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पुरूष प्रधान देश में पुरूष प्रधान खेत भी है

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पटना। सर्वविदित है कि भारत पुरूष प्रधान देश है। वहीं पुरूष प्रधान खेत भी हो गया है। वहां पर कार्यरत व्यक्ति को किसान कहते हैं। राजा के बदले रानी है। मगर किसान के बदले में क्या शब्द है ? इसी लिए हम लोग खेत की आड़ी से भोजन की थाली तक अहम किरदार अदा करने वाली वीरांगनाओं को महिला किसान कहते हैं। इन महिलाओं का उत्पादन से वितरण में योगदान रहता है। वहीं 200 से 400 वर्ष पहले तक घर के तमाम सम्पति को पारिवारिक सम्पति कहा जाता था। इस लिए जमीन पर महिलाओं का अधिकार ही नहीं रहा। मगर महिलाओं की मजबूत कंधे पर पूजा पाठ और नेतृत्व की जिम्मेवारी रख दिया गया। इस तरह की अवधारणाओं को कल्याणकारी राज्य की सरकार के द्वारा बदलाव किया जा रहा है। अब महिलाओं को मान - सम्मान , पहचान और अधिकार दिये जा रहे हैं। इंदिरा आवास योजना के तहत मकान बनाते समय और जमीन का पर्चा देते समय महिला और पुरूष के नाम से संयुक्त नाम से वितरण किया जा रहा है।   योजना ...

लोगों ने तिनके-तिनके जोड़-जोड़कर घर बनाएं

  * हम   विश्वास करते हैं आप काम करते हैं , और अब कार्रवाई करने का समय आ गयी है कार्रवाई करनी चाहिए। यह बिल्डरों और नगर निगम अधिकारियों की लॉबी की मिलीभगत से अन्याय के खिलाफत धर्म की जीत होगी । ऐसा करके हमलोगों के घरों को बचा ले। आप यह जरूर कर सकते हैं । मुम्बई। 25 वर्षों से अधिक समय से रहते हैं। इन लोगों ने तिनके - तिनके जोड़ - जोड़कर घर बनाएं हैं। आने वाले 11 नवम्बर ,2013 किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा। उस दिन बुलडोजर से 102 घरों को जमींदोज कर दिया जाएगा। इनके घरों के तमाम समान बाहर सड़कों पर फेंक दिया जाएगा। सभी लोगों के प्यारे समान को तहस - नहस कर दिया जाएगा। बच्चों और महिलाओं को परिजन कहां ले जाएंगे। यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। बुजुर्ग को कहां ले जाएंगे ? अब कैसे अपने बच्चों को आश्रय दे सकेंगे ? सच में गरीब लोग अपने घरों को खो देंगे , अपने रिश्तेदारों को खो देंगे। एक बसा - बसाया मलिन बस्तियों   के अस्तित्व मि...