दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता

 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता 

पटना.विश्व भर में बहुत लोगों को आकर्षित करता है क्रिकेट. यह खेल ऐसा ही है.यह खेल एक बल्ले और गेंद के साथ खेला जाता है, जिसमें दो टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं.एक वक्त में एक टीम गेंदबाजी और दूसरी टीम बल्लेबाजी करती है.यह सब सिक्का उछालने के बाद टॉस जीतने वाली टीम के कप्तान पर निर्भर होता है.

    क्रिकेट एक खेल है जिसमें दो टीमें होती हैं, प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं जो बल्ले और गेंद के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. एक खेल में दो टीम होती हैं, जिसमें एक टीम बल्लेबाजी करती है जबकि दूसरी टीम गेंदबाजी करती है. विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता  होता है और विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करना होता है.आउट करने का फैसला अंपायर करते हैं.

      अब सोनी के स्वामित्व वाली हॉक-आई प्रणाली को यूनाइटेड किंगडम में पॉल हॉकिन्स द्वारा विकसित किया गया. यह प्रणाली मूल रूप से क्रिकेट में टेलीविजन उद्देश्यों के लिए 2000 में लागू की गई थी.सिस्टम छह (कभी-कभी सात) उच्च-प्रदर्शन वाले कैमरों के माध्यम से काम करता है, जो आम तौर पर स्टेडियम की छत के नीचे स्थित होते हैं, जो विभिन्न कोणों से गेंद को ट्रैक करते हैं.फिर छह कैमरों के वीडियो को त्रिकोणीय बनाया जाता है और गेंद के प्रक्षेपवक्र का त्रि-आयामी प्रतिनिधित्व बनाने के लिए संयोजित किया जाता है.हॉक-आई अचूक नहीं है, लेकिन इसे 3.6 मिलीमीटर के भीतर सटीक होने के लिए विज्ञापित किया जाता है और आम तौर पर खेल में निष्पक्ष दूसरी राय के रूप में इस पर भरोसा किया जाता है.

       उसके बाद अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (यूडीआरएस) आया.हालांकि टेस्ट क्रिकेट में डीआरएस का उपयोग 2008 में किया गया.इस प्रणाली को 2011 में वनडे में शामिल किया गया था.डीआरएस को 2017 में T20 इंटरनेशनल में पेश किया गया था. क्रिकेट का इतिहास हजारों वर्षों से बदला है और यह खेल विभिन्न प्रकारों में खेला जाता है, जैसे कि टेस्ट मैच, वनडे इंटरनेशनल, और टी20. वनडे और टी20 खेल आमतौर पर अधिक रोमांचक होते हैं और उनमें बहुत तेजी से बदलती घटनाएं होती हैं.

    क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा आमतौर पर एक उत्सव की भावना के साथ खेली जाती है और इसमें उत्साह, जज्बा, और अद्वितीयता होती है. खेल के शौर्य और कुशलता के साथ, यह खेल खिलाड़ियों के बीच अज्ञात से मित्रता भी पैदा करता है.क्रिकेट जनप्रियता के कारण विभिन्न टूर्नामेंट और लीग आयोजित होते हैं, जैसे कि विश्व कप, आईपीएल, बीबीसी चैम्पियंस ट्रॉफी, और बहुत से अन्य।.इन टूर्नामेंट्स में विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने देश का गौरव बढ़ाते हैं.

      क्रिकेट का इतिहास, उनके क्रिकेट स्टेडियमों की भरपूर महक, और विभिन्न रूपों के खेलों की रोचकता ने इसे एक महत्वपूर्ण खेल बना दिया है.यह न केवल खेल है, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है.क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा न केवल खेल दर्शकों को एकजुट करती है, बल्कि यह एक खेल के रूप में आदर्श से उत्साहित करता है.

   

आलोक कुमार

पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में प्रदर्शन 7 मार्च को

 चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध 

पटना.सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को बुधवार 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग को डीटेल्स पेश करने का निर्देश दिया था. इस बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी डीटेल्स को जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा है. एसबीआई ने कहा है कि कोर्ट ने जो 3 हफ्ते का समय दिया था वह पर्याप्त नहीं है. एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के डीटेल्स का खुलासा करने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने का सोमवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया. पिछले महीने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया था.            

     यू.पी.ए.दो को हराने के बाद एन.डी.ए.की सरकार 2014 में सत्तासीन हो गई.कांग्रेस मुक्त राज्य सरकार बनाने में जुटी भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी. इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानून लागू कर दिया था.प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बांड प्रणाली के तहत, इन बांडों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जाना चाहिए, लेकिन गुमनाम रूप से पार्टियों को दान किया जा सकता है.इसका भरपूर लाभ एन.डी.ए.सरकार को मिली. हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड का काफी विरोध हुआ.            

     बता दें कि इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक राजनीतिक दलों को धन देने के लिए बांड जारी कर सकता है.इन्हें ऐसा कोई भी दाता खरीद सकता है, जिसके पास एक ऐसा बैंक खाता है, जिसकी केवाईसी की जानकारियां उपलब्ध हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड में भुगतानकर्ता का नाम नहीं होता है.योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक की निर्दिष्ट शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये में से किसी भी मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे जा सकते हैं.चुनावी बॉन्ड्स की अवधि केवल 15 दिनों की होती है, जिसके दौरान इसका इस्तेमाल सिर्फ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान देने के लिए किया जा सकता है.

      केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये चंदा दिया जा सकता है, जिन्होंने लोकसभा या विधान सभा के लिए पिछले आम चुनाव में डाले गए वोटों का कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो.योजना के तहत चुनावी बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं.इन्हें लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के दौरान भी जारी किया जा सकता है.हालांकि, इस प्रणाली के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हैं.कुछ लोग यह मानते हैं कि इससे लोगों को निश्चित राजनीतिक दलों के साथ बंधन में डालने का खतरा हो सकता है और यह लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है.

     इस प्रणाली की तुलना में, यह भी महत्वपूर्ण है कि कैसे उसे सुधारा जा सकता है ताकि यह सबके समर्थन और प्रतिनिधित्व की दिशा में और बेहतर काम कर सके.इसमें नागरिकों को अधिक सकारात्मक और सशक्त बनाने के लिए उपाय शामिल करना भी महत्वपूर्ण है.सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है.आयकर अधिनियम के तहत, किसी के चुनावी बांड दान को धारा 80 जीजी और धारा 80 जीजीबी के तहत कर-मुक्त माना जाता है. हालाँकि, दान प्राप्त करने वाला राजनीतिक दल भी आयकर अधिनियम की धारा 13 ए के अनुसार दान प्राप्त कर सकता है.

     इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भाजपा को चंदा देने वालों का नाम एस.बी.आई. द्वारा सार्वजनिक नहीं किये जाने के विरोध में पटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष शशि रंजन के नेतृत्व में गुरुवार 0 7 मार्च,2024 को गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास प्रदर्शन किया जाएगा.प्रदर्शन अपराह्न 12ः30 बजे गांधी मैदान स्थित एस.बी.आई. शाखा के पास होगा.     

आलोक कुमार

अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना चाहिए

 धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार समझता था:डा0 अखिलेश

पटना। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को अपना परिवार समझने वाले बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी को बपना परिवार बसाना ही नहीं आया उनको तो परिवार को छोड़ने की आदत है। अगर मोदी देश को वास्तव में परिवार समझते हैं तो परिवार की चिंता करना भी उनको देखना चाहिए।

  आगे कहा कि परिवार को बेहाल करके खुद वास्कोडिगामा की तरह विश्व भ्रमण नहीं करना चाहिए। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या मणिपुर के जिन महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया वह इस परिवार की इज्जत नहीं थी। महिला पहलवानों को भी मोदी जी बेटी कहा था लेकिन उन्हीं के पार्टी के सांसद जब उन बेटियों की इज्जत पर हाथ डाल रहा था तो मोदी जी की पुलिस ने उन बेटियों पर लाठियां बरसाईं, तब मोदी धृतराष्ट्र क्यों हो गए? धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर को अपना परिवार कहता था लेकिन द्रौपदी का चीरहरण होने दिया, हर तरह का अन्याय, अनैतिकता और सत्ता के दुरुपयोग कर विरोधियों को कुचलने का नापाक खेल चलता रहा, वह आज हो रहा है। लेकिन उनको याद होना चाहिए कि जिस तरह कौरवों का विनाश हुआ ठीक उसी तरह भाजपा का भी विनाश तय है।  

    अगर देश को मोदी वास्तव में अपना परिवार समझते हैं तो देशवासियों की आह उनको जरूर लगेगी। अगर देश को परिवार समझते तो भूख से बिलखते बच्चों की चीख उनको जरूर सुनाई नहीं देती और भूख मिटाने वाले अन्नदाता किसानों को कुचलने के लिए मोदी रोड पर कील नहीं ठुकवाते और उनके रास्ते में पत्थरों का पहाड़ खड़ा नहीं करवाते। वही हाल नौजवानों का है। देश का भविष्य बेरोजगारी से बेहाल है और मोदी दो करोड़ सालाना नौकरी का झाँसा देते रहे। देश का नौजवान, महिला और किसान इस क्रूर मजाक का बदला जरूर लेंगे।


आलोक कुमार

40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

 अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू कर दी 

जमुई। अभी तक सर्वज्ञात था कि लोग जन्मदिन और वैवाहिक सालगिरह के अवसर पर रक्तदान करके महादान करते थे। अब समय बदल गया है। इस क्षेत्र में रहने वाले विनोद मंडल ने अपनी पत्नी के निधन पर रक्तदान अर्पण शिविर आयोजित कर महादान की शानदार पहल शुरू  कर  दी है. इस अवसर पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण शिविर में आकर अंजू कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

         बता दें कि गुर्दा (किडनी) शरीर का एक जरूरी अंग है। ये मानव शरीर के निचले हिस्से में होता है। ये मानव खून की सफाई करते हैं और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालते हैं। किडनी आपके मूत्राशय में विषाक्त पदार्थों को भेजती है, जिसे आपका शरीर बाद में पेशाब के दौरान विषाक्त पदार्थों को निकालता है। पर गुर्दे से जुड़ी कोई भी बीमारी इसके काम काज को प्रभावित कर सकती है। अंजू कुमारी  किडनी रोग के शिकार हो गयी। अंजू कुमारी की दोनों किडनी फेल्योर हो गई। जब आपके गुर्दे आपके ब्लड से वेस्ट चीजों को पर्याप्त रूप से फिल्टर करने की क्षमता खो देते हैं। उसे लगातार डायलिसिस पर रखा गया। जो सफल नहीं हो सका। अंनतः अंजू कुमारी का निधन हो गया। वह एक बच्ची को छोड़ गयी। 

              रक्त के अभाव में किसी व्यक्ति की मौत न हो उसके प्रति सचेत रहने वाली गैर सरकारी संस्था प्रबोध जन सेवा संस्थान की इकाई मानव रक्षक रक्तदाता परिवार,जमुई द्वारा रक्तदाता मिलन सह स्वैच्छिक रक्तदाता शिविर आयोजित की गई।  शिविर का उदघाटन जिलाधिकारी राकेश कुमार, सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रताप, डीएस डॉ सैयद नौशाद अहमद, सुदर्शन सिंह एवं संस्थान सचिव सुमन सौरभ द्वारा संयुक्त रूप से की गई। 

                शिविर की शुरुआत रक्तवीर विनोद मंडल के पत्नी के तस्वीर पर पुष्पर्पित कर की गई। इस दौरान स्मृतिशेष अंजू कुमारी के निधन पर तकरीबन 40 से अधिक युवाओं ने रक्त अर्पण श्रद्धांजलि दी। वहीं, अधिकारियों ने रक्तदाताओं के बीच प्रोत्साहन प्रमाण पत्र भी वितरित किए। 

डीएम राकेश कुमार ने संस्थान के क्रियाकलापों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है। इससे लोगों को जीवनदान मिलता है।डीएम ने रक्तवीरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, हर सक्षम लोगों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए। वहीं, संस्थान सचिव सुमन सौरभ, रक्तवीर अनुराग सिंह,शिवजीत सिंह, रोशन सिंह, सौरभ मिश्र, रॉकी, सचिन कुमार आदि ने बताया कि पत्नी के निधन पर आयोजित हुआ ये शिविर एक सामाजिक चेतना का आगाज है,ताकि समाज के अंतिम वर्ग रक्तदान की महत्ता समझते हुए संस्थान के उद्देश्य को सार्थक कर सके। शिविर के अंतिम कड़ी में सिविल सर्जन व डी एस ने भी संस्थान के सकारात्मक कार्यशैली की प्रसंशा करते हुए रक्तवीरों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया। वहीं, शिविर के मौके पर सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


आलोक कुमार

अपने उद्घाटन भाषण में डा0 सिंह ने कांग्रेस के लिए मोर्चा संगठनों को रीढ़ बताया


 मोदी राज में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा क्रूर मजाक : डा0 अखिलेश

पटना. शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में महिला कांग्रेस के दफ्तर का उद्घाटन किया गया. उद्घाटन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने किया. अपने उद्घाटन भाषण में डा0 सिंह ने कांग्रेस के लिए मोर्चा संगठनों को रीढ़ बताया. 

     उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास में आधी आबादी की अहम भूमिका है. डा0 सिंह ने कहा कि मोदी राज में महिलाओं पर हर तरह के अत्याचार की घटना लगातार बढ़ती जा रही है. बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा क्रूर मजाक बन गया है. क्योंकि सत्ता में ऊँचे पदों पर बैठे लोग भी बहू-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे. ऐसी परिस्थिति में महिला कांग्रेस को रणनीति बनाकर प्रदेश भर में एक असरदार आन्दोलन खड़ा करने की जरूरत है.

   उन्होंने आश्वासन दिया कि महिला कांग्रेस के द्वारा महिला उत्प्रीड़न एवं शोषण के खिलाफ उठाये गये हर आवाज को प्रदेश कांग्रेस पूरी शक्ति देगी. इस अवसर पर महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरवत जहां फातिमा ने अपनी साल भर की रिपोर्ट पेश की और होने वाले कार्यक्रमों से प्रदेश अध्यक्ष को अवगत कराया.

    इस मौके पर जो नेता उपस्थित थे उनमें शामिल हैं - कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान, पूर्व अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, नरेन्द्र कुमार, विधायक आनंद शंकर, डा0 हरखु झा, प्रमोद कुमार सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, राजकुमार राजन, प्रो. अम्बुज झा, नागेन्द्र कुमार विकल, निर्मल वर्मा, रूपम यादव, डा0 विनोद शर्मा, सुधा मिश्रा, आईपी गुप्ता, संजय यादव, वैद्यनाथ शर्मा, गुरदयाल सिंह, आदित्य पासवान, निधि पांडेय, अरुण सिंह, राम सागर पाण्डेय एवं अन्य.


आलोक कुमार 

पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में शुक्रवार को आयोजित एक मिलन समारोह

 भाजपा के बहुत सारे लोग कांग्रेस में आना चाहते हैं : डा0 अखिलेश


पटना। कभी-कभी शिकारी खुद शिकार बन जाता है। तोड़फोड़ की जो सियासत भाजपा ने शुरू की उसका शिकार खुद भाजपा बन रही है। बहुत लोग मेरे सम्पर्क में हैं जो भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आना चाहते हैं। लेकिन मैंने यह शर्त रख दिया है कि कांग्रेस में वगैर शर्त ही प्रवेश संभव होगा। भाजपा ने प्रजातंत्र को मंडी समझती है इसका खामियाजा उसको भुगतना होगा। उक्त बातें बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में शुक्रवार को आयोजित एक मिलन समारोह में कही।

   मिलन समारोह में भाजपा नेता मंटू शर्मा ने आज अपने सैकड़ों समर्थकों  के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके अलावा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अचला सिंह ने भी हाथ के साथ चलने का निर्णय लिया। प्रदेश अध्यक्ष ने दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। मंटू शर्मा बिक्रम विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और पूर्व में कांग्रेस के पटना ग्रामीण जिला के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस अवसर पर डा0 सिंह ने कहा कि इन दोनों के पार्टी में आने से पार्टी मजबूत होगी। अधिवक्ता अचला सिंह ने कहा कि कांग्रेस न्याय की बात करती है। और राहुल जी के यात्रा का नाम भी न्याय यात्रा है इसलिए केवल कांग्रेस ही हमारे लिये उपयुक्त जगह थी। दोनों को तीन मार्च की महारैली में अपना दमखम दिखाने का निर्देश दिया गया।

   इस अवसर पर भारी संख्या में नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे उनमें प्रमुख हैं-पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, डा0 अशोक कुमार, अवधेश कुमार सिंह, लाल बाबू लाल, प्रमोद कुमार सिंह, कपिलदेव प्रसाद यादव, ब्रजेश प्रसाद मुनन, राजेश राठौड़, ब्रजेश पाण्डेय, डा0 विनोद शर्मा, आईपी गुप्ता, वीके रवि, मिन्नत रहमानी, नागेन्द्र कुमार विकल, संजय यादव, ज्ञान रंजन, कमलदेव नारायण शुक्ला, दुर्गा प्रसाद, सुमन मल्लिक, सुधा मिश्रा, मिरनाल अनामय, निधि पाण्डेय,अरुणा सिंह, सुदय शर्मा,  रामाशंकर पाण्डेय।


आलोक कुमार


सभी जिला अध्यक्षों को कम से कम दो लाख लोगों को लाना है

 राहुल की महारैली में सुनाई देगा जनाक्रोश का हुंकार: डा0 अखिलेश

पटना. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होने वाली महागठबंधन की जन विश्वास महारैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है. इसके लिए आज पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों को बुलाकर मीटिंग ली गई. मीटिंग में 37 जिलाध्यक्ष एवं तीन जिले के जिलाध्यक्ष के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सभी जिला अध्यक्षों को कम से कम दो लाख लोगों को कांग्रेस के झंडा के साथ 3 मार्च सुबह 10 बजे गांधी मैदान पहुँचाने का टास्क दिया गया है. बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले एवं नीतीश के पलटी मारने के बाद की यह पहली बैठक है इसलिए कांग्रेस को इसमें अन्य घटक दलों से बढ़चढ़ कर भागीदारी सुनिश्चित करनी है.

   मालूम हो कि इस महारैली की घोषणा भी डा0 सिंह ने ही की थी. इसके अलावा इसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के अलावा वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी उपस्थित रहेंगे.डा0 सिंह ने जिला अध्यक्षों को लोगों के रहने एवं भोजन-पानी आदि की व्यवस्था में पार्टी द्वारा भरपूर मदद देने का आश्वासन दिया. प्रदेश अध्यक्ष ने ऐलान किया कि महारैली में भाजपा-नीतीश के खिलाफ बिहार की जनता के आक्रोश का हुंकार सुनाई देगा.

      बैठक में जिलाध्यक्षों ने एक-एक कर अपनी-अपनी तैयारी का लेखा जोखा प्रस्तुत किया एवं प्रदेश अध्यक्ष से अपनी परेशानियाँ भी साझा की. डा0 सिंह ने संगठन स्तर पर भी जिलाध्यक्षों को अधिक से अधिक शक्ति देने की बात कही ताकि वे असरदार तरीके से आने वाले चुनाव में अपनी निर्णायक भूमिका अदा कर पाएं.

      जिलाध्यक्षों के अलावे प्रदेश नेतृत्व के सभी प्रमुख नेता इसमें मौजूद रहे उनमें शामिल हैं- कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान, विजय शंकर दूबे, कृपानाथ पाठक, डा0 अशोक कुमार, प्रमोद कुमार सिंह, ब्रजेश पाण्डेय, कपिलदेव प्रसाद यादव, तारानन्द सदा.

आलोक कुमार

Bihar : पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस

  बेतिया पल्ली में मरियम के जन्मोत्सव पर आस्था का उत्सव प्रार्थना, पवित्र मिस्सा और आठ बच्चों के प्रथम परमप्रसाद के साथ मनाया गया पल्ली दिवस...