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Bihar : दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने की पूरी कहानी

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संवैधानिक समयसीमा, राजनीतिक समन्वय और एनडीए की रणनीति—दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने की पूरी कहानी राजनीति में कई फैसले केवल राजनीतिक समीकरणों का परिणाम नहीं होते, बल्कि उनके पीछे संवैधानिक बाध्यताएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। बिहार की राजनीति में ऐसा ही एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान पार्षद देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र एवं बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया गया। इस निर्णय ने न केवल एक संवैधानिक आवश्यकता को पूरा किया, बल्कि एनडीए के भीतर राजनीतिक समन्वय और सहयोग का भी संदेश दिया। दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री के रूप में पहले ही शपथ ले चुके थे, लेकिन वे न तो विधानसभा के सदस्य थे और न ही विधान परिषद के। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत किसी भी ऐसे मंत्री को, जो नियुक्ति के समय किसी सदन का सदस्य नहीं हो, छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।...

Bihar : आठवें दिन भी ठप नगर सेवाएं: हड़ताल, कूड़े के ढेर और आम जनता की बढ़ती परेशानी

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 आठवें दिन भी ठप नगर सेवाएं: हड़ताल, कूड़े के ढेर और आम जनता की बढ़ती परेशानी बिहार के शहरी इलाकों में इन दिनों नगर निकाय सेवाएं गंभीर संकट से गुजर रही हैं। पटना नगर निगम सहित राज्य के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल गुरुवार को आठवें दिन भी जारी रही। इस हड़ताल का सबसे अधिक असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर दिखाई दे रहा है। शहरों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है, कई जगह कचरे के ढेर लग गए हैं, जलापूर्ति प्रभावित हुई है और अन्य आवश्यक नगर सेवाएं भी बाधित हैं। ऐसे में लोगों को न केवल असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी लगातार बढ़ रही हैं। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा, बिहारशरीफ और अन्य नगर निकाय क्षेत्रों में सड़कों के किनारे कचरा जमा होने लगा है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई इलाकों में दुर्गंध फैल रही है। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि गीला कचरा तेजी से सड़ता है और मच्छरों, मक्खियों तथा अन्य कीटों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों का भी मानना है कि लंबे समय तक ऐस...

India : गोदी मीडिया के दौर में क्या निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है?

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  गोदी मीडिया के दौर में क्या निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है? जब मीडिया पर सत्ता के करीब होने के आरोप लगते हों, विज्ञापन राजस्व पर निर्भरता बढ़ रही हो, टीआरपी और क्लिक की दौड़ तेज हो और सोशल मीडिया खबरों का बड़ा मंच बन चुका हो, तब सवाल किसी एक पत्रकार या चैनल का नहीं, बल्कि पूरी पत्रकारिता की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का है। “गोदी मीडिया” शब्द पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर उन मीडिया संस्थानों या पत्रकारिता की शैली के लिए किया जाता है, जिन पर सत्ता के प्रति अत्यधिक नरम या पक्षधर होने का आरोप लगाया जाता है। दूसरी ओर, इस शब्द की आलोचना करने वाले इसे राजनीतिक लेबल मानते हैं और कहते हैं कि इससे पत्रकारिता पर गंभीर बहस व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाती है। इसलिए असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कौन “गोदी मीडिया” है और कौन नहीं। बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में पत्रकारिता सत्ता, बाजार और राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र रहकर जनता को सही और संतुलित सूचना दे सकती है? जवाब है— हां, लेकिन इसके लिए पत्रकारिता की संस्थागत स्वतंत्रता, संपादकीय जि...

Jharkhand : JPSC पेपर लीक विवाद: छात्रों का बढ़ता आंदोलन और सरकार के सामने चुनौती

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 JPSC पेपर लीक विवाद: 13 दिनों से सड़क पर छात्र, आखिर कब मिलेगी निष्पक्ष परीक्षा की गारंटी? "जब मेहनत करने वाले छात्र सड़कों पर बैठ जाएं और परीक्षा की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगें, तब यह केवल एक परीक्षा का संकट नहीं रह जाता, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा बन जाता है। झारखंड में JPSC परीक्षा पेपर लीक विवाद अब सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य की लड़ाई बन चुका है।" झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले हजारों अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। राज्य की झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने युवाओं के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। पिछले 13 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं होगी, तो वर्षों की मेहनत का क्या अर्थ रह जाएगा? यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे राज्य का मुद्दा बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा है। छात्र इसे दिल्ली के जंतर-मंतर जैसे लंबे लोकता...

India : सच की कलम का सम्मान—लिज़ मैथ्यू को भारतीय कैथोलिक प्रेस पुरस्कार

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 सच की कलम का सम्मान—लिज़ मैथ्यू को भारतीय कैथोलिक प्रेस पुरस्कार पत्रकारिता केवल खबरें लिखने का पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखने का दायित्व भी है। ऐसे समय में जब मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और साहस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, वरिष्ठ पत्रकार Liz Mathew को प्रतिष्ठित Indian Catholic Press Award 2026 से सम्मानित किया जाना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी पत्रकारों के लिए प्रेरणा है जो सत्य और जनहित को सर्वोपरि मानते हैं। बेंगलुरु में 2 अगस्त 2026 को आयोजित समारोह में उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता (Excellence in Journalism) के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लगभग तीन दशक लंबे पत्रकारिता जीवन में राजनीतिक रिपोर्टिंग, संसद, चुनाव, सरकारी नीतियों और सार्वजनिक मामलों पर किए गए निष्पक्ष एवं प्रभावशाली कार्यों की स्वीकृति है। यह पुरस्कार भारतीय कैथोलिक प्रेस एसोसिएशन (ICPA) और मुंबई प्रांत के सेल्सियन ऑफ डॉन बॉस्को द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है। यह सम्मान उन पत्रकारों और संस्थानों को दिया जाता है जिन्होंने साहस, ईमानदारी और सत्य के प्र...

India : राजस्थान में स्किल इंडिया और RSLDC: चुनौतियों के बीच नए अवसरों की तलाश

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राजस्थान में स्किल इंडिया और RSLDC: क्या कौशल विकास से मिलेगा स्थायी रोजगार या अभी बाकी हैं कई चुनौतियां? भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यह जनसांख्यिकीय शक्ति देश के लिए एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी। यदि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि यह विशाल युवा वर्ग बेरोजगार या अल्परोजगार की स्थिति में रहता है तो यह सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय बन सकता है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की, जबकि राजस्थान सरकार ने राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) के माध्यम से राज्य के लाखों युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने का अभियान चलाया। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के विभिन्न जिलों में हजारों प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग, कंप्यूटर, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनेस, ऑटोमोबाइल सहित अनेक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रमा...

Bihar : बांकीपुर की राजनीतिक विरासत: जब पटना पश्चिम का हुआ विभाजन और बदली राजधानी की चुनावी तस्वीर

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बांकीपुर की राजनीतिक विरासत: कैसे पटना पश्चिम के विभाजन ने बदल दी राजधानी की चुनावी राजनीति? जानिए परिसीमन, नेताओं और चुनावी इतिहास की पूरी कहानी। बिहार की राजधानी पटना की राजनीति केवल चुनावी जीत-हार या नेताओं के उतार-चढ़ाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था, शहरी विकास और बदलते सामाजिक समीकरणों का भी जीवंत दस्तावेज है। समय के साथ राजधानी का विस्तार हुआ, जनसंख्या बढ़ी और मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। ऐसे में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की गई। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन ने पटना की राजनीतिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया। इसी प्रक्रिया में वर्षों तक अस्तित्व में रहा पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र इतिहास का हिस्सा बन गया और उसके स्थान पर दो नए विधानसभा क्षेत्र—बांकीपुर और दीघा—अस्तित्व में आए। यह बदलाव केवल नक्शे पर सीमाओं का परिवर्तन नहीं था, बल्कि राजधानी की चुनावी राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी था। पटना पश्चिम: राजधानी की राजनीति का मजबूत केंद्र परिसीमन से पहले पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता था। यह...