ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी करने की मांग


 मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं......

नई दिल्ली. EPS-95 एजिटेशन कमिटी के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा है कि केंद्र सरकार के द्वारा लगातार आश्वासन मिल रहा है कि ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी कर दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि एक दशक से केवल आश्वासन ही मिल रहा है.

   आगे कहा कि संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त, 2025 तक बुलाया गया है.इस दौरान माननीय सांसद लोकसभा और राज्यसभा में सरकारी की वादाखिलाफी के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे.वहीं EPS-95 एजिटेशन कमिटी की पैनी नजर मानसून सत्र पर रहेगा.यदि 31 जुलाई तक 7500 न्यूनतम पेंशन,महंगाई भत्ता,पति और पत्नी की स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है.तो मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं.उनकी व्यवस्था एजिटेशन कमिटी की ओर से की जाएगी.समिति के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा कि बुलढाना में साढ़े छह सालों से सत्याग्रह किया जा रहा है.तब भी केंद्र सरकार पर असर नहीं पड़ रहा है.

                पिछले 11 वर्षों से EPS-95 के तहत पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जो आज के समय में जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है. इस संदर्भ में, EPS-95 एजिटेशन कमिटी ने वित्त मंत्री से मुलाकात की और न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग की है.इसके अतिरिक्त, उन्होंने महंगाई भत्ते (DA) का समावेश करने और रिटायर्ड कर्मचारियों तथा उनके जीवन साथियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग की है.वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 78 लाख से अधिक पेंशनर्स लाभ प्राप्त कर रहे हैं.

आलोक कुमार


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स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई

 


प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने मनाई स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती


पटना . बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने आज अपने मुख्यालय सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई.

     इस अवसर पर, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने अब्दुल कय्यूम अंसारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी थे। राजेश राम ने उन्हें गरीबों का सच्चा मसीहा बताते हुए कहा कि मंत्री के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए गरीबों के बेहतर इलाज के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की, जिसने असंख्य लोगों को लाभ मिला. इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के बुनकरों के उत्थान और विकास के लिए भी कई क्रांतिकारी कार्यक्रम चलाए, जिससे इस वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिला. प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए राजेश राम ने कहा कि उस दौरान कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोपरि था और उनके मार्गदर्शन में पार्टी ने नई ऊंचाइयों को छुआ.कार्यक्रम की शुरुआत अंसारी साहब के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी पुष्पांजलि अर्पित की.

            स्व. अंसारी साहब को पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार, मोती लाल शर्मा, जमाल अहमद भल्लू, स्नेहाशीष वर्धन पांडेय ,सौरभ कुमार सिन्हा, उमैर खान, शिशिर कौंडिल्य,नागेन्द्र कुमार विकल, अश्विनी कुमार, बैजनाथ शर्मा, सकिलुर रहमान , असफर अहमद, अरविन्द लाल रजक शाशि कान्त तिवारी, राजेन्द्र चौधरी,राजकिशोर सिंह मो.शाहनवाज उमर सैफुल्लाह खान, वसी अहमद, , यशवंत कुमार चमन, वसीम अहमद, , कन्हैया कुमार, रंजीत यादव, विश्वनाथ बैठा, , मिहिर झा, नदीम अंसारी, रवि गोल्डन, विमलेश तिवारी,. रवि कुमार, मो. तम्मना, अबुल कलाम जौहरी, रजनीश कुमार सिंह, संजय कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, इश्तियाक आजम, नीरज कुमार, भूषण सिंह, उदय चन्द्र झा, अमजद अली आदि प्रमुख हैं.

आलोक  कुमार 


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विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

 

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली!: दिग्विजय सिंह

भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया!: दिग्विजय सिंह

 पटना. बिहार की शिक्षा का परचम पूरे विश्व में लहराया था. नालंदा विश्वविद्यालय हो या विक्रमशिला विश्वविद्यालय तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमित्रा, मंगोलिया आदि देशों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा लेने आते थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) और इत्सिंग (Yixing) ने इसके वैभव की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थे. आज उसी बिहार को भाजपा और जेडीयू की सरकार ने युवाओं के भविष्य बेचने का केंद्र बना दिया है.भर्ती प्रवेश परीक्षा के घोटाले, जर्जर स्कूल भवन और युवाओं का पलायन ये बिहार की शिक्षा का भाग्य बन गया है -

         आज मोदी सरकार ख़ुद कह रही है की बिहार को बर्बाद भाजपा जेडीयू ने किया है ये बातें बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कही .

       राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने क्रमवार आंकड़े पेश करके विस्तार से निम्नांकित बातों को प्रमुखता से संवाददाता सम्मेलन में रखी .उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट UDISE+ 2023–24 का बिहार के लिए चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली और ड्रॉपआउट रेट देश में सबसे ज़्यादा, न स्कूलों में बिजली न शिक्षक , न कंप्यूटर न लाइब्रेरी मौजूद है-

      यह प्रदर्शन पूरे देश में सबसे खराब है- बिजली की सुविधा से वंचित स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है.कंप्यूटर रहित स्कूल और कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में यह सुविधा मौजूद है .

       बिहार में 2,637 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक है और इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं. वहीँ राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं. स्कूलों से ⁠ड्रॉप-आउट रेट भी सबसे अधिक बिहार का ही है जिसमें प्राइमरी (1–5): 8.9%, अपर प्राइमरी (6–8): 25.9%, सेकेंडरी (9–10): 25.63% ड्रॉप-आउट रेट है.

      बिहार में कुल स्कूल और सरकारी हिस्सेदारी राज्य में कुल स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 94,686, कुल स्कूल में सरकारी स्कूल 78,120 हैं,  यानी लगभग 82% स्कूल सरकारी हैं. 2025-26 के बजट में बिहार सरकार ने 60,954 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च करने का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.भाजपा जेडीयू सरकार ने उच्च शिक्षा में भी बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया. AISHE 2021–22 (All India Survey on Higher Education) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है.

     GER (Gross Enrolment Ratio) यानी कुल GER: 17.1% अर्थात, राज्य की 18–23 वर्ष की अनुमानित जनसंख्या 1.36 करोड़ है, लेकिन इनमें से केवल 23.33 लाख छात्र अंडर ग्रेजुएट में पढ़ रहे है .अर्थात 1.13 करोड़ युवा उच्च शिक्षा से वंचित है. देश में सबसे कम प्रति लाख जनसंख्या पर उच्च शैक्षणिक संस्थान बिहार में हैं जिसमें कुल 37 विश्वविद्यालय, 1092 महाविद्यालय, 315 स्टैंड-अलोन संस्थान के साथ कुल उच्च शिक्षण संस्थान 1,387 हैं लेकिन आबादी की तुलना में ये संख्या बेहद कम है.प्रति 1 लाख आबादी पर सिर्फ़ 7 कॉलेज हैं — जबकि राष्ट्रीय औसत 30 कॉलेज प्रति लाख है. यह पूरे भारत में सबसे कम है.

     पेपर लीक पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली! बिहार में भाजपा-जेडीयू की सत्ता की सरपरस्ती में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटालों का गोरख धंधा चल रहा है। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। नीचे हम पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख घोटालों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं:


 2017: सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा.इस मामले में  21 एफआईआर दर्ज की गयी. मगर जांच अभी भी जारी है.

2019 और 2021: इन वर्षों में बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हुए-

2021-22: बिहार उत्पाद विभाग की परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया.ईओयू द्वारा जांच जारी है .2022: बहुचर्चित बीपीएससी 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी मगर जाँच अभी जारी है.

2023: फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ईओयू द्वारा BPSC के केंद्राधीक्षक को गिरफ्तार किया गया.

2023: अमीन भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया था.इस मामले में पटना समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गयी.

2023: देशभर में बहुचर्चित NEET परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. पटना से पेपर आउट होने की पुष्टि .यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा.

2024: बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई.

2024: राज्य स्वास्थ्य समिति की सीएचओ भर्ती परीक्षा में भी प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए लीक हो गया.

    भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया.बिहार में शिक्षा की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत को कलंकित करने वाले “पेपर माफिया” का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है.एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए पेपर लीक करने और उसमें मदद दिलाने के बदले में प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूली जाती है.इन माफियाओं का कारोबार हजारों करोड़ का है .

        नीचे दी गई सूची में विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर माफिया द्वारा ली जाने वाली दरों का विवरण प्रस्तुत है:

NEET PG ₹70-80 लाख,NEET UG, ₹30-40 लाख, बैंकिंग परीक्षा (Bank PO) ₹15-20 लाख, एसएससी (SSC) ₹15-20 लाख, साक्षात्कार सहायक ₹25-30 लाख, पुलिस SI ₹25 लाख, पुलिस सिपाही ₹10-15 लाख ,पटवारी ₹10-15 लाख, टेट/रीट ₹10 लाख, अन्य ₹10 लाख.


       चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सत्यापन पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य भाजपा के निर्देशन पर चुनाव आयोग की मनमानी है जिसमें केवल 28 दिनों में 11 दस्तावेजों के साथ मतदाता सत्यापन का जो दावा चुनाव आयोग कर रही है वो सीधे तौर पर गरीब, आदिवासी, युवा, बाढ़ प्रभावित जनता और पलायन का दंश झेल रहे मतदाताओं को आगामी बिहार विधान सभा चुनावों में मतदान से रोकने की कवायद है.

           संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद् में कांग्रेस के नेता डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दूबे, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम, प्रेमचंद मिश्र, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, असित नाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, रीता सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार


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कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं


 वाटिकन के नियमानुसार कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा पद त्याग करेंगे

कलकत्ता. कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा हैं.उनका जन्म तिथि 26 अगस्त, 1950 है.वाटिकन के नियम के अनुसार 75 वर्ष होने पर पद मुक्त हो जाना है.इसके आलोक में आर्चबिशप थॉमस डिसूजा ने पोप लियो 14 वें के पास पद मुक्त होने के लिए पत्र प्रेषित कर दिया है.जिसे बहुत जल्द ही स्वीकार कर लिया जाएगा.आग्रह स्वीकार होते ही आर्चबिशप थॉमस डिसूजा एमेरिटस हो जाएंगे.एमेरिटस एक सम्मानित शब्द है.जो विशिष्ट पद धारकों को दिया जाता है.

कलकत्ता आर्चडायसिस के आर्चबिशप थॉमस डिसूजा का पुरोहिताभिषेक 16 अप्रैल, 1977 को हुआ था. वे बागडोगरा, पश्चिम बंगाल, भारत के बिशप 14 जून, 1997 को नियुक्त हुए थे. उनका बिशप अभिषेक 25 जनवरी, 1998 को हुआ.उसके बाद कलकत्ता आर्चडायसिस के कोएड जुटर 12 मार्च, 2011 को मनोनीत हुए. मात्र 11 माह के बाद थॉमस डिसूजा कलकत्ता के आर्चबिशप 23 फरवरी, 2012 नियुक्त किया गया.इस पद पर 13 साल से हैं.

    एमेरिटस एक शब्द है जिसका उपयोग उन लोगों में किया जाता है जो किसी दिए गए संगठन में अपने कार्यों को समाप्त करने के बाद भी कुछ विशेष विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं जो उनकी स्थिति के पूर्ण कार्यों में आनंद ले सकते हैं.सामान्य तौर पर, जिन लोगों को किसी संस्थान में एमेरिटस की उपाधि से सम्मानित किया जाता है, वे एक उत्कृष्ट पेशेवर करियर का प्रतिनिधित्व करते हैं और ज्ञान और सलाह के गढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार के शीर्षक आम तौर पर संगठनों में दिए जाते हैं वे एक विशिष्ट सिद्धांत जैसे कि ईसाई चर्च, सरकारी प्रशासनिक प्रणाली, कानून फर्म, आदि को आधार बनाते हैं.

आलोक कुमार


आज उनका अंतिम संस्कार की सेवा



आज फादर अरोकिअम जॉन बोस्को का अंतिम विधि


एक्सटीटीआई चैपल में शाम 4ः00 बजे से मिस्सा


पटना.  शिक्षाविद फादर अरोकिअम जॉन बोस्को थे. आज कैथोलिक चर्च,न्यू आरा में मिस्सा अर्पित करने के बाद भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.यहां पर फादर जॉन बोस्को ने एक शिक्षक के रूप में कैथोलिक हाई स्कूल, आरा में 2016-2018 तक कार्य सेवा निभाया.उसके बाद कैथोलिक मिडिल स्कूल, आरा में 2018-2025 तक प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य किया.वे 63 वर्ष के थे.मृत्यु का कारण लंग्स फेलियोर यानी फेफड़ों का काम करना बंद करना बताया गया.यह एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जिसमें फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पाते या कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर नहीं निकाल पाते.

   कैथोलिक हाई स्कूल और कैथोलिक मिडिल स्कूल आरा के साथ कैथोलिक चर्च,न्यू आरा में है. इसे जेसुइट सोसायटी के द्वारा संचालित है,यह क्षेत्र बक्सर धर्मप्रांत के अधीन है.इसके आलोक में बक्सर धर्मप्रांत की ओर से श्रद्धांजलि एवं मिस्सा किया गया.बक्सर धर्मप्रांत के बिशप डा. जेम्स शेखर ने मिस्सा अर्पित किया.अन्य पुरोहित ने फादर जॉन बोस्को की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित किये.

   बताते चले कि फादर अरोकिअम जॉन बोस्को का जन्म 27.5.1962 को तमिलनाडु में हुआ था.वे 15.7.1981 को जेसुइट में प्रवेश किये.उनका पुरोहिताभिषेक 30.12.1996 को अंतिम व्रत धारण 15.5.2005 में हुआ था.सोशियस से नौसिखिए मास्टर एक्सटीटीआई दीघा घाट, पटना में 1997-1998 तक थे.शिक्षक सेंट इग्नाटियस हाई स्कूल, औरंगाबाद में 1998-2001 तक थे. प्रधानाध्यापक आर आर हाई स्कूल, बरबीघा में 2003-2006 तक थे. उप प्राचार्य सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, बेतिया में 2006-2011 तक थे.निदेशक के.आर. कैंडिडेट्स हाउस में 2012-2015 तक थे.शिक्षक कैथोलिक हाई स्कूल, आरा में 2016-2018 तक थे.प्रधानाध्यापक कैथोलिक मिडिल स्कूल, आरा में 2018 -2025 मृत्युलोक तक थे.

   आज उनका अंतिम संस्कार की सेवा सोमवार, 30 जून को शाम 4ः00 बजे एक्सटीटीआई चैपल में शुरू होगी.


आलोक कुमार

आजतक मुंगेरी ग्राम नहीं बन सका

पटना . पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल अंतर्गत वार्ड नम्बर-22 बी के कुर्जी मोहल्ला में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मुंगेरी लाल रहने वाले थे.बीमार पड़ने के बाद परिजनों ने मुंगेरी बाबू को कुर्जी होली फैमिली हाॅस्पीटल में भर्ती कराया.यहां पर इलाज के दरमियान दैनिक हिंदुस्तान और दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित हुई.इस खबर से नीतीश सरकार के महकमे में हलचल मच गया.आनन फानन में नीतीश सरकार ने मुंगेरी बाबू को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेजने की व्यवस्था कर दी थी.कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के वरीय चिकित्सक डा.एल.बी.सिंह साथ जाने वाले थे.इस बीच मुंगेरी बाबू की हालत खराब हो गयी और प्रभु के दरबार में चले गए.

     इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनीतिक विवशता के कारण जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए दिए.उनके कार्यकाल में बिहार विधान परिषद में कुर्जी मोहल्ला को मुंगेरी ग्राम नामकरण करने का प्रस्ताव पारित किया गया.जो आजतक मुंगेरी ग्राम नहीं बन सका. कुर्जी मोहल्ला का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी और राज्य के पूर्व मंत्री मुंगेरी लाल के नाम पर होगा.अब इसे मुंगेरी ग्राम के नाम से जाना जाएगा.मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार को विधान परिषद में इसकी घोषणा की. ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह मांग सदस्य दिलीप कुमार चौधरी ने उठाई थी.

      परिषद में नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी ने भी इस मांग का समर्थन किया और मुख्यमंत्री से इसकी अपील की. रामवचन राय ने भी इसका समर्थन किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंगेरी लाल बड़े नेता थे और गरीबों के मसीहा थे.सदन और विपक्ष के नेता की भावनाओं को देखते हुए कुर्जी नामकरण मुंगेरी ग्राम करने की घोषणा करता हूं.

आलोक कुमार.

Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...