मंगलवार, 23 अगस्त 2022

13 दिन बाद भी विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया

 

पटना: बिहार में सरकार बदलने के 13 दिन बाद भी विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है.जिसके कारण संवैधानिक संकट बन गया है.बिहार विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं देंगे.यह कहा जा सकता है कि इस्तीफा देने के मसले पर अड़ गए हैं. किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देंगे.

बिहार में सत्ता परिवर्तन 10 अगस्त को हुआ.लगभग 13 दिन हो गए.अब तक विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है.सत्ताधारी जेडीयू और आरजेडी, लगातार इस्तीफे की मांग कर रही है, लेकिन वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं.विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि जो उन्हें नोटिस दी गई है, वह नियमों के खिलाफ है.

पटना में पत्रकारों से बात करते हुए स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विगत दिनों सत्ता को बचाए रखने के लिए जो कुछ भी हुआ, उस पर इस समय कुछ भी कहना उचित नहीं होगा. लेकिन इस दौरान विधायिका की प्रतिष्ठा पर जो प्रश्न खड़े किए गए हैं, उस पर चुप रह जाना भी मेरे लिए अनुचित होगा. विजय सिन्हा ने कहा कि जब तक दायित्व के साथ बंधे हैं, तब तक अपने व्यक्तिगत सम्मान से ऊपर लोकतंत्र की गरिमा को सुरक्षित रखना मेरा कर्तव्य है. इसलिए जब विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तब मैंने अपने ऊपर विश्वास की कमी के रूप में नहीं देखा.अविश्वास का प्रस्ताव का जो नोटिस सभा सचिवालय को दिया गया है, इसके नियमों और प्रावधानों की अनदेखी की गई है.इसलिए इस नोटिस को अस्वीकृत करना मेरा स्वाभाविक जिम्मेवारी है.

बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने साफ तौर पर कह दिया है कि वे पद से इस्तीफा नहीं देंगे. विजय सिन्हा ने कहा कि मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, लेकिन मैंने खुद पर विश्वास रखा. अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सचिवालय को दिया गया, जिसमें नियमों की अनदेखी की गई है. आसन से बंधे होने के कारण से नोटिस में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और निराधार आरोप लगाए गए हैं, जो व्यक्तिगत स्तर के हैं. ऐसे में उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद ललित यादव की अध्यक्षता में महागठबंधन के नेताओं ने मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था.बिहार विधानसभा के सचिव के समक्ष 10 अगस्त को महागठबंधन के 50 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा गया था. अविश्वास प्रस्ताव के तहत विजय कुमार सिन्हा को अध्यक्ष के रूप में अपना पद बरकरार रखने के लिए विधानसभा के अंदर बहुमत साबित करना होगा.लेकिन अब उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया है.

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के 14 दिन बाद उस पर चर्चा हो सकती है.नोटिस दिए जाने का बाद विधानसभा की कार्यवाही सत्र शुरू होने पर चर्चा के लिए यह सबसे पहला एजेंडा होता है. जब अविश्वास प्रस्ताव लिया जाता है, तो स्पीकर खुद अध्यक्षता नहीं कर सकता. ऐसे में डिप्टी स्पीकर काम संभालेंगे. विधानसभा में जेडीयू नेता महेश्वर हजारी डिप्टी स्पीकर हैं. कानून के मुताबिक विजय कुमार सिन्हा अधिकतम 14 दिन स्पीकर की कुर्सी पर रह सकते हैं. वहीं महागठबंधन को 15 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में 14 दिनों का समय 23 अगस्त को खत्म हो रहा है और सत्र 24 अगस्त को होगा. लेकिन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही स्पीकर ने कह दिया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे.

बता दें कि बिहार विधानसभा के कार्य संचालन नियमावली में अध्यक्ष को हटाने और नये अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया निर्धारित है. खास बात यह है कि बिहार के राज्यपाल द्वारा अध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि निर्धारित की जाती है. तकनीकी रूप से देखा जाए तो विधानसभा अध्यक्ष का पद अभी खाली नहीं है और ना ही इस तरह की कोई सूचना विधानसभा की ओर से महामहिम राज्यपाल को दी गई है. जहां तक विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन की बात है तो पद रिक्ति की सूचना मिलने के बाद राज्यपाल द्वारा तिथि निर्धारित की जाती है. नियम के अनुसार, निर्वाचन की तिथि के एक दिन पहले 12 बजे दिन तक ही अध्यक्ष बनने को इच्छुक सदस्य विधानसभा सचिव के पास नामांकन दर्ज कर सकते हैं.

बता दें कि नई सरकार को विश्वास मत हासिल करने के लिए 24 अगस्त को विधानसभा की बैठक बुलाई गई है. दो दिवसीय सत्र की कार्ययोजना मौजूदा अध्यक्ष को ही बनानी है. बिहार विधानसभा में दो ही कार्य किये जाने हैं. पहला सरकार का बहुमत हासिल करना और दूसरा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराना. हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि इनमें से पहला कार्य कौन होगा और दूसरा कौन सा.हालांकि विधानसभा स्पीकर ने सत्ता पक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. ऐसे में अब आगे क्या होगा, इस पर इस पर सबकी नजर रहेगी.

 जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा,‘महागठबंधन के विधायकों ने मंगलवार को (जिस दिन नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में पद छोड़ दिया था) बिहार विधानसभा के सचिव को एक नोटिस भेजा, जिसमें सदन के अध्यक्ष को उनके पद से हटाने की मांग की गई है.’ उन्होंने कहा कि महागठबंधन के कई विधायकों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे. चौधरी ने कहा कि इसकी एक हार्ड कॉपी भी बुधवार को विधानसभा सचिवालय को सौंपी गई. चौधरी ने कहा कि सदन के वर्तमान अध्यक्ष सिन्हा के खिलाफ यह प्रस्ताव नीतीश कुमार की ओर से विश्वास मत लाने के लिए सत्र आहूत किए जाने के दौरान लाया जाएगा. 

जेडीयू के एक अन्य नेता ने कहा, ‘हमें पता चला कि वर्तमान अध्यक्ष ने मंगलवार को एक बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) नेता की अध्यक्षता में आचार समिति की बैठक बुलाई और पिछले साल मार्च में विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम के अधिनियम के दौरान विधानसभा में अराजकता पर एक ताजा रिपोर्ट प्राप्त की थी.’ उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की मंशा बहुत संदिग्ध थी, क्योंकि उन्होंने परंपरा के अनुसार पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था.

जब अविश्वास प्रस्ताव लिया जाता है, तो स्पीकर खुद अध्यक्षता नहीं कर सकता. ऐसे में डिप्टी स्पीकर काम संभालेंगे.' विधानसभा में जदयू नेता महेश्वर हजारी डिप्टी स्पीकर हैं.पूर्व स्पीकर विजय कुमार चौधरी ने बताया कि कानून के मुताबिक विजय कुमार सिन्हा अधिकतम 14 दिन स्पीकर की कुर्सी पर रह सकते हैं। ही महागठबंधन को 15 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा. विजय कुमार चौधरी ने कहा, 'मुझे भी पता चला है कि महागठबंधन ने अविश्वास नोटिस दिया है. ऐसे में 14 दिनों का समय 23 अगस्त को खत्म हो रहा है और सत्र 24 अगस्त को होगा.'

आलोक कुमार

सितंबर में नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना

 * पहले चेहरे का स्कैन होगा,तब वोट डालेंगे


पटनाः राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद है.उन्होंने बिहार में आगामी नगर निकाय चुनाव में फर्जी मतदान रोकने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से निपटने के उपायों पर काम शुरू कर दिया है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरपालिका चुनाव को लेकर पहली बार जिलों के अधिकारियों के साथ विस्तार से समीक्षा की. जिसमें यह सहमति बनी कि नगरपालिका चुनाव में गड़बड़ी और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाताओं की पहचान उनके चेहरे से की जाएगी. इससे पहले पंचायत चुनाव में अंगुली (फिंगर) के माध्यम से मतदाताओं की पहचान की व्यवस्था की गई थी.इस बार चेहरे के माध्यम से मतदाताओं की पहचान करने से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी.

वहीं जानकार लोगों का कहना है कि सितंबर में नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और अक्टूबर में मतदान कराए जाने के आसार हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को चुनाव की तैयारी तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया है. इसमें सभी जिलों को चुनाव कोषांगों के गठन करने, मतदाता सूची का सुधार कर जल्द अनुमोदन हासिल करने के लिए भी कहा गया है.

गत दिनों राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद की अध्यक्षता में नगर निकाय आम चुनाव, 2022 को लेकर सभी जिलों के जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी के साथ बैठक की गयी.बैठक में सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं सभी अनुमंडलाधिकारी भी शामिल हुए. वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में आयोग के आयुक्त डॉ. प्रसाद ने निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की. ईवीएम की कमीशनिंग संबंधी कार्य, निकाय के तीन पदों के अनुरूप मतगणना हॉल का आकलन, चुनाव में होने वाले खर्च को लेकर नगर विकास विभाग को राशि आवंटन के लिए पत्र भेजने, मतदान सामग्रियों की व्यवस्था एवं ससमय वितरण इत्यादि को लेकर चर्चा की गयी.बैठक में आयोग के सचिव मुकेश सिन्हा सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे.

मेयर व डिप्टी मेयर का आरक्षण निर्धारण आयोग करेगा सूत्रों ने बताया कि आयोग ने निर्देश दिया कि निकाय चुनाव में नगर निगम के मेयर/उप मेयर, नगर परिषद एवं नगर पंचायत के मुख्य पार्षद एवं उप मुख्य पार्षद के आरक्षण का निर्धारण आयोग करेगा. वहीं, वार्डवार पार्षदों का आरक्षण का निर्धारण जिला के स्तर से किया जाएगा. इसके लिए 25 से 31 अगस्त तक का समय निर्धारित किया गया है.

इस संदर्भ में सभी डीएम को निर्देश दिया गया है कि मतदाताओं की पहचान इस बार चेहरे के माध्यम से की जाएगी. मेयर/ उप मेयर व मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के पदों के लिए आरक्षण निर्धारण आयोग करेगा.वार्डवार पार्षदों का आरक्षण का निर्धारण जिला के स्तर से होगा.सभी जिलों में चुनाव संबंधी कोषांगों का गठन जल्द करने का निर्देश.मतदाता सूची में सुधार कर उस पर अनुमोदन प्राप्त करने को कहा गया.मतदान के लिए बूथों का गठन कर जीआईएस मैपिंग की जाएगी और ईवीएम की जरूरत का आकलन व फर्स्ट लेवल चेकिंग की जाएगी.

आलोक कुमार

सोमवार, 22 अगस्त 2022

पटना में हार्ट अटैक से संजय जेम्स की मौत

* दिल्ली से मां मेरी जेम्स से मिलने आया था संजय जेम्स

*पटना में हार्ट अटैक से संजय जेम्स की मौत




पटना: नई दिल्ली से अकेले विलियम जेम्स उर्फ संजय चलकर पटना 15 अगस्त को शाम 7ः 30 बजे पटना मां मेरी जेम्स के घर बोरिंग रोड पहुंचा.यहां पर मां के साथ संजय जेम्स की पत्नी कंचन रहती थीं.दोनों के सामने ही संजय जेम्स को गहरा हृदयाघात लगा.  संजय जेम्स  20 अगस्त को सुबह 6ः 00 बजे दम तोड़ दिया.

एकलौता पुत्र संजय जेम्स थे : नहीं रहा संजय जेम्स (विलियम जेम्स): पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया क्रिश्चियन कॉलोनी के रहवासी जेम्स  फिदेलिस थे. उनका विवाह मेरी से हुआ था.सीतामढ़ी जिले के मोरपा कोठी के की मेरी रहवासी है. जेम्स और मेरी का एकलौता पुत्र संजय जेम्स थे. इस बीच संजय जेम्स के सिर पर से पिताश्री की छाया उठ गई.मेरी निधन हो गया है.इसके बाद संजय जेम्स की मां मेरी जेम्स बेतिया से पलायन कर पटना में रहने लगी.यहां पर होम नर्स के रूप में काम करने लगी.


फिलहाल संजय दिल्ली में रहता था :
बेतिया नगर निगम के वार्ड नं.7 के प्रत्याशी गोडेन अंथोनी ठाकुर ने कहा कि संजय जेम्स ( विलियम जेम्स) मेरा  फुफेरा भतीजा था.वह सुरेश लुईस का मौसेरा भाई था.वह दिल्ली के एक हॉस्पिटल का मेडिकल स्टाफ था.उनकी शादी हो चुकी है.आरा की रहने वाली कंचन से शादी हुई थी.करीब एक साल पहले ही शादी हुई थी.अभी कोई बाल बच्चा नहीं हुआ है.उनकी पत्नी कंचन सासू मां के घर बोरिंग रोड पटना में रहती थी.दिल्ली से संजय जेम्स व्यक्तिगत काम से और पत्नी कंचन को पटना से ले जाने के लिए आए थे.

प्रत्याशी गोडेन अंथोनी ठाकुर ने कहाः यह दुर्भाग्यपूर्ण संयोग ही था कि मां मेरी और पत्नी कंचन के सामने ही संजय को जानलेवा ह्दयाघात अटैक कर दिया.दोनों महिलाएं किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये.इस बीच इस धरती को छोड़कर संजय जेम्स सुबह 6ः00 बजे प्रभु के प्यारे हो गए.अंतिम सामाजिक व धार्मिक कर्तव्य निभाकर पार्थिव का कुर्जी कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया.करीब 32 साल के थे.स्व.जेम्स फिदेलिस के भाई हैं राजू फिदेलिस.राजू   फिदेलिस के भतीजा हैं संजय जेम्स. राजू इलेक्ट्रिशियन हैं. वह अभी बेतिया में रहते हैं. उनका घर मधु चिकन वाली गली में हैं.


ओ जाने वाले हो सके तो लौट आनाः
सीतामढ़ी जिले के मोरपा कोठी के रहवासी पूर्व   पंचायत समिति के सदस्य बैरगनिया सुरेश लुईस का कहना है कि मेरा मौसेरा भाई विलियम जेम्स है.परंतु वह संजय जेम्स नाम से विख्यात था.उसका जन्म 25/06/1990 को बेतिया में हुआ था.उन्होंने कहा कि मेरी मौसी मेरी जेम्स का नैहर मोरपा कोठी में है.वे कहते है कि पहले मौसा जेम्स फिदेलिस दुनिया से विदा हो गये.अब मेरा मौसेरा भाई संजय जेम्स प्रभु के प्यारे हो गए 20/08/2022 को सुबह 06: 00 बजे अंतिम सांस ली.इस तरह मौसी मेरी जेम्स और उनकी पुत्रवधु कंचन अकेली हो गयी.उन्होंने कहा कि मैंने अपने नाना के कब्र में ही संजय जेम्स को जगह दे दी.कारण की कुर्जी कब्रिस्तान में जगह नहीं है.एक कब्र के अंदर कई लोगों को दफनाया जा रहा है.20/08/2022 को दोपहर 2: 00 बजे दफन कर दिया गया.


आलोक कुमार


खाद्यान्न का वितरण लाभुकों के बीच जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के माध्यम से ससमय करने का निर्देश

 


किशनगंज: आज श्री श्रीकांत शास्त्री भा०प्र०से०, जिला पदाधिकारी, किशनगंज की अध्यक्षता में जिला आपूर्ति टास्क फोर्स की समीक्षात्मक बैठक आहूत की गई.

समीक्षात्मक बैठक में सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी / प्रखण्ड आपूर्ति निरीक्षक को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत खाद्यान्न का वितरण लाभुकों के बीच जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के माध्यम से ससमय करने का निर्देश दिया गया.

जिला प्रबंधक, रा०वा०निगम, किशनगंज को परिवहन - सह - हथालन अभिकर्ता, मुख्य के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से खाद्यान्न का उठाव कर राज्य खाद्य निगम के गोदाम में समय आपूर्ति कराने का निर्देश दिया गया, जिससे खाद्यान्न का वितरण ज०वि०प्र० विक्रेताओं को ससमय किया जा सके. भारतीय खाद्य निगम के गोदामों के लिए खाद्यान्न ले जाने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच करने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी, किशनगंज को निर्देशित किया गया.

जिला प्रबंधक, रा० खा० निगम, किशनगंज को सभी टी. पी. डी. एस. गोदामों में सी. सी. टी. भी. कैमरा लगाने का निर्देश दिया गया.बैठक में जिला आपूर्ति पदाधिकारी किशनगंज अनुमंडल पदाधिकारी किशनगंज, जिला प्रबंधक  रा० खा० निगम   किशनगंज, सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, सभी सहायक गोदाम प्रबंधक रा० खा० निगम, परिवहन-सह-हथालन अभिकर्ता, मुख्य एवं डी. एस. डी. आदि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

 

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सेना द्वारा 20 वर्षों के लिए प्रस्तावित रूटीन तोपाभ्यास के अवधि विस्तार पर रोक लगाई

 


रांची: अभी नहीं हुआ हैं नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द! माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सेना द्वारा 20 वर्षों के लिए प्रस्तावित रूटीन तोपाभ्यास के अवधि विस्तार पर रोक लगाई है. इसके लिए केन्द्रीय जन संघर्ष समिति माननीय मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती है. साथ ही माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द करने के लिए  विधिवत अधिसूचना जारी करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री व केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को लिखा जाए.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रद्द नहीं हुआ है. अवधि विस्तार पर रोक लगाना निश्चय ही हमारे संघर्ष की जीत की एक और कदम है. पहली जीत हमने तब हासिल की थी जब 22 मार्च 1994 को तोप अभ्यास के लिए आई सेना को वापस किया था.  जिसके लिए अभी हमें और संघर्ष करना है. जब तक सरकार द्वारा नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द करने की अधिसूचना जारी नहीं करती.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित लोगों द्वारा पिछले लगभग 30 वर्षों से लगातार नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को रद्द करने के लिए विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था. वर्तमान में भी प्रत्येक वर्ष की भांति नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में 22-23 मार्च को विरोध प्रदर्शन किया गया था. अब ऐसे में अधिसूचना को आगे और विस्तार नहीं होने से आदिवासियों के 30 वर्षों का संघर्ष भी समाप्त होगा और इलाके के लोगों को गोलियों की तड़तड़ाहट नहीं सुनाई देगी.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार जिला के करीब 39 राजस्व ग्रामों द्वारा आम सभा के माध्यम से झारखंड के राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा बताया गया था कि लातेहार व गुमला जिला पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आता है. यहां पेसा एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत ग्राम सभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है. इसी के तहत नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित इलाके के ग्राम प्रधानों ने प्रभावित जनता की मांग पर ग्राम सभा का आयोजन कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिए गांव की सीमा के अन्दर की जमीन सेना के फायरिंग अभ्यास के लिए उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया था. साथ ही नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को आगे और विस्तार न कर विधिवत अधिसूचना प्रकाशित कर परियोजना को रद्द करने का अनुरोध किया था.

बता दें, 1964 में शुरू हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में अवधि विस्तार किया गया था. मुख्यमंत्री ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित नहीं करने  के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की है.फायरिंग रेंज के होने के चलते एक-दूसरे से सटे दोनों जिलों के दर्जनों गांव के आदिवासी आज तक विस्थापन के भय से उबर नहीं पाए हैं. फायरिंग रेंज के होने के चलते एक-दूसरे से सटे दोनों जिलों के दर्जनों गांव के आदिवासी आज तक विस्थापन के भय से उबर नहीं पाए हैं. इनके भीतर यह डर 1991-92 के समय से है जब अविभाजित बिहार सरकार ने गजट जारी कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के नाम से पहचानी जाने वाली सैन्य छावनी के लिए लातेहार और गुमला के 157 मौजों  के मातहत 245 गांव की 1471 वर्ग किलोमीटर भूमि को अधिसूचित किया था.8 जनवरी 2022 को नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन संघर्ष समिति की जारी मासिक बैठक.  

समिति की स्थापना 1993 में हुई थी. हर साल 22 और 23 मार्च को फायरिंग रेंज को रद्द किए जाने का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करने के लिए अधिसूचित गांव के हजारों आदिवासी जमा होते हैं.झारखंड के सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) विधायक विनोद सिंह ने 20 दिसंबर 2021 को जारी विधानसभा सत्र में राज्य सरकार से पूछा था कि बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या-1862, दिनांक-20.08.1999 के अनुसार, “नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का उक्त क्षेत्र के ग्रामीण व्यापक विरोध कर रहे हैं? क्या यह एक ईको सेंसिटिव क्षेत्र है?”सरकर ने प्रश्न में कही बात को स्वीकारा लेकिन विधायक द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल, कि “क्या सरकार 11 मई 2022 को समाप्त हो रही फायरिंग रेंज की समयावधि विस्तार पर रोक लगाने का विचार रखती है? अगर हां तो कब तक और अगर नहीं, तो क्यों?” के जवाब में सरकार ने बताया कि इस संबंध में विभाग को अब तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है.

झारखंड के गुमला और लातेहार जिले के आदिवासी गांवों के लोगों के लिए सरकार के इस जवाब का सीधा और स्पष्ट मतलब है कि सरकारी कागजों में उनका गांव फायरिंग रेंज के तौर पर अभी भी चिन्हित है.इस फायरिंग रेंज के विरोध में बीते तीन दशक से यहां के ग्रामीण आंदोलनरत हैं. इन जिलों के ग्रामीणों के मुताबिक उसने फायरिंग रेंज को रद्द किए जाने का वादा और भरोसा भाषणों में तो सभी नेताओं ने किया है लेकिन अपने वादों पर कभी अमल नहीं किया. उनके दावे की तस्दीक क्षेत्र के दर्जनों अखबार और पत्रिका में प्रकाशित खबरों से की जा सकती है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुरोध है अनुसूचित जनजातियां समाप्त होती जा रही है. आदिवासी संकट में हैं, उन्हें बचाना परम धर्म है. केंद्र सरकार नेतरहाट फील्ड रेंज को हमेशा के लिए रद्द करना होगा. अन्यथा सिदो कान्हू के समय से आज तक जिस तरह आंदोलन चला उस तरह का आंदोलन जारी रहेगा. अनिल पन्ना, प्रफुल्ल लिंडा, नदीम खान, दीपा मिंज, सुषमा बिरुली समेत अन्य ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम का आयोजन महेंद्र पीटर तिग्गा ने किया.

आलोक कुमार


नगर निकायों में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था के तहत ही 248 नगर निकायों में चुनाव होंगे

  


पटना: कतिपय कारणों से बिहार में नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं हो सका है. अब चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट आया है.राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और नगरपालिका को लेटर जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि नगर निकायों में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था के तहत ही 248 नगर निकायों में चुनाव होंगे. इस लेटर में  172 नवगठित, उत्क्रमित या क्षेत्र विस्तारित नगर निकाय हैं, जबकि 10 यथास्थिति वाले नगर निकाय शामिल हैं. यथास्थिति वाले नगर निकायों में नगर निगम की बात करें तो इसमें मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, बेगूसराय के साथ ही नगर परिषद हिलसा, अरवल, बेनीपुर, एकमा बाजार, परसा बाजार के साथ नगर पंचायत मोहनिया को रखा गया है.

इसके अलावा बताया गया है कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 12(2) के मुताबिक़ हर नगरपालिका में सदस्यों के कुल स्थानों का 50 प्रतिशत के निकट, लेकिन इससे अधिक स्थान के लिए आरक्षण किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का मापदंड निर्धारित किया गया है. सभी तरह के आरक्षण का प्रावधान 50 प्रतिशत के भीतर ही होगा.

 बता दें अगर किसी कोटि में केवल एक पद है तो वह महिला के लिए रिजर्व्ड नहीं होगा. इसके साथ ही ऐसे नगर निकाय, जिनका गठन पहले हो चुका है, उसमें 62 पार्षदों के आरक्षण में बिहार नगरपालिका अधिनियम-12 के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. लेटर में इस बात की भी चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के क्रम में नगर विकास और आवास विभाग द्वारा राज्य सरकार का फैसला उपलब्ध कराया गया है. बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 (यथा संशोधित) और बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 2007 (यथा संशोधित) के अनुसार अलग -अलग कोटि के लिए आरक्षण निर्धारित किया जाएगा.

 बता दें राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की नगरपालिकाओं के वार्डों के गठन का कार्य पांच चरणों में कराया है, साथ ही साथ इन नगर निकायों की मतदाता सूची भी नए ढंग से तैयार करवाई गई है. चार चरणों में परिसीमन का काम पूरा किया जाना है. आयोग ने सभी जिलों को कहा है कि सभी नगर निकायों के मतदान के लिए बूथों के गठन का कार्य भी हर हाल में पूरा कर लिया जाए.

पहले चरण में 144 नगर निकायों का जबकि दूसरे चरण में 80 नगर निकायों का साथ ही तीसरे चरण में छह नगर निकायों का और चौथे चरण में नौ नगर निकायों का एवं पांचवें चरण में पांच नगर निकायों के वार्डों का परिसीमन, मतदाता सूची की तैयारी और बूथों के गठन की तैयारी कराने का निर्देश जारी किया गया है.

राज्य निर्वाचन आयोग के लेटर आने के बाद सुस्त निवर्तमान पार्षदों के बीच संचार पैदा हो गया है.अब घर के बाहर फील्ड में देखे जा रहे हैं.वहीं पार्षद बनने की अभिलाषा रखने वाले लोगों से संपर्क करने लगे हैं. सबकी नजर पंचायत से नगर निकाय वाले पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 22 ए, 22 बी और 22 सी पर है.यहां के वार्ड पार्षद कुर्सी बचाने के फिराक में है. ऐसे पार्षदों को परास्त करने के प्रत्याशी मैदान में आ गये हैं.उनमें 22 ए से उमेश कुमार है.जो गत साल दशहरा पर्व से ही सक्रिय हैं.वहीं किंग मेकर के रूप में प्रचारित पप्पू राय 22 बी और 22 सी से अपने प्रत्याशी उतारने को कटिबद्ध हैं. इस बार 22 बी से रीता देवी और 22 सी से निवर्तमान डिप्टी मेयर रजनी देवी को मेयर पद से भी चुनाव लड़ा रहे हैं.इसके अलावे अनेक प्रत्याशी है जो पार्षद बनने को बेताब हैं.

अब सभी निगाह निर्वाचन आयोग पर है कि कब चुनाव का शंखनाद कर रहे हैं. संभवतः अक्टूबर में चुनाव हो सकता है.यह चुनाव दिलचस्प होगा कारण कि मेयर और डिप्टी मेयर को वोटर ही प्रत्यक्ष वोट के द्वारा चुनाव करेंगे.


आलोक कुमार

रविवार, 21 अगस्त 2022

जनप्रतिनिधियों के शिकायतों सुझावों की जानकारी देनी थी.

  


चंडीः नालंदा जिले के चंडी प्रखंड परिसर स्थित सभागार में उप विकास आयुक्त श्री वैभव श्रीवास्तव के अध्यक्षता में माननीय जन प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की बैठक हुई.सभी माननीय जन प्रतिनिधियों ने चंडी के पंचायतों से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की स्थानीय स्तर पर हो रही खामियों की जानकारी दी.

बताते चलें कि इस बैठक के पूर्व कई विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर द्वारा प्रखंड स्तर पर चल रही योजनाओं के निरीक्षण करने के आदेश दिए गए थे. निरीक्षणोपरांत उन्हें उक्त बैठक में जनप्रतिनिधियों के शिकायतों/ सुझावों की जानकारी देनी थी.

उप विकास आयुक्त के आगमन के पूर्व कई जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने इस प्रखंड में अपने संबंधित कर्मियों/अधिकारियों के साथ बैठक कर रखा था.

माननीय जन प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी समस्याएं बताई जिसे उप विकास आयुक्त ने गौर से सुना.ज्यादातर शिकायतें नल-जल,बिजली तथा कल्याणकारी योजनाओं के लिए भू-अनुपलब्धता की थी.

चंडी प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष ने कचड़ा प्रबंधन तथा पंचायत सरकार भवन हेतु भूमि अनुपलब्धता की बात बताई.उप  विकास आयुक्त ने अंचलाधिकारी को निर्देशित किया.सालेपुर पंचायत में वार्ड नं.5,6,13 एवं 14 में सात निश्चय के कार्यों के भुगतान लंबित की शिकायत भी की गई.

माधोपुर पंचायत के वार्ड न.14 में आंगनवाड़ी भवन निर्माण के लिए भूमि अनुपलब्धता की बात बतायी गयी,जिस पर उप विकास आयुक्त ने भूमि चिन्हित करने का आदेश अंचलाधिकारी को दिया.उन्होंने कहा कि अगर चिन्हित जमीन अतिक्रमित पायी जाती है तो उसे अतिक्रमण मुक्त कराई जाएगी.

महकार पंचायत के प्राथमिक विद्यालय गौरी के विद्यालय भवन जर्जर होने की शिकायत की गई. सिरनामा पंचायत के वार्ड न.13,14 एवं 15 में नल-जल की समस्या बताई गई.माधोपुर के वार्ड नं.11 में करीब 50 घरों में जलापूर्ति नहीं होने की बात बतायी गई.

माननीया चंडी प्रमुख ने प्रखंड के विकास के लिए पदाधिकारियों/कर्मियों के सहयोग सही ढंग से नहीं मिलने की शिकायत की जिस पर उप विकास आयुक्त ने काफी गंभीरता से लिया तथा सभी को निर्देश दिया कि माननीय जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य करें .सालेपुर पंचायत में इंदिरा आवास में बिना आवास बने तृतीय किश्त भुगतान की भी शिकायत की गई जिसकी जांच करवाने की बात उप विकास आयुक्त ने कही.

उप विकास आयुक्त ने पंचायती राज के द्वारा चल रही नल-जल की समीक्षा माननीय जन प्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायत पत्र के आलोक में किया तथा आवश्यक निर्देश दिया.माननीया अध्यक्ष जिला परिषद ने अमरौरा पंचायत में आंगनवाड़ी केंद्र संचालन में गड़बड़ी की बात कही जिस पर उप विकास आयुक्त ने जिला स्तर से जांच के आदेश दिए.

उप विकास आयुक्त ने माननीय जन प्रतिनिधियों से मिली शिकायत तथा नल-जल के अद्यतन प्रतिवेदन में मेल नहीं रहने पर तथा जानकारी नहीं रहने पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी,चंडी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा.

उक्त बैठक में अपर समाहर्ता श्री मंजीत कुमार सहित कई जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.


आलोक कुमार


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