*शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर
शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर
असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती
असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती
समेली.कटिहार के समेली प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राज मलहरिया में मुखिया राज कुमार भारती ने सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए करीब 400 असहाय वृद्धजनों, विकलांगजनों और घुटने-कमर-कान की बीमारी से पीड़ित परिवारों के बीच बहुमूल्य कीट का वितरण किया.
यह वितरण पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 9 तथा 11, 12 और 13 में किया गया. इस अवसर पर व्हीलचेयर, घुटने व कमर का बेल्ट, कान की मशीन, स्टिक-छड़ी आदि उपकरण बड़े पैमाने पर वितरित किए गए.
मुखिया भारती ने बताया कि वितरण से पहले पंचायत का सघन सर्वेक्षण कराया गया था, जिसमें पाया गया कि अधिकांश वृद्धजन और दिव्यांगों चलने-फिरने में असमर्थ हैं या गंभीर रोगों से जूझ रहे हैं.इसी आधार पर वयोश्री योजना (आसरा), भारत सरकार की मदद से यह पहल की गई.
कार्यक्रम के दौरान मुखिया ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनका लक्ष्य है कि पंचायत के 1000 पीड़ित परिवारों तक इस तरह की सहायता पहुँचे.
इस वितरण कार्यक्रम में सरपंच प्रभाष कुमार मंडल, उप मुखिया चंदन कुमार, वार्ड सदस्य लुशी कुमारी, प्रीति कुमारी, वार्ड प्रतिनिधि चंदन रविदास, बबलू कुमार, पंच लुचाय मंडल, सोमिजा खातून समेत कई जनप्रतिनिधि सक्रिय रहे.
ग्रामीणों और लाभार्थियों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता का नजारा इस बात का प्रमाण था कि यह पहल उनके जीवन में राहत और उम्मीद की किरण लेकर आई है.
आलोक कुमार
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है
उसकी 115 वीं जन्म जयंती है
कोलकाता . सर्वप्रथम मदर टेरेसा अपने पल्ली में एक जेसुइट पादरी द्वारा संचालित सोडालिटी नामक एक युवा समूह में शामिल हुईं और इसी में उनकी भागीदारी ने उन्हें एक मिशनरी नन के रूप में सेवा करने के लिए प्रेरित किया.
वह 17 साल की उम्र में लोरेटो की सिस्टर्स में शामिल हो गईं और उन्हें कलकत्ता भेज दिया गया जहाँ उन्हें एक हाई स्कूल में पढ़ाया.उन्हें टीबी हो गया और उन्हें दार्जिलिंग में आराम करने के लिए भेज दिया गया. दार्जिलिंग जाने वाली ट्रेन में ही उन्हें बुलावा आया - जिसे उन्होंने ईश्वर का "आदेश" कहा कि कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों के बीच काम करना और रहना है.
उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि उन्हें ननों का एक संघ स्थापित करना है, या यह भी नहीं पता था कि उन्हें कहाँ सेवा करनी है. ट्रेन में बिताए उस पल को याद करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, "मुझे पता था कि मेरा स्थान कहाँ है, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वहाँ कैसे पहुँचना है."
आलोक कुमार
बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश
बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश
नई दिल्ली. सात वर्षों से लंबित बीमा दावे के मामले में अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए संपत्ति कुर्की का वारंट जारी करने का निर्देश दिया है. यह मामला 018 से पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में लंबित था.
वादी सुचिता डेविड, निवासी ए-ब्लॉक हट्स, धोबी घाट, किरबी प्लेस, नई दिल्ली, ने वाहन संख्या DL-ILS-5501 के लिए बीमा पॉलिसी संख्या 35101031176340031147 के तहत नेशनल इंश्योरेंस से बीमा कराया था। पॉलिसी 03 अप्रैल 2017 से 02 अप्रैल 2018 तक वैध थी. 23 जून 2017 की सुबह अकबर रोड, जिमखाना क्लब गोलचक्कर के पास उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया,वादी के अनुसार, वाहन का बीमा घोषित मूल्य ₹2,05,000/- था और दुर्घटना के बाद इसे मरम्मत से परे माना गया.
बीमा कंपनी से क्लेम न मिलने पर वादी ने 26 अप्रैल 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद सुचिता डेविड ने 06 जुलाई 2018 को सिविल वाद (CS SCJ No. 875/2018) दायर किया. 08 दिसंबर 2023 को सीनियर सिविल जज, पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी को ₹2,05,447/- राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया. लेकिन आदेश के बावजूद नेशनल इंश्योरेंस ने भुगतान नहीं किया.वर्तमान में वादी ₹2,20,477/- राशि के साथ 24% वार्षिक ब्याज की मांग कर रही है.
अदालत ने पाया कि आदेश पालन में जिला मजिस्ट्रेट भी विफल रहे हैं। अब निर्देश दिए गए हैं कि चल संपत्तियों की कुर्की का नया वारंट जारी किया जाए.1 जुलाई 2025 को बेलीफ नियुक्ति के लिए उपस्थित होने का निर्देश.19 अगस्त 2025 को अगली कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश.यह मामला भारतीय बीमा क्षेत्र में दावों के निपटान में देरी और आदेश अनुपालन की गंभीर समस्या को उजागर करता है.धारा 151 CPC (न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों) के तहत अदालत ने कुर्की की कार्रवाई का निर्देश दिया है.
कंपनी का आदेश पालन न करना अवमानना के दायरे में आ सकता है.यह केस उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और बीमा अधिनियम, 1938 के तहत दावों के समय पर निपटान के महत्व को रेखांकित करता है.अगर नेशनल इंश्योरेंस आदेश का पालन नहीं करता, तो संपत्तियों की नीलामी और वादी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अगली कार्यवाही और कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.
आलोक कुमार
दुकान लगाने से सड़क अतिक्रमण हो जाता
तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है
पटना. परमप्रसाद (पवित्र कम्युनियन) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह वह क्षण है जब ईसाई अनुयायी स्वयं प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं.यह संस्कार अनुयायियों को न केवल पवित्रता प्रदान करता है बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण करता है और परमेश्वर के निकट लाता है.इसी कारण, इसका महत्व और इसका तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है.
रोमन कैथोलिक परंपरा में पुरोहित “ख्रीस्त का शरीर और रक्त” कहकर लोकधर्मियों की जीभ पर कम्युनियन रखते थे.यह पद्धति पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे प्रभु के प्रति गहरी श्रद्धा का प्रतीक माना गया.परंतु कोरोना महामारी के दौरान सुरक्षा कारणों से प्रीस्ट ने कम्युनियन लोकधर्मियों के हाथ में देना आरंभ किया.अब जब महामारी का दौर थम चुका है, बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस ने पुराने तरीके को फिर से अपनाने का आदेश जारी किया है.उनके अनुसार पुरोहितों को लोकधर्मियों की जीभ पर ही परमप्रसाद रखना चाहिए.
प्रसिद्ध प्रीस्ट और लेखक फादर जॉर्ज मैरी क्लैरेट ने भी अपने वीडियो संदेश में इसी बात पर बल दिया कि प्रभुभोज को ग्रहण करने का तरीका केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का प्रश्न है.उन्होंने अनुयायियों से कहा कि यदि वे प्रभु भोज से अधिकतम आशीष प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें उचित तैयारी और सही तरीके से इसे ग्रहण करना चाहिए. उन्होंने बाइबिल के उस अंश की याद दिलाई जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि कोई प्रभु का शरीर और रक्त बिना पहचाने ग्रहण करता है, तो वह अपनी ही दण्डाज्ञा खाता और पीता है.
यह सवाल आज भी प्रासंगिक है – कितनी बार हम लापरवाही में प्रभु को अपवित्र कर बैठते हैं? कितनी बार हमारे हाथों से परमप्रसाद गिरा और हम अनजाने में उसे पैरों तले रौंद देते हैं? यह केवल शारीरिक असावधानी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अपराध भी है.
इसी संदर्भ में यह बहस जरूरी हो जाती है कि “पवित्र कम्युनियन” को ग्रहण करने का सही तरीका क्या है.परंपरा कहती है कि इसे जीभ पर ग्रहण किया जाए, ताकि प्रभु के शरीर और रक्त की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे. आधुनिक परिस्थितियां हाथ में ग्रहण करने को सहज मानती हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या सहजता के लिए पवित्रता से समझौता किया जा सकता है?
अंततः, यह केवल किसी आदेश या नियम का पालन करने का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की गहराई का प्रश्न है. परमप्रसाद तभी फलदायी होगा जब हम पूरे मन, आत्मा और विश्वास के साथ प्रभु को ग्रहण करें. यह संस्कार हमें यीशु के समान बनने और उनके जीवन-संदेश को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है.इसलिए आवश्यक है कि चर्च, पुरोहित और अनुयायी – तीनों इस संस्कार की पवित्रता और गरिमा की रक्षा करें.
आलोक कुमार
दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम का राज्यव्यापी शुभारंभ
दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम का राज्यव्यापी शुभारंभ
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक पहल, 38 जिलों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित
दानापुर. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (बी.एस.डी.एम.ए.) ने समाज कल्याण विभाग की संस्था “सक्षम” के सहयोग से आज प्रदेशभर में “दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम” का भव्य शुभारंभ किया. यह महत्वाकांक्षी पहल माननीय मुख्यमंत्री सह प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नीतीश कुमार के प्रगतिशील नेतृत्व में संचालित की जा रही है.
राज्यस्तरीय उद्घाटन समारोह पटना जिले के दानापुर स्थित सदर बुनियाद केंद्र में आयोजित हुआ.प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डाॅ. उदय कांत, माननीय सदस्य श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह एवं श्री प्रकाश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. समारोह में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और उनके परिजन उपस्थित रहे.
इस अवसर पर माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने कहा - “यह कार्यक्रम केवल आपदा प्रबंधन नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है.इसका लाभ समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है, जो आज सबसे ज्यादा संवेदनशील है.” माननीय सदस्य श्री नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि “संभवतः पूरे देश में बिहार पहला राज्य है जिसने दिव्यांगजनों के लिए आपदा सुरक्षा कार्यक्रम को इतनी व्यापकता से लागू किया है.”
समारोह में प्राधिकरण के ओ.एस.डी. मो. मोइन उद्दीन, एस.डी.आर.एफ. कमांडेंट श्री राजेश कुमार, "सक्षम" के वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी श्री हरिशंकर राम, डिप्टी सी.ई.ओ. श्री सुनील कुमार, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री शाहनवाज अहमद और श्री सुशील श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। नोडल पदाधिकारी श्री संदीप कमल तथा प्राधिकरण की अवैतनिक सलाहकार सुश्री सुमन कुमारी के साथ प्राधिकरण की पूरी टीम भी मौके पर मौजूद थी.
प्रदेश के सभी 38 जिलों में यह कार्यक्रम आज एक साथ आयोजित किया गया.वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के बुनियाद केंद्र उद्घाटन समारोह से जुड़े रहे.जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में सहायक जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने भी भाग लिया.
इस अभियान के तहत अब तक 1000 से अधिक मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं तथा दर्जनों स्कूलों में मॉक ड्रिल आयोजित कर दिव्यांगजनों को आपदा के समय सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए गए हैं.आने वाले दिनों में यह कार्यक्रम “सुरक्षित शुक्रवार” के नाम से राज्य के सभी 101 अनुमंडलों के बुनियाद केंद्रों से नियमित रूप से चलाया जाएगा. इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आपदा के समय आत्मनिर्भर एवं सुरक्षित बनाना है.बी.एस.डी.एम.ए. और एस.डी.आर.एफ. की विशेषज्ञ टीमों के साथ प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर दिव्यांगजनों को उनके अधिकार, सुरक्षा उपाय और आपातकालीन प्रतिक्रिया के गुर सिखा रहे हैं.
आलोक कुमार
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