Iindia: 5 मई को अंतरराष्ट्रीय दाई दिवस मनाया जाता

            हमें यह भी याद दिलाता है कि सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कितनी आवश्यकता है


5 मई
का दिन इतिहास, समाज और वैश्विक जागरूकता के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हैं, साथ ही कुछ विशेष दिवस भी मनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और मानव जीवन को बेहतर बनाना है। आइए 5 मई के दिन के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सबसे पहले, 5 मई को हर साल International Midwives Day यानी अंतरराष्ट्रीय दाई दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दाइयों (मिडवाइफ) के योगदान को सम्मान देना है, जो गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में अहम भूमिका निभाती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में दाइयों का योगदान विशेष रूप से ग्रामीण और विकासशील क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण होता है, जहां डॉक्टरों की कमी होती है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कितनी आवश्यकता है।

इसके अलावा, कई वर्षों में 5 मई के आसपास या इसी दिन World Asthma Day भी मनाया जाता है (हालांकि यह मई के पहले मंगलवार को पड़ता है)। इस दिन का उद्देश्य अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। दुनियाभर में लाखों लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, और समय पर इलाज तथा सही जानकारी से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इस अवसर पर स्वास्थ्य संस्थान लोगों को श्वसन संबंधी समस्याओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

इतिहास के पन्नों में भी 5 मई का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। वर्ष 1818 में Karl Marx का जन्म हुआ था। कार्ल मार्क्स एक प्रसिद्ध दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाजशास्त्री थे, जिनके विचारों ने दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। उनकी रचनाएँ जैसे “दास कैपिटल” और “कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” आज भी अध्ययन का विषय हैं। उनके विचारों ने श्रमिक वर्ग के अधिकारों और सामाजिक समानता की दिशा में नई सोच को जन्म दिया।

भारत के संदर्भ में भी 5 मई का दिन कुछ घटनाओं के कारण महत्वपूर्ण रहा है। यह दिन हमें देश के सामाजिक और राजनीतिक विकास की विभिन्न घटनाओं की याद दिलाता है। समय-समय पर इस दिन विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं, जिनसे देश की प्रगति को बल मिला है।

सांस्कृतिक दृष्टि से भी 5 मई का महत्व कम नहीं है। यह दिन हमें समाज में सेवा, स्वास्थ्य और मानवता के मूल्यों को समझने का अवसर देता है। दाइयों के सम्मान से लेकर अस्थमा जागरूकता तक, यह दिन हमें यह सिखाता है कि समाज में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी इस दिन का महत्व है। स्कूलों और कॉलेजों में इस दिन स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और चर्चाएँ आयोजित की जाती हैं। इससे विद्यार्थियों को न केवल इतिहास की जानकारी मिलती है, बल्कि वे सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझते हैं। इस तरह के आयोजन युवाओं को जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

5 मई का दिन हमें यह भी सिखाता है कि इतिहास केवल घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे वर्तमान और भविष्य को दिशा देने का माध्यम है। इस दिन घटी घटनाओं और मनाए जाने वाले दिवसों से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें निभाने का प्रयास करें।

अंततः, 5 मई का महत्व केवल ऐतिहासिक या औपचारिक नहीं है, बल्कि यह दिन मानवता, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि समाज की प्रगति में हर व्यक्ति का योगदान आवश्यक है और हमें मिलकर एक बेहतर दुनिया बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

आलोक कुमार

India: सोना-चांदी के दाम: 4 मई 2026 का ताजा भाव

                       निवेशकों के रुझान के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है

सोना और चांदी भारतीय बाजार में हमेशा से निवेश और परंपरा का मजबूत आधार रहे हैं। 4 मई 2026 को इन दोनों की कीमतों में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, और निवेशकों के रुझान के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में अगर आप निवेश करने या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो ताजा भाव जानना बेहद जरूरी है।

आज का ताजा भाव (4 मई 2026)

राजधानी दिल्ली में आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

24 कैरेट सोना: लगभग ₹72,000 प्रति 10 ग्राम

22 कैरेट सोना: लगभग ₹66,000 प्रति 10 ग्राम

वहीं, चांदी की कीमत में भी बदलाव देखने को मिला है:

चांदी (Silver): लगभग ₹85,000 प्रति किलोग्राम

मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, हालांकि स्थानीय टैक्स और मांग के कारण मामूली अंतर हो सकता है।

कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह

सोना और चांदी के दाम कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों से प्रभावित होते हैं।

1. अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

भारत में सोने-चांदी की कीमतें सीधे तौर पर वैश्विक बाजार से जुड़ी होती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। अमेरिका और यूरोप की आर्थिक नीतियां इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।

2. डॉलर और रुपये का संबंध

जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोना महंगा हो जाता है। भारत सोना आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर कीमतें और बढ़ जाती हैं।

3. ब्याज दरें और महंगाई

कम ब्याज दरों के दौरान निवेशक सोने की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। वहीं, बढ़ती महंगाई भी सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) बनाती है।

4. त्योहार और शादी का सीजन

भारत में सोने की मांग त्योहारों और शादी के मौसम में बढ़ जाती है। खासकर दिवाली, अक्षय तृतीया और विवाह सीजन में कीमतों में उछाल देखने को मिलता है।

निवेश के नजरिए से सोना-चांदी

सोना और चांदी दोनों को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग है।

सोना (Gold Investment)

सोना लंबे समय के निवेश के लिए बेहतर माना जाता है। यह आर्थिक संकट के समय स्थिरता प्रदान करता है और मुद्रास्फीति से बचाव करता है।

चांदी (Silver Investment)

चांदी का उपयोग उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल आदि। इसलिए इसकी कीमतें अधिक उतार-चढ़ाव वाली होती हैं, लेकिन इसमें तेजी की संभावना भी ज्यादा रहती है।

क्या अभी खरीदना सही समय है?

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सोने की कीमतें स्थिर लेकिन ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

चांदी के मामले में, इसकी औद्योगिक मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में कीमतों में तेजी आ सकती है।

निवेश के विकल्प

आज के समय में सोना-चांदी में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं:

फिजिकल गोल्ड (ज्वेलरी, सिक्के, बार)

डिजिटल गोल्ड

गोल्ड ETF

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)

सिल्वर ETF

इन विकल्पों के जरिए आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

सावधानियां

सोना या चांदी खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:

हमेशा हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें

विश्वसनीय ज्वेलर से ही खरीदारी करें

मेकिंग चार्ज और टैक्स की जानकारी जरूर लें

निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं तो डिजिटल या ETF विकल्प बेहतर हो सकते हैं

आगे का अनुमान

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में हल्की तेजी जारी रह सकती है। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के चलते सोना सुरक्षित निवेश बना रहेगा।

वहीं, चांदी की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसमें भी अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है।

निष्कर्ष

4 मई 2026 को सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। जहां सोना स्थिर और सुरक्षित निवेश का विकल्प बना हुआ है, वहीं चांदी में तेजी की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर रही है।

अगर आप निवेश करना चाहते हैं, तो बाजार की चाल को समझते हुए और विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही निर्णय लें। सही समय पर किया गया निवेश भविष्य में अच्छा लाभ दे सकता है।


आलोक कुमार

Bihar: तेज आंधी और बारिश की संभावना

चेतावनी के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया 

बिहार
में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 और 5 मई के लिए राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) का अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

मौसम विभाग के अनुसार, पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा समेत कई जिलों में तेज हवा के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है, जो पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, जो ग्रामीण और खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।

इस मौसम परिवर्तन का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव माना जा रहा है। इन दोनों कारकों के मिलन से वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे आंधी और बारिश की स्थिति बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मौसम बदलाव गर्मी के मौसम में सामान्य है, लेकिन इसकी तीव्रता कभी-कभी ज्यादा हो जाती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है।

किसानों के लिए यह मौसम विशेष रूप से चिंता का विषय है। इस समय कई जगहों पर गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी फसल खेतों में है। इसके अलावा, सब्जियों और फलों की फसल भी इस मौसम से प्रभावित हो सकती है। तेज हवा और बारिश के कारण फसल गिर सकती है या खराब हो सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर आम और लीची जैसे फलों पर इसका असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह उनका संवेदनशील समय होता है।

ग्रामीण इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं हर साल कई लोगों की जान ले लेती हैं। इसलिए मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों और मजदूरों को चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि बिजली अक्सर ऊंचे और अलग-थलग खड़े पेड़ों पर गिरती है।

शहरी क्षेत्रों में भी इस मौसम का असर देखने को मिल सकता है। पटना जैसे बड़े शहरों में हल्की से मध्यम बारिश भी जलजमाव की समस्या पैदा कर देती है। कई इलाकों में नालियों की सफाई ठीक से नहीं होने के कारण पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। ऑफिस जाने वाले लोगों और छात्रों को इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, तेज हवा के कारण बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। कई बार बिजली के खंभे या तार क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या हो जाती है। ऐसे में लोगों को पहले से ही तैयारी करके रखनी चाहिए, जैसे मोबाइल चार्ज रखना, टॉर्च या आपातकालीन लाइट की व्यवस्था करना आदि।

प्रशासन ने भी इस अलर्ट को गंभीरता से लिया है। जिला प्रशासन को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें, इसके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें, खासकर जब तेज आंधी या बिजली गिरने की संभावना हो। यदि बाहर निकलना जरूरी हो, तो सुरक्षित स्थानों पर रहें और खुले मैदान, पेड़ या बिजली के खंभों के पास खड़े न हों। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतें, क्योंकि तेज हवा और बारिश से दृश्यता कम हो सकती है।

स्कूलों और संस्थानों को भी सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए आवश्यक कदम उठाएं। यदि मौसम बहुत खराब हो, तो छुट्टी देने या समय में बदलाव करने जैसे निर्णय लिए जा सकते हैं, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कुल मिलाकर, बिहार में 4 और 5 मई को मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। हालांकि बारिश से गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन इसके साथ आने वाली आंधी और बिजली खतरा भी पैदा कर सकती है। ऐसे में जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग समय रहते सतर्क हो जाएं और निर्देशों का पालन करें, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सकता है।

आलोक कुमार

Nepal: कई घरों और इमारतों के साथ एक चर्च को भी गिरा दिया

                                       सख्त प्रशासनिक शैली और अतिक्रमण के खिलाफ तेज कार्रवाई

नेपाल की राजनीति में हाल के दिनों में जिस नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह हैं बालेन शाह। अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और अतिक्रमण के खिलाफ तेज कार्रवाई के कारण वे पहले ही चर्चा में थे, लेकिन अब एक नए विवाद ने उनकी छवि और सरकार दोनों को कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है। यह विवाद भक्तपुर क्षेत्र की मनोहरा बस्ती में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान से जुड़ा है, जहां कई घरों और इमारतों के साथ एक चर्च को भी गिरा दिया गया।

अतिक्रमण हटाओ अभियान और विवाद की शुरुआत

नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था। इसी क्रम में मनोहरा बस्ती में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई संरचनाओं को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का दावा है कि ये सभी निर्माण बिना कानूनी अनुमति के किए गए थे और सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाए गए थे।

हालांकि, इस कार्रवाई ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब एक चर्च को भी तोड़ दिया गया। यह घटना रविवार के दिन हुई, जब चर्च में आमतौर पर प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियां होती हैं। चर्च गिराए जाने की खबर सामने आते ही ईसाई समुदाय में गहरा आक्रोश फैल गया।

ईसाई समुदाय की प्रतिक्रिया

चर्च गिराने की घटना के बाद विभिन्न ईसाई संगठनों और कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि भले ही जमीन का स्वामित्व चर्च के पास न हो, लेकिन यह एक धार्मिक स्थल था, जिसे इस तरह अचानक और बिना संवेदनशीलता के तोड़ा जाना उचित नहीं था।

ईसाई नेताओं का तर्क है कि सरकार को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों के साथ विशेष संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए, क्योंकि वे केवल भवन नहीं होते, बल्कि लोगों की आस्था और पहचान से जुड़े होते हैं।

कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में उचित कदम नहीं उठाया, तो इसका परिणाम राजनीतिक और सामाजिक रूप से गंभीर हो सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि चर्च के लिए दूसरी जगह उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

कानूनी बनाम धार्मिक संवेदनशीलता

यह पूरा विवाद एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है—क्या कानून का पालन धार्मिक भावनाओं से ऊपर है, या दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है?

सरकार का पक्ष साफ है कि यदि कोई निर्माण अवैध है, तो उसे हटाना प्रशासनिक कर्तव्य है। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे वह घर हो, दुकान हो या धार्मिक स्थल।

वहीं दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के मामले में सरकार को अधिक संवेदनशील और संवादात्मक रवैया अपनाना चाहिए था। यदि चर्च अवैध भूमि पर बना था, तो भी उसे हटाने से पहले समुदाय से बातचीत, वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था और पर्याप्त समय देना जरूरी था।

बालेन शाह की छवि पर असर

बालेन शाह को अब तक एक सख्त और ईमानदार प्रशासक के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। लेकिन इस घटना ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुछ लोग उनकी कार्रवाई को कानून के प्रति प्रतिबद्धता मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे असंवेदनशील और जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहे हैं। यह विवाद उनके राजनीतिक करियर पर भी असर डाल सकता है, खासकर तब जब नेपाल जैसे बहुधार्मिक समाज में धार्मिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

नेपाल एक बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक देश है, जहां विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी धार्मिक स्थल को गिराने जैसी घटना सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है।

यदि इस मुद्दे को समय रहते सुलझाया नहीं गया, तो यह व्यापक विरोध और असंतोष का कारण बन सकता है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

समाधान की जरूरत

इस पूरे विवाद का समाधान संवाद और संतुलन में ही निहित है। सरकार को चाहिए कि वह ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करे और उनकी चिंताओं को समझे। यदि संभव हो, तो चर्च के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए या पुनर्निर्माण में सहायता दी जाए।

साथ ही, भविष्य में इस तरह की कार्रवाई करते समय सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि कानून का पालन भी हो और लोगों की आस्था को भी ठेस न पहुंचे।

निष्कर्ष

मनोहरा बस्ती में चर्च गिराने की घटना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। बालेन शाह के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है, जिसमें उन्हें कानून और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना होगा।

यदि इस मामले को समझदारी से नहीं संभाला गया, तो यह न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि नेपाल के सामाजिक ताने-बाने पर भी असर डाल सकता है। वहीं, यदि सरकार संवाद और सहमति के रास्ते पर चलती है, तो यह संकट एक सकारात्मक समाधान में भी बदल सकता है।


आलोक कुमार

अगली किस्त कब आएगी?

 अगली किस्त कब आएगी?अब सभी किसान 14वीं या 15वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता योजना है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6000 की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। अब सभी किसान 14वीं या 15वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अगली किस्त मई या जून 2026 में जारी की जा सकती है।

इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे कि ई-केवाईसी (e-KYC) और आधार लिंकिंग। जिन किसानों ने अभी तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनकी किस्त अटक सकती है।

किसान अपने भुगतान की स्थिति ऑनलाइन भी चेक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है।


यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है, क्योंकि इससे उन्हें खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है।

आलोक कुमार

पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में

 पेट्रोल-डीजल कीमत अपडेट: 4 मई 2026 का ताजा रेट

पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। 4 मई 2026 को देश के कई शहरों में ईंधन की कीमतों में मामूली बदलाव देखा गया है, जबकि कुछ स्थानों पर कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियों द्वारा रोजाना सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी की जाती हैं, जिसके अनुसार आज भी कुछ शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में हलचल देखने को मिली है।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बिहार के कुछ जिलों में पेट्रोल ₹107 प्रति लीटर के आसपास और डीजल ₹94 के करीब बिक रहा है।

ईंधन की कीमतों में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये-डॉलर के विनिमय दर पर निर्भर करता है। पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे आर्थिक ढांचे को प्रभावित करता है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जी, फल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है।

सरकार समय-समय पर टैक्स में बदलाव करके कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में कीमतों में स्थिरता बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन जाता है।


आने वाले दिनों में कीमतों में क्या बदलाव होगा, यह काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को रोजाना कीमतों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।


आलोक कुमार

कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा: ढाबा और आम जनता पर असर

 इसका असर अब रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई देने लगा है

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने देशभर के छोटे और बड़े कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है। 1 मई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में लगभग ₹993 की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.50 तक पहुंच गई है, जो बीते महीनों की तुलना में काफी ज्यादा है। यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अब रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई देने लगा है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कमर्शियल एलपीजी का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में होता है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, चाय की दुकानें, फास्ट फूड स्टॉल और छोटे कैटरिंग व्यवसाय पूरी तरह इस गैस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उनकी लागत को सीधे बढ़ा दिया है। छोटे व्यवसायों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि उनके पास लागत को वहन करने की क्षमता सीमित होती है।

पिछले कुछ महीनों में लगातार कीमतों में वृद्धि ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। पिछले तीन महीनों में कुल मिलाकर ₹1300 से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। बड़े होटल और रेस्टोरेंट चेन किसी तरह इस बढ़ोतरी को झेल सकते हैं, लेकिन छोटे ढाबा संचालकों और सड़क किनारे दुकान लगाने वालों के लिए यह अस्तित्व का संकट बन चुका है।

इसका सबसे बड़ा असर अब उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। चाय, नाश्ता, खाना और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू हो गई है। जहां पहले चाय ₹10 में मिलती थी, अब वही ₹12-₹15 तक पहुंच रही है। इसी तरह थाली और अन्य खाने-पीने की चीजों के दाम में 5 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह बढ़ोतरी भले ही मामूली लगे, लेकिन रोज कमाने और खाने वाले लोगों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाती है।

छोटे कारोबारियों ने इस बढ़ती लागत से निपटने के लिए कई तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। कुछ ने मेन्यू छोटा कर दिया है, कुछ खाने की मात्रा कम कर रहे हैं, तो कुछ ने कम बिकने वाले आइटम हटा दिए हैं। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए भी नुकसानदायक है क्योंकि उन्हें पहले जितनी कीमत में अब कम मात्रा में भोजन मिल रहा है।

सरकार के सामने यह एक बड़ा चुनौतीपूर्ण मुद्दा बन चुका है। ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कुछ कदम उठाने की जरूरत है, जैसे टैक्स में छूट या सब्सिडी प्रदान करना।

इसके अलावा, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), इलेक्ट्रिक कुकिंग और सोलर ऊर्जा जैसे विकल्प भविष्य में इस समस्या का समाधान हो सकते हैं। हालांकि, इन विकल्पों को अपनाने के लिए समय और निवेश दोनों की आवश्यकता होती है।


अंततः, कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर और भी व्यापक हो सकता है।

आलोक कुमार

India : अब नाराज फूफा का शगूफा छोड़ा गया

  अब नाराज फूफा का शगूफा छोड़ा गया है, बेरोजगारी, लाचारी और महंगाई ताक पर रख दी गई पटना। चुनावी मौसम आते ही राजनीति का माहौल बदलने लगता है।...