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स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है


पटना.प्रेरितों की रानी ईश मंदिर को पटना प्रोविंश के द्वारा जेसुइट पुरोहितों के द्वारा संचालित किया जाता है.यहां पर हाल के दिनों में पुरोहित बने फादर राजीव रंजन पदस्थापित हैं.पटना प्रोविंश के फादर प्रोविंशियल डोनाल्ड जे मिरांडा ने फादर राजीव रंजन को अतिरिक्त कार्यभार दिये हैं.वे युवा अपोस्तोलेट के सदस्य हैं.युवा अपोस्तोलेट का सभापति फादर प्रकाश एंथोनी हैं. फादर प्रकाश एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर धर्म महासभा पर शानदार ढंग से संगोष्ठी आयोजित की.इसमें कुर्जी पल्ली के 30 युवाओं ने हिस्सा लिये. 

धर्म महासभा को तीन सत्र में बांटा गया था. प्रथम सत्र में फादर अनील ने धर्म महासभा पर विचार व्यक्त किये.द्वितीय चरण में फादर एंथोनी और फादर राजीव रंजन ने मिलकर टीम वर्क पर विचार व्यक्त किये.तृतीय चरण में सामूहिक चर्चा की गयी और कार्ययोजना बनायी गयी. कार्ययोजना पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई.अपने जीवन को कैसे सवारना है.करियर गाइडेंस और पल्ली के उनकी जिम्मेवारी के बारे में बताया गया.

बताते चले कि धर्म महासभा आधिकारिक नाम हैः ‘एक धर्मसभा के लिए चर्च‘ कम्युनियन, भागीदारी और मिशन‘ संत पापा फ्राँसिस द्वारा पूरे चर्च को इस ‘धर्मसभा प्रक्रिया‘ के लिए बुलाए जाने से पहले ही, दुनिया भर के कई बिशपों ने अपने स्थानीय चर्चों को पुनर्जीवित करने के लिए धर्मसभा का उपयोग किया है.इसके आलोक में युवाओं को दिशानिर्देश देने के संगोष्ठी का आयोजन किया गया है.

फादर राजेश जेकब भाजू ने पवित्र मिस्स अर्पित किये. मिस्सा के बाद भोजन किया गया.इसके बाद संगोष्ठी में शामिल युवाओं को तरूमित्र और संत जेवियर काॅलेज का भ्रमण करवाया गया.

आलोक कुमार





 

ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित

 राँची .आज  हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में  राँची में ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  के भारत आगमन की 137 वीं वर्षगांठ और वार्षिक तीर्थयात्रा आयोजित की गयी.सभी पल्लीवासियों को  विशेष रूप से पल्ली पुरोहित और युवा साथियों को आज के सफल संचालन के लिए बहुत - बहुत  बधाई दी गयी.


ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  ने 19 मार्च 1885 ई. को जमगाई गाँव में पाँव रखा था और वहीं से छोटानागपुर के लोगों की सेवा करना आरम्भ किया था.उन्होंने अपना सारा जीवन छोटानागपुर के गरीब और कमजोर लोगों की मदद करने में बिताया. उनकी स्मृति में हर साल जमगाई में ‘लीवन्स डे‘ मनाया जाता है.

राँची महाधर्मप्रांत महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एवं सह अनुष्ठाता सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवन्स को श्रद्धांजलि देते हुए माल्यार्पण किया एवं मशाल प्रज्वलित किया. तत्पश्चात् फादर कॉन्सटंट लीवंस  की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की गई। परमप्रसाद के बाद ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंस  की धन्य घोषणा के लिए विशेष प्रार्थना की गई.महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एस.जे. ने अपने संदेश में कहा कि फादर लीवन्स कोन्सटण्ट ने जो विश्वास का बीज 137 साल पहले बोया था उसे हमें आगे बढ़ाना है और उसे जीने का प्रयत्न करना है. उन्होंने हमारे पूर्वजों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और सी.एन.टी एवं एस.पी.टी एक्ट को लागू करवाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है.

राँची के सहायक धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्स ने ईश सेवक फादर कॉन्सटंट लीवंन्स एवं ईश सेविका माता मेरी बेर्नादेत्त की संत घोषणा की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि उनकी संत घोषणा के लिए हर घर, समाज और पल्ली में प्रार्थना करना है.

फादर कॉन्सटंट लीवन्स ईश्वर के प्रेम की आग से प्रज्वलित थे. उनमें ईश्वर की शक्ति को स्पष्ट देखा जा सकता है. उनका जन्म 10 अप्रैल 1856 को बेल्जियम के मूरसेलेदे में हुआ था.मानव सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने 1878 में येसु समाज में प्रवेश किया और 1880 में मिशनरी बनकर भारत आये. 1883 में पुरोहित अभिषेक के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पढ़ाई में व्यतीत किया उसके बाद 1885 में छोटानागपुर आये.छोटानागपुर जो आज झारखंड कहलाता है उन दिनों वहाँ के लोग जमीनदारों के चंगुल में थे एवं गरीबी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार आदि कई विकट समस्याओं का सामना कर रहे थे.फादर लीबंस ने छोटनागपुर में साल सालों की अपनी प्रेरिताई में दिन-रात मेहनत कर बहुत सारे लोगों को जमीनदारों के चंगुल से छुड़ाया और उनके बीच ख्रीस्त की ज्योति जलायी.


कठोर परिश्रम और त्याग करने के कारण वे अधिक दिन छोटानागपुर में नहीं रह पाये और 7 नवम्बर 1893 को 37 साल की उम्र में बेल्जियम में उनका निधन हो गया। उनके पवित्र अवशेष को 7 नवम्बर 1993 को राँची लाया गया तथा संत मरिया महागिरजाघर में स्थापित किया गया है.

फादर कॉन्सटंट लीवंस का छोटानागपुर पदार्पण और हमारे पूर्वजों का मनफिराव एक ऐतिहासिक घटना है। बेल्जियम मिशनरी येसु संघी फादर कोन्सटंट लीवंस छोटानागपुर में बहुत कम समय के लिए अपनी मिशनरी सेवाएं दी। उनकी समर्पित मिशनरी सेवा और सुसमाचार प्रचार का प्रभाव था कि सात साल में 80 हजार लोगों ने मनफिराव कर ख्रीस्त को अंगीकार किया, इसलिए उन्हें छोटानागपुर के प्रेरित भी कहा जाता है.   

हुलहुण्डू पल्ली के जमगाई गाँव में इस मौके पर संत अन्ना की पुत्रियाँ, उर्सुलाईन की धर्मबहनें, हुलहुण्डू के पल्ली पुरोहित फादर हुबेर्तुस बेक, काथलिक सभा के सभापति राजन तिरू, प्रचारक साइमन तिरू, अनिमा, सि. एमरेंसिया और भारी संख्या में विभिन्न धर्मसमाजों के पुरोहित, धर्मबंधु, धर्मबहनें और हजारों की संख्या में विश्वासी उपस्थित थे. कार्यक्रम का समापन प्रीति भोज से किया गया.

आलोक कुमार  


फादर बर्टी पौल का पुरोहिताभिषेक का 28 वां पावन दिवस

 

पटना.आज बालक येसु के पालक पिता संत जोसेफ का पर्व है.यह पर्व माता कलीसिया ने द्योषित की है.आज हमलोग माता मरियम के दुल्हे तथा येसु के पालक पिता संत जोसेफ को याद करते हैं.इसी तरह उत्तर बिहार के ईसाई समुदाय फादर बर्टी पौल को याद करते हैं.फादर का जन्म चखनी पल्ली में हुआ है.यह बगहा एक प्रखंड में पड़ता है.बेतिया धर्मप्रांत की चखनी पल्ली में जन्म लेने वाले फादर बर्टी पौल का पुरोहिताभिषेक का 28 वां पावन दिवस है.फादर बर्टी का पुरोहिताभिषेक 19 मार्च 1994 में हुआ था.मौसम के 28 वसंत ऋतु देख चुके फादर कहते हैं कि मेरे लिए येसु से दुआ करें ताकि मैं पुरोहिताई जीवन को पवित्रता के साथ जीते हुए ईश्वरीय योजना में आगे बढ़ते हुए मानव सेवा करता रहूं.

बता चले कि चखनी पल्ली में रहने वाले अनीश साह भी हैं.पटना जेसुइट प्रोविंश में जाने वाले प्रथम व्यक्ति हैं.हालांकि रायपुर महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप  विक्टर हेनरी  ठाकुर और पटना महाधर्मप्रांतीय पुरोहित फादर चार्ली चखनी पल्ली के ही हैं.यहां से कई सिस्टर अलाकोक भी धर्मसमाज में हैं.एक डिकेन भी हैं. इसी तरह चखनी पल्ली से ब्रदर जोसेफ साह थे. ब्रदर जार्ज ठाकुर, और फादर चार्ली साह,फादर भिनसेट ‌?,फादर लूईस पीटर साह‌ फादर राजेश ठाकुर,फादर बर्टी पौलख् फादर अमितख् ‌फादर दीपक ‌फादर रंजित ठाकुर और आर्चबिशप विक्टर हेनरी ठाकुर चखनी पल्ली से धर्म समाज और धर्मप्रान्त के लिए सेवा दे रहे हैं.

आलोक कुमार

पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो पुरोहित

पटना.विख्यात येसु समाज के पुरोहित हैं फादर हेनरी रेबेलो. अभी 84 साल का हैं. उनका जन्म 28 अक्टूबर 1938 हुआ था. जब 21 साल के थे,तब उन्होंने येसु समाज में 8 जून 1959 में प्रवेश किए. अभी प्रवेश के 63 साल हो गया. जब वे 34 साल के थे,तब उनका पुरोहिताभिषेक 18 मार्च 1972 को हुआ.अभी 50 साल हो गया. आज फादर हेनरी रेबेलो का स्वर्णिम दिवस है.भला क्यों हो उन्होंने येसु समाज के पुरोहित के रूप में 50 वर्ष पूरा कर लिये हैं.आज 18 मार्च 2022 को पचास साल हो गया.पुरोहिताभिषेक का शानदार पचास साल मुबारक हो. 

उत्तर बिहार के ईसाइयों का उद्गम स्थल बेतिया पल्ली के पल्ली पुरोहित थे फादर हेनरी रेबेलो.कई जगहों पर शानदार कार्य करने के बाद कुर्जी पल्ली के भी पल्ली पुरोहित थे.जब पल्ली पुरोहित थे,तब विश्व विख्यात संत विंसेंट डी पौल सोसाइटी की स्थापना में कुर्जी पल्ली में की थी.संत विंसेंट डी पौल समाज के आध्यामिक सलाहकार बनकर सोसाइटी को आगे बढ़ाने का काम किया.कोलकाता के अधीन सोसाइटी रहने के बाद पटना पार्टिकुलर काउंसिल बनने के बाद सेंटल काउंसिल बना.इसके बाद आज विभिन्न पल्लियों में संचालित है.शानदार पचास वर्ष पूरा करने वाले फादर हेनरी रेबेलो शिवाजी नगर में स्थित फातिमा माता सुसमाचार केन्द्र में करिश्माई कार्य में जुड़े रहे. 

सादगी जीवन बिताने में माहिर थे. मिलनसार स्वाभाव थे. किसी तरह के विवादों को प्रार्थना के बल पर सुलझाने में विश्वास रखते थे.पल्लियों में काम करते समय किसी पल्लीवासी से विवाद नहीं हुआ.इस तरह के पल्ली पुरोहितों से पुरोहितों को सीखना चाहिए. किसी को टारगेट बनाकर पल्ली में काम नहीं करना चाहिए.


आलोक कुमार

पटना प्रोविंश यूथ कमीशन के द्वारा यूथ संगोष्ठी 20 मार्च को आत्मदर्शन में

पटना.आजकल ईसाई समुदाय का दुःखभोग चल रहा है. ईसाई धर्मावलम्बियों ने 02 मार्च को राख बुधवार मनाया. इस दिन चर्च के पुरोहितों के द्वारा विश्वासियों की ललाट पर पवित्र राख से क्रूस का चिन्ह बनाकर स्मरण दिलवाया कि हे ! मनुष्य तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओंगे. इस दिन ईसाई समुदाय ने उपवास और परहेज रखा. शाम के समय उपवास तोड़ा जाता है.आज दुःखभोग का 17 वां दिन है. आज शुक्रवार है.होली का दिन है. होली के पकवान से परहेज कर रहे हैं.

पवित्र दुःखभोग की अवधि में ईसाई समुदाय उपवास और परहेज रखते हैं.हालांकि इसमें माता कलीसिया ने 18 साल से नीचे और 60 साल से ऊपर वालों को छूट दे रखी है. बहरहाल ईसाई समुदाय शिद्ददत से ईसा मसीह के दुःखभोग में स्वयं को शामिल कर रहे हैं. उपवास और परहेज रखते हैं. बुधवार और शुक्रवार के दिन में चर्च जाते हैं और ईसा मसीह के दुःखों पर आधारित 14 मुकाम में बड़ी भक्ति से शामिल होते हैं. इसके बाद पवित्र धार्मिक अनुष्ठान में सशरीर उपस्थित होकर परमप्रसाद ग्रहण करते हैं.

इस बीच पटना प्रोविंश यूथ कमीशन के द्वारा यूथ संगोष्ठी 20 मार्च को आत्मदर्शन में किया गया है.यूथ संगोष्ठी चालीसा अवधि 20 मार्च को ईसाई युवाओं के लिए आयोजित की गयी है. बता दें कि 20 मार्च को एक्सटीटीआई परिसर में स्थित आत्मदर्शन में पहुंचना है.यहां पर संगोष्ठी है.सुबह 8ः00 बजे से रजिस्ट्रेशन होगा.8ः30 बजे से एक-दूसरे के साथ परिचय करवाया जाएगा. इसके बाद 8ः45 बजे से प्रथम सत्र आरंभ होगा.इसमें भाग लेने के लिए यूथ से आग्रह किया गया है.याद रहे कि यूथ को पंजीयन शुल्क के रूप में 50 रूपये देना होगा.इस शुल्क से भोजनादि उपलब्ध कराया जाएगा.इसका आयोजक पटना प्रोविंश यूथ कमीशन है.इसका संयोजक हैं फादर राजीव रंजन और प्रकाश अंतोनी.

आलोक कुमार 


केरल को 'ईश्वर का अपना घर' कहा जाता है


मलयट्टूर. ईसाई मिशनरियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि “भारत मे ईसाइयत का आगमन ईसा मसीह के बारह प्रेरितों (शिष्यों) में से एक थोमस के द्वारा अरब की खाड़ी पार कर भारत में आने के साथ ही शुरु हो गया था. सन् 52 ईं. मे केरल के क्रान्गानोर नामक जगह पर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने भारत के तटीय इलाकों में सुसमाचार प्रचार किया. सर्वप्रथम मालावार तट के ब्राह्मणों के बीच उसने प्रचार किया और उनके प्रभाव से कई ब्राह्मणों ने ईसाइयत को ग्रहण किये.

संत थॉमस चर्च, मलयट्टूर के विकर जनरल का कहना है कि मलयट्टूर में स्थित पहाड़ पर संत थोमस चढ़े थे.वहां पर संत थोमस का पैरों का निशान है.जो पवित्र स्थान और दर्शनीय स्थल बन गया है.केरल एवं अन्य राज्यों के भक्तगण दर्शन करने आते हैं.जमीन से लेकर पहाड़ की चोटी तक प्रकाश की व्यवस्था कर दी गयी है.रात में आसानी से दर्शन किया जा सकता है.यहां संत थोमस चर्च भी है.

बताते चले कि प्रत्येक दिन भक्तगण पहाड़ की चोटी तक जाते हैं. इस समय यानी प्रभु येसु ख्रीस्त के दुखभोग अवधि में भक्तों की संख्या अधिक हो जाती है. पहाड़ पर चढ़ते समय भक्तगण कूस का रास्ता तय करते चलते जाते हैं. नीचे से चोटी तक चढ़ने में दिक्कत होती है. जगह-जगह ठहर तक प्रार्थना करते आगे बढ़ते हैं.पहाड़ की चोटी पर चढ़कर संत थोमस के पैर के निशान देखकर सभी तरह की दिक्कत भूल जाते हैं.

इस बीच संत थोमस चर्च, मलयट्टूर के द्वारा विशेष व्यवस्था की गयी है.मलयट्टूर कुरीसुमुदी तीर्थयात्रा का समय जारी कर दिया गया है.यह बताया गया कि आज 18.03.2022, शुक्रवार से, जब तक हम आगे की घोषणा नहीं करते, तीर्थयात्री दिन के 24 घंटे कुरीसुमुदी शिखर पर जा सकते हैं.रात्रि तीर्थयात्रा के लिए सभी आवश्यक प्रकाश व्यवस्था की गई है. तीर्थयात्रियों का हार्दिक स्वागत है.केरल को 'ईश्वर का अपना घर' कहा जाता है. भगवान आप सबको आशीर्वाद दें. संत थॉमस हम सभी के लिए हस्तक्षेप करें और स्वर्ग से आशीर्वाद बरसाएं.



इस ऐतिहासिक स्थल का दीदार आलोक कुमार भी हुए हैं. 





प्रसिद्ध गीतकार एंथोनी दीपक की 88 वीं जयंती मनायी गयी

 रोमन कैथोलिक समुदाय में बहुत ही कम शख्स है जो हिन्दी भाषा के गीतकार हो.मगर पश्चिम चम्पारण के रामनगर में रहने वाले एंथोनी दीपक नामक हस्ती को विशिष्टता प्राप्त हुई.उनकी 88 वीं जयंती मनाई गई. पेश है स्वीटी माइकल की रिपोर्ट..


रामनगर. पश्चिम चम्पारण जिले में है रामनगर.यहां पर रोमन कैथोलिक समुदाय के लोग रामनगर पल्ली में रहते हैं. इस समय बेतिया धर्मप्रांत के विकर जनरल सह पल्ली पुरोहित फादर फिनटन साह हैं.इस पल्ली में अरूण एंथोनी दीपक रहते हैं. इनका पिताश्री प्रसिद्ध गीतकार एंथोनी दीपक थे.उनकी 88 वीं जयंती मनायी गयी. जयंती समारोह पूर्वक नगर के सोमेश्वर साहित्य संसद परिसर में परमार्थ संस्थान द्वारा मनाई गई. उपस्थित गणमान्यों ने

गीतकार दीपक के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप जलाकर क्रार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. वाद्य यंत्रों के माध्यम से भी गीतकार तथा संगीतकार एंथोनी दीपक को श्रद्धांजलि दी गई.

 इस कार्यक्रम के दौरान परमार्थ महिला सम्मान- 2022 से चुहड़ी में रहने वाली और बेतिया में कार्य करने वाली समाजसेविका मेरी आडलीन को सम्मानित किया गया.मेरी आडलीन को यह सम्मान कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रखंड प्रमुख निहारिका नूतन व विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र व शॉल देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन संस्थान के संस्थापक दिनेश मुखिया एवं अधिवक्ता सौरभ पांडे ने किया.


अपने संबोधन में नरेश राम ने कहा 5 दशकों तक नगर में अपनी सेवा देने वाले एंथोनी दीपक की प्रतिमा की स्थापना होनी चाहिए.वहीं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मधुकर राय ने कहा कि सोमेश्वर साहित्य संसद के भवन एवं परिसर का सौंदर्यीकरण होना चाहिए. जिसका उपस्थित सैंकड़ों साहित्य प्रेमियों ने सहर्ष स्वीकार किया. ई. रतन शंकर झा और रंजन उपाध्याय ने भी अपने संबोधन में दीपक जी संस्मरणों को जीवंत किया.

इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों स्टेशन मास्टर शिशिर राय, प्रोफेसर असलम खान एवं नवीन श्रीवास्तव द्वारा गीतकार दीपक के गीत गाये गए. दीपक
के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आचार्य दिनेश शुक्ल , गौतम प्रसाद राव , सदाकांत शुक्ल, दैनिक भास्कर के अनुमंडल प्रभारी शिवशंकर सत्यार्थी , ओबैदुर रहमान , सुरेंद्र यादव , बुलबुल सिंह , पुनम द्विवेदी ,मधुकर राय , हेमराज बैठा , अरूण दीपक ,कुश शर्मा शिवशंकर सत्यार्थी , आलोक जयसवाल आदि ने प्रकाश डाला.


कार्यक्रम में सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष सुभाष साहनी , उप मुखिया संघ के उपाध्यक्ष मनीष पांडेय, नरेश राम , जदयू के प्रखंड अध्यक्ष संजय मिश्रा , खिलाड़ी नरसिंह यादव , राजेंद्र यादव , नागेंद्र साह, अरमान खान , मयूर सेन यादव , शिवनाथ चैबे अनपढ़ , मनोज यादव , शेख सज्जन , विजय गुप्ता आदि उपस्थित रहे । संस्थान के सदस्यों राजेश यादव ,बब्लू पासवान , अनुराग मिश्र, संतोष पौलुस, रामकुमार शर्मा , छोटेलाल मोदनवाल ,सुबोध यादव , प्रकाश श्रीवास्तव आदि ने आगत अतिथियों का स्वागत किया.


Jharkhand : खूंटी में आखिर चल क्या रहा है?

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