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chhattisgarh : पति की मौत के 42 दिन बाद आया ‘बधाई’ संदेश

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पति की मौत के 42 दिन बाद पत्नी के मोबाइल पर आया ‘स्वस्थ होकर घर लौटने’ का बधाई संदेश! आयुष्मान सिस्टम में मृत मरीज जीवित कैसे दिखा—डेटा एंट्री, अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल। छत्तीसगढ़ में एक परिवार को पति की मौत के 42 दिन बाद आयुष्मान योजना से मिला ऐसा संदेश, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के डिजिटल रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मृत व्यक्ति को ‘स्वस्थ होकर घर लौटने’ की सूचना कैसे मिली, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। रायपुर। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा, सुरक्षा और भरोसा देना है। लेकिन जब किसी सरकारी डिजिटल सिस्टम से ऐसी सूचना सामने आए, जो परिवार के वास्तविक अनुभव से बिल्कुल उलट हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। छत्तीसगढ़ में सामने आया एक मामला इसी वजह से चर्चा में है। एक महिला का दावा है कि उनके पति की अस्पताल में मृत्यु के करीब 42 दिन बाद आयुष्मान योजना से उनके मोबाइल पर ऐसा संदेश आया, जिसमें मरीज के अस्पताल से स्वस्थ होकर घर जाने की सूचना दी गई। मामला राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री आवास से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर रहने वाली स्टाफ नर्स ...

India : विदेशी फंड रुकने का डर कम, FCRA के तहत परिसंपत्ति जाने की चिंता ज्यादा?

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  विदेशी अंशदान पर सरकार की निगरानी जरूरी है, लेकिन असली सवाल यह है कि FCRA पंजीकरण खत्म होने की स्थिति में विदेशी योगदान से वर्षों में बनाई गई संपत्तियों का क्या होगा? कानून की सख्ती और संस्थाओं के अधिकारों के बीच संतुलन आखिर कैसे बनेगा? विदेशी फंडिंग को लेकर प्रस्तावित **FCRA Amendment Bill, 2026** ने एक बार फिर भारत में चर्च, ईसाई संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बहस और चिंता को तेज कर दिया है। हालांकि इस पूरे विवाद को केवल विदेशी फंड मिलने या बंद होने के सवाल तक सीमित करके देखना शायद सही तस्वीर पेश नहीं करता। असली चिंता अब उन **परिसंपत्तियों** को लेकर सामने आ रही है, जिन्हें विदेशी अंशदान से वर्षों के दौरान बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद इस बहस को एक नया आयाम मिला। 10 जुलाई को नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात में सरकार की ओर से कथित तौर पर यह आश्वासन दिया गया कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं लाया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग की व्य...

India :शिवलिंग पर टिप्पणी: अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आस्था का अपमान कब तक?

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शिवलिंग पर टिप्पणी: अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आस्था का अपमान कब तक? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन क्या इस स्वतंत्रता की कोई मर्यादा नहीं होनी चाहिए? रायपुर की कथित सोशल मीडिया टिप्पणी ने धर्म, अभिव्यक्ति और कानून के बीच संतुलन पर फिर बहस छेड़ दी है। रायपुर में छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की भगवान शिव और शिवलिंग को लेकर कथित सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद विवाद गहरा गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक सोशल मीडिया पोस्ट पर उनकी टिप्पणी को आपत्तिजनक माना गया, जिसके बाद शिकायत दर्ज हुई और पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा समुदायों के बीच वैमनस्य से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की। उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किए जाने और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बुनियादी कानूनी सिद्धांत को नहीं भूलना चाहिए—"गिरफ्तारी या आरोप किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करते।"किसी भी मामले में अंतिम निर्णय जांच, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। इसलिए इस घटना पर चर्चा करते समय आ...

India : महिलाओं को संसद में जगह कब?

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  महिलाओं को संसद में जगह कब?   जिस देश में महिलाएं पंचायत से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी क्षमता साबित कर रही हैं, वहां संसद में उनकी हिस्सेदारी अब भी इतनी कम क्यों है? महिला आरक्षण कानून बन चुका है, लेकिन उसका वास्तविक लाभ महिलाओं को कब मिलेगा? जवाब सिर्फ राजनीति में नहीं, बल्कि जनगणना, परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया की उस कड़ी में छिपा है, जो 2026 में और महत्वपूर्ण हो गई है। भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का सवाल नया नहीं है। स्वतंत्रता के बाद महिलाओं को पुरुषों के समान मतदान का अधिकार मिला और वे चुनाव लड़कर संसद तथा विधानसभाओं तक पहुंचती रही हैं। लेकिन सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी के अनुपात में नहीं पहुंच पाया है। यही वजह है कि महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के सवाल के रूप में देखना जरूरी है। 2023 में संसद ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम पारित किया। इसे आम तौर पर महिला आरक्षण कानून कहा जाता है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित क...

Bihar: बक्सर धर्मप्रांत में मसीही सत्संग मंडली और लोकभाषा में ईसाई संदेश की एक अनोखी यात्रा

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  जब अकेला चला एक व्यक्ति, तो बनता गया कारवाँ “एक पिता की मेज पर पड़ी छोटी-सी पुस्तिका ने बदली एक व्यक्ति की दिशा, भोजपुरी लोकभाषा और लोकधुनों के सहारे शुरू हुई यात्रा कैसे बनी मसीही सत्संग मंडली का कारवाँ?” बिहार के सामाजिक और धार्मिक इतिहास में ग्रामीण समाज की अपनी भाषा, लोकधुन और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का विशेष महत्व रहा है। इसी पृष्ठभूमि में बक्सर धर्मप्रांत से जुड़ी 'मसीही सत्संग मंडली' की यात्रा को एक अलग प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है। इस पहल के जनक के रूप में "श्री प्यारेलाल"का नाम सामने आता है। उनके लिए यह केवल धार्मिक प्रचार का माध्यम नहीं था, बल्कि अपने समाज की भाषा और लोकसंस्कृति के भीतर आध्यात्मिक संदेश को अभिव्यक्त करने का प्रयास भी था। इस यात्रा की प्रेरणा उन्हें अपने पिता "स्वर्गीय लूकस मास्टर" के अधूरे कार्यों और सपनों से मिली। प्यारेलाल के अनुसार, एक दिन उन्हें अपने पिता की टेबल पर रखी ‘ईसायण’ नामक पुस्तिका मिली। दोहा-चौपाई की शैली में लिखी इस पुस्तिका ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने महसूस किया कि यदि धार्मिक संदेश को ग्रामीण ...

India : FCRA 2026: विदेशी फंड पर शिकंजा या सेवा संस्थानों पर संकट?

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सवाल सिर्फ चर्च का नहीं, उन करोड़ों भारतीयों का भी है जिन्हें स्कूल, अस्पताल, छात्रावास और सामाजिक सेवाएँ मिलती हैं । पटना। विदेशी चंदे और उससे जुड़े संगठनों की निगरानी किसी भी संप्रभु देश के लिए जरूरी है। विदेशी धन का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित के खिलाफ, अवैध गतिविधियों या वित्तीय अनियमितताओं के लिए न हो, यह सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। लेकिन Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर उठ रही बहस ने एक महत्वपूर्ण सवाल सामने ला दिया है—क्या विदेशी फंड पर निगरानी की प्रक्रिया इतनी कठोर हो सकती है कि उसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़ी संस्थाओं पर भी पड़ने लगे? FCRA Amendment Bill, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य उन परिस्थितियों में विदेशी अंशदान और उससे बनी परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए व्यवस्था तैयार करना है, जब किसी संस्था का FCRA प्रमाणपत्र रद्द हो जाए, संस्था स्वयं उसे वापस कर दे या उसका पंजीकरण समाप्त हो जाए। प्रस्तावित व्यवस्था में **Designated Authority** की भूमिका ...

Jharkhand : मांडर के आनंद डेविड खालखो बने राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष, अभिषेक समारोह में उमड़ा विश्वासियों का जनसैला

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मांडर पल्ली से निकली धर्मसेवा की यात्रा अब राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी तक पहुँची है। आनंद डेविड खालखो के धर्माध्यक्षीय अभिषेक समारोह में देशभर से धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मबहनों, जनप्रतिनिधियों और विश्वासियों ने भाग लेकर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ दीं। राँची। राँची महाधर्मप्रांत में आज हर्ष और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। मांडर पल्ली में जन्मे आनंद डेविड खालखो ने राँची के सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। उनके धर्माध्यक्षीय अभिषेक की पवित्र धर्मविधि श्रद्धा, प्रार्थना और धार्मिक परंपराओं के बीच सम्पन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्मगुरुओं और विश्वासियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया। आनंद डेविड खालखो का जन्म 20 नवंबर 1975 को राँची महाधर्मप्रांत के मांडर पल्ली में हुआ था। मांडर पल्ली से धर्मपुरोहित के रूप में उनकी यात्रा शुरू हुई और अब वे इसी महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में कलीसिया की सेवा के लिए अभिषिक्त हुए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण पड़ाव है...