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Bihar : ए.एन. कॉलेज में आईपीएल खिलाड़ी शाकिब हुसैन का सम्मान, युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

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  पटना के ए.एन. कॉलेज में आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे शाकिब हुसैन का सम्मान किया गया। उन्होंने युवाओं को मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का संदेश दिया "हर बड़े खिलाड़ी की कहानी किसी स्टेडियम की चमक से नहीं, बल्कि छोटे मैदानों की धूल, कठिन संघर्षों और बड़े सपनों से शुरू होती है। जब किसी युवा की मेहनत उसे देश के सबसे बड़े क्रिकेट मंच तक पहुंचा देती है, तो उसकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह जाती, बल्कि वह हजारों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाली प्रेरणा बन जाती है। बिहार के युवा क्रिकेटर शाकिब हुसैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने आज राज्य के युवाओं में नए विश्वास का संचार किया है।" पटना स्थित ए.एन. कॉलेज में मंगलवार को उत्साह, गर्व और प्रेरणा का अनूठा माहौल देखने को मिला, जब बिहार के उभरते क्रिकेट खिलाड़ी तथा आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे शाकिब हुसैन का महाविद्यालय परिवार की ओर से भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। कॉलेज परिसर में आयोजित इस सम्मान समारोह में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने गर्मजोशी के साथ शाकि...

Bihar : आस्था की पुकार: आइए, डाकबाबा मंदिर के जीर्णोद्धार में बनें सहभागी

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  पटना के मखदुमपुर स्थित डाकबाबा मंदिर के जीर्णोद्धार अभियान में जुटे श्रद्धालु और स्थानीय लोग "मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं होता, वह किसी समाज की आस्था, संस्कृति और विरासत का जीवंत प्रतीक होता है। जब किसी मंदिर की घंटियां बजती हैं तो केवल ध्वनि नहीं गूंजती, बल्कि पीढ़ियों की श्रद्धा, विश्वास और परंपराएं भी जीवंत हो उठती हैं।" दीघा थाना क्षेत्र के मखदुमपुर मोहल्ले में स्थित डाकबाबा मंदिर भी ऐसी ही एक पवित्र धरोहर है, जो वर्षों से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में सड़क किनारे कराया गया था। समय के साथ मोहल्ला बदला, सड़कें बदलीं, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन डाकबाबा मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा और विश्वास कभी नहीं बदला। वर्षों से यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना लेकर माथा टेकते रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह मंदिर...

Bihar: पप्पू यादव ने गडकरी से की संपर्क पथ निर्माण की मांग

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दियारा से विकास की राह: पप्पू यादव ने गडकरी से की संपर्क पथ निर्माण की मांग, सीमांचल को जोड़ने की नई पहल "किसी भी क्षेत्र का विकास केवल बड़े पुलों और चौड़ी सड़कों से नहीं मापा जाता, बल्कि इस बात से तय होता है कि उस विकास का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। जब करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बन जाएं, लेकिन गांव का किसान, छात्र, मरीज और मजदूर उससे सीधे लाभान्वित न हो सके, तब विकास की तस्वीर अधूरी दिखाई देती है। बिहार के दियारा क्षेत्र की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे के बावजूद संपर्क मार्गों की कमी लोगों की परेशानियां बढ़ा रही है।" इसी समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए पूर्णिया संसदीय क्षेत्र के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर दियारा क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगों को उनके समक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने केवल एक सड़क निर्माण की मांग नहीं की, बल्कि बिहार के दियारा, कोसी और सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में व्यापक पहल की आवश्यकता पर जोर दिय...

Bihar : शहर में ऑटो और टेंपू किराए में वृद्धि कर दी गई

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        पटना में  बैटरी से चलने वाली हवा-हवाई टेंपू का भाड़ा, 'हवा-हवाई' का नया गणित: ईंधन बढ़े या न बढ़े, जेब ढीली होना तय है! "महंगाई का असर जब आम आदमी की जेब पर पड़ता है, तो वह केवल आंकड़ों का विषय नहीं रह जाता। वह रोजमर्रा की जिंदगी की हकीकत बन जाता है। लेकिन सवाल तब उठता है, जब बढ़ती लागत के नाम पर ऐसी वसूली शुरू हो जाए, जिसका वास्तविक खर्च से सीधा संबंध ही न हो।" बिहार की राजधानी पटना इन दिनों कुछ ऐसे ही सवालों से जूझ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद शहर में ऑटो और टेंपू किराए में वृद्धि कर दी गई है। पहली नजर में यह फैसला सामान्य लग सकता है, क्योंकि ईंधन महंगा होने पर परिवहन लागत बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन बहस तब शुरू हुई जब सीएनजी और बैटरी से चलने वाले वाहनों ने भी लगभग उसी अनुपात में किराया बढ़ा दिया। अब यात्रियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी वाहन का संचालन पेट्रोल या डीजल पर निर्भर ही नहीं है, तो फिर ईंधन मूल्य वृद्धि का बोझ यात्रियों पर क्यों डाला जा रहा है? सुबह की शुरुआत अब किराए की बहस से पटना की सड़कों पर सुबह का दृश्य...

Bihar : मानसून की दस्तक और किसानों की उम्मीदें: खेती की तैयारी में जुटा बिहार

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  बिहार में मानसून की आहट के साथ किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए  बिहार में मानसून की आहट के साथ किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। जानिए खेती, सिंचाई, बीज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मानसून का प्रभाव। "आसमान में दिखने वाले हर बादल के साथ बिहार के किसानों की उम्मीदें भी उड़ान भरने लगती हैं। क्योंकि यहां मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि खेतों की हरियाली, घरों की खुशहाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।" बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। जून का महीना शुरू होते ही गांवों में खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। खेतों की जुताई, बीजों की व्यवस्था और सिंचाई संसाधनों की तैयारी के बीच किसानों की निगाहें अब मानसून पर टिकी हुई हैं। राज्य के अधिकांश किसान खरीफ फसलों, विशेष रूप से धान की खेती पर निर्भर हैं। धान उत्पादन का बड़ा हिस्सा समय पर होने वाली वर्षा पर आधारित होता है। यही कारण है कि मानसून की पहली बारिश किसानों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं मानी जाती। इन दिनों बिहार के विभिन्न जिलों मे...

Bihar : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात

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  बिहार के भविष्य की नई तस्वीर: जब शिक्षा और नेतृत्व एक मंच पर आए किसी भी राज्य की वास्तविक ताकत उसकी सड़कों, इमारतों या प्राकृतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके शिक्षित, जागरूक और सशक्त युवाओं में निहित होती है। जब शिक्षा जगत और शासन व्यवस्था भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक साथ आते हैं, तब ऐसी मुलाकातें केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रह जातीं, बल्कि विकास की नई संभावनाओं का आधार बनती हैं। पटना में ऐसा ही एक प्रेरणादायक अवसर देखने को मिला, जब पटना वीमेंस कॉलेज (स्वायत्त) के प्रतिनिधिमंडल ने  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात की है। इस दौरान राज्य में शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और शैक्षणिक विकास के विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट कर शिक्षा, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. रश्मि ए.सी. के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस प्रतिनिधिमंडल में उप-प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. तनिशा ए.सी. तथा श्री आलोक जॉन, डीन – नेशनल एंड...

India : 12 साल का इंतज़ार, हजार रुपये की पेंशन और बुजुर्गों की उम्मीदें

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 12 साल का इंतज़ार, हजार रुपये की पेंशन और बुजुर्गों की उम्मीदें: क्या 9 जुलाई की बैठक से निकलेगा कोई रास्ता? जिस उम्र में व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और सुकून मिलना चाहिए, उस उम्र में यदि उसे दवा, भोजन और जीवनयापन के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। देश के लाखों ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनभोगी पिछले एक दशक से अधिक समय से इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक ओर महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर हजार से डेढ़ हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाले अनेक बुजुर्ग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए सं घर्ष कर रहे हैं। न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये प्रतिमाह करने, महंगाई भत्ता लागू करने तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन जारी है। 12 वर्षों से जारी है संघर्ष ईपीएफओ पेंशनभोगियों की विभिन्न मांगों को लेकर वर्ष 2013-14 के दौरान राष्ट्रीय संघर्ष समिति का गठन किया गया था। इसके बाद देशभर में पेंशनभोगियों ने धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरण अभियान चलाए। समिति के अध्यक्ष अशोक राउत के नेतृत्व में पेंश...