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Bihar: गांव की सड़क बनने के बाद उसकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है?

 


गांव की सड़क बनने के बाद उसकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है?

गांव में सड़क बन जाना विकास की अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि उसकी शुरुआत है। सड़क बनने के बाद कुछ समय तक ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिलती है। लेकिन बारिश, जलजमाव, भारी वाहनों की आवाजाही, नालियों की समस्या और समय पर रखरखाव नहीं होने से वही सड़क धीरे-धीरे खराब होने लगती है। कई जगह सड़क बनने के कुछ ही वर्षों में गड्ढे दिखाई देने लगते हैं और ग्रामीणों को फिर पुराने रास्ते जैसी परेशानी झेलनी पड़ती है।

ऐसे में एक सामान्य सवाल सामने आता है—गांव की सड़क बनने के बाद उसकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

इसका जवाब केवल ग्राम पंचायत या मुखिया के नाम से नहीं दिया जा सकता। सड़क किस योजना के तहत बनी है, उसका स्वामित्व किस विभाग या संस्था के पास है और निर्माण के समय रखरखाव से जुड़ी क्या शर्तें तय की गई थीं—इन बातों के आधार पर जिम्मेदारी अलग-अलग हो सकती है।

सबसे पहले पता करें कि सड़क किस योजना से बनी है

किसी सड़क की मरम्मत के लिए शिकायत करने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह सड़क किस योजना या विभाग के अधीन आती है।

यदि सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी है, तो उसके रखरखाव की व्यवस्था योजना के निर्धारित प्रावधानों और संबंधित राज्य एजेंसी के माध्यम से होती है। सड़क निर्माण के साथ रखरखाव की अवधि और संबंधित अनुबंध की शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं।

दूसरी ओर, किसी गांव की सड़क यदि ग्राम पंचायत या स्थानीय निकाय की योजना से बनी है, तो उसके रखरखाव में पंचायत और संबंधित स्थानीय प्रशासन की भूमिका हो सकती है।

इसी तरह कुछ सड़कें ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधीन हो सकती हैं। इसलिए केवल यह देखकर कि सड़क गांव में है, यह तय नहीं किया जा सकता कि उसकी जिम्मेदारी पंचायत की ही है।

सड़क बनने के बाद ठेकेदार की जिम्मेदारी कब तक रहती है?

ग्रामीणों के बीच अक्सर यह धारणा रहती है कि सड़क बन जाने और भुगतान हो जाने के बाद ठेकेदार की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। लेकिन ऐसा हर मामले में जरूरी नहीं है।

निर्माण अनुबंध में यदि Defect Liability Period यानी दोष दायित्व अवधि या रखरखाव से जुड़ी कोई निर्धारित शर्त है, तो उस अवधि में निर्माण संबंधी कमी सामने आने पर संबंधित एजेंसी या अनुबंध के अनुसार ठेकेदार से सुधार कराया जा सकता है।

इसलिए सड़क निर्माण के समय योजना का नाम, काम करने वाली एजेंसी, निर्माण वर्ष और उपलब्ध कार्यस्थल संबंधी जानकारी को सुरक्षित रखना उपयोगी है।

अगर सड़क बनने के थोड़े समय बाद ही उसकी सतह उखड़ने लगे, बड़े गड्ढे बनने लगें या निर्माण में स्पष्ट कमी दिखाई दे, तो ग्रामीण लिखित शिकायत के माध्यम से संबंधित विभाग से निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।

बारिश के बाद सड़क टूटने का कारण केवल खराब निर्माण नहीं

गांव की सड़कें बारिश के मौसम में सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। कई जगह सड़क के किनारे जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होती। पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहने से सड़क की सतह और नीचे की संरचना कमजोर हो सकती है।

इसलिए हर बार केवल गड्ढे भर देना स्थायी समाधान नहीं है।

यदि किसी सड़क पर हर साल एक ही स्थान पर पानी जमा होता है और सड़क टूटती रहती है, तो समस्या की जड़ नाली, पुलिया, कल्वर्ट या जल निकासी की व्यवस्था में भी हो सकती है।

ऐसे मामलों में ग्रामीणों को केवल सड़क की मरम्मत की मांग करने के बजाय जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान की मांग करनी चाहिए। अन्यथा कुछ समय बाद फिर उसी जगह सड़क खराब होने की संभावना बनी रहती है।

सड़क खराब होने पर ग्रामीण शिकायत कैसे करें?

सड़क खराब होने की जानकारी केवल मौखिक रूप से किसी प्रतिनिधि को दे देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। संभव हो तो शिकायत लिखित या उपलब्ध सरकारी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करनी चाहिए, ताकि उसका रिकॉर्ड मौजूद रहे।

शिकायत में कुछ जरूरी जानकारी शामिल की जा सकती है—

  • गांव और पंचायत का नाम

  • सड़क का स्थान

  • सड़क किन गांवों या मुख्य मार्ग को जोड़ती है

  • सड़क बनने का अनुमानित वर्ष

  • वर्तमान समस्या का विवरण

  • गड्ढों या टूटे हिस्सों की तस्वीरें

  • जलजमाव होने की स्थिति

  • आवागमन में हो रही परेशानी

  • संबंधित सड़क की मरम्मत या निरीक्षण की मांग

यदि यह स्पष्ट नहीं है कि सड़क किस विभाग के अधीन है, तो पंचायत, प्रखंड कार्यालय या संबंधित ग्रामीण सड़क/पथ विभाग से पहले इसकी जानकारी ली जा सकती है।

पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका क्या होनी चाहिए?

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों की भूमिका केवल नई सड़क बनवाने की मांग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गांव में पहले से मौजूद सड़कों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।

यदि ग्रामीण किसी सड़क की खराब स्थिति की शिकायत करते हैं, तो पंचायत प्रतिनिधि संबंधित विभाग तक उनकी समस्या पहुंचाने और यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि सड़क किस एजेंसी के अधीन है।

यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार शिकायत गलत कार्यालय में चली जाती है और ग्रामीण लंबे समय तक एक विभाग से दूसरे विभाग का चक्कर लगाते रहते हैं।

सड़क की खराब स्थिति में ग्रामीणों की भी भूमिका है

सड़क की देखभाल को केवल सरकार की जिम्मेदारी मान लेना भी पूरी तस्वीर नहीं है। सड़क के किनारे कूड़ा डालना, नाली बंद करना, जल निकासी के रास्ते पर कब्जा करना या सड़क पर स्थायी अतिक्रमण करना सड़क को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसी तरह यदि किसी सड़क पर ऐसे भारी वाहन लगातार चल रहे हैं जिनके कारण सड़क की स्थिति प्रभावित हो रही है, तो ग्रामीण इसकी जानकारी संबंधित प्रशासन या विभाग को दे सकते हैं।

सड़क सार्वजनिक संपत्ति है। इसकी सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

सड़क पर खर्च हुए पैसे की जानकारी क्यों जरूरी है?

ग्रामीणों के लिए यह जानना उपयोगी है कि उनके गांव की सड़क किस योजना से बनी, किस विभाग ने काम कराया और रखरखाव की जिम्मेदारी किसके पास है।

जहां उपलब्ध हो, वहां कार्यस्थल पर लगे सूचना बोर्ड, योजना संबंधी विवरण और सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यदि कोई सड़क बार-बार बनती है और थोड़े समय बाद फिर खराब हो जाती है, तो सवाल केवल मरम्मत का नहीं रह जाता। वहां सड़क की गुणवत्ता, जल निकासी, निगरानी, यातायात भार और सरकारी धन के उचित उपयोग जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

प्रशासन को शिकायत के बाद क्या करना चाहिए?

सड़क की समस्या सामने आने के बाद संबंधित विभाग को केवल मरम्मत कर देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पहले यह देखना जरूरी है कि सड़क खराब क्यों हुई।

यदि कारण जलजमाव है तो जल निकासी की व्यवस्था देखी जानी चाहिए। यदि पुलिया या कल्वर्ट की समस्या है तो उसका समाधान आवश्यक है। यदि निर्माण संबंधी कमी है तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

शिकायतकर्ता को भी संभव हो तो यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसकी शिकायत किस विभाग को भेजी गई है और उस पर क्या कार्रवाई की गई।

निष्कर्ष

गांव की सड़क बन जाने के बाद उसकी कहानी खत्म नहीं होती। सड़क की वास्तविक उपयोगिता उसके निर्माण के बाद शुरू होती है। अच्छी सड़क वही है जो गुणवत्तापूर्ण निर्माण के साथ उचित जल निकासी, नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव के कारण लंबे समय तक ग्रामीणों के काम आती रहे।

इसलिए ग्रामीणों को यह जानने की जरूरत है कि उनके गांव की सड़क किस योजना और विभाग के अधीन है। पंचायत प्रतिनिधियों को शिकायतों को सही विभाग तक पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए और संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट रखनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सड़क खराब होने का इंतजार करने के बजाय उसकी नियमित निगरानी और समय पर छोटी मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए। इससे बड़ी क्षति और अधिक सरकारी खर्च दोनों को कम किया जा सकता है।

सरकारी पैसे से बनी सड़क का उद्देश्य केवल उद्घाटन के दिन अच्छी दिखाई देना नहीं है। उसका असली मूल्य तब सामने आता है, जब वह वर्षों तक गांव के लोगों को सुरक्षित, सुगम और भरोसेमंद आवागमन उपलब्ध कराती रहे।

आलोक कुमार

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