उत्सव की शुरुआत एक विशेष सुबह की सभा से हुई
सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल में उनके संरक्षक संत, सेंट डोमिनिक सैवियो का पर्व (Feast Day) मुख्य रूप से 6 मई को मनाया जाता है।
इस अवसर पर पटना आर्चडायोसिस के एमेरिटस आर्चबिशप विलियम डिसूजा के नेतृत्व में सेंट डोमिनिक में पवित्र मास किया गया.उनके साथ कुर्जी पल्ली के प्रधान पल्ली पुरोहित फादर सेल्विन जेवियर भी थे.पर्व दिवस का उत्सव देखने को मिला जो विश्वास, कृपा और एकजुटता से भरा संपूर्ण एक दिवस बन गया.
इससे पूर्व सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल, पटना ने 5 मई, 2026 को सेंट डोमिनिक सैवियो का पर्व दिवस बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया। उत्सव की शुरुआत एक विशेष सुबह की सभा से हुई, जिसके बाद झारखंड विधानसभा के अंतिम एंग्लो-इंडियन समुदाय के पूर्व विधायक सह डायरेक्टर ग्लेन जोसेफ गैल्स्टन ने प्रेरणादायक शब्द कहे और छात्रों को सेंट डोमिनिक सैवियो के मूल्यों पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया।
छात्रों ने रंग-बिरंगे पोस्टरों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया और उनके जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प प्रश्नोत्तरी (क्विज़) में भाग लिया। इस दिन का मुख्य आकर्षण शिक्षकों और छात्रों के बीच हुआ रोमांचक 'रस्साकशी' (Tug of War) का मुकाबला था, जिसका समापन छात्रों की आनंदमयी जीत के साथ हुआ.
सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल (St. Dominic Savio's High School), पटना की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी। यह स्कूल
राजधानी पटना के नासरीगंज (दीघा) में स्थित है .यह सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध एक प्रतिष्ठित ईसाई भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालय है।
आज गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है. 1982 में इस संस्थान की स्थापना दो महान शिक्षाविदों — स्वर्गीय जोसेफ गैल्स्टन और उनकी पत्नी मौली गैल्स्टन — ने की थी.
यह विद्यालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक दृष्टि का साकार रूप है — ऐसी दृष्टि, जिसमें शिक्षा को मानवता, अनुशासन और चरित्र निर्माण के साथ जोड़ा गया.
चार दशक से अधिक की यात्रा में यह संस्थान अब 44 वर्ष पुराना एक सशक्त शैक्षणिक वृक्ष बन चुका है, जिसकी जड़ें समर्पण में और शाखाएँ सेवा में फैली हुई हैं.
स्वर्गीय जोसेफ गैल्स्टन न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी थे, बल्कि एक समाजसेवी और जनप्रतिनिधि के रूप में भी उनकी पहचान थी.
एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें बिहार और झारखंड विधानसभा में मनोनीत किया गया था. विधायक रहते हुए उन्होंने कुर्जी कब्रिस्तान की चारदीवारी का निर्माण करवाया, जो उनके सामाजिक उत्तरदायित्व की गवाही देता है.
आज, उसी पथ पर उनके पुत्र ग्लेन जोसेफ बतौर निदेशक और पुत्रवधू ग्लेंडा गैल्स्टन बतौर प्रधानाचार्या विद्यालय की बागडोर संभाले हुए हैं.
इन दोनों ने न केवल संस्थान की शिक्षण परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, बल्कि समाज और धर्म के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भी पूरी निष्ठा से निभाया है.
पटना धर्मप्रांत की शताब्दी वर्षगांठ पर उन्होंने कुर्जी पल्ली में शताब्दी द्वार का निर्माण करवाया और हाल ही में कुर्जी आराधनालय का नवीनीकरण संपन्न करवाकर अपने पूर्वजों की सेवा भावना को जीवंत रखा है.
सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि यह एक संस्कार केंद्र है — जहाँ शिक्षा का उद्देश्य अंकों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देना है.
इस संस्थान की 44 वर्षीय यात्रा यह प्रमाणित करती है कि जब शिक्षा में समर्पण, नेतृत्व में नैतिकता और सेवा में विनम्रता हो, तब संस्थान स्वयं एक प्रेरणा बन जाता है.
सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल : शिक्षा, संस्कार और सेवा का 44 वर्षों का गौरवपूर्ण सफर
पटना के नासरीगंज (दीघा) स्थित St. Dominic Savio's High School में इस वर्ष संरक्षक संत Saint Dominic Savio का पर्व दिवस अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी 6 मई को विद्यालय परिसर विश्वास, प्रार्थना, अनुशासन और एकजुटता की सुंदर भावना से सराबोर दिखाई दिया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के लिए प्रेरणा का एक जीवंत अवसर बन गया।
इस पावन अवसर पर पटना आर्चडायोसिस के एमेरिटस आर्चबिशप William D'Souza के नेतृत्व में पवित्र मास का आयोजन किया गया। उनके साथ कुर्जी पल्ली के प्रधान पल्ली पुरोहित Fr. Selvin Xavier भी उपस्थित रहे। प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक शामिल हुए। पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास से परिपूर्ण था।
आर्चबिशप विलियम डिसूजा ने अपने संदेश में कहा कि सेंट डोमिनिक सैवियो का जीवन युवाओं के लिए अनुशासन, पवित्रता और समर्पण का आदर्श है। उन्होंने छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। वहीं फादर सेल्विन जेवियर ने समाज और चर्च के प्रति सेवा भावना को जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया।
इस पर्व की शुरुआत 5 मई 2026 को विद्यालय में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा से हुई थी। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक एवं झारखंड विधानसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के अंतिम पूर्व विधायक Glenn Joseph Galstaun ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने सेंट डोमिनिक सैवियो के जीवन मूल्यों — सत्य, अनुशासन, सेवा और ईश्वरभक्ति — को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
विद्यालय के छात्रों ने इस अवसर पर अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे पोस्टरों, स्लोगनों और चित्रों के माध्यम से छात्रों ने सेंट डोमिनिक सैवियो के जीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उनके जीवन से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता (क्विज़) में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे बच्चों को अपने संरक्षक संत के जीवन और आदर्शों को निकट से जानने का अवसर मिला।
दिन का सबसे आकर्षक और रोमांचक कार्यक्रम शिक्षकों और छात्रों के बीच आयोजित रस्साकशी प्रतियोगिता रही। खेल मैदान में जब दोनों पक्ष आमने-सामने आए तो पूरे परिसर में उत्साह का वातावरण बन गया। अंततः छात्रों की टीम ने आनंदमयी जीत हासिल की। इस प्रतियोगिता ने विद्यालय परिवार के बीच प्रेम, सहयोग और आत्मीयता की भावना को और मजबूत किया।
सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी। यह विद्यालय आज राजधानी पटना के प्रतिष्ठित सीबीएसई संबद्ध ईसाई भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालयों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इस संस्थान की स्थापना दो महान शिक्षाविदों — स्वर्गीय Joseph Galstaun और उनकी पत्नी Molly Galstaun — ने की थी।
उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण और चरित्र निर्माण का सशक्त उपकरण माना। इसी सोच के साथ उन्होंने इस संस्थान की नींव रखी। आज चार दशक से अधिक समय के बाद यह विद्यालय एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी जड़ें समर्पण और सेवा में गहराई तक फैली हुई हैं।
स्वर्गीय जोसेफ गैल्स्टन केवल एक शिक्षाविद नहीं थे, बल्कि समाजसेवी और जनप्रतिनिधि के रूप में भी उनकी विशेष पहचान थी। एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें बिहार और झारखंड विधानसभा में मनोनीत किया गया था। विधायक रहते हुए उन्होंने कुर्जी कब्रिस्तान की चारदीवारी का निर्माण करवाया, जो उनके सामाजिक उत्तरदायित्व और समुदाय के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
आज उनके पुत्र ग्लेन जोसेफ गैल्स्टन विद्यालय के निदेशक के रूप में संस्थान का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि उनकी पुत्रवधू Glenda Galstaun प्रधानाचार्या के रूप में विद्यालय की शैक्षणिक परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रही हैं। इन दोनों ने शिक्षा, समाज और चर्च सेवा को समान महत्व देते हुए संस्थान को निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर रखा है।
पटना धर्मप्रांत की शताब्दी वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने कुर्जी पल्ली में शताब्दी द्वार का निर्माण करवाया। इसके अतिरिक्त हाल ही में कुर्जी आराधनालय के नवीनीकरण कार्य को भी पूर्ण करवाकर उन्होंने अपने पूर्वजों की सेवा परंपरा को जीवित रखा है। यह कार्य केवल धार्मिक योगदान नहीं, बल्कि समुदाय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
आज सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि संस्कार और नैतिक मूल्यों का केंद्र बन चुका है। यहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि छात्रों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और चरित्रवान नागरिक बनाना है।
विद्यालय की 44 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब शिक्षा में समर्पण, नेतृत्व में नैतिकता और सेवा में विनम्रता हो, तब कोई भी संस्थान समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। सेंट डोमिनिक सैवियो हाई स्कूल आज उसी प्रेरणा का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और सेवा का मार्ग दिखाता रहेगा।
आलोक कुमार