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राजनीतिः बीजेपी के कई संगठन जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं

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  भारत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उससे जुड़े व्यापक वैचारिक परिवा र भारत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उससे जुड़े व्यापक वैचारिक परिवार, जिसे सामान्यतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कहा जाता है, केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से सक्रिय हैं। इन संगठनों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर सेवा कार्य करना, सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार करना और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान देना है। विशेष रूप से शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में इनके कई संगठन जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। सबसे पहले यदि शिक्षा क्षेत्र की बात करें, तो विद्या भारती इस दिशा में सबसे प्रमुख संगठन है। यह आरएसएस का शैक्षिक विंग माना जाता है और “विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान” के अंतर्गत देशभर में हजारों विद्यालयों का संचालन करता है। इन विद्यालयों में सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिर विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और राष्ट्...

क्रिकेट:आईपीएल 2026 में “बिहारी बाबू” के नाम से चर्चित युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी

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आईपीएल 2026 में “बिहारी बाबू” के नाम से चर्चित युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने जिस अंदाज़ में अपनी छाप छोड़ी है, वह केवल एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि बिहार जैसे क्रिकेटिंग रूप से पिछड़े माने जाने वाले राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गया है। उनकी बल्लेबाज़ी में आक्रामकता, आत्मविश्वास और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की समझ साफ झलकती है। इस सीजन में उनके प्रदर्शन को देखें तो आंकड़े ही उनकी कहानी बयां कर देते हैं। 9 मैचों में लगभग 400 रन बनाना, 226 से अधिक का स्ट्राइक रेट और 103 का सर्वोच्च स्कोर—ये सभी आंकड़े यह साबित करते हैं कि वैभव सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने वाले खिलाड़ी हैं। खास बात यह है कि उन्होंने 34 चौके और 37 छक्के लगाए, जो उनकी विस्फोटक शैली को दर्शाते हैं। आज के टी20 क्रिकेट में जहां तेजी से रन बनाना ही सफलता की कुंजी है, वहां वैभव ने खुद को पूरी तरह फिट साबित किया है। उनके मैच-दर-मैच प्रदर्शन पर नज़र डालें तो शुरुआत से ही उन्होंने अपना इरादा साफ कर दिया था। 31 मार्च को चेन्नई के खिलाफ 52 रन की पारी खेलकर उन्होंने संकेत दे ...

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार पर बड़ी खबर

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वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद 29 महत्वपूर्ण विभागों को अपने पास रखा बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजीनामा के बाद 15 अप्रैल 2026 को भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री पद से अलग हो गए, जिसके बाद सम्राट चौधरी ने विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शपथ ग्रहण की। शपथ लेने के तुरंत बाद बिहार विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाकर उन्होंने विश्वासमत भी प्राप्त कर लिया।अब नई सरकार पूरे जोर-शोर से काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों और विभागीय समीक्षाओं में व्यस्त हैं। उसी क्रम में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों की सूची पर विचार-विमर्श अंतिम चरण में पहुंच गया है। पार्टी संगठन, वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं।विस्तार का मकसद और संभावित समयराजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ़ मंत्रियों की संख्या ब...

विश्वासियों के आध्यात्मिक जीवन के ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव

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                                          इन संस्कारों को Jesus Christ द्वारा स्थापित माना जाता है कैथोलिक परंपरा में “सात संस्कार” (Sacraments) केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि विश्वासियों के आध्यात्मिक जीवन के ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, जिनके माध्यम से वे ईश्वर की कृपा को अनुभव करते हैं। Roman Catholic Church में इन संस्कारों को Jesus Christ द्वारा स्थापित माना जाता है। इनका उद्देश्य मानव जीवन के विभिन्न चरणों को पवित्र बनाना और व्यक्ति को ईश्वर तथा समुदाय (कलीसिया) के साथ गहरे संबंध में जोड़ना है। रोमन कैथोलिक चर्च वास्तव में एक विशाल वैश्विक परिवार है, जिसमें विभिन्न “रीतियाँ” (Rites) और स्वायत्त चर्च शामिल हैं। ये सभी चर्च अपनी-अपनी परंपराओं और पूजा-पद्धतियों में भिन्न होते हुए भी Pope को सर्वोच्च धर्मगुरु मानते हैं और एक ही विश्वास में एकजुट रहते हैं। भारत में, विशेषकर केरल में, कैथोलिक चर्च तीन प्रमुख शाखाओं में विभाजित है—लैटिन कैथोलिक, Syro-Malabar Catholic Church और Syr...

अब “बुलडोजर एक्शन” केवल एक चेतावनी नहीं

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बिहार में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई इन दिनों व्यापक चर्चा और बहस का विषय बनी हुई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब “बुलडोजर एक्शन” केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि वास्तविक नीति का हिस्सा बन चुका है। सरकार का मानना है कि यदि राज्य को व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है, तो सबसे पहले सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से प्रशासन ने अभियान चलाकर अवैध निर्माणों को चिन्हित करना और उन्हें ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। इस पूरे अभियान की अगुवाई राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकारी जमीन पर बने किसी भी अवैध ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी व्यक्ति का क्यों न हो। इस बयान के साथ ही प्रशासनिक तंत्र भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है और जिलों में बड़े पैमाने पर सर्वे का काम चल रहा है। गैर मजरूआ जमीन, तालाब, सड़क, पार्क और सरकारी परियोजनाओं के लिए चिन्हित भूमि पर बने निर्माणों को विशेष रूप से निशाने पर लिया गया है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषत...

विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस

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                                          देश के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने में योगदान    29 अप्रैल का दिन इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और वैश्विक जागरूकता के कई महत्वपूर्ण आयामों से जुड़ा हुआ है। यह दिन न केवल अतीत की घटनाओं को याद करने का अवसर देता है, बल्कि वर्तमान समाज को प्रेरित करने और भविष्य के लिए दिशा तय करने का भी माध्यम बनता है। आइए 29 अप्रैल के विशेष महत्व को विभिन्न पहलुओं में विस्तार से समझते हैं। सबसे पहले, 29 अप्रैल को विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस (International Dance Day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत UNESCO से जुड़े अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य नृत्य कला को बढ़ावा देना, लोगों को इसके प्रति जागरूक करना और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करना है। इस दिन दुनिया भर में नृत्य से जुड़े कार्यक्रम, कार्यशालाएं और प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। यह दिन महान फ्रांसीसी नृत्यकार Jean-Georges Noverre की...

यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा

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यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं।पश्चिम चंपारण (बिहार) की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक महत्व—जैसे चंपारण सत्याग्रह—से ही नहीं, बल्कि उसके समृद्ध खान-पान से भी होती है। इस क्षेत्र के स्वाद में जो आत्मीयता और परंपरा की मिठास है, वह खासकर आनंदी का चूड़ा और चिकन ताश जैसे व्यंजनों में झलकती है। ये केवल खाने की चीजें नहीं हैं, बल्कि यहां के लोगों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं। सबसे पहले बात करें आनंदी के चूड़ा की, तो यह पश्चिम चंपारण के चनपटिया और आसपास के इलाकों में बनने वाला एक बेहद खास खाद्य पदार्थ है। चूड़ा, जिसे सामान्य भाषा में पोहा या चिवड़ा भी कहा जाता है, भारत के कई हिस्सों में बनाया जाता है, लेकिन “आनंदी का चूड़ा” अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है। इसका पतलापन, हल्कापन और कुरकुरापन इसे विशेष बनाता है। पारंपरिक तकनीक से धान को भिगोकर, सुखाकर और फिर विशेष ढंग से कूटकर तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में अनुभव और धैर्य की जरूरत होती है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी ...