राजनीति में नाम के आगे लगने वाला “डॉ.” कई बार सम्मान से
छवि और रणनीति से जुड़ा हुआ है रा जनीति में नाम के आगे लगने वाला “डॉ.” कई बार सम्मान से ज्यादा सवाल खड़े कर देता है। लेकिन जब कोई नेता इस उपाधि को होते हुए भी इस्तेमाल नहीं करता—तो कहानी और दिलचस्प हो जाती है। Samrat Choudhary के संदर्भ में आपका सवाल बिल्कुल जायज़ है। अगर उनके पास “डॉक्टरेट” की कोई उपाधि है, तो वे अपने नाम के आगे “डॉ.” क्यों नहीं लगाते? इसका जवाब केवल डिग्री से नहीं, बल्कि राजनीति की शैली, छवि और रणनीति से जुड़ा हुआ है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारतीय राजनीति में उपाधियों का उपयोग केवल शैक्षणिक पहचान के लिए नहीं, बल्कि जन-छवि (public image) बनाने के लिए भी होता है। कई नेता अपनी डिग्रियों को प्रमुखता से दिखाते हैं, जबकि कुछ जानबूझकर उन्हें पीछे रखते हैं। सम्राट चौधरी का उदाहरण इसी दूसरी श्रेणी में आता है। अगर उन्हें किसी संस्था द्वारा मानद डॉक्टरेट (Hon...