों में हम पाते हैं कि पुरोहिताई के पवित्र संस्कार द्वारा उन्होंने दूसरे व्यक्तियों को धर्माध्यक्ष और पुरोहितों की शक्ति प्रदान की.केवल धर्माध्यक्षों और पुरोहितों के पास ही वह शक्ति है, जो ख्रीस्त ने बारह प्रेरितों को प्रदान की थी.

पुण्य बृहस्पतिवार 14 अप्रैल को

हर साल आर्चबिशप अथवा स्थानीय बिशप क्रिस्म मास का आयोजन करते है.यह आयोजन पवित्र सप्ताह के दौरान अंतिम व्यालू के दिन पवित्र बृहस्पतिवार के दिन होता है.इस साल रोम में 14 अप्रैल पुण्य बृहस्पतिवार को प्रातः 9.30 बजे से संत पेत्रुस महागिरजाघर में किस्म मास होगा, जिसमें संत पापा फ्रांसिस, कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षो और पुरोहितों (रोम के धर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल,कुर्जी में
बता दें कि किस्म मास करने में सहुलियते दी गयी है.आप ईस्टर पर्व के पूर्व आयोजित कर सकते हैं. इसके कारण राजधानी पटना के कुर्जी में स्थित पटना महाधर्मप्रांत का प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में क्रिस्म मास 07 अप्रैल को शाम 05 बजे से होगा.महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबस्टियन कल्लूपुरा,  विकर जनरल,पल्ली पुरोहितों (पटना के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ खीस्तयाग अर्पित करेंगे.

किस्म मास में भाग लेने हैं सुदूर ग्रामीण चर्च के पुरोहित
सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी पुरोहित किस्म मास में भाग लेने हैं.इन लोगों का जमावड़ा प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में होगा.महाधर्माध्यक्ष सेवस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में किस्म मास होगा.किस्म मास में तीन तरह के पवित्र तेल पर आशीष दी जाती है. एक बीमारों के तेल ,द्वितीय केटक्यूमेन तेल और तीसरा क्रिस्म तेल है.इसमें गुल मेहँदी Balsam डाला जाता है. बिशप स्वामी के द्वारा आशीष दी जाती है.अगर यहीं विशेष कार्यक्रम पुण्य बृहस्पतिवार को क्रिस्म मास होगा,तो सुदूर ग्रामीण और शहरी चर्च के पुरोहितों को वापस जाकर अपने पल्ली में   धार्मिक कार्यक्रम करने में दिक्कत होगी. सुबह हो या शाम पुरोहित परेशान ही परेशान हो जाते .इसके चलते पवित्र बृहस्पतिवार को विशेष समारोह नहीं रखा जाता है.

किस्म मास के दौरान सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं
मुख्य याजक बिशप स्वामी के सामने महाधर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी सभी पुरोहित अपनी मन्नतों को दोहराते हैं और बिशप के प्रति अपनी आज्ञाकारिता का वादा करते हैं.यह सभी पुरोहितों का एक महापर्व है.इस दिन येसु ख्रीस्त पुरोहिताई संस्कार को ठहराया था.इसलिए इसे एक बड़े समारोह के रूप में मनाते हैं .

क्रिस्म मास के दौरान आशीर्वाद वाले नये तेल पल्ली ले जाते
बता दें कि क्रिस्म मास के दौरान हर पल्ली पुरोहितों को देने के लिए पर्याप्त नए तेल का आशीर्वाद दिया जाता है. पुरोहित पवित्र तेलों को अलग-अलग पैरिशों में ले जाते है, जहाँ वे उस वर्ष के दौरान उपयोग के लिए व्यवहार में लाया जाता है.यद्यपि बिशप प्रत्येक बपतिस्मा या अपने धर्मप्रांत में पुष्टिकरण पर शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते है, वह अपने द्वारा आशीर्वादित पवित्र तेलों के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से उपस्थित हो जाते हैं.बीमार व्यक्तियों के चंगाई के तेल, नए दीक्षार्थियों और बपतिस्मा के लिए तेल और तीसरा पवित्र विलेपन का या पवित्र अभिषेक के लिए तेल की बिशप और अन्य पुरोहितों द्वारा आशीष किया गया.

जैतून का तेल विशेष पात्र में रखा जाता है
वचन की आराधना के बाद, तेलों का आशीर्वाद होता है. एक औपचारिक जुलूस में, जैतून का तेल विशेष कलशों में आगे लाया जाता है.बीमारों का तेल पहले पेश किया जाता है, फिर कैटेचुमेन्स का तेल, और अंत में पवित्र क्रिस्म के लिए तेल. बिशप व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक तेल पर प्रार्थना करता है और आशीर्वाद देता बिशप जैतून के तेल के साथ बालसम के पौधे से तेल मिलाता है, पवित्र आत्मा की उपस्थिति को दर्शाने के लिए मिश्रित तेल पर सांस लेता है, और फिर इसे पवित्र करने के लिए प्रार्थना करता है.एक बार इस तरह से आशीर्वाद देने के बाद, क्रिस्म और अन्य तेल अब साधारण मलहम नहीं रह गए हैं.इसके बजाय, वे चर्च के लिए भगवान से एक पवित्र, कीमती उपहार हैं, जो शुद्धिकरण और मजबूती, उपचार और आराम, और पवित्र आत्मा की जीवन देने वाली कृपा को दर्शाता है.    
                  
आलोक कुमार

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया

पटना.इस साल 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे है.इन दिनों ईसाई समाज 40 दिनों का उपवास रखते हैं.ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों के लिए भी गुड फ्राइडे का दिन बहुत अहम है.बाइबल के अनुसार, इसी दिन ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया था. इस वर्ष गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.दरअसल, गुड फ्राइडे के साथ ईसाई धर्म के लोगों के लिए पाम संडे और ईस्टर डे भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस साल पाम संडे 10 अप्रैल को है.वहीं गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है और ईस्टर संडे 17 अप्रैल को है.बाइबल, यूहन्ना 18 और 19 में इन तीन दिनों में जो घटना घटी थी उसका उल्लेख किया गया है. बाइबल के अनुसार, पाम संडे पर ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह यरूशलेम पहुंचे थे जहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर की डालियों को बिछाकर किया था, इस घटना के वजह से इस दिन को पाम संडे का नाम दिया गया है. जब वह  यरूशलेम यानी इजरायल की राजधानी  यरूशलेम  पहुंचे थे तब उन्हें सूली पर लटकाया गया था. जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी उस दिन को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे की, ठीक 3 दिन बाद यानी रविवार के दिन मेरी मेग्दलीन नाम की एक महिला ने ईसा मसीह को उनके कब्र के पास देखा था. यह चमत्कारी घटना जिस दिन हुई थी उसे ईस्टर संडे कहा गया.

आज भी इजराइल की राजधानी जेरूसलम में वह जगह मौजूद है जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यह जगह गोलगोथा के नाम से पूरे विश्व में मशहूर है. जिस जगह गोलगोथा मौजूद है वह हिल ऑफ द केलवेरी के नाम से जाना जाता है. इसी जगह पर चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन स्थित है जहां सार्वजनिक रूप से ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह की निंदा की गई थी. मान्यताओं के अनुसार, चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन के मार्ग को दर्द या पीड़ा का मार्ग कहा जाता है. इस स्थान पर नौ और ऐतिहासिक स्थल स्थित है.

पटना महाधर्मप्रांत के प्रेरितों की रानी कैथेडल में मिस्सा पूजा में शामिल होने वाले भक्तगण प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखभरी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाकर प्रार्थना करते हैं.हरेक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी गुड फ्राइडे को प्रभु येसु ख्रीस्त की दुःखमयी घटना को एक झांकी के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया था.दिनांक 15 अप्रैल ( गुड़ फ्राइडे) के पुण्य बेला में सुबह सात बजे से लोयला हाई स्कूल, कुर्जी से प्रारम्भ होकर कुर्जी के मुख्य सड़क से होते हुए प्रभु ईसा की दुःखमयी यात्रा को एक झांकी के रूप में दर्शाते हुए, प्रार्थना और भक्ति गीतों के साथ कुर्जी चर्च में जाकर एक विशेष प्रार्थना के साथ संपन्न होगी.

यह बताया गया कि यह कलीसिया का काम है जो लोकधर्मियो द्वारा आयोजित किया जा रहा है. निवेदक विक्टर फ्रांसिस का नम्र निवेदन है कि इस धार्मिक कार्य में आप अपने स्तर से सहयोग करें ताकि इसे हम एक साथ मिलकर और भी भक्तिमय और दूसरों के लिए प्रेरणादायक बना सकें.आज दिनांक 2 अप्रैल को और कल दिनांक 3 अप्रैल को संध्या 4 बजे से इसके रिहर्सल में उपस्थित होकर अपना योगदान देने की कृपा करें.आशा करता हूं कि आप अपनी भागदौड़ की जिंदगी में से कुछ समय इस पुण्य कार्य के लिए अवश्य निकलने की कोशिश करेंगे.

आलोक कुमार

बक्सर धर्मप्रांत में 29 जून 2018 से बिशप नहीं

पटना.कैथोलिक धर्मप्रांत में इलाहाबाद धर्मप्रांत विश्व का सबसे बड़ा धर्मप्रांत था.इसमें कोलकाता, पटना, जबलपुर, इंदौर, लखनऊ, झांसी और गोरखपुर आते थे. 1887 में कोलकाता धर्मप्रांत, पटना धर्मप्रांत 1919 में, 1932 में जबलपुर धर्मप्रांत, 1935 में इंदौर धर्मप्रांत, 1940 में लखनऊ धर्मप्रांत व 1946 में गोरखपुर इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग हुए.

1845 मे हुगली दो विकारिएट में विभाजित हुआ. एक भाग चटगांव विकारिएट और दूसरा कोलकाता विकारिएट जो पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल के नाम से जाने जाते थे. पश्चिम बंगाल को 1864 में बेल्जियम जेसुइट पुरोहितों के हाथों सौंपा गया.वह महाधर्मप्रांत के अस्तित्व में आया. मिशनरियों ने 1865 में मिदनापुर, बालासेार, 1868 में 24 परगना, 1869 में चाईबासा और 1870 में छोटानागपुर क्षेत्र में विकास का काम किया.

रोम 1812 में एक विकारिएट में तिब्बत-हिंदुस्तान के प्रान्त बनवाया. 1827 एक स्वतंत्र पटना विकारिएट बनाया गया था.जिसमें बेतिया , चुहड़ी , पटना सिटी , दानापुर , भागलपुर , दार्जिलिंग , सिक्किम , नेपाल तथा निकटवर्ती प्रदेशों. संत अनास्तासियस हार्टमैन को इसका पहला विकार अपोस्टोलिक नियुक्त किया गया था. पोप लियो एक्सटीटीआई के एक डिक्री के साथ पटना विकारिएट 1886 में इलाहाबाद धर्मप्रांत का हिस्सा बन गया.बेतिया, चुहड़ी , चखनी और लातौना के अपने चार स्टेशनों के साथ उत्तर बिहार मिशन को 1886 में टायरोलिस कैपुचिन्स को सौंपा गया था. मई 1892 में उत्तर बिहार मिशन बेतिया - नेपाल प्रीफेक्चर बनाया गया था, जिसका पहला प्रीफेक्ट अबतेई के फादर हिलारियन, ऑफम कैप था. 1919 में इस प्रान्त को भंग कर दिया गया और पटना के वर्तमान धर्मप्रांत के रूप में दक्षिण बिहार में शामिल हो गया.

पोप बेनेडिक्ट 15 वें ने 10 सितंबर 1919 को एक डिक्री द्वारा इलाहाबाद के धर्मप्रांत को दो में विभाजित किया. इस प्रकार पटना का धर्मप्रांत बनाया गया था. बेतिया-नेपाल के प्रीफेक्चर को नए धर्मप्रांत के साथ जोड़ा गया था. परमधर्मपीठ ने पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के अमेरिकी मिसौरी प्रांत को सौंपा. बाद में, 13 नवंबर 1930 को, मिसौरी प्रांत के विभाजन के बाद, पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के शिकागो प्रांत को सौंपा गया था. बेल्जियम के जेसुइट लुइस वैन होएक को 20 जुलाई 1920-15 फरवरी 1928 पटना का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

आपको मालूम है कि इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग होकर बना है पटना धर्मप्रांत. जी हां, संत पिता बेनेडिक्ट 15 वें के कार्यकाल में 10 सितम्बर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग करके पटना धर्मप्रांत की स्थापना की गयी थी.इसके 2 साल के बाद पटना धर्मप्रांत को प्रथम धर्माध्यक्ष मिला.प्रथम धर्माध्यक्ष बनने का श्रेय फादर लुइस वानहुक को प्राप्त हुआ. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम  धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.

बिशप लुई वैन होएक , एसजे (6 मार्च 1921 - 15 फरवरी 1928),बिशप बर्नार्ड जेम्स सुलिवन , एसजे (15 जनवरी 1929 - 6 जून 1946),बिशप ऑगस्टीन फ्रांसिस वाइल्डरमुथ , एसजे (12 जून 1947 - 6 मार्च 1980),बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा, एसजे (76) (बाद में आर्चबिशप ) (6 मार्च 1980 - 16 मार्च 1999),बिशप विलियम डिसूजा( बाद में आर्चबिशप ) (12 दिसंबर 2005 -ं9 दिसंबर 2020) और अब सेबस्टियन कल्लूपुरा ( बाद में आर्चबिशप) April 3, 2009....)                                

पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया. मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत बनाया. पटना महाधर्मप्रांत को विभक्त कर बक्सर धर्मप्रांत बनाया.  जून 29, 2018 से बिशप नहीं हैं. अभी सेवानिवृत आर्चबिशप विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर काम निकाला जा रहा है.

                                                                                                                                                                      आलोक कुमार

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

इसमें 26 फस्ट और 10 सेकेड डिवीजन में सफलता हासिल

 


बेतिया. पश्चिमी चम्पारण जिले में है बेतिया.यहां पर संत जेवियर बालिका शिक्षण संस्थान संचालित है.यहां कई वर्षों से मैट्रिक परीक्षा में शतप्रतिशत परिणाम बच्चे लाते हैं.इस साल भी मैट्रिक परीक्षा- 2022 में 36 छात्राएं शामिल हुई थी. इसमें 26 फस्ट और 10 सेकेड डिवीजन में सफलता हासिल की हैं.इनलोगों को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां. इसके साथ संस्थान परिवार की ओर से सभी शिक्षक वृंद और विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की कामना.

आलोक कुमार

बिहार बोर्ड दसवीं की परीक्षा में बाढ़ अनुमंडल में सबसे पहले स्थान पर स्नेहा रानी

 


पटना. पटना जिले में है बाढ़ प्रखंड. पटना महाधर्मप्रांतीय पुरोहितों के द्वारा बाढ़ पल्ली संचालित है.यहां पर बाढ़ संत जोसेफ कान्वेंट  गर्ल्स हाई स्कूल प्लस टू के 294 छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई थी. जिसमें से 251 छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई वहीं 43 छात्राएं द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुई. इसी विद्यालय की छात्रा स्नेहा रानी  ने 500 अंक में 464 अंक लाकर अपने बाढ़ अनुमंडल एवं स्कूल का नाम गौरवान्वित किया है.

वहीं द्वितीय श्रेणी में रश्मि सिंह 456 अंक, कृतिका कुमारी 454 अंक, संस्कृति सिन्हा 453 राजनंदनी वर्मा 451 तमन्ना कुमारी 450 नोसबा प्रवीण 449 अंजली कुमारी 448 वर्षा रानी 448 संजना कुमारी 448 विद्यालय टॉप टेन में अपना नाम दर्ज कराई. छात्राओं से वार्तालाप करने के बाद वह अपने मंतव्य को व्यक्त करते हुए बता रही है कि कोविड-काल में पढ़ाई एक चुनौती बन चुकी थी. घर में स्मार्टफोन नहीं होने कारण ऑनलाइन क्लास करना एक मध्यम परिवार के बच्चे के लिए काफी मुश्किल था उस स्थिति में उनके अभिभावक ने अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन की व्यवस्था की और पढ़ाई में होने में बाधा को दूर किया. इसलिए बच्चे सबसे पहले परीक्षा में उत्तीर्ण हुए. तो इनका श्रेय अपने माता-पिता और अपने विद्यालय और वहां के शिक्षकों को दिया है.क्योंकि विद्यालय के शिक्षकों की कड़ी मेहनत से ही आज छात्राएं इस उपलब्धि को पा चुकी हैं. विद्यालय के सचिव फादर एंड्रयू थम्बी, प्राचार्य सिस्टर दीपिका एवं पूरा विद्यालय परिवार इन बच्चों की उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करता है. ताकि छात्राएं अपने उज्जवल भविष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहें एवं आसमान की बुलंदियों को छू सके.

संत जोसेफ कॉन्वेंट गर्ल्स हाई स्कूल प्लस टू के सचिव फादर एंड्रयू थम्मी

शिक्षा मनुष्य के जीवन में सर्वांगीण विकास का आधार होता है. किसी भी स्थान की जनता के सम्पूर्ण विकास में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.इसी शिक्षा को बिहार की धरा बाढ़ में फैलाने के लिए फादर संटाग के नेतृत्व में बाढ़ पैरिश सोसाईटी द्वारा 1943 ई0 में संत जोसेफ विद्यालय की स्थापना की गई. फादर ने बाढ़ मिशन के लिए भूमि खरीदी तथा विद्यालय बनवाने का कार्य शुरू किया. विद्यालय के प्रारंभिक विकास के क्रम में गरीब एवं परित्यक्त जनता के उत्थान के लिए पवित्र हृदय-धर्म-संघ की धर्म बहनें बाढ़ भेजी गयी. पठन-पाठन के समुचित प्रबंधन के लिए कान्वेंट का निर्माण किया गया.हमारी सिस्टरों द्वारा संचालित विद्यालय की पढ़ाई सुचारू रूप से चलाती हैं और अवकाश के समय में वे बालिकाओं को सिलाई एवं बागवानी का ज्ञान भी दिया जाता है.विद्यालय की स्थापना के प्रारंभिक दिनों में यहाँ मध्य विद्यालय स्तर तक की पढ़ाई होती है.अब माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई होती है.बिहार सरकार के द्वारा विद्यालय को माध्यमिक एवं उच्च स्तर (2) तक की मान्यता प्राप्त है.

आलोक कुमार

गुरुवार, 31 मार्च 2022

ईसाई समुदाय के दुखभोग अंतिम चरण में

                                                    * दुखभोग का पांचवां रविवार 3 अप्रैल को

पटना. ईसाई समुदाय के दुखभोग अंतिम चरण में पहुंचने लगा है.दुखभोग का पांचवां रविवार 3 अप्रैल को है.जानकारी के अनुसार संत पापा फ्रांसिस के धर्मविधिक अनुष्ठानों के संचालक मोनसिन्योर डियेगो रावेल्ली ने 31 मार्च को एक सूचना जारी करते हुए कहा है कि पुण्य सप्ताह में संत पापा फ्राँसिस के धर्मविधिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम प्रकाशित कर दिया गया है.जो इस प्रकार से कार्यक्रम है-

10 अप्रैल 2022- खजूर रविवार एवं प्रभु का दुःखभोग

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पूर्वाहन 10.00 बजे संत पापा फ्राँसिस खजूर रविवार का समारोही जूलूस एवं ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे.

14 अप्रैल 2022 - पुण्य बृहस्पतिवार

प्रातः 9.30 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में क्रिज्मा मिस्सा होगा, जिसमें संत पापा कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षो और पुरोहितों (रोम के धर्मप्रांतीय एवं धर्मसमाजी) के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे.

15 अप्रैल 2022 - पुण्य शुक्रवार

संत पेत्रुस महागिरजाघर में शाम 5.00 बजे पवित्र क्रूस उपासना की धर्मविधि का नेतृत्व करेंगे. शाम 9.15 में रोम के ऐतिहासिक स्थल कोलोसेयो में में क्रूस रास्ता का संचालन करेंगे.

16-17 अप्रैल 2022 - पास्का जागरण एवं पास्का रविवार

16 अप्रैल को शाम 7.30 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में पास्का जागरण मिस्सा सम्पन्न किया जाएगा.  

17 अप्रैल को सुबह 10 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पास्का महापर्व का समारोही मिस्सा का अनुष्ठान करेंगे.


आलोक कुमार


The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

“आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें

  “ आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें – पूरी जानकारी” Narendra Modi द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य ...

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post