प्रधानमंत्री जी, जन्मदिन पर देश आपको शुभकामनाएं दे रहा है। क्या इस अवसर पर देश के लाखों EPS-95 पेंशनभोगियों की लंबे समय से चली आ रही ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग पर भी कोई ठोस पहल हो सकती है?
17 सितंबर का दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के कारण देश के सार्वजनिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था। उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा में 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उनके सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश का उल्लेख किया था।
जन्मदिन के अवसर पर देशभर से शुभकामनाएं दी जाती हैं। लेकिन लोकतंत्र में शुभकामनाओं के साथ जनता की अपेक्षाएं और समस्याएं भी सत्ता तक पहुंचनी चाहिए। इसी संदर्भ में कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS-95 के पेंशनभोगियों की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा है।
₹1,000 से ₹7,500 की मांग क्यों?
कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रतिमाह निर्धारित है। यह न्यूनतम राशि 1 सितंबर 2014 से लागू है और केंद्र सरकार अतिरिक्त बजटीय सहायता के माध्यम से इसे सुनिश्चित करती है।
लेकिन समय के साथ जीवन-यापन की लागत बढ़ी है। बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए दवाइयां, चिकित्सकीय जांच, भोजन, बिजली, आवागमन और अन्य रोजमर्रा के खर्च आय का बड़ा हिस्सा ले सकते हैं।
इसीलिए पेंशनभोगियों के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों की ओर से न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रतिमाह करने सहित अलग-अलग मांगें लंबे समय से उठाई जाती रही हैं। जुलाई 2025 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने स्वयं संसद में बताया था कि EPS-95 की न्यूनतम पेंशन को मौजूदा ₹1,000 से बढ़ाने के लिए ट्रेड यूनियनों और जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।
यानी यह केवल सोशल मीडिया पर उठने वाली मांग नहीं है। इसे विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों की ओर से सरकार के सामने रखा गया है।
पेंशनभोगियों के लिए नियमित आय का महत्व
बुढ़ापे में नियमित आय का महत्व बढ़ जाता है। कामकाजी जीवन में व्यक्ति परिवार की जिम्मेदारियां निभाता है, रोजगार करता है और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में योगदान देता है। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय का साधन सीमित हो जाने पर पेंशन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
EPS-95 को सरकार ने सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के रूप में वर्णित किया है। मार्च 2025 में श्रम मंत्रालय ने बताया कि इस योजना में सदस्य पेंशन, विकलांगता पेंशन, विधवा या विधुर पेंशन और बच्चों के लिए पेंशन जैसी विभिन्न सुविधाएं शामिल हैं। उसी जानकारी के अनुसार 2023-24 में EPS-95 के अंतर्गत लगभग 78.49 लाख पेंशनभोगी लाभ प्राप्त कर रहे थे।
इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि पेंशन का सवाल बड़ी संख्या में परिवारों से जुड़ा हुआ है।
₹7,500 की मांग पर सरकार क्या कहती है?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। ₹7,500 न्यूनतम पेंशन वर्तमान में सरकार द्वारा घोषित नई राशि नहीं है, बल्कि पेंशनभोगी संगठनों और अन्य हितधारकों की ओर से उठाई जाने वाली मांगों में से एक है।
वहीं सरकार ने जुलाई 2025 में संसद में बताया था कि EPS-95 के तहत मौजूदा न्यूनतम पेंशन ₹1,000 है। सरकार ने यह भी बताया कि पेंशन फंड में नियोक्ता का योगदान और केंद्र सरकार का बजटीय समर्थन शामिल होता है तथा योजना की वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाता है।
इसलिए ₹7,500 की मांग पर निर्णय केवल घोषणा का विषय नहीं है। इसके लिए वित्तीय प्रभाव, योजना के फंड, सरकारी सहायता और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।
जन्मदिन पर क्यों उठ रही है यह मांग?
प्रधानमंत्री का जन्मदिन राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के कारण सार्वजनिक चर्चा का अवसर बनता है। ऐसे अवसर पर किसी वर्ग की मांग को सामने रखना लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा हो सकता है।
पेंशनभोगियों की अपील भी इसी संदर्भ में है—यदि सरकार उचित समझे तो EPS-95 की न्यूनतम पेंशन पर गंभीरता से विचार किया जाए और पेंशनभोगियों को राहत देने के लिए कोई ठोस निर्णय लिया जाए।
₹7,500 की मांग को स्वीकार करना या नहीं करना सरकार का नीतिगत और वित्तीय निर्णय होगा। लेकिन इस मांग पर चर्चा और उसके आधार, लागत तथा संभावित प्रभाव को सार्वजनिक रूप से समझाना भी महत्वपूर्ण है।
पेंशन केवल आर्थिक मुद्दा नहीं
पेंशन का सवाल केवल रकम बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता का प्रश्न भी जुड़ा है।
किसी बुजुर्ग को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े, यह सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य माना जा सकता है। इसलिए न्यूनतम पेंशन की राशि पर चर्चा करते समय महंगाई, चिकित्सा खर्च और वास्तविक जीवन-यापन लागत जैसे पहलुओं पर भी विचार होना चाहिए।
प्रधानमंत्री से एक विनम्र अपील
प्रधानमंत्री जी, 17 सितंबर को देश आपको जन्मदिन की शुभकामनाएं देता है। इसी अवसर पर EPS-95 के लाखों पेंशनभोगियों की ओर से एक विनम्र अपील भी सामने रखी जा सकती है।
₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग पर गंभीरता से विचार कीजिए।
यदि सरकार इस विषय पर कोई निर्णय लेती है, तो उससे पहले उसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रभाव स्पष्ट करना भी जरूरी होगा। लेकिन पेंशनभोगियों की मांग को लगातार चर्चा और नीति-निर्माण के दायरे में रखना सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
जन्मदिन केवल शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं, बल्कि समाज की अपेक्षाओं को सामने रखने का अवसर भी हो सकता है। देश के वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों की आवाज को भी इस सार्वजनिक संवाद में जगह मिलनी चाहिए।
जन्मदिन पर पेंशनभोगियों की यही उम्मीद है—उनकी न्यूनतम पेंशन ₹7,500 प्रतिमाह करने की मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करे और यदि वित्तीय तथा नीतिगत रूप से संभव हो तो उन्हें राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
क्योंकि सम्मानजनक वृद्धावस्था केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक सुरक्षा का भी विषय है।
आलोक कुमार