पल्ली पुरोहित और प्रिंसिपल की जमकर पिटाई

 


* पल्ली पुरोहित और प्रिंसिपल की जमकर पिटाई 


 * नकाबपोश डकैतों को शीघ्र गिरफ्तारी करने की मांग को लेकर सड़क जाम किया


समसेरा .दक्षिण झारखंड स्थित सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड में समसेरा स्थित संत तेरेसा चर्च में देर रात करीब 1:30 बजे नकाबपोश डकैतों ने बड़ी लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया है. चार से पांच की संख्या में आए नकाबपोश डकैतों ने सबसे पहले चर्च परिसर में बने पुरोहितों के आवास में घुसकर हथियारों के बल पर लूटने की कोशिश की.

    इस कदम का विरोध करने पर नकाबपोश डकैतों ने तीन पुरोहितों, फादर इग्नासियुस टोप्पो, फादर अगुस्टीन डुंगडुंग और फादर रोशन सोरेंग को लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा और उन्हें एक कमरे में बांधकर बंद कर दिया. घायल पुरोहितों को पहले बोलबा अस्पताल और फिर सिमडेगा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीनों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है.

      पुरोहितों के अनुसार, नकाबपोश डकैतों ने चर्च परिसर में बने आवास में घुस आए और पिस्तौल तथा धारदार हथियार दिखाकर तिजोरी की चाबी मांगने लगे.चाबी देने में आनाकानी करने पर उन्होंने पुरोहितों की पिटाई की और सभी को बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया.इसके बाद, तिजोरी को तोड़कर लगभग आठ लाख रुपये लूट लिए.

  इस बात की जानकारी मिलते ही कोलेबिरा विधायक विक्सल कोनगाड़ी अपने प्रतिनिधि शमी आलम, रावेल लकड़ा व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सिमडेगा जिले के बोलबा पहुंचे. वे समसेरा पल्ली गये और पल्ली में डकैती व धर्मगुरुओं पर हुए जानलेवा हमले के बारे में जानकारी ली. वहीं, बोलबा सीएचसी में भर्ती घायल धर्मगुरुओं और विद्यालय के प्रिंसिपल से मुलाकात कर हालचाल जाना. डॉक्टरों को बेहतर इलाज का निर्देश भी दिया.

    घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विधायक ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की यह तीसरी घटना है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिले के एसपी से बात हुई है. एसपी ने एसआईटी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है. विधायक ने कहा कि धर्मगुरुओं और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना बर्दास्त नहीं किया जाएगा. मौके पर प्रिंस कुमार, विपिन पंकज मिंज, संजय कुजूर, सुनील टोप्पो, रोशन बरला आदि मौजूद थे.


आलोक कुमार)


कुशासन काल के ग्यारह साल में देश हुआ बदहाल : राजेश राम


 कुशासन काल के ग्यारह साल में देश हुआ बदहाल : राजेश राम

पटना . पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं, मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में कदम रखते ही इस बात का आभास करा दिया था कि यह सरकार किसान, दलित, मजदूर, महिला और गरीब विरोधी है. ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कही.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि “अच्छे दिन आने वाले हैं, हम मोदी जी को लाने वाले हैं”.. यह गाना शायद नीरव मोदी, ललित मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या जैसे बैंकों के लुटेरों और मोदी जी के दोस्तों अडानी-अंबानी ने लिखा था, क्योंकि यह सिर्फ इन्हीं लोगों के लिए ही चरितार्थ हुआ. बाकी सभी देशवासी आज एक स्वर में फिल्म “आखिरी दांव” का गाना गा रहे हैं-

“बेदर्दी, धोखेबाज, झूठा... झूठा!

झूठे से प्यार किया, वादों पर ऐतबार किया.

हम ही नादान थे जो इतना इंतजार किया.

झूठे से प्यार किया, वादों पर ऐतबार किया.”

   प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बताया कि मोदी सरकार के ग्यारह सालों में देश को किस तरह बदहाल किया गया, उन्होंने बताते हुए कहा कि 

*  सत्ता में आते ही किसानों की जमीन हड़पने के लिए एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाए गए.

*  फिर सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर किसानों की समर्थन मूल्य की माँग को ठुकराते हुए स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले को लागू करने से इंकार कर दिया गया.

*  नोटबंदी जैसा काला कानून लागू कर देश की एमएसएमई और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया गया.

*  गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) लागू कर अर्थव्यवस्था को और चैपट कर दिया गया.

* एक के बाद एक बैंक के लुटेरे विदेश भागते रहे, और सरकार मूकदर्शक बनी रही.

*  कोविड के दौरान बिना योजना के लॉकडाउन लागू कर मजदूरों को दरबदर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया गया.

*  कृषि के तीन क्रूर काले कानून लाए गए, जिनका देशभर में तीव्र विरोध हुआ.

*  लखीमपुर खीरी में किसानों को जीप से रौंदकर बेरहमी से मार डाला गया.

*  दिल्ली में धरना दे रही पहलवान बेटियों को घसीट-घसीट कर पीटा गया.

*  पठानकोट, उड़ी, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों से देश को झुलसाया गया.

*  मणिपुर में हिंसा का तांडव आज तक जारी है और केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है.

*  चीन के भारत में अतिक्रमण को लेकर सरकार ने क्लीन चिट दे दी.

    बिहार को चुनावी वादों में विकास के पथ पर अग्रसर करने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री ने भर भरकर यहां से सांसद जिताएं लेकिन एक उद्योग तक नहीं स्थापित कर सकें. बीते 11 साल महँगाई और बेरोजगारी की भेंट चढ़ गए, और हमारे मोदी साहेब बड़बोले भाषण और झूठ की भरमार गढ़ते रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार को लगातार छलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कर्मों से देश के सबसे निकम्मे और कामचोर प्रधानमंत्री बन चुके हैं.



आलोक कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार से मुसलमानों के उत्पाद का बहिष्कार करवाया


नवादा .राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुत्र मणिलाल गांधी हैं. मणिलाल गांधी के एक पुत्र अरुण मणिलाल गांधी था. अरुण मणिलाल गांधी के एक ही बेटा था, जिसका नाम तुषार अरुण  गांधी.महात्मा गांधी के परपोते, मणिलाल गांधी के पोते और अरुण मणिलाल गांधी के पुत्र तुषार अरुण गांधी हैं. उनका पटना और नवादा में कार्यक्रम था.दोनों कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता श्री तुषार गांधी थे.

               संपूर्ण क्रान्ति दिवस और पर्यावरण संरक्षण दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि गांधी जी के परपोते तुषार गाँधी के समस्त छात्र और छात्राओं ने गांधी जी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम और वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाने रे‘ से सत्र की शुरुआत  हुई और छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी का संकल्प गीत नया जमाना नयी जवानी देंगे अपनी कुर्बानी कहने वाले दीवानो की बनी आज संघर्ष वाहिनी को सुशील ने गाया.

               इसी सत्र में कारू जी ने भी युग की जड़ता के खिलाफ एक इंकलाब ,गीत  गाए. सत्र का संचालन उदय भागलपुर और ज्ञानेन्द्र महाराष्ट्र ने किया. मंथन संपूर्ण क्रान्ति और संघर्ष वाहिनी के पचास साल पर  पारित मसौदा को पढ़कर सुनाया. तुषार गांधी ने देश की राजनीतिक सामाजिक और सांस्कृतिक हालात को चिंताजनक बताते हुआ  कहा कि सत्ता के द्वारा जो नफरत फैलाया जा रहा है वह अंग्रेजी हुकूमत से भी भयावह है.

       तुषार गांधी ने हाल ही में महाराष्ट्र के एक गांव में गए थे, उसका बयान करते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार से मुसलमानों के उत्पाद का बहिष्कार करवाया है ,जिसके कारण उनके लिए जीवन और मरण का संकट आ गया है.गंगा जमुनी संस्कृति बर्बाद कर नफरत का बीज बोया गया.साजिश पूर्वक सत्ता के द्वारा नस्लभेद कर आपस मे तनाव का माहौल बनाया जा रहा है. इसका सड़क पर उसी प्रकार निकलकर विरोध करना पड़ेगा जिस प्रकार 1974 में बिहार से आंदोलन शुरू हुआ और केंद्र की सत्ता हिल गयी थी. जिस गांधी के समय जेल से कैदी भर गये और जेल के वाह्रर घेरा बनाकर कैंपो में रखना पड़ा था और जेल घेरा टुट गया था उसी ढंग की स्थिती  पैदा करना होगा और घर से निकलकर सड़कों पर आना होगा.  

                 प्रश्न प्रति प्रश्न में बनारस के साथी सर्व सेवा संघ की जमीन सरकार द्वारा हड़पने और 11अक्टुबर से दिल्ली मार्च का जिक्र करते हुए सभी को यात्रा  भाग लेने के लिए आमंत्रित किया.  

 पंकज जी  चुनाव में साम्प्रदायिक शक्ति को हराने और नफरत के खिलाफ प्रेम और शांति का संदेश देने के लिए बिहार में यात्रा की शुरुआत चंपारण से करने का आमंत्रण दिया. कारू ने भी बोधगया आने और अपना पूरा जीवन राष्ट्र से नफरत हटाने के लिए  समर्पित करने का संकल्प लिया.

                  इसके अलावे कई महत्वपूर्ण साथियों ने सवाल और महत्वपूर्ण सुझाव दिया..अंतिम दिन  चुनाव में हस्तक्षेप करने के लिए एक कमिटी बनाई गयी जिसके संयोजक प्रोफेसर योगेन्द्र भागलपुर को बनाया गया जिसका कैंप कार्यालय गांधी निधी पटना होगा.

     एक संचालन समिति भी बनाई गयी जिसका संयोजक ज्ञानेन्द्र महाराष्ट्र को बनाया गया.अगला वाहिनी मित्र मिलन  समारोह इलाहाबाद में होगा,जिसके आयोजन समिति  के संयोजन का जिम्मा सौंपा गया. वाहिनी मित्र  संवाद  समिति का संयोजक कारू बोधगया को चुना गया.इसके अलावे महत्वपूर्ण सुझाव आए हैं जिस पर संवाद स्थापित करने और निर्णय लेने के लिए  ऑनलाइन बैठक करने की सहमति बनी है.


आलोक कुमार

पोप चुनाव का तीस दिन पूरा

 


वेटिकन सिटी . आज 8 जून है. 8 मई को पोप लियो पोप चुना गया था.पोप चुनाव का तीस दिन पूरा हो गया. गुरुवार 8 मई को कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को 1.4 बिलियन रोमन कैथोलिक का पोप चुना गया था. उन्होंने अपने लिए पोप लियो 14 नाम चुना है. ये पहली बार है कि यूएसए के किसी नागरिक को पोप बनाया गया है.पोप लियो 14 से पहले रोमन कैथोलिक चर्च के लीडर पोप फ्रांसिस थे जिनका पिछले महीने 88 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया.

     रोमन कैथोलिक चर्च के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण आया जब अमेरिकी कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को 8 मई 2025 को चर्च का 267 वां पोप चुना गया. उन्होंने पोप लियो चौदहवें नाम धारण किया और इस प्रकार वे संयुक्त राज्य अमेरिका से चुने जाने वाले पहले पोप बन गए. उन्होंने पोप फ्रांसिस का स्थान लिया, जिनका निधन 21 अप्रैल 2025 को हुआ था.इस घोषणा के साथ ही जब सेंट पीटर्स स्क्वायर में सफेद धुआं उठा और नई पोप की पहली झलक वेटिकन की बालकनी से मिली, तो हजारों की भीड़ उल्लास और आशा से झूम उठी.

    एक नए पोप का चुनाव विश्व स्तर पर धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण घटना होता है.इस बार दुनिया ने देखा जब कार्डिनल रॉबर्ट प्रीवोस्ट, जो पोप फ्रांसिस के करीबी और उदारवादी माने जाते हैं, को ऐसे समय में चर्च का नेतृत्व करने के लिए चुना गया जब भीतर मतभेद और वैश्विक अनिश्चितता दोनों ही सामने हैं. 8 मई 2025 को उनका चुनाव पोप फ्रांसिस के 21 अप्रैल 2025 को निधन के बाद हुआ, जिससे विश्वभर के 1.4 अरब कैथोलिकों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई.

नाम-पोप लियो चौदहवें (पूर्व में कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट,)

चुने जाने की तिथि 8 मई 2025

देश संयुक्त राज्य अमेरिका

पोप क्रमांक 267वें पोप

उत्तराधिकारी पोप फ्रांसिस (निधन 21 अप्रैल 2025)

पृष्ठभूमि और जीवन यात्रा

अमेरिका में जन्मे प्रीवोस्ट, अपने शांत और सौम्य स्वभाव के लिए जाने जाते हैं.

उन्होंने पेरू में मिशनरी कार्य किया और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर पोप फ्रांसिस की सोच के करीब रहे।

पोप बनने से पहले वह रोमन कूरिया (वेटिकन की प्रशासनिक इकाई) के सदस्य और बिशप रह चुके थे।

पोप चुनाव (कॉन्क्लेव)

स्थानः सिस्टिन चैपल, वेटिकन सिटी

आरंभ 7 मई 2025

भागीदारी 133 कार्डिनल मतदाता, 70 देशों से थे. अब तक का सबसे अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव

परिणामः दो दिनों में चयन, पूर्व पोप्स जैसे फ्रांसिस (2013 5 मत) और बेनेडिक्ट सोलहवें (2005 4 मत) की तरह

सफेद धुआँ और घंटियों की ध्वनि ने नए पोप की घोषणा का संकेत दिया.

ऐतिहासिक प्रथम अमेरिका से पहला पोप.


आलोक कुमार

‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया‘

 


पटना.विश्व पर्यावरण दिवस पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण  ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 05 जून 2025 को “इनसे मिलिए” कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली आयोजन किया.यह विशेष आयोजन पटना स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में अपराह्न 3ः30 बजे से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की. इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय सदस्यगण श्री पी.एन. राय, श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह एवं श्री प्रकाश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रख्यात जीवविज्ञानी एवं ‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया‘ के नाम से सुविख्यात पद्मश्री प्रो. (डॉ.) रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने सहभागिता की। डॉ. सिन्हा, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं.

     अपने प्रेरणास्पद संबोधन में डॉ. सिन्हा ने पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में नदियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बीच गहरा और सीधा संबंध है, जिसे समझना और नीतियों में शामिल करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि गंगा का पारिस्थितिकी तंत्र जैविक एवं अजैविक घटकों से बना एक अत्यंत संवेदनशील संतुलन है, जिसमें बायोजियोकेमिकल साइकिल और ऊर्जा प्रवाह की महत्वपूर्ण भूमिका है.

डॉ. सिन्हा ने अपने 40 वर्षों के गंगा-अनुसंधान, विशेषकर गंगा डॉल्फिन संरक्षण, नदी पारिस्थितिकी तंत्र और जन-जागरूकता अभियान से जुड़े अनुभवों को साझा किया. 

            .उन्होंने बताया कि किस प्रकार संसाधनों की कमी के बावजूद, पटना विश्वविद्यालय में प्रारंभ किए गए शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली.

डॉ. सिन्हा ने विकास के अंधाधुंध मॉडल पर भी गहरी चिंता जताई, विशेषकर नदियों पर अतिक्रमण, बालू खनन, और पर्यावरणीय सलाह के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों के दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को विकास योजनाओं में उचित स्थान दिया जाता, तो न केवल पारिस्थितिकीय संकट टलते बल्कि जनकल्याणकारी विकास भी संभव होता.

              उन्होंने ‘गंगा एक्शन प्लान’ और अन्य परियोजनाओं के उदाहरण देते हुए यह स्पष्ट किया कि नीति निर्माण में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर रहना नुकसानदायक होता है. स्थानीय साक्ष्य, भूगोल और जन-भागीदारी को केंद्र में रखकर ही स्थायी समाधान निकाले जा सकते हैं.

कार्यक्रम में प्राधिकरण के सचिव श्री मो. वारिस खान, सभी अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे. स्वागत भाषण मो. मोइएजुद्दीन द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजित द्वारा प्रस्तुत किया गया.



आलोक कुमार

जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बनकर रहते हैं भाई-भाई

 जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बनकर रहते हैं भाई-भाई 




पटना.बिहार में 2025 में बिहार विधानसभा का चुनाव है. महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला है.बिहार में डबल इंजन की सरकार है.बिहार में नीतीश कुमार और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है.बिहार में नीतीश कुमार ने आयोग और बोर्ड में मनपसंद लोगों को मनोनीत करना शुरू कर दिया है.वहीं केंद्र सरकार पैकेज देने की घोषणा करने लगे हैं. मगर इससे जनता खुश होने के बदले नाराज होने लगे हैं.यहां पर हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई आपस में हैं भाई-भाई और  ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ नहीं चल रहा है.

    अभी नीतीश सरकार ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग का पुनर्गठन किया गया है.विभागीय अधिसूचना के मुताबिक गुलाम रसूल बलियावी (पटना) को आयोग का अध्यक्ष,

लखबिंदर सिंह उपाध्यक्ष ,मौलाना उमर नूरानी उपाध्यक्ष, मुकेश कुमार जैन सदस्य, श्रीमती अफरोजा खातून सदस्य, अशरफ अली अंसारी सदस्य, मो० शमशाद आलम उर्फ मो० शमशाद सांई सदस्य, श्री तुफैल अहमद खान (कादरी) सदस्य, श्री शिशिर कुमार दास,सदस्य, श्री राजेश कुमार जैन सदस्य और श्री अजफर शमशी सदस्य मनोनीत किये गये है.इस बार भी किसी ईसाई समुदाय को आयोग में मनोनीत नहीं किया  गया है.इसको लेकर ईसाई समुदाय में खासा नाराजगी है.

    जानकार लोगों का कहना है कि अंतिम बार ईसाई प्रतिनिधि के रूप में वर्ष 2015 में एम्ब्रोस पैट्रिक को उपाध्यक्ष बनाया गया.उक्त अधिसूचनानुसार संख्या 1069, दिनांक 05.08.2015 द्वारा आयोग का अगले कार्यकाल के लिए गठन किया गया.मोहम्मद सलाम अध्यक्ष बनाये गये तथा एम्ब्रोस पैट्रिक एवं डॉक्टर कप्तान दिलीप कुमार सिन्हा उपाध्यक्ष मनोनीत हुए.सदस्य के रूप में कुलवंत सिंह सलूजा, मोहम्मद अब्दुल्लाह,अहमद अली तमन्ने मनोनित किए गये. सरकार के निर्देश पर मोहम्मद सलाम अध्यक्ष तथा एम्ब्रोस पैट्रिक एंव डॉक्टर कैप्टन दिलीप कुमार सिन्हा उपाध्यक्ष तथा तीनों सदस्यों ने दिनांक 17-05-2017 को त्यागपत्र दे दिया.इसके बाद से आयोग के पुनर्गठन में ईसाई समुदाय के किसी शख्स को आयोग में प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं दिया गया.

      बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष सिसिल साल, भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह,जनसुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतोनी ठाकुर,अल्पसंख्यक विभाग की सचिव इंग्रिड डिसूजा आदि श्रेष्ठ ईसाई नेता हैं,जो देशहित और पार्टीहित में शानदार सेवा कर रहे हैं. मालूम हो कि बिहार सरकार के द्वारा पंजीकृत क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव ए.ए.ओस्ता को 1993-94 में पहली बार राज्य अल्पसंख्यक आयोग में सदस्य के रूप में मनोनीत किए गए थे.इसके बाद आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में पहली बार फादर बेनी एक्का को मनोनीत किया गया.वे 21-08-1998 से 20-08-2001 तक उपाध्यक्ष पद पर रहे.इसी तरह फादर पीटर अरोकियास्वामी 05-08- 2006 से 04-08-2009 तक रहे.पद्मश्री सुधा वर्गीस 07-08-2012 से 06-06-2015 तक रहे.एम्ब्रोस पैट्रिक 07-08-2015 से 17-06-2016 तक रहे.केवल आठ माह ही उपाध्यक्ष पद पर रहे.उसके बाद सरकार ने ईसाई समुदाय को हाशिए पर धकेल दिया है.


आलोक कुमार

पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने का काम

 मानव जीवन विकास समिति कटनी में है. जो एक एनजीओ है.इस समिति का कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड, बघेलखण्ड और महाकौशल क्षेत्र है.यहां के कई गांवों के हजारो किसानों के साथ मिलकर खेती की लागत कम हो.जिस पर वैज्ञानिक सोच के साथ काम किया जाता है.वह चुनौतीपूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक खेती,  जैविक खेती, वृक्षारोपण, पानी बचाओ जैसे पर्यावरणीय संरक्षण के क्षेत्र है.इस पर काफी हद तक सफल होने का दावा मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह ने अपने काम व अनुभव के आधार पर यह लेख साझा किये हैं.

           पर्यावरण और मानव का संबंध अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारा अस्तित्व पर्यावरण पर निर्भर करता है. हमें अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए. पृथ्वी पर जीवन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए हमें सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण का निर्माण करना होगा. यह केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है.

          पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन का आधार है. यह हमारे चारों ओर का वह प्राकृतिक और मानव निर्मित ढाँचा है, जो जीवन को संभव बनाता है. हवा, पानी, भूमि, पेड़-पौधे, और जीव-जंतु मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं. इसके साथ ही, मानव की गतिविधियों और निर्माण भी इस पर्यावरण का हिस्सा हैं. पर्यावरण हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है, और इसकी सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है. आज के युग में पर्यावरणीय समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जो मानव जीवन और पृथ्वी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं. इस निबंध में, पर्यावरण के महत्व, उसके घटकों, समस्याओं और संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा है. पर्यावरण न केवल हमारे अस्तित्व का आधार है, बल्कि यह हमारी समग्र भलाई के लिए भी महत्वपूर्ण है. पर्यावरण हमें स्वच्छ हवा, पीने का पानी, भोजन, और दवाइयां प्रदान करता है. यह जैव विविधता को संरक्षित करता है और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखता है. यह भूमि, वायु, और जल के बीच आपसी संबंधों को बनाए रखता है, जिससे जीवन चक्र सुचारू रूप से चलता रहता है.

पर्यावरण का महत्व केवल शारीरिक जरूरतों तक सीमित नहीं है. यह हमारी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को भी प्रभावित करता है. हरे-भरे जंगल, स्वच्छ नदियाँ, और शांत वातावरण मानसिक शांति प्रदान करते हैं. यह मानव की रचनात्मकता और कल्पना को बढ़ावा देता है. इसलिए, पर्यावरण को संरक्षित रखना न केवल हमारी जरूरत है, बल्कि यह हमारा दायित्व भी है. इसके अलावा, यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी बनाए रखने में मदद करता है, जो समाज की पहचान का हिस्सा हैं.पिछले कुछ दशकों में, मानव की अंधाधुंध गतिविधियों ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है. औद्योगीकरण, शहरीकरण, और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय समस्याओं का मुख्य कारण हैं.

     * ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने धरती के तापमान को बढ़ा दिया है. इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, और मौसम में अप्रत्याशित परिवर्तन हो रहे हैं.

     * वन हमारे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.लेकिन अंधाधुंध वनों की कटाई ने न केवल जलवायु संतुलन को बिगाड़ा है, बल्कि वन्यजीवों का आवास भी नष्ट कर दिया है.

      * जल, वायु, और भूमि का प्रदूषण पर्यावरण के लिए एक गंभीर समस्या है. औद्योगिक कचरे, रासायनिक उर्वरकों, और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग ने प्राकृतिक संसाधनों को दूषित कर दिया है. मानवीय गतिविधियों के कारण कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं.यह पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित करता है और हमारे अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करता है.

वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण पेड़ों का संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करता है. पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे वायु की गुणवत्ता में सुधार होता है. नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और जल ऊर्जा के नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग पर्यावरणीय क्षति को कम करता है. यह प्रदूषण को भी नियंत्रित करता है. प्रदूषण नियंत्रण वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें. इसके अलावा, औद्योगिक कचरे का सही तरीके से निपटान और रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग प्रदूषण को नियंत्रित कर सकते हैं. जल संरक्षण जल हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है. जल की बचत, पुनः उपयोग, और जल पुनर्चक्रण तकनीकों को अपनाना पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है. पुनर्चक्रण और कचरे का प्रबंधन प्लास्टिक और अन्य कचरे के पुनर्चक्रण से पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सकता है. कचरे को सही तरीके से अलग करना और उसका निपटान पर्यावरण संरक्षण में सहायक है. जागरूकता और शिक्षा लोगों को पर्यावरण के महत्व और संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है. पर्यावरणीय शिक्षा को स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करना एक अच्छा कदम हो सकता है. इसके साथ ही, युवाओं को यह सिखाना कि वे अपने दैनिक जीवन में कैसे पर्यावरण को संरक्षित कर सकते हैं, एक लंबी अवधि के बदलाव की शुरुआत हो सकती है.

      पर्यावरण और मानव जीवन के बीच सहजीवी संबंध है. पर्यावरण मानव को जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है, जबकि मानव का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे. लेकिन दुर्भाग्य से, मानव ने अपनी स्वार्थी गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है.

      मानव और पर्यावरण के बीच का यह संबंध संतुलित होना चाहिए. यदि पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, तो मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा. इसलिए, यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम पर्यावरण को संरक्षित रखें.

          पर्यावरण से हमें अनगिनत लाभ मिलते हैं. यह हमें स्वच्छ वायु, पीने का पानी, भोजन, और औषधियां प्रदान करता है. यह जैव विविधता को संरक्षित करता है, जो पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके अलावा, पर्यावरण हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जरूरतों को भी पूरा करता है.

         पर्यावरण मानव जीवन को प्रभावित करता है और उसे आकार देता है.हमारा स्वास्थ्य, जीवन शैली, और सोचने का तरीका पर्यावरण से प्रभावित होता है. स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण में रहने वाले लोग शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ होते हैं. इसके अलावा, हमारा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास भी पर्यावरण की परिस्थितियों पर निर्भर करता है. पर्यावरण हमारी धरती का आधार है और इसे संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है. आज, जब पर्यावरणीय संकट हमारे सामने खड़ा है, हमें अपने प्रयासों को दोगुना करने की आवश्यकता है. हमें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि सामूहिक रूप से भी पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करना चाहिए.

        पर्यावरण के असंतुलन के कारण कई प्रकार की मानव बीमारियां, पानी का संकट, मौसम का बदलाव उत्पन्न होना अपने आप मे बहुत गंभीर समस्या बनती जा रही है. समिति कटनी जिले के बड़वारा व ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक और दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा व जबेरा ब्लाॅक मे किसानों के साथ पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, बायो पेस्टिसाईड यूनिट, प्राकृतिक खेती, पानी संरक्षण, वृक्षारोपण जैसे कई कामों से अच्छे परिणाम के साथ लगे है.

आइए, पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पृथ्वी का निर्माण करें. पृथ्वी केवल हमारी नहीं है, यह उन सभी प्रजातियों का घर है, जो हमारे साथ यहां रहती हैं. पर्यावरण को बचाने के लिए हमारा हर छोटा कदम बड़ा बदलाव ला सकता है. पर्यावरण के लिए संकल्पित गांव कटनी जिले के ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक अन्तर्गत कई ऐसे गांव है जहां पर पर्यावरण संरक्षण के कई आयामों पर काम किया जा रहा है. जिसमे महगवां पंचायत अंतर्गत दैगवां गांव के स्व सहायता समूह (जय दुर्गा भारती समूह) की महिलाओं के द्वारा बायो पेस्टिसाइड यूनिट (बीआरसी) की स्थापना कर जो जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने मे काफी सहायक होती हैं. समूह की महिलाएं अपने खेतों मे जैविक दवाइयां डालती ही है इसके अलावा अपने एवं आसपास के गांव में बिक्री भी करते है. जिसमें पिछले साल रवि एवं खरीफ सीजन मे लगभग 80 से 85 हजार की दवाइयों की बिक्री किया है. गांव के ही पंजाब सिंह, धन सिंह, ओंमकार सिंह, हुकुम सिंह कहते है कि हमारे गांव मे जैविक खेती का रकवा पानी संरक्षण के लिए तालाब फसल चक्रीय मे औषधीय फसलों की खेती का रकवा बढ़ा है.

   मानव जीवन विकास समिति के सहयोग से हम अपने गांव मे प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, पानी संरक्षण, वृक्षारोपण आदि कार्य पर्यावरण संरक्षण के काम मे लगे है.इसी प्रकार ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक के खंदवारा गांव के सुरेष सिंह एवं सोहन सिंह और भलवारा गांव से विजय सिंह भी उक्त कामों के साथ-साथ वर्मी खाद, नाडेप खाद और गौ-पालन के काम मे सक्रिय भूमिका निभा रहे है. इन गांव के अलावा भी मिलेट (श्रीअन्न) की खेती जिसमे कोदो, कुटकी, रागी की खेती का रकवा अच्छा बढ़ा है. ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक मे ही दादर सिहुड़ी के गुमान सिंह कहते है कि हमारे गांव मे सिंचाई का साधन नही होने के कारण खरीफ की फसल अधिकतर बोई जाती है और मानव जीवन विकास समिति के संपर्क में आने के कारण हमको जैविक और पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने का काम एवं आगे की और तैयारी भी कर रहे हैं.




निर्भय सिंह

सचिव

मानव जीवन विकास समिति

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