सोमवार, 22 अगस्त 2022

खाद्यान्न का वितरण लाभुकों के बीच जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के माध्यम से ससमय करने का निर्देश

 


किशनगंज: आज श्री श्रीकांत शास्त्री भा०प्र०से०, जिला पदाधिकारी, किशनगंज की अध्यक्षता में जिला आपूर्ति टास्क फोर्स की समीक्षात्मक बैठक आहूत की गई.

समीक्षात्मक बैठक में सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी / प्रखण्ड आपूर्ति निरीक्षक को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत खाद्यान्न का वितरण लाभुकों के बीच जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के माध्यम से ससमय करने का निर्देश दिया गया.

जिला प्रबंधक, रा०वा०निगम, किशनगंज को परिवहन - सह - हथालन अभिकर्ता, मुख्य के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से खाद्यान्न का उठाव कर राज्य खाद्य निगम के गोदाम में समय आपूर्ति कराने का निर्देश दिया गया, जिससे खाद्यान्न का वितरण ज०वि०प्र० विक्रेताओं को ससमय किया जा सके. भारतीय खाद्य निगम के गोदामों के लिए खाद्यान्न ले जाने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच करने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी, किशनगंज को निर्देशित किया गया.

जिला प्रबंधक, रा० खा० निगम, किशनगंज को सभी टी. पी. डी. एस. गोदामों में सी. सी. टी. भी. कैमरा लगाने का निर्देश दिया गया.बैठक में जिला आपूर्ति पदाधिकारी किशनगंज अनुमंडल पदाधिकारी किशनगंज, जिला प्रबंधक  रा० खा० निगम   किशनगंज, सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, सभी सहायक गोदाम प्रबंधक रा० खा० निगम, परिवहन-सह-हथालन अभिकर्ता, मुख्य एवं डी. एस. डी. आदि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

 

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सेना द्वारा 20 वर्षों के लिए प्रस्तावित रूटीन तोपाभ्यास के अवधि विस्तार पर रोक लगाई

 


रांची: अभी नहीं हुआ हैं नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द! माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सेना द्वारा 20 वर्षों के लिए प्रस्तावित रूटीन तोपाभ्यास के अवधि विस्तार पर रोक लगाई है. इसके लिए केन्द्रीय जन संघर्ष समिति माननीय मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती है. साथ ही माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द करने के लिए  विधिवत अधिसूचना जारी करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री व केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को लिखा जाए.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रद्द नहीं हुआ है. अवधि विस्तार पर रोक लगाना निश्चय ही हमारे संघर्ष की जीत की एक और कदम है. पहली जीत हमने तब हासिल की थी जब 22 मार्च 1994 को तोप अभ्यास के लिए आई सेना को वापस किया था.  जिसके लिए अभी हमें और संघर्ष करना है. जब तक सरकार द्वारा नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द करने की अधिसूचना जारी नहीं करती.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित लोगों द्वारा पिछले लगभग 30 वर्षों से लगातार नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को रद्द करने के लिए विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था. वर्तमान में भी प्रत्येक वर्ष की भांति नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में 22-23 मार्च को विरोध प्रदर्शन किया गया था. अब ऐसे में अधिसूचना को आगे और विस्तार नहीं होने से आदिवासियों के 30 वर्षों का संघर्ष भी समाप्त होगा और इलाके के लोगों को गोलियों की तड़तड़ाहट नहीं सुनाई देगी.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार जिला के करीब 39 राजस्व ग्रामों द्वारा आम सभा के माध्यम से झारखंड के राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा बताया गया था कि लातेहार व गुमला जिला पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आता है. यहां पेसा एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत ग्राम सभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है. इसी के तहत नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित इलाके के ग्राम प्रधानों ने प्रभावित जनता की मांग पर ग्राम सभा का आयोजन कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिए गांव की सीमा के अन्दर की जमीन सेना के फायरिंग अभ्यास के लिए उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया था. साथ ही नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को आगे और विस्तार न कर विधिवत अधिसूचना प्रकाशित कर परियोजना को रद्द करने का अनुरोध किया था.

बता दें, 1964 में शुरू हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में अवधि विस्तार किया गया था. मुख्यमंत्री ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित नहीं करने  के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की है.फायरिंग रेंज के होने के चलते एक-दूसरे से सटे दोनों जिलों के दर्जनों गांव के आदिवासी आज तक विस्थापन के भय से उबर नहीं पाए हैं. फायरिंग रेंज के होने के चलते एक-दूसरे से सटे दोनों जिलों के दर्जनों गांव के आदिवासी आज तक विस्थापन के भय से उबर नहीं पाए हैं. इनके भीतर यह डर 1991-92 के समय से है जब अविभाजित बिहार सरकार ने गजट जारी कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के नाम से पहचानी जाने वाली सैन्य छावनी के लिए लातेहार और गुमला के 157 मौजों  के मातहत 245 गांव की 1471 वर्ग किलोमीटर भूमि को अधिसूचित किया था.8 जनवरी 2022 को नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन संघर्ष समिति की जारी मासिक बैठक.  

समिति की स्थापना 1993 में हुई थी. हर साल 22 और 23 मार्च को फायरिंग रेंज को रद्द किए जाने का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करने के लिए अधिसूचित गांव के हजारों आदिवासी जमा होते हैं.झारखंड के सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) विधायक विनोद सिंह ने 20 दिसंबर 2021 को जारी विधानसभा सत्र में राज्य सरकार से पूछा था कि बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या-1862, दिनांक-20.08.1999 के अनुसार, “नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का उक्त क्षेत्र के ग्रामीण व्यापक विरोध कर रहे हैं? क्या यह एक ईको सेंसिटिव क्षेत्र है?”सरकर ने प्रश्न में कही बात को स्वीकारा लेकिन विधायक द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल, कि “क्या सरकार 11 मई 2022 को समाप्त हो रही फायरिंग रेंज की समयावधि विस्तार पर रोक लगाने का विचार रखती है? अगर हां तो कब तक और अगर नहीं, तो क्यों?” के जवाब में सरकार ने बताया कि इस संबंध में विभाग को अब तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है.

झारखंड के गुमला और लातेहार जिले के आदिवासी गांवों के लोगों के लिए सरकार के इस जवाब का सीधा और स्पष्ट मतलब है कि सरकारी कागजों में उनका गांव फायरिंग रेंज के तौर पर अभी भी चिन्हित है.इस फायरिंग रेंज के विरोध में बीते तीन दशक से यहां के ग्रामीण आंदोलनरत हैं. इन जिलों के ग्रामीणों के मुताबिक उसने फायरिंग रेंज को रद्द किए जाने का वादा और भरोसा भाषणों में तो सभी नेताओं ने किया है लेकिन अपने वादों पर कभी अमल नहीं किया. उनके दावे की तस्दीक क्षेत्र के दर्जनों अखबार और पत्रिका में प्रकाशित खबरों से की जा सकती है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुरोध है अनुसूचित जनजातियां समाप्त होती जा रही है. आदिवासी संकट में हैं, उन्हें बचाना परम धर्म है. केंद्र सरकार नेतरहाट फील्ड रेंज को हमेशा के लिए रद्द करना होगा. अन्यथा सिदो कान्हू के समय से आज तक जिस तरह आंदोलन चला उस तरह का आंदोलन जारी रहेगा. अनिल पन्ना, प्रफुल्ल लिंडा, नदीम खान, दीपा मिंज, सुषमा बिरुली समेत अन्य ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम का आयोजन महेंद्र पीटर तिग्गा ने किया.

आलोक कुमार


नगर निकायों में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था के तहत ही 248 नगर निकायों में चुनाव होंगे

  


पटना: कतिपय कारणों से बिहार में नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं हो सका है. अब चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट आया है.राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और नगरपालिका को लेटर जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि नगर निकायों में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था के तहत ही 248 नगर निकायों में चुनाव होंगे. इस लेटर में  172 नवगठित, उत्क्रमित या क्षेत्र विस्तारित नगर निकाय हैं, जबकि 10 यथास्थिति वाले नगर निकाय शामिल हैं. यथास्थिति वाले नगर निकायों में नगर निगम की बात करें तो इसमें मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, बेगूसराय के साथ ही नगर परिषद हिलसा, अरवल, बेनीपुर, एकमा बाजार, परसा बाजार के साथ नगर पंचायत मोहनिया को रखा गया है.

इसके अलावा बताया गया है कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 12(2) के मुताबिक़ हर नगरपालिका में सदस्यों के कुल स्थानों का 50 प्रतिशत के निकट, लेकिन इससे अधिक स्थान के लिए आरक्षण किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का मापदंड निर्धारित किया गया है. सभी तरह के आरक्षण का प्रावधान 50 प्रतिशत के भीतर ही होगा.

 बता दें अगर किसी कोटि में केवल एक पद है तो वह महिला के लिए रिजर्व्ड नहीं होगा. इसके साथ ही ऐसे नगर निकाय, जिनका गठन पहले हो चुका है, उसमें 62 पार्षदों के आरक्षण में बिहार नगरपालिका अधिनियम-12 के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. लेटर में इस बात की भी चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के क्रम में नगर विकास और आवास विभाग द्वारा राज्य सरकार का फैसला उपलब्ध कराया गया है. बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 (यथा संशोधित) और बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 2007 (यथा संशोधित) के अनुसार अलग -अलग कोटि के लिए आरक्षण निर्धारित किया जाएगा.

 बता दें राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की नगरपालिकाओं के वार्डों के गठन का कार्य पांच चरणों में कराया है, साथ ही साथ इन नगर निकायों की मतदाता सूची भी नए ढंग से तैयार करवाई गई है. चार चरणों में परिसीमन का काम पूरा किया जाना है. आयोग ने सभी जिलों को कहा है कि सभी नगर निकायों के मतदान के लिए बूथों के गठन का कार्य भी हर हाल में पूरा कर लिया जाए.

पहले चरण में 144 नगर निकायों का जबकि दूसरे चरण में 80 नगर निकायों का साथ ही तीसरे चरण में छह नगर निकायों का और चौथे चरण में नौ नगर निकायों का एवं पांचवें चरण में पांच नगर निकायों के वार्डों का परिसीमन, मतदाता सूची की तैयारी और बूथों के गठन की तैयारी कराने का निर्देश जारी किया गया है.

राज्य निर्वाचन आयोग के लेटर आने के बाद सुस्त निवर्तमान पार्षदों के बीच संचार पैदा हो गया है.अब घर के बाहर फील्ड में देखे जा रहे हैं.वहीं पार्षद बनने की अभिलाषा रखने वाले लोगों से संपर्क करने लगे हैं. सबकी नजर पंचायत से नगर निकाय वाले पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 22 ए, 22 बी और 22 सी पर है.यहां के वार्ड पार्षद कुर्सी बचाने के फिराक में है. ऐसे पार्षदों को परास्त करने के प्रत्याशी मैदान में आ गये हैं.उनमें 22 ए से उमेश कुमार है.जो गत साल दशहरा पर्व से ही सक्रिय हैं.वहीं किंग मेकर के रूप में प्रचारित पप्पू राय 22 बी और 22 सी से अपने प्रत्याशी उतारने को कटिबद्ध हैं. इस बार 22 बी से रीता देवी और 22 सी से निवर्तमान डिप्टी मेयर रजनी देवी को मेयर पद से भी चुनाव लड़ा रहे हैं.इसके अलावे अनेक प्रत्याशी है जो पार्षद बनने को बेताब हैं.

अब सभी निगाह निर्वाचन आयोग पर है कि कब चुनाव का शंखनाद कर रहे हैं. संभवतः अक्टूबर में चुनाव हो सकता है.यह चुनाव दिलचस्प होगा कारण कि मेयर और डिप्टी मेयर को वोटर ही प्रत्यक्ष वोट के द्वारा चुनाव करेंगे.


आलोक कुमार

रविवार, 21 अगस्त 2022

जनप्रतिनिधियों के शिकायतों सुझावों की जानकारी देनी थी.

  


चंडीः नालंदा जिले के चंडी प्रखंड परिसर स्थित सभागार में उप विकास आयुक्त श्री वैभव श्रीवास्तव के अध्यक्षता में माननीय जन प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की बैठक हुई.सभी माननीय जन प्रतिनिधियों ने चंडी के पंचायतों से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की स्थानीय स्तर पर हो रही खामियों की जानकारी दी.

बताते चलें कि इस बैठक के पूर्व कई विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर द्वारा प्रखंड स्तर पर चल रही योजनाओं के निरीक्षण करने के आदेश दिए गए थे. निरीक्षणोपरांत उन्हें उक्त बैठक में जनप्रतिनिधियों के शिकायतों/ सुझावों की जानकारी देनी थी.

उप विकास आयुक्त के आगमन के पूर्व कई जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने इस प्रखंड में अपने संबंधित कर्मियों/अधिकारियों के साथ बैठक कर रखा था.

माननीय जन प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी समस्याएं बताई जिसे उप विकास आयुक्त ने गौर से सुना.ज्यादातर शिकायतें नल-जल,बिजली तथा कल्याणकारी योजनाओं के लिए भू-अनुपलब्धता की थी.

चंडी प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष ने कचड़ा प्रबंधन तथा पंचायत सरकार भवन हेतु भूमि अनुपलब्धता की बात बताई.उप  विकास आयुक्त ने अंचलाधिकारी को निर्देशित किया.सालेपुर पंचायत में वार्ड नं.5,6,13 एवं 14 में सात निश्चय के कार्यों के भुगतान लंबित की शिकायत भी की गई.

माधोपुर पंचायत के वार्ड न.14 में आंगनवाड़ी भवन निर्माण के लिए भूमि अनुपलब्धता की बात बतायी गयी,जिस पर उप विकास आयुक्त ने भूमि चिन्हित करने का आदेश अंचलाधिकारी को दिया.उन्होंने कहा कि अगर चिन्हित जमीन अतिक्रमित पायी जाती है तो उसे अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी.

महकार पंचायत के प्राथमिक विद्यालय गौरी के विद्यालय भवन जर्जर होने की शिकायत की गई. सिरनामा पंचायत के वार्ड न.13,14 एवं 15 में नल-जल की समस्या बताई गई.माधोपुर के वार्ड नं.11 में करीब 50 घरों में जलापूर्ति नहीं होने की बात बतायी गई.

माननीया चंडी प्रमुख ने प्रखंड के विकास के लिए पदाधिकारियों/कर्मियों के सहयोग सही ढंग से नहीं मिलने की शिकायत की जिस पर उप विकास आयुक्त ने काफी गंभीरता से लिया तथा सभी को निर्देश दिया कि माननीय जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य करें .सालेपुर पंचायत में इंदिरा आवास में बिना आवास बने तृतीय किश्त भुगतान की भी शिकायत की गई जिसकी जांच करवाने की बात उप विकास आयुक्त ने कही.

उप विकास आयुक्त ने पंचायती राज के द्वारा चल रही नल-जल की समीक्षा माननीय जन प्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायत पत्र के आलोक में किया तथा आवश्यक निर्देश दिया.माननीया अध्यक्ष जिला परिषद ने अमरौरा पंचायत में आंगनवाड़ी केंद्र संचालन में गड़बड़ी की बात कही जिस पर उप विकास आयुक्त ने जिला स्तर से जांच के आदेश दिए.

उप विकास आयुक्त ने माननीय जन प्रतिनिधियों से मिली शिकायत तथा नल-जल के अद्यतन प्रतिवेदन में मेल नहीं रहने पर तथा जानकारी नहीं रहने पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी,चंडी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा.

उक्त बैठक में अपर समाहर्ता श्री मंजीत कुमार सहित कई जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.


आलोक कुमार


शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

लोक का चुनाव प्रभारी मनोनीत


पटना: इस समय गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से भाजपा नेता मनसुख वसावा सांसद हैं, उन्होंने साल 2014 के चुनाव इस सीट पर कांग्रेस के जैयशभाई पटेल को 153, 273 वोटों से हराया था.लोकसभा चुनाव को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल ने बिहार कांग्रेस सेवादल के संगठन प्रभारी श्री राज कुमार पूर्वे को गुजरात राज्य के भरूच लोक का चुनाव प्रभारी मनोनीत किया है.

इनके मनोनयन पर बधाई देने वालों में बिहार कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, राज किशोर सिंह, महामंत्री श्री ब्रह्मदेव चौरसिया, श्री रामबाबू साह, जसमीन अंसारी, विपिन झा, इजहार अंसारी, प्रेमनाथ राय शर्मा, मोहम्मद ऐनुल, आर0 के0 मंडल, विनोद मंडल, राजीव पाण्डेय आदि प्रमुख हैं.


आलोक कुमार 

वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित !

 पटना: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. इस समय भारत खतरे में है.आजकल भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कवायद तेज है.उसके लिए एक मसौदा तैयार किया जा रहा है.फिलहाल जो यहां मसौदा का प्रारूप बना है उसके अनुसार भारत के हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.यानी मतदान नहीं कर सकेेंगे.एक तरह से राजनीतिक हत्या कर दी जाएगी.



बता दें कि फरवरी 2022 में आयोजित माघ मेले के दौरान संगम तट पर संत सम्मेलन में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के साथ भारत को अपने संविधान के साथ हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए धर्म संसद में प्रस्ताव पारित हुआ था. तीन प्रस्ताव पारित किए गए थे.तीर्थराज प्रयागराज की धरती से हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने का साधु-संतों ने संकल्प लिये थे तो उस समय जोरदार जयघोष गूंजने लगे थे.इस दौरान संतों ने कहा था कि जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा, तब तक विश्व गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकेगा.    

तब प्रयागराज धर्म संसद में यह तय किया गया कि संत और धर्मगुरु इसके लिए एक मसौदा तैयार करेंगे जो एक राष्ट्र के गठन की स्थिति में ‘संविधान‘के रूप में गाइडबुक के रूप में कार्य करेगा.इस दौरान सनातनी हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए इस्लामी जिहाद के खिलाफ संतों से एकजुटता का आह्वान किया गया था.कहा गया कि अब अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का फर्क मिट जाना चाहिए.यह धर्म संसद महावीर मार्ग स्थित ब्रह्मर्षि आश्रम ट्रस्ट शिविर में आयोजित थी.  

इस संदर्भ में बताया गया कि हिंदू राष्ट्र के संविधान का मसौदा तैयार हो चुका है. मसौदे में विषयों को शामिल करने के साथ-साथ आम जनता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा.अभी तक 32 पृष्ठों का मसौदा तैयार किया गया है, प्रस्तावित गाइडबुक 750 पृष्ठों की होगी. यह विद्वानों व संतों के बीच मतैक्य स्थापित कर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है. इस मौजूदा मसौदे में कई चौंकाने वाली बातें हैं.    

इस कथित ड्राफ्ट में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.मसौदे में दिल्ली के बजाय वाराणसी को भारत की राजधानी बनाने का प्रस्ताव है. मसौदे के निर्माताओं के अनुसार वाराणसी सर्वज्ञता का केंद्र रहा है और इसलिए इसे हिंदू राष्ट्र में राजधानी बनाया जाना चाहिए. हालांकि शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि नाम केवल चर्चा के लिए है और अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. संभव है कि राजधानी के लिए उज्जैन जैसी कोई दूसरी जगह भी मानी जा सकती है.                        

वाराणसी में 30 संतों और विद्वानों ने इसे तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसमें मुस्लिमों और ईसाइयों को मताधिकार नहीं दिया गया है.विधि विशेषज्ञों एवं सनातन धर्म के विशेषज्ञों के सहयोग से ‘हिन्दू राष्ट्र संविधान निर्माण समिति‘ने इस मसौदे पर लोगों से विचार-विमर्श कर 2023 में प्रयागराज में होने वाले माघ मेले में इस प्रारूप को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है.मसौदे पर उनकी राय जानने के लिए लोगों के बीच जाएंगे.

अब धार्मिक विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने इसके लिए एक दस्तावेज तैयार किया है.यह शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप के नेतृत्व में उस विस्तृत दस्तावेज का एक हिस्सा है. कहा जा रहा है कि हिंदू राष्ट्र के संविधान के पहले मसौदे में शिक्षा, कानून-व्यवस्था, रक्षा, मतदान प्रणाली, रक्षा, राज्य के मुखिया के अधिकारों के बारे में बताया गया है.  

हिंदू राष्ट्र के संविधान में कहा गया है कि सभी लोगों को अनिवार्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा. खेती को टैक्स फ्री किया जाएगा. इस ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात मताधिकार को लेकर है. फिलहाल जो प्रारूप बना है उसके अनुसार हिंदुओं के अलावा अन्य जो दो धर्म के मतावलंबी हैं यानी मुस्लिम और ईसाई, उनको भारत में हर तरह के अधिकार प्राप्त होंगे. वो शिक्षा ग्रहण करने के लेकर रोज़गार, व्यवसाय सब कर सकेंगे. लेकिन उनको वोट देने का अधिकार नहीं होगा. यानी हिंदुओं जिसमें सिख, बौद्ध, जैन भी हैं, वो ही वोट दे सकेंगे. स्वामी आनंद स्वरूप कहते हैं ‘ ऐसा ही तो दूसरे देशों में है.तो फिर भारत में क्यों नहीं? इस्लामिक देश क्या वहां रहने वाले हिंदुओं को मत का अधिकार देते हैं? इस प्रारूप में वोट देने की आयु 16 वर्ष और चुनाव लड़ने की 25 वर्ष करने का भी प्रस्ताव किया गया है.

इस संविधान के कवर पेज पर अखंड भारत का नक्शा लगाया गया है. कवर पेज में कुछ मंदिरों के ऊपर भगवा झंडा फहराते हुए दिखाया गया है. ब्रिटिश कालीन नियम खत्म कर दिए जाएंगे. सब कुछ वर्ण व्यवस्था के आधार पर चलाया जाएगा. हर जाति के लोगों को सुविधा और सुरक्षा मिलेगी.

आलोक कुमार


गुरुवार, 18 अगस्त 2022

शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया

 स्मृति भवन में दशरथ मांझी द्वारा उपयोग में लाये गए छेनी हथौड़ा को रखने के लिए  लगाए गए डिस्प्ले यूनिट का हुआ लोकार्पण


गया:पर्वत पुरूष दशरथ मांझी के 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दशरथ मांझी महोत्सव, 2022 का आयोजन मोहड़ा प्रखंड के गहलोर पंचायत में आज किया गया.कार्यक्रम में सर्वप्रथम जिलाधिकारी, गया डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा कार्यक्रम के उपस्थित मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो देकर स्वागत किया गया. कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया.

स्वागत भाषण में जिला पदाधिकारी, गया डॉ त्यागराजन एसएम द्वारा बताया गया की आज माउन्टेन मैन के नाम से जग में विख्यात दशरथ मांझी की स्मृति में आयोजित दशरथ मांझी महोत्सव में उपस्थित माननीय पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी, माननीय मंत्री, ग्रामीण कार्य विभाग श्री श्रवण कुमार, माननीय मंत्री, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग श्री संतोष कुमार सुमन, मंचासीन माननीय सांसद, माननीय विधायक एवं गणमान्य व्यक्ति, देवियों, सज्जनों, बच्चों एवं मीडिया के प्रतिनिधिगण। इस कार्यक्रम में अपना बहुमूल्य समय देकर शामिल होने के लिए हम आप सबो का हार्दिक अभिनंदन करते हैं.

अपनी कर्मठता एवं दृढ़ संकल्प इच्छा शक्ति के द्वारा गया जिला के साथ-साथ बिहार को गौरवान्वित करने वाले पर्वत पुरूष दशरथ मांझी के सम्मान में आयोजित इस महोत्सव में मैं सर्वप्रथम गेहलौर की धरती का नमन करता हूँ, जिसने ऐसे जीवट पुरुष को जन्म दिया.

दशरथ मांझी (1929-2007) गया जिला के गेहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे. केवल हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली.22 वर्षों के परिश्रम के बाद, दशरथ मांझी के बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को लगभग 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर कर दिया.वे जिस गांव में रहते थे, वहां से पास के कस्बे जाने के लिए एक पूरा पहाड़ (गहलोर पर्वत) पार करना पड़ता था. उनके गांव में उन दिनों न बिजली थी, न पानी. ऐसे में छोटी से छोटी जरूरत के लिए उस पूरे पहाड़ को या तो पार करना पड़ता था, या उसका चक्कर लगाकर जाना पड़ता था. पति के लिए खाना ले जाने के क्रम में उनकी पत्नी फगुनी देवी पहाड़ के दर्रे में गिर गयीं और उनका निधन हो गया. उनकी पत्नी की मौत दवाइयों के अभाव में हो गया, क्योंकि बाजार दूर था. इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले दम पर पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकालेंगे और अतरी व वजीरगंज की दूरी को कम करेंगे.

17 अगस्त, 2007 को 73 साल की उम्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में कैंसर से पीड़ित दशरथ माँझी का निधन हो गया. बिहार सरकार के द्वारा राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. वे ‘माउंटेन मैन‘ के रूप में विख्यात हैं. उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में ‘पद्म‘ के लिए उनके नाम का प्रस्ताव रखा.

आज उनकी कृति वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बन गया है. उनकी कृति ने अपने यश का डंका न सिर्फ भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में बजा रखा है.आज वॉलीवुड, हॉलीवुड के बड़े-बड़े निर्माताओं ने उन पर कई फिल्में बनायी, जो अत्यंत लोकप्रिय है. ‘पहाड़ से उँचा आदमी‘, ‘डिजाइन्ड वाई लव‘,"THE MAN WHO MOVED THE MOUNTAIN", MANJHI-THE MOUNTAIN MAN" फिल्म ने काफी लोकप्रियता हासिल की.

’जिलाधिकारी ने बताया की कार्यक्रम से पूर्व मोहड़ा प्रखंड में जिला स्तरीय जनता दरबार का आयोजन किया गया है, जिसमे आमजन द्वारा बढ़ चढ़ कर भाग लिया गया.प्राप्त आवेदनों में अधिकतर आवेदन का निष्पादन ऑन द स्पॉट किया गया.’

 माननीय मुख्यमंत्री द्वारा गेहलौर में 3 किमी लंबी एक सड़क हॉस्पिटल, पंचायत भवन, किसान भवन, ओ०पी०, समाधि स्थल बनवाया तथा गहलौर का पर्यटकीय विकास किया एवं वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करवाया गया है. पहाड़ काटने के प्रयोग में लाए गए हथौड़ा और छेनी को गेहलौर में बिहार सरकार द्वारा निर्मित स्मृति भवन में पर्यटकों को देखने के उद्देश्य से निर्माण कराया गया.


बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम, पटना द्वारा दशरथ मांझी स्मारक स्थल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण कार्य में चारदीवारी का निर्माण, गेट का निर्माण कार्य, समाधि स्थल का कार्य, सोलर लाइट का अधिष्ठापन एवं पार्किंग का निर्माण कार्य कराया गया है. साथ ही जन सुविधा का निर्माण, पानी का प्याऊ ट्यूबवेल एवं पहुंच पथ का निर्माण एवं दशरथ मांझी मूर्ति का स्थापना कार्य कराया गया है. साथ ही पर्वत पुरुष दशरथ मांझी स्मृति भवन का निर्माण कार्य करवाया गया है.

कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमण्डल, गया द्वारा रॉक कट सड़क के दूसरी तरफ पूर्वी छोर पर प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य एवं स्मारक स्थल पर कानॉपी निर्माण कार्य कराया गया है, इन सभी योजनाओं में 146.26 लाख रूपये खर्च किया गया है.  

 


वर्ष 2022 में दशरथ मांझी स्मारक स्थल एवं इसके आस-पास के जगहों पर बंद पड़े सभी सोलर लाईट को इलेक्ट्रीक कनेक्शन कराते हुए चालू कराया गया है.साथ ही हाईमास्ट लाइट के सभी खराब बल्ब को बदल दिया गया है. स्मारक स्थल पर टूटे हुए टाइल्स को हटाकर नया टाइल्स लगाया गया. स्मृति भवन में दशरथ मांझी द्वारा उपयोग में लाए गए छेनी हथौड़ा को रखने के लिए डिस्प्ले यूनिट का निर्माण एवं स्मृति भवन का मरम्मती कार्य कराया गया है. इस कार्य के लिए लगभग 06 लाख रुपये व्यय हुआ है. रॉक कट सड़क के दोनों किनारों में डेकोरेटेड प्लांट लगाया जा रहा है.


सरकार आम लोगों की सुविधा एवं बिहार के विकास के लिए कृतसंकल्प है. हर घर में नल का जल, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन की व्यवस्था कर रही है। सभी वृद्धजनों को पेंशन प्रदान कर रही है, युवाओं को शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास के लिए राज्यव्यापी कार्यक्रम चलाया जा रहा है. शराबबंदी से समाज में खुशनुमा माहौल बना है. बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा, विकास की मुकम्मल व्यवस्था की गयी.महिलाओं को रोजगार में 35 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा गया है.

आनेवाली पीढ़ी दशरथ मांझी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेती रहेगी.उनके कार्यवीरता की गाथा युग-युगान्तर तक गायी जाती रहेगी। इन्हीं शब्दों के साथ अपनी वाणी को विराम देते है.


आलोक कुमार

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