और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये
| कुर्जी चर्च |
आलोक कुमार
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये
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आलोक कुमार
ईसाई समुदाय के पाम संडे के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों को समेटकर पेश है आलोक कुमार और स्वीटी माइकल की विशेष रिपोर्ट..
आजकल अप्रैल महीना चल रहा है.अप्रैल माह हिंदू और मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए पवित्र माह है.इसके साथ ही ईसाई समुदाय के लिए भी महीना बेहद खास है.हिंद संवत्सर में चैत्र का महीना चल रहा है और आज रामनवमी है.वहीं इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह रोजे का पाक महीना है.इसी महीने में ईसाई समुदाय का पाम संडे और गुड फ्राइडे भी है. इन दिनों ईसाई समुदाय के भी रोजे चल रहे हैं. जो अंतिम चरण में है.40 दिन के रोजे रखने के बाद उनका एक बड़ा पर्व आता है ईस्टर .यह ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए त्योहारों में से एक है.आज ईसाई समुदाय पाम संडे मना रहे हैं.इसके साथ ही पवित्र सप्ताह शुरू हो गया है.
आज ईसाई समुदाय परम्परागत ढंग से पाम संडे मना रहे है.आज के दिन दो हजार वर्ष पूर्व प्रभु येसु मसीह नगर यरूशलेम नगरी में प्रवेश किए थे. वहां के लोगों ने उनके स्वागत में खजूर की डालियां और कपड़ों को जमीन पर बिछाकर स्वागत किया था. दाऊद के पुत्र को होसान्ना..ईसा के आगे-आगे जाते हुए और पीछे -पीछे आते हुए लोग यह नारा लगा रहे थे,‘दाउद के पुत्र को होसन्ना... धन्य है वह जो प्रभु के नाम पर आते हैं.सर्वोच्च स्वर्ग में होसन्ना.‘
उसी दिन को स्मरण कर मसीही समुदाय के लोग पाम संडे यानी खजूर पर्व मनाते हैं.10 अप्रैल की सुबह 5ः30 बजे से भक्तों भारी संख्या संत माइकल जुनियर स्कूल में एकत्रित हो गये. इस अवसर पर येसु समाजी पुरोहित उपस्थित थे. येसु समाजी पुरोहितों में फादर पीयुस ओस्ता,फादर राजीव रंजन,फादर राजेश,फादर लौरेंस पास्कल,फादर एडिसन आम्रस्टांग,फादर ग्रेगरी गोम्स,फादर सेल्विन जेवियर,फादर डेनिस और फादर अगस्टीन उपस्थित थे. फादर सेल्विन जेवियर ने ग्रामीण अंचल से लाये गए खजूर की डालियों पर आशीष दिये.
इस धार्मिक कार्यक्रम के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच महायुद्ध समाप्त करने के लिए प्रार्थना की गयी.इस जहां के सभी समुदाय के लोगों के लिए प्रार्थना की गयी. परिवार, समाज, एकता, प्रेम, संगठन, शांति व भाईचारे के लिए प्रभु येसु मसीह से दुआ मांगी.इस दौरान पाम संडे के दिन पुरोहितों के नेतृत्व में अनुयायी हाथ मे खजूर की डालियां लेकर होसन्ना के गीत गाते हुए चर्च में प्रवेश करते हैं। इस अवसर पर
फादर सेल्विन जेवियर की अगुवाई में सुबह जुलूस निकाला गया.स्वयंसेवक हॉली क्रॉस लेकर आगे-आगे निकले और उनके पीछे मसीही समुदाय के लोग चल रहे थे. इन लोगों ने हाथ में खजूर के पेड़ की डालियां थीं. इस दौरान प्रभु येसु की शान में गीत गाए गए. जय-जय होवे तेरीकृप्रभु के प्रतिनिधि दाउद सुत की गूंजे इस़्त्राएल के प्रभु की नभ में यश की भेरी जय-जय होवे तेरी.आज से 2022 साल पहले प्रभु येसु के लिए भीड़ ने होशन्ना के नारे लगाए थे. उसी दिन की याद में पाम संडे मनाया गया.जय हो... प्रभु की जय जय हो,स्वर्ग लोक की जय हो स्वागत के लिए हर्ष के मारे,बालक ले जैतून की डालें गुंजित करने लगे नारे,जय हो प्रभु की जय हो...
पाम संडे के साथ मसीहियों के लिए पवित्र सप्ताह का आगाज हो गया है. अगले रविवार को ईस्टर मनाया जाएगा. प्रभु यीशु के जीवित हो उठने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. इससे पहले चर्चा में इस पूरे सप्ताह अलग-अलग दिनों में कई तरह के आयोजन होंगे.
कहा जाता है कि चालीसा या लेंट के चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी प्रत्येक मसीही के लिए अपने जीवन में की गई गलतियों और पापों के लिए सच्चे दिल से पश्चाताप करने, उपवास, परहेज और प्रार्थना में बढ़ने का अभ्यास है. लेकिन उपवास, प्रार्थना, परहेज और क्रूस रास्ता आराधना आदि के कार्यक्रम को मात्र चालीस दिन की औपचारिकता तक ही सीमित करने का नहीं, पूरे जगत के मसीहियों के लिए यह जीवन पूरे साल अर्थात वर्ष के 365 दिन कहें या अपने जीवन के अंतिम सांस तक अनुसरण करने का है.
पटना. पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल में वार्ड नम्बर- 22 ए के वार्ड पार्षद हैं दिनेश कुमार.इस वार्ड पार्षद के पार्षद प्रतिनिधि हैं नीरज कुमार. वार्ड 22 ए में गंगा विहार कॉलोनी है.यहां पर पांच सौ मकान है.इस गंगा विहार के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.
कॉलोनी के मो.आरिफ ने समस्याओं का जिक्र करने के दरम्यान कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गरीबों की प्यास बुझाने के लिए 2015 में जब महागठबंधन के साथ सरकार बनाई थी, उस समय उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मिल सके इसकी शुरुआत की थी. इस योजना को शुरू हुए 7 साल से अधिक हो गए, लेकिन अभी भी यह योजना पूरी तरह से धरातल पर नहीं दिख नहीं रही है. राजधानी पटना में ही यह योजना दम तोड़ रही है.
उन्होंने कहा कि इस बहुआंकाक्षी सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने का प्रयास 2016 में गंगा विहार कॉलोनी में भी किया गया.आईटीआई छात्रावास के बगल में जलापूर्ति केंद्र सह जलमिनार से पाइप का संयोजन किया गया.पॉश एरिया फेयरफील्ड कॉलोनी में पाइप बिछाकर गंगा विहार कॉलोनी में अंत किया गया.
उन्होंने कहा कि जलापूर्ति चालू होने के बाद हर घर नल का जल पहुंचने से लोग खुश थे.यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2017 तक चला.इसके बाद प्रोजेक्ट का पानी आना बंद हो गया .इससे लोग नाखुश हो गये.साल में एक बार मटरगश्ती करने वाले वार्ड पार्षद दिनेश कुमार से शिकायत की गयी.तब उन्होंने फेयरफील्ड कॉलोनी शुरू और गंगा विहार कॉलोनी अंत पाइप खोलकर जांच कराएं. जांचोपरांत पता चला कि पाइप में पानी बहाव हो रहा है,परंतु घरों तक नहीं पहुंच रहा है.पांच साल से परेशान हैं.
रोज़ा तोड़वाने के समय के पूर्व मो.नौशाद ने कहा कि शुद्ध पेयजल के साथ जल निकासी की भी समस्या है.बरसातवहीं लोग कहते हैं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के द्वारा तीन खंभा गाढ़कर कर्तव्य पूरा कर लिया है. दो साल के बाद भी तार तानकर उर्जा घरों तक पहुंचाने का कार्य नहीं किया जा रहा है.बांस के सहारे तार लाया गया है.
जानकार लोगों का कहना है कि पटना नगर निगम के वार्ड पार्षदों को एक करोड़ विकास कार्य करने को मिला है.पर वार्ड पार्षद दिनेश कुमार गंगा विहार कॉलोनी में विकास कार्य करना ही नहीं चाहते हैं.इससे लोग आक्रोशित हैं.
बिहार में सीएम नीतीश (CM Nitish) का ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना (Saat Nischay Yojana) के तहत 'हर घर नल का घर योजना ' के क्रियान्वयन में लेट लतीफी के कारण अभी तक कई वार्डों में पाइप भी नहीं बिछाए गए हैं. कई वार्डों में पाइप बिछाए गए तो उसमें से पानी ही गायब है. ऐसे में पानी के लिए लोग तरस रहे हैं.
इस संदर्भ में 22 ए के भावी प्रत्याशी उमेश कुमार कहते हैं कि वर्त्तमान वार्ड पार्षद दिनेश कुमार जन उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतर रहे हैं. उनका कहना है कि अब गंगा विहार कॉलोनी के लोगों को सोचना होगा. उनका विकास कौन करेगा ? कौन पटना नगर निगम के द्वारा प्रदत राशि का उपयोग जन विकास कार्य में लगा सकता है .गेंद जनता के पाले में है . कुछ दिनों के बाद ही चुनाव होने वाला है .
आलोक कुमार
पटना.इस साल 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे है.इन दिनों ईसाई समाज 40 दिनों का उपवास रखते हैं.ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों के लिए भी गुड फ्राइडे का दिन बहुत अहम है.बाइबल के अनुसार, इसी दिन ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह के खिलाफ षड्यंत्र रच कर उन्हें सूली पर लटकाया गया था. इस वर्ष गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.दरअसल, गुड फ्राइडे के साथ ईसाई धर्म के लोगों के लिए पाम संडे और ईस्टर डे भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
इस साल पाम संडे 10 अप्रैल को है.वहीं गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है और ईस्टर संडे 17 अप्रैल को है.बाइबल, यूहन्ना 18 और 19 में इन तीन दिनों में जो घटना घटी थी उसका उल्लेख किया गया है. बाइबल के अनुसार, पाम संडे पर ईसाई धर्म के प्रभु ईसा मसीह यरूशलेम पहुंचे थे जहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर की डालियों को बिछाकर किया था, इस घटना के वजह से इस दिन को पाम संडे का नाम दिया गया है. जब वह यरूशलेम यानी इजरायल की राजधानी यरूशलेम पहुंचे थे तब उन्हें सूली पर लटकाया गया था. जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी उस दिन को गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे की, ठीक 3 दिन बाद यानी रविवार के दिन मेरी मेग्दलीन नाम की एक महिला ने ईसा मसीह को उनके कब्र के पास देखा था. यह चमत्कारी घटना जिस दिन हुई थी उसे ईस्टर संडे कहा गया.पटना.कैथोलिक धर्मप्रांत में इलाहाबाद धर्मप्रांत विश्व का सबसे बड़ा धर्मप्रांत था.इसमें कोलकाता, पटना, जबलपुर, इंदौर, लखनऊ, झांसी और गोरखपुर आते थे. 1887 में कोलकाता धर्मप्रांत, पटना धर्मप्रांत 1919 में, 1932 में जबलपुर धर्मप्रांत, 1935 में इंदौर धर्मप्रांत, 1940 में लखनऊ धर्मप्रांत व 1946 में गोरखपुर इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग हुए.
1845 मे हुगली दो विकारिएट में विभाजित हुआ. एक भाग चटगांव विकारिएट और दूसरा कोलकाता विकारिएट जो पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल के नाम से जाने जाते थे. पश्चिम बंगाल को 1864 में बेल्जियम जेसुइट पुरोहितों के हाथों सौंपा गया.वह महाधर्मप्रांत के अस्तित्व में आया. मिशनरियों ने 1865 में मिदनापुर, बालासेार, 1868 में 24 परगना, 1869 में चाईबासा और 1870 में छोटानागपुर क्षेत्र में विकास का काम किया.
रोम 1812 में एक विकारिएट में तिब्बत-हिंदुस्तान के प्रान्त बनवाया. 1827 एक स्वतंत्र पटना विकारिएट बनाया गया था.जिसमें बेतिया , चुहड़ी , पटना सिटी , दानापुर , भागलपुर , दार्जिलिंग , सिक्किम , नेपाल तथा निकटवर्ती प्रदेशों. संत अनास्तासियस हार्टमैन को इसका पहला विकार अपोस्टोलिक नियुक्त किया गया था. पोप लियो एक्सटीटीआई के एक डिक्री के साथ पटना विकारिएट 1886 में इलाहाबाद धर्मप्रांत का हिस्सा बन गया.बेतिया, चुहड़ी , चखनी और लातौना के अपने चार स्टेशनों के साथ उत्तर बिहार मिशन को 1886 में टायरोलिस कैपुचिन्स को सौंपा गया था. मई 1892 में उत्तर बिहार मिशन बेतिया - नेपाल प्रीफेक्चर बनाया गया था, जिसका पहला प्रीफेक्ट अबतेई के फादर हिलारियन, ऑफम कैप था. 1919 में इस प्रान्त को भंग कर दिया गया और पटना के वर्तमान धर्मप्रांत के रूप में दक्षिण बिहार में शामिल हो गया.
पोप बेनेडिक्ट 15 वें ने 10 सितंबर 1919 को एक डिक्री द्वारा इलाहाबाद के धर्मप्रांत को दो में विभाजित किया. इस प्रकार पटना का धर्मप्रांत बनाया गया था. बेतिया-नेपाल के प्रीफेक्चर को नए धर्मप्रांत के साथ जोड़ा गया था. परमधर्मपीठ ने पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के अमेरिकी मिसौरी प्रांत को सौंपा. बाद में, 13 नवंबर 1930 को, मिसौरी प्रांत के विभाजन के बाद, पटना धर्मप्रांत को सोसाइटी ऑफ जीसस के शिकागो प्रांत को सौंपा गया था. बेल्जियम के जेसुइट लुइस वैन होएक को 20 जुलाई 1920-15 फरवरी 1928 पटना का पहला बिशप नियुक्त किया गया था. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.
आपको मालूम है कि इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग होकर बना है पटना धर्मप्रांत. जी हां, संत पिता बेनेडिक्ट 15 वें के कार्यकाल में 10 सितम्बर 1919 को इलाहाबाद धर्मप्रांत से अलग करके पटना धर्मप्रांत की स्थापना की गयी थी.इसके 2 साल के बाद पटना धर्मप्रांत को प्रथम धर्माध्यक्ष मिला.प्रथम धर्माध्यक्ष बनने का श्रेय फादर लुइस वानहुक को प्राप्त हुआ. 6 मार्च 1921 में विधिवत फादर लुइस वानहुक को पटना धर्मप्रांत के प्रथम धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषिक्त किया गया.
बिशप लुई वैन होएक , एसजे (6 मार्च 1921 - 15 फरवरी 1928),बिशप बर्नार्ड जेम्स सुलिवन , एसजे (15 जनवरी 1929 - 6 जून 1946),बिशप ऑगस्टीन फ्रांसिस वाइल्डरमुथ , एसजे (12 जून 1947 - 6 मार्च 1980),बिशप बेनेडिक्ट जॉन ओस्टा, एसजे (76) (बाद में आर्चबिशप ) (6 मार्च 1980 - 16 मार्च 1999),बिशप विलियम डिसूजा( बाद में आर्चबिशप ) (12 दिसंबर 2005 -ं9 दिसंबर 2020) और अब सेबस्टियन कल्लूपुरा ( बाद में आर्चबिशप) April 3, 2009....)
पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया. मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत बनाया. पटना महाधर्मप्रांत को विभक्त कर बक्सर धर्मप्रांत बनाया. जून 29, 2018 से बिशप नहीं हैं. अभी सेवानिवृत आर्चबिशप विलियम डिसूजा को प्रेरितिक प्रशासक बनाकर काम निकाला जा रहा है.
आलोक कुमार
आलोक कुमार
“ आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें – पूरी जानकारी” Narendra Modi द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य ...