पटना से चंपारण पदयात्रा: गांधी के कदमों पर एक नई शुरुआत
“जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ” “ज हां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ” — यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवंत संकल्प है। 10 से 22 अप्रैल 2026 तक आयोजित पटना से चंपारण (भितिहरवा आश्रम) तक की यह पदयात्रा इतिहास, विचार और समाज परिवर्तन का संगम है। ऐतिहासिक संदर्भ: जब चंपारण बना परिवर्तन की भूमि 10 अप्रैल 1917 को महात्मा गांधी जब पहली बार बिहार पहुंचे, तो यह यात्रा केवल एक स्थानांतरण नहीं थी, बल्कि एक क्रांति की शुरुआत थी। चंपारण के नील किसानों की पीड़ा ने गांधीजी को झकझोर दिया, और यहीं से सत्याग्रह का पहला सफल प्रयोग हुआ। यह पदयात्रा उसी ऐतिहासिक मार्ग को पुनर्जीवित करने का प्रयास है—जहां अन्याय के खिलाफ सत्य और अहिंसा ने विजय प्राप्त की। यात्रा का उद्देश्य: विचारों को जन-जन तक पहुंचाना इस पदयात्रा का आयोजन सर्व सेवा संघ और प्रदेश सर्वोदय मंडल, बिहार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। इसका नेतृत्व चंदन पाल और राम धीरज जैसे समर्पित कार्यकर्ता कर रहे हैं। इस यात्रा के मुख्य...