ITI और Polytechnic के बाद नौकरी तक पहुंचने में युवाओं को किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है?
तकनीकी शिक्षा को अक्सर रोजगार का सीधा रास्ता माना जाता है। ITI और Polytechnic में प्रवेश लेते समय युवा और उसका परिवार यही उम्मीद करता है कि कोर्स पूरा होते ही नौकरी या कमाई का रास्ता खुल जाएगा। लेकिन प्रमाणपत्र हाथ में आने के बाद कई युवाओं के सामने एक कठिन सवाल खड़ा हो जाता है—तकनीकी शिक्षा पूरी हो गई, अब नौकरी कहां और कैसे मिलेगी?
ITI और Polytechnic युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, मशीनिस्ट, मोटर मैकेनिक, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल, मैकेनिकल और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देते हैं। फिर भी शिक्षा पूरी करने के बाद नौकरी तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं होता। इसके पीछे केवल रोजगार के अवसरों की कमी नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुभव, अप्रेंटिसशिप, भर्ती प्रक्रिया, नौकरी की जानकारी, शुरुआती वेतन और स्थानीय रोजगार जैसे कई कारण होते हैं।
प्रमाणपत्र और रोजगार के बीच दूरी
किसी तकनीकी संस्थान से प्रमाणपत्र हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन नौकरी के लिए केवल प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं होता। नियोक्ता अक्सर यह देखना चाहते हैं कि उम्मीदवार मशीन, उपकरण या संबंधित तकनीक पर वास्तव में काम कर सकता है या नहीं।
यहीं से नए तकनीकी युवाओं की समस्या शुरू होती है। कई नौकरियों में अनुभव मांगा जाता है, जबकि नए विद्यार्थी के पास अनुभव हासिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं होता।
इस स्थिति को दूर करने के लिए पढ़ाई के दौरान ही विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव देने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरत में अंतर
तकनीक तेजी से बदल रही है। उद्योगों में ऑटोमेशन, CNC मशीन, PLC, डिजिटल उपकरण, आधुनिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम और कंप्यूटर आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
यदि किसी संस्थान में प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध उपकरण और मशीनें उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक से बहुत पीछे हैं तो विद्यार्थी प्रमाणपत्र तो हासिल कर सकता है, लेकिन नौकरी के लिए आवश्यक व्यावहारिक क्षमता विकसित करने में कठिनाई हो सकती है।
इसलिए तकनीकी संस्थानों में पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण उपकरणों को समय के साथ अपडेट करना जरूरी है।
अप्रेंटिसशिप क्यों महत्वपूर्ण है?
ITI और Polytechnic के बाद अप्रेंटिसशिप युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। इससे विद्यार्थी को वास्तविक कार्यस्थल, मशीनों, कार्य अनुशासन और उद्योग की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है।
लेकिन हर विद्यार्थी तक अप्रेंटिसशिप के अवसर की जानकारी और पहुंच समान नहीं होती। कई युवाओं को यह पता ही नहीं होता कि उनके ट्रेड से संबंधित अप्रेंटिसशिप कहां उपलब्ध है और आवेदन कैसे करना है।
इसलिए संस्थानों को केवल प्रशिक्षण पूरा कराने के बजाय विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप और रोजगार की अगली प्रक्रिया समझाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
नौकरी की जानकारी तक पहुंच भी समस्या है
ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी समस्या रोजगार की सही जानकारी प्राप्त करना भी हो सकती है।
किस कंपनी में भर्ती चल रही है, किस ट्रेड के लिए कितनी योग्यता चाहिए, आवेदन की अंतिम तारीख क्या है, अप्रेंटिसशिप कहां उपलब्ध है और कैंपस भर्ती कब होगी—इन सवालों की जानकारी समय पर नहीं मिलने से योग्य युवा अवसर से बाहर हो सकता है।
इसलिए प्रत्येक ITI और Polytechnic में मजबूत करियर सूचना और प्लेसमेंट सहायता व्यवस्था होना उपयोगी होगा।
विद्यार्थियों को सरकारी भर्ती, निजी कंपनियों, अप्रेंटिसशिप, कैंपस प्लेसमेंट और स्वरोजगार के विकल्पों की जानकारी नियमित रूप से मिलनी चाहिए।
नौकरी के लिए दूसरे शहर जाने की मजबूरी
ग्रामीण क्षेत्र के युवा के सामने एक दूसरी चुनौती स्थानीय रोजगार की कमी हो सकती है।
मान लीजिए किसी जिले के युवा ने वहीं ITI या Polytechnic किया, लेकिन उसके ट्रेड से संबंधित नौकरी किसी दूसरे शहर या औद्योगिक क्षेत्र में उपलब्ध है। तब नौकरी पाने के साथ-साथ उसे रहने, भोजन, यात्रा और परिवार से दूर रहने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
कम शुरुआती वेतन वाली नौकरी के लिए दूसरे शहर में रहने का खर्च कई युवाओं के लिए महत्वपूर्ण सवाल बन जाता है।
इसलिए जिला स्तर पर छोटे उद्योग, तकनीकी सेवा केंद्र, मरम्मत और विनिर्माण इकाइयों तथा अन्य स्थानीय रोजगार अवसरों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
शुरुआती वेतन और नौकरी की गुणवत्ता
तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद युवा स्वाभाविक रूप से बेहतर आय की उम्मीद करता है। लेकिन शुरुआती स्तर पर मिलने वाला वेतन कई बार उसकी अपेक्षा से कम हो सकता है।
यदि नौकरी की आय से किराया, भोजन, यात्रा और अन्य खर्च मुश्किल से पूरे हों तो युवा के सामने यह सवाल आ सकता है कि वह उसी क्षेत्र में आगे बढ़े या किसी दूसरे रोजगार की तलाश करे।
इसलिए केवल कितने युवाओं को नौकरी मिली, यह देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि उन्हें किस प्रकार का काम, कितनी स्थिरता और आगे बढ़ने की कितनी संभावना मिली।
तकनीकी ज्ञान के साथ संचार कौशल भी जरूरी
आज नौकरी के लिए केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं माना जाता। इंटरव्यू, रिज्यूमे, कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान, कार्यस्थल पर संवाद और बुनियादी अंग्रेजी या तकनीकी शब्दावली की समझ भी कई जगह उपयोगी होती है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि का कोई युवा तकनीकी काम में अच्छा हो सकता है, लेकिन इंटरव्यू में अपनी क्षमता ठीक से प्रस्तुत न कर पाए तो उसके सामने अतिरिक्त कठिनाई आ सकती है।
इसलिए तकनीकी संस्थानों में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ रिज्यूमे, इंटरव्यू, कंप्यूटर और कार्यस्थल व्यवहार की बुनियादी तैयारी भी कराई जानी चाहिए।
सरकारी नौकरी का इंतजार भी लंबा हो सकता है
तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक युवा सरकारी विभागों में तकनीकी पदों को रोजगार का महत्वपूर्ण विकल्प मानते हैं। लेकिन सरकारी भर्तियों में रिक्तियों की संख्या, प्रतियोगिता और भर्ती प्रक्रिया की अवधि के कारण उम्मीदवारों को लंबे समय तक तैयारी करनी पड़ सकती है।
यदि युवा केवल एक ही रोजगार विकल्प पर निर्भर रहता है तो उसके सामने समय और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए ITI और Polytechnic के विद्यार्थियों को शुरुआत से ही सरकारी नौकरी के साथ निजी क्षेत्र, अप्रेंटिसशिप और स्वरोजगार के विकल्पों की जानकारी मिलनी चाहिए।
संस्थान की सफलता का पैमाना क्या होना चाहिए?
किसी ITI या Polytechnic की सफलता केवल परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए।
यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कितने विद्यार्थी:
नौकरी तक पहुंचे,
अप्रेंटिसशिप में गए,
आगे का तकनीकी प्रशिक्षण लिया,
अपना काम शुरू कर पाए,
या अपनी तकनीकी योग्यता के अनुरूप रोजगार प्राप्त कर सके।
इसके लिए संस्थानों में नियमित प्लेसमेंट गतिविधियां, उद्योगों से संपर्क, कैंपस भर्ती और पूर्व विद्यार्थियों के रोजगार संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत किया जा सकता है।
सरकार और उद्योग की भी जिम्मेदारी
तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार, प्रशिक्षण संस्थान और उद्योग—तीनों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
जिला स्तर पर यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि स्थानीय उद्योगों को किस प्रकार के तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत है। उसी आधार पर प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर संबंध बनाया जा सकता है।
उद्योगों के लिए भी नए प्रशिक्षित युवाओं को शुरुआती अवसर देना महत्वपूर्ण है। अप्रेंटिसशिप को केवल प्रशिक्षण की प्रक्रिया न मानकर भविष्य के रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
वहीं जिन युवाओं के पास तकनीकी कौशल है, उन्हें छोटे स्तर पर सेवा या कारोबार शुरू करने के लिए उपलब्ध वित्तीय और संस्थागत सहायता की जानकारी भी दी जानी चाहिए।
तकनीकी शिक्षा तभी सफल होगी जब रोजगार तक रास्ता भी बने
ITI और Polytechnic युवाओं को तकनीकी कौशल देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। लेकिन प्रमाणपत्र से रोजगार तक की यात्रा अपने आप पूरी नहीं होती।
इसके लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, व्यावहारिक अनुभव, अप्रेंटिसशिप, उद्योग से संपर्क, समय पर रोजगार की जानकारी और स्थानीय स्तर पर अवसरों की जरूरत होती है।
किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार का युवा जब तकनीकी शिक्षा में प्रवेश लेता है तो उसके पीछे केवल एक प्रमाणपत्र हासिल करने की इच्छा नहीं होती। उसके पीछे आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद होती है।
इसलिए तकनीकी शिक्षा की सफलता का मूल्यांकन केवल इस बात से नहीं होना चाहिए कि कितने विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की। असली सवाल यह होना चाहिए कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कितने युवा अपने कौशल के आधार पर सम्मानजनक और टिकाऊ आजीविका तक पहुंच पाए।
ITI और Polytechnic के बाद नौकरी पाने में युवाओं को किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है? जानिए अनुभव, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण, रोजगार की जानकारी, स्थानीय नौकरी और शुरुआती वेतन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां।
आलोक कुमार