शनिवार, 16 अप्रैल 2022

शौचालय काफी गंदे रहते थे.वह अभी भी बरकरार

 आलोक कुमार और स्वीटी माइकल की पोल खोलनी वाली रिपोर्ट...

पटना. इन दिनों राजधानी पटना को पटना नगर निगम स्वच्छ और सुन्दर बनाने में जुटा है.यह सब स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले किया जा रहा है.इसके लिए निगम प्रशासन के तरफ से शहर में 500 से अधिक शौचालय का निर्माण करवाया गया है. जो स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग को बढ़ाने में मददगार साबित होगा. इन सभी टॉयलेट्स की साफ सफाई और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल को दी गई है.   


बता दें कि पिछली बार पटना स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में फिसड्डी हो गया था. इसका मुख्य कारण शौचालय की गुणवत्ता में कमी थी. निगम प्रशासन किसी भी शौचालय की देखरेख नहीं करता थी. जिसकी वजह से शौचालय काफी गंदे रहते थे.वह अभी भी बरकरार है. 

पटना नगर निगम के वार्ड 22 ए के क्षेत्र में स्थित है शौचालय.कुर्जी चर्च के परिसर से सटे निर्मित है शौचालय है.पटना नगर निगम के 22 ए में दर्जनों सफाईकर्मी हैं.जो रोड क्लिन करने में लगे रहते हैं.वार्ड 22 ए के वार्ड पार्षद ध्यान दें.अब स्थिति यह है आवाजाही करने वालों को नाक पर रूमाल रखकर जाने को मजबूर हो रहे हैं.

बता दें कि संत माइकल हाई स्कूल व हार्टमन बालिका उच्च विघालय के बच्चे आते और जाते हैं.यहां पर स्कूल के बच्चों का वाहन खड़ा कर चालक बच्चों की छुट्टी का इंतजार करते हैं.

कुछ माह के बाद पटना नगर निगम का चुनाव होने वाला है.क्षेत्र के वार्ड 22 ए के वार्ड पार्षद दिनेश कुमार उदासीन है.ऐसी स्थिति में वार्ड 22 ए के वार्ड पार्षद के उदासीनता का फायदा भावी प्रत्याशी उठा सकते हैं.भावी प्रत्याशियों में उमेश कुमार काफी सक्रिय हैं.जो इसको मुद्धा बनाकर शौचालय की सफाई करवा सकते हैं.मालूम हुआ है कि पटना नगर निगम ने सभी मॉड्युलर शौचालय और सामुदायिक शौचालय की साफ सफाई की जिम्मेदारी सुलभ शौचालय को दे दी है. हम लोग हर दिन सुबह शाम शौचालय की सफाई करवाते हैं.साफ है कि इसको शामिल नहीं किया गया है.


यह निगम के द्वारा बनाया है.निगम के जरिए बनाये गये शौचालयों की गुणवत्ता की बात करें तो आर्किटेक्ट का मानना है कि निगम ने जितने भी शौचालय भवनों का निर्माण किया है वो ठीक हैं. लेकिन किसी भी शौचालय का मेंनटेनेंस नहीं होता है, जब अधिकारी शौचालय का निरिक्षण करने आते हैं तो साफ सफाई करा दी जाती है. नगर निगम इस बार शौचालयों की सफाई का पूरा ख्याल रख रहा है. 100 से अधिक शौचालय की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल को दी गई है. सुलभ शौचालय जो लोग उपयोग करते उनसे 5 रुपये भी लिया जाता है. ताकी शौचालय की सफाई करवाई जा सके. वहीं, बाकी सभी शौचालय को निगम अपने मंद से खुद सफाई कराता है. जो लोग इन शौचालय का उपयोग करते है. उनसे पैसा भी नहीं लिया जाता है.                    

पटना नगर निगम क्षेत्र में निगम ने तीन तरह के शौचालय बनावाए हैं. सुलभ शौचालय, सामुदायिक शौचालय और मॉड्यूलर शौचालय. इनकी संख्या की बात की जाये तो सुलभ शौचालय की संख्या 100 है. यहां लोगों से पैसे लेकर शौच करने दिया जाता है. तो वहीं सामुदायिक शौचालय की संख्या 170 से अधिक है. मॉड्यूलर शौचालय की संख्या 200 है. पटना में मॉड्यूलर टॉयलेट्स का निर्माण दो वर्ष पहले किया गया था. लेकिन इसमें देखरेख का अभाव था.                          

200 से अधिक शौचालय का टाटा स्टील कंपनी के माध्यम से स्टील युक्त मॉड्युलर शौचालय का निर्माण करवाया गया था. ताकि लोग सड़कों पर गंदगी ना फैलाएं. लेकिन रखरखाव के अभाव में सभी शौचालय की फ्लश, सीट, नल वगैरह गायब हो जाने और पानी की व्यवस्था नहीं रहने के कारण वे कारगर नहीं हो पाया था. अब रेनोवेशन और संचालन की व्यवस्था होने के बाद उन्‍हें आम जन के उपयोग लिए फिर चालू कर दिया गया है.                                            


इन दिनों पटना नगर निगम में सभी शौचालय की सफाई की जा रही है. गुणवत्ता की बात करें तो सफाई के मामले में इन दिनों निगम की ओर से अच्छी पहल की जा रही है पानी की भी व्यवस्था अब सभी शौचालय में रह रहती है'- रविन्द्र कुमार, पटनावासी.                          

हमारी तरफ से शौचालय की गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है. अगर कोई संवेदक द्वारा गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो उस पर निगम प्रशासन कर्रवाई भी करता है. क्योंकि निगम द्वारा बनाए गए सभी शौचालय का बजट काफी अधिक है.                     

वहीं  निगम द्वारा बनाए गए सभी शौचालय की गुणवत्ता को लेकर जब सिविल इंजीनियर अभय राणा से बात की गई तो उनका बताया कि भवन निर्माण में सरकार और निगम प्रशासन गुणवत्ता का तो पूरा ख्याल रखते हैं. लेकिन उन भवनों के रखरखाव का अभाव साफ तौर पर दिखाई देता है. क्योंकि भवनों का मेंटेनेंस इनके द्वारा नहीं किया जाता. जब कोई अधिकारी इन भवनों के निरीक्षण के लिए आते हैं तो सफाईकर्मी साफ सफाई कर देते हैं.                 

शौचालय की सफाई की बात करें तो अभी स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर सर्वे चल रहा है. इसलिए निगम द्वारा सभी शौचालय की सफाई ठीक से की जा रही है. लेकिन जैसे ही सर्वेक्षण समाप्त होगा फिर शौचालय उसी स्थिति में पहुंच जाएगा-' अभय राणा, सिविल इंजीनियर                            

आपको बता दें कि पटना नगर निगम ने सभी शौचालयों की दावारों पर नीले रंग करा दिए हैं. इससे आम जन के लिए नजदीकी शौचालय की पहचान करना आसान हो गया है. अगर स्वच्छता सर्वेक्षण के सर्वे के बाद भी ये देख रेख इसी तरह जारी रही तो लोगों को शहर के अंदर टॉयलेट्स के लिए इधर उधर भटकना नहीं पडे़गा और साथ ही शहर में सफाई भी अच्छी रहेगी.                   



पास्का जागरण समारोह

 

पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा के द्वारा प्रो कैथेड्रल चर्च बांकीपुर में रात्रि 10ः30 बजे मिस्सा


पटना.अब से कुछेक घंटों के बाद ईसाई धर्मावलंबी चालीस दिन तक प्रभु येसु की स्तुति में एवं उसके दुख एवं मरण के स्मरण में प्रार्थना, उपवास, तपस्या, परहेज आदि कार्य करते हुए आज पवित्र चरम के दिन में पहुंचने वाले हैं.इसके साथ ही पवित्र शनिवार अर्थात प्रभु येसु का देह कब्र में लेटा रहना एवं ख्रीस्त का पुनरुत्थान दिन मनाया जाएगा.इस समय सभी ईसाई धर्मावलम्बी मौन रहकर एवं विशेष प्रार्थना करते हुए येसु के पुनरुत्थान की बाट जोह रहे है.

आज धर्मी और पवित्र स्त्रियां दुख भरे मन और दिल के साथ एवं सुगंधित द्रव्य लेकर येसु के शव का विलेपन करने के लिए प्यार और भक्ति के साथ कब्र के पास जाती है और कब्र खुला देख कब्र में प्रवेश करती हैं. लेकिन वे येसु का शव न पाकर डर और भय से घबरा जाती हैं. साथ ही साथ विश्वास भरे मन दिल से वे आश्चर्यचकित हो जाती है अर्थात उन्हें येसु का कथन ज्ञात था कि येसु पापियों के हवाले कर दिया जायेगा क्रूस पर चढ़ाया जाएगा और तीसरे तीसरे दिन जी उठेगा.

कुर्जी पल्लाी

कुर्जी स्थित प्रेरितों की रानी ईश मंदिर कैथेड्रल में पुण्य शनिवार 16 अप्रैल को रात्रि में पास्का जागरण समारोह 10ः30 बजे से.पास्का रविवार 17 अप्रैल को सुबह में पहला मिस्सा 06ः00 बजे और दूसरा मिस्सा 07ः30 बजे से.

बेतिया पल्ली

आज इस अवसर पर नैटिविटी ऑफ द ब्लेस्ड वर्जिन मेरी चर्च में पुण्य शनिवार 16 अप्रैल को रात्रि 11ः00 बजे से पास्का-जागरण. बपतिस्मा की प्रतिज्ञा दुहराने के लिए सभी लोग अपनी मोमबत्ती साथ लाएं.पास्का रविवार 17 अप्रैल को प्रथम मिस्सा सुबह 06ः00 बजे से, द्वितीय मिस्सा सुबह 07ः30 बजे से होगा. 

पाटलिपुत्र पल्ली 

यहां के सेक्रेट हार्ट चर्च,पाटलिपुत्र में 16 अप्रैल को पुण्य शनिवार के अवसर पर 10ः30 बजे से रात्रि में मिस्सा.पास्का रविवार 17 अप्रैल को प्रथम मिस्सा 07ः00 बजे हिंदी में और 08ः30 बजे से इंगलिश में मिस्सा होगा.

चखनी पल्ली

यहां पर शनिवार की रात में 11ः00 बजे से पास्का जागरण के महासमारोह की धर्मविधि.गिरजाघर के सम्मुख आग तथा मोमबत्ती पर आशीष.बपतिस्मा की प्रतिज्ञा दुहराने के लिए अपनी अपनी मोमबत्ती साथ लाएं. रविवार को प्रथम मिस्सा सुबह 07ः00 बजे से होगा. 

चुहड़ी पल्ली

पुण्य शनिवार 16 अप्रैल को पास्का जागरण. रात्रि 11ः30 बजे से पवित्र जागरण का समारोही मिस्सा. पास्का रविवार 17 अप्रैल को येसु ख्रीस्त का पुनरूत्थान पास्का महापर्व.सुबह 06ः30 बजे से पास्का पर्व का समारोही मिस्सा.

मालूम हो कि मानव समाज को पूर्ण विश्वास था कि प्रभु येसु पुनर्जीवित होंगे और उन्हें स्वर्गदूतों का ये कथन, आप लोग जीवित को मृतकों में अर्थात कब्र में क्यों ढूंढती है?उनके विश्वास को और मजबूत बना दिया और इसी के फलस्वरूप वे धर्मी और पवित्र स्त्रियां येसु के पुनरुत्थान के साक्षी बने. आज खाली कब्र दर्शाता है कि येसु का निवास स्थान कब्र नहीं,मृतकों के साथ नहीं बल्कि जीवित के साथ गांव में घर में है. यदि हम भी इन स्त्रियों की भांति धार्मिकता और पवित्रता का जीवन जिए और प्रभु येसु को सारे मन और दिल से प्यार करें तो निश्चय हमारे लिए भी कब्र के पत्थर हटा दी जाएगी और हम पुनर्जीवित प्रभु  येसु की भांति पुनर्जीवित होकर येसु के महिमा में सहभागी होंगे.

आलोक कुमार

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

ऑल्ड यूथ समय निकालकर समाजसेवा कर रहे हैं:बंट्टी

आसनसोल.आसनसोल धर्मप्रांत में है संत जॉन्स चर्च, चेलिडांगा.यहां के यूथ काफी एक्टिव हैं.यहां के ऑल्ड यूथ अश्विन फेलिक्स,बंट्टी थोमस,प्रतिक राय, डिम्पल लौरेंस,प्रदीप माइकल,एलिजाबेथ फैक्लिन,जैक्लिन साह,सोनू आदि मिलकर अपने समुदाय के बीच में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए कोरोना काल में  'SING A CAROL 2021' किये थे.                        

उस दौरान जो अतिरिक्त आय हुआ था. उस आय से यूथ ने आवश्यक खाद्य पदार्थ खरीदा.उक्त खाद्य पदार्थ को चेलिडांगा के सभी पाड़ा में से बीस परिवारों के बीच जाकर वितरित कर दिया.इस खाद्य उपहार देकर गरीबों मदद कर दी है.जो उनके ईस्टर उत्सव में थोड़ी खुशी जोड़ देगा.यूथ ने कहा है कि जो हमारे कार्य में हमेशा समर्थन करते हैं.ऐसे सभी प्रायोजकों को दिल से धन्यवाद! पल्ली परिषद और यूथ के बीच अनबन बरकरार है.फिर भी ऑल्ड यूथ समय निकालकर समाजसेवा कर रहे हैं.

आलोक कुमार

रविवार तक के महत्वपूर्ण दिन


रांची। रांची महाधर्मप्रांत के आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने गुरुवार से लेकर रविवार तक के महत्वपूर्ण दिनों के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही इन्हें किन मान्यताओं के साथ मनाया जाता है, पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पुण्य बृहस्पतिवार को तीन विधियां की जातीं है।

इसमें पहला है- प्रभु का अपने चेलों का पैर धोना, जिससे उन्होंने ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं करने का संदेश दिया और कहा कि एक-दूसरे को प्रेम करने के लिए प्रेरित किया। दूसरा- येसु ने एक बलिदान दिया। मानव मुक्ति के लिए उन्होंने खुद का बलिदान दिया।

तीसरा- बलिदान को अर्पित करने के लिए उन्होंने अपने प्रेरितों को पुरोहिताई की शिक्षा दी। 

पुण्य बृहस्पतिवार की सुबह वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में क्रिज्म मिस्सा के दौरान अपने उपदेश में संत पापा फ्राँसिस ने पुरोहितों को निमंत्रण दिया कि वे अपनी नजरें येसु पर केंद्रित रखने की कृपा प्राप्त करें, जिससे कि वे ईश्वर एवं लोगों की सेवा बेहतर रूप से कर सकेंगे।




गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

महायुद्ध के खिलाफ उपवास और परहेज रखेंगे


टना.ईसाई समुदाय का दुःखभोग 15 अप्रैल 2022 को गुड फ्राइडे मनाने के साथ खत्म हो जाएगा. ईसाई समुदाय का कल पुण्य शुक्रवार को पूर्ण उपवास और परहेज का दिन है. ईसाई समुदाय रूस और यूक्रेन के बीच 50 दिनों से जारी महायुद्ध के खिलाफ उपवास और परहेज रखेंगे.पाटलिपुत्र कॉलोनी में स्थित सेक्रेट हार्ट चर्च,पाटलिपुत्र में पुण्य शुक्रवार को रक्तदान शिविर आयोजित किया है. कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के लिए रक्तदान संग्रह किया जा रहा है.वहीं प्रभु ईसा के क्रूस  मरण की दुखमय घटना को एक झांकी के रूप में पेश किया जाएगा.परम्परागत मुसीबत गान कुर्जी चर्च में पेश किया जाएगा.


गुड फ्राइडे के पुण्य बेला में कुर्जी चर्च के द्वारा और विक्टर फ्रांसिस के नेतृत्व में प्रभु ईसा के क्रूस  मरण की दुःखमयी  घटना को एक झांकी के रूप में सुबह 6ः 30 बजे लोयला हाई स्कूल, कुर्जी से निकलकर कुर्जी के मुख्य सड़क से प्रार्थना, गीत और अभिनय द्वारा कुर्जी चर्च के प्रांगण में पहुंचकर एक विशेष प्रार्थना के साथ सम्पन्न होगी.राजधानी पटना के सभी पत्रकार भाई-बहनों से नम्र निवेदन किया गया है कि कृपया इसके कवरेज के लिए अपना बहुमूल्य समय निकालने की कृपा करें.जैसा कि आपको जानकारी होगी कि गुड फ्राइडे के पुण्य अवसर पर पूरे देश और दुनिया में विशेष प्रार्थना होती है.


पश्चिम चंपारण के बेतिया के निवासियों के द्वारा 100 साल पहले शुरू प्रभु येसु ख्रीस्त के चालीस दिवसीय दुःखभोग के ऊपर निर्मित मुसीबत गायन को घर-घर पहुंचाने का प्रयास करने वाले एस.के.लॉरेंस और उनकी टीम का अंतिम मुसीबत गायन गुड फ्राइडे 15 अप्रैल 2022 को कुर्जी चर्च में होगा. टीम का नेतृत्व करने वाले एस. के. लॉरेंस ने कहा कि उनके नेतृत्व में भक्त जनों के साथ कुर्जी चर्च के परिसर में दोपहर 1.50 पर प्रभु येसु के दुःखभोग (प्राणदंड की आज्ञा से लेकर सूली पर चढ़ाए जाने तक की कष्टमय घटना) से सम्बन्धित ‘मुसीबत‘नामक गीत तथा प्रार्थना का भक्तिमय कार्यक्रम प्रारम्भ होगा.आप सभी से आग्रह है कि इस भक्तिमय कार्यक्रम (गीत) में अवश्य शामिल हों तथा परमेश्वर की आशीष प्राप्त करें.


आलोक कुमार



बुधवार, 13 अप्रैल 2022

23 साल खत्म हो चुके है इसके बाद भी 1773 स्कूलों को अपना भवन नहीं मिला

 



पटना.बिहार में 70 हजार प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं.इनमें 1773 विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है.पटना जिले में ही 190 विद्यालय भवनहीन हैं, जो दूसरे विद्यालयों में चलाए जा रहे हैं.पटना क्षेत्र में 74 ऐसे विद्यालय है, जिनका अपना भवन नहीं है. इसमें 13 मध्य विद्यालय लड़कियों के हैं.ऐसे सभी विद्यालयों को मर्ज करने का निर्णय लिया गया है. प्रदेश में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की संख्या 70 हजार है. इनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 38 हजार और मध्य विद्यालयों की संख्या 32 हजार है. पटना में 3339 प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं, जिसमें 2183 प्राथमिक और 1140 मध्य विद्यालय हैं.अल्पसंख्यकों के लिए 16 मध्य विद्यालयों और 12 प्रस्वीकृत विद्यालय है.

अपनी जमीन अपना भवन का यह सपना शिक्षा विभाग 1999 से दिखा रहा है. इसके बाद भी भवनहीन विद्यालयों के लिए 23 साल से जमीन की तलाश पूरी नहीं कर सका है. 1999 में शिक्षा विभाग ने लोगों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रदेश में लगभग 20 हजार विद्यालयों बनाए थे. यहां-वहां की तर्ज पर बनाए गए विद्यालयों का निर्माण किया गया था. योजना थी कि दो-तीन साल में अपनी जमीन खोज कर स्कूल को भवन उपलब्ध कराया जा सके. लेकिन, 23 साल खत्म हो चुके है इसके बाद भी 1773 स्कूलों को अपना भवन नहीं मिला है. एक नए नियम के तहत स्कूल मर्ज करने पर कहीं एक किलोमीटर में दो-तीन विद्यालय और कहीं पर तीन से चार में एक भी विद्यालय नहीं होंगे.

पटना में लगभग 100 विद्यालयों को मर्ज किया जा चुका है.लगभग 90 विद्यालयों को मर्ज किए जाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है. कई विद्यालय ऐसे है जहां पर भवन की अपेक्षा लड़की संख्या काफी अधिक है. ऐसे में इनको मर्ज किए जाने पर शिक्षकों को संख्या कम पड़ जाएगी. इसको देखते हुए विद्यालयों के लिए जमीन की तलाश की जा रही है.

इस बीच शिक्षा विभाग,बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिनांक 11 अप्रैल 2022 को पत्र लिखा है कि राज्य में वैसे दो या दो से अधिक विघालय जो एक ही विघालय के भवन में संचालित है उन्हें एक विघालय में सामजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को अन्यत्र स्थानांतरित कर दें.आगे कहा गया है कि इस कार्यालय के पत्रांक 1772 दिनांक 21.12.2021,पत्रांक1533 दिनांक 19.11.2021,पत्रांक 256 दिनांक 13.03.2019,पत्रांक 1546 दिनांक 18.09.2017,पत्रांक 488 दिनांक 15.03.2018 एवं पत्रांक 880.प्रांसगिक पत्र के आलोक में 15 जिला यथा जहानाबाद, किशनगंज,पश्चिम चम्पारण, वैशाली, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, कैमूर,जमुई, बांका, पूर्वी चम्पारण, खगड़िया, बेगूसराय, कटिहार,सहरसा एवं नवादा से प्रतिवेदन हार्ड कोपी में प्राप्त हुआ है लेकिन उसका साफ्ट कोपी उपलब्ध नहीं कराया गया है,शेष जिला से अब तक अघतन प्रतिवेदन अप्राप्त है. प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश ने निर्देश दिया है कि वैसे जिला,जिनके द्वारा प्रतिवेदन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, वे एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. जिलके द्वारा हार्ड कोपी में उपलब्ध कराया गया है, वे उसका साफ्ट कोपी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें.

आनन्द माधव चेयरमैन, रिसर्च व मैनिफेस्टो कमेटी एवं प्रवक्ता, बिहार प्रदेश काँग्रेस कमेटी ने कहा है कि एक ओर बिहार सरकारी उच्च विद्यालय हर पंचायत में खोलनें की घोषणा सरकार कर रही है तो दूसरी ओर धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों को बंद करनें की साजिश रच रही है.आज सुबह एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, बिहार के 1885 प्राथमिक विद्यालयों को पिछले 1 वर्षों में बंद कर दिया गया है. जब इस संबंध में शिक्षा मंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विद्यालयों को बंद नहीं बल्कि मर्ज किया जा रहा है.

चेयरमैन, रिसर्च विभाग व प्रवक्ता, बिहार प्रदेश काँग्रेस कमेटी, आनन्द माधव ने कहा कि यह पूरी तरह से ही भ्रामक और गैर जिम्मेदाराना बयान है.शिक्षा मंत्री शब्दजाल में जनता को उलझा रहे हैं.सरकार ने स्पष्ट रूप से समग्र शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में 1885 विद्यालयों को बंद कर दूसरे विद्यालय में समाहित करने की बात कही है.दो दिन पूर्व प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने भी इसी आशय में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश निर्गत किया है कि भवनहीन या भूमिहीन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में समाहित करते हुए अतिरिक्त शिक्षकों को किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरित किया जाय.


ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर 15 सालों तक भवनहीन या भूमिहीन विद्यालय पेड़ों के नीचे या अस्थायी भवन या पंचायत भवन में चलाये ही क्यों गए? या फिर इन विद्यालयों के पास अगर भूमि या भवन ही नहीं था तो इन 15 सालों में विद्यार्थियों को इन विद्यालयों में कैसे पढ़ाया गया? क्या सरकार ने उन बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं किया? सच्चाई यह है कि सरकार के पास शिक्षा को लेकर के कोई स्पष्ट नीति नहीं है. चुनाव के दौरान जब वोट लेने के बारी आती है तो हर टोले में प्राथमिक विद्यालय और हर पंचायत में उच्च विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी जाती है. ना तो उनके लिए भूमि या भवन की व्यवस्था की जाती है और ना ही उन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था होती है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में चौपट कर दिया है. अगर सरकार को शिक्षा व्यवस्था की चिंता होती और सही मायने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहती तो विद्यालय खोलने की घोषणा करने से पहले उनके लिए भवन और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की व्यवस्था करती. लेकिन सरकार तो चुनावों में वोट और तालियां बटोरने के लिए घोषणा कर देती है. उसका फलाफल यह होता है कि 10-15 साल तक भवनहीन एवं शिक्षक विहीन विद्यालय चलने के बाद उन्हें बंद करने की घोषणा करनी पड़ती है.
 
एक ओर तो कोरोना के कारण सरकारी स्कूल के बच्चों की दो साल पढ़ाई बंद रही और अब स्कूल बंद कर उनका भविष्य और बर्बाद कर रहे. सच यह है कि शिक्षा विभाग स्कूल विहीन शिक्षा की बात सोच रही है और धीरे धीरे उस कदम बढ़ा रही है.यह व्यवस्था निजी स्कूलों को बढ़ावा देनें की तथा सरकारी स्कूलों को और कमजोर करनें की एक सोची समझी चाल है और हम इस जाल में फँसते चले जा रहे हैं.

आनन्द माधव ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि कितनें स्कूलों को कितने समय सीमा में ये बंद करनें जा रही है.उन्होंने माँग किया कि एक भी विद्यालय बंद नहीं होनें चाहिये तथा उनके लिए उचित भूमि और भवन की व्यवस्था की जाए.अगर इस तरह से सरकारी विद्यालय को बंद करने से आने वाले भविष्य में गरीब एवं पिछड़े तबकों को शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा.जरूरत है आज सरकारी शिक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने की ना तो उसे कमजोर करने की.

आलोक कुमार

सोमवार, 11 अप्रैल 2022

और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये

 और दोस्तों से कहते रहते कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये


कुर्जी चर्च 
जेफरी केरकेट्टा का नाम समीर केरकेट्टा भी है. कुर्जी क्रिश्चियन काॅलोनी में रहने वाले आर केरकेट्टा के पुत्र हैं. स्व.आर केरकेट्टा नोट्र्े डेम एकेडमी में अकाउंटेड थे.उनके चार पुत्री और चार पुत्र हैं.पुत्रियों में सरोज बड़ी थीं.पुत्र में जेफरी केरकेट्टा बड़े थे.पटना में कालाजार विभाग में कार्यरत थे. इसके बाद दिल्ली में स्थानान्तरण हुआ था.वहां पर बेहतर ढंग से कार्य करते थे.इस बीच बीमार पड़े. किडनी में कैंसर हो गया था. इसका इलाज चल रह था. इस बीच दिल्ली से पटना आते और जाते थे.पटना के दोस्तों से कहते थे कि अब पटना आते रहेंगे.यह देखें पटना आ ही गये.यह विधि के विधान के तहत हो गया.
उनसे मिलने वाले रिश्तेदार और दोस्त आ गये.पर वह बाॅक्स में पड़े रहे.आने वाले लोग जेफरी के बारे कहते रहे जिंदा दिल इंसान थे. चेहरे पर मुस्कान बिखड़ते रहते थे.किसी से दुश्मनी नहीं सभी दोस्त ही थे. जेफरी के दोस्तों में सुशील लकड़ा, जोन बेनेदिक्त,इक्लारेंस हेनरी,सुशील लोबो,जेवियर लुइस आदि आये थे.वहीं जेफरी की धर्मपत्नी गोडेंसिया केरकेट्टा के साथ नर्सिंग करने वाली एडलीन माइकल की पुत्री भी आयी थीं. कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पिटल में गोडेंसिया और एडलीन साथ-साथ नर्सिंग की थीं.साथ-साथ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा में काम करती थीं. इसके बाद उक्त संस्थान से गोडेंसिया दिल्ली चली गयी. इस बीच एडलीन माइकल की अकाल मौत हो गयी.इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा की दोस्त लुसी बेनेदिक्त,कुमारी,फिलोमीना डिक्रूज आदि भी कुर्जी चर्च में मिस्सा सुने और कुर्जी कब्रिस्तान में मिट्टी दिये. फादर सेल्विन जेवियर को भी कहते सुना गया कि जब ब्रदर थे तब से केरकेट्टा परिवार को जानते हैं.

आलोक कुमार

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