संदेश

आजादी के अदभुत दिवाने थे नेताजी-डा0 अखिलेश

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 आजादी के अदभुत दिवाने थे नेताजी-डा0 अखिलेश  पटना .नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आजादी के दिवाने थे जिनका नारा “तुम मुझे खून दो-मैं तुझे आजादी दूँगा” आज भी जन-जन को रोमांचित करता है। आई.सी.एस. परीक्षी पास करने के बावजूद उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर आजादी के लिए संघर्ष करने का रास्ता चुना। देश और कांग्रेस पार्टी में उनकी लोकप्रियता की मिशाल आज भी दी जाती है क्योंकि तमाम विरोध के बावजूद वे दो बार 1938 एवं 1939 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उनकी लोकप्रियता को देखकर ही महात्मा गांधी ने उन्हें नेताजी की उपाधि दी थी। ये बातें बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने नेताजी के 127 वीं जयंती के अवसर पर भेजे अपने संदेश में कही। मालूम हो कि नेताजी की जयंती पूरे देश में पराक्रम दिवस के रूप में मनायी जाती है।  डा0 सिंह ने कहा कि राष्ट्र के लिए नेताजी का समर्पण अदभुत था यह बात कल्पना से परे लगती है कि अंग्रेजो से जबरन आजादी छीनने के लिए उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिन्द फौज खड़ी कर दी।  पराक्रम दिवस के अवसर पर मंगलवार को पार्टी मुख्याल...

कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित

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 26 जनवरी, 2024 को सम्मानित किया जाएगा पटना.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के गैर-कांग्रेसी नेता कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित 26 जनवरी, 2024 को किया जाएगा, जैसा कि गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले 23 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषणा की गई.     बिहार के गैर-कांग्रेसी नेता कर्पूरी ठाकुर थे.जो दो बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.पहली बार दिसंबर 1970 से जून 1971 तक और दूसरी बार दिसंबर 1977 से अप्रैल 1979 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे.सादगी के प्रतिमूर्ति ‘जननायक’ के रूप में मशहूर थे कर्पूरी ठाकुर. एक बार कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में आए थे.उनके रिश्तेदार हॉस्पिटल में भर्ती थे.मुलाकात समय नहीं होने के कारण हॉस्पिटल के दरबान पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को अनजाने में रोक दिये.तब अन्य नेताओं के द्वारा‘पावर‘ नहीं दिखाएं.गेट से लौटकर बेच पर जाकर बैठ गये.धोती और कुर्ता पहने थे.      कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल चलाने वाली संस्था मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी की सिस्टर मारिया पी.जननायक कर्पूरी ठाक...

कुछ पुरुषों का एक समूह ने जय श्री राम का नारा लगाया

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  झाबुआ.मध्य प्रदेश में झाबुआ है.वहां पर कुछ पुरुषों का एक समूह ने जय श्री राम का नारा लगाया. राम मंदिर प्रतिष्ठा समारोह से पहले मध्य प्रदेश के झाबुआ में एक चर्च के शीर्ष पर चढ़ गए और भगवा झंडे लगा दिए.झाबुआ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अगम जैन ने कहा कि अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.                         झाबुआ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अगम जैन ने कहा कि “हमारी टीम ने रविवार 21 जनवरी की शाम को साइट का दौरा किया.हमने पूछा कि क्या हुआ. यह एक व्यक्ति का घर था, जिसे वह प्रार्थना के लिए उपयोग करता है, यह कोई चर्च नहीं था.इसलिए हमने स्वत संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की.वह व्यक्ति शिकायत दर्ज नहीं करना चाहता था, इसलिए अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है”.              अब वायरल हो रहे एक वीडियो में, लोगों को इमारत पर चढ़ते और ईसाई क्रॉस पर एक झंडा लगाते हुए देखा जा सकता है.भगवा झंडे पर अयोध्या राम मंदिर की तस्वीर और श्जय श्री रामश् लिखा हुआ था. यह घटना प्राण प्रतिष्ठा समारोह से एक दिन...

29 जनवरी को राहुल की यात्रा करेगी बिहार में प्रवेश

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  पटना।भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बिहार मीडिया कमिटी के चेयरमैन प्रेमचन्द्र मिश्रा ने न्याय यात्रा के बारे में खुलासा करते हुए कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 29 जनवरी को बिहार में प्रवेश करेगी। किशनगंज के रास्ते प्रवेश करने वाली यात्रा 30 जनवरी, को पूर्णिया पहुंचेगी जहां राहुल गांधी एक विशाल रैली को सम्बोधित करेंगे। इसके बाद 31 जनवरी को कटिहार में रैली होगी और 1 फरवरी को अररिया होते हुए यात्रा झारखंड में प्रवेश कर जायेगी। उनके मुताबिक, दो चरणों में होने वाली यह यात्रा बिहार के  7 जिलों से गुजरेगी और कुल 425 कि0मी0 की दूरी तय करेगी । पहले चरण में किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया से गुजरेगी। दूसरे चरण में औरंगाबाद, कैमूर और सासाराम से होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जायेगी। मिश्रा ने बताया कि पूर्णिया में होने वाली सभा में नीतीश कुमार शामिल होंगे। आलोक कुमार
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राहुल को मंदिर जाने से रोकना अधर्म-कांग्रेस शंकरदेव मंदिर जाने से जबरन रोका गया पटना। बिहार कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान असम में हो रही हिंसात्मक वारदात की घोर निंदा की। गौर तलब है कि राहुल फिलहाल असम में न्याय यात्रा कर रहे हैं और सोमवार को उन्हें असम के नगांव स्थित शंकरदेव मंदिर जाने से जबरन रोका गया।       इससे पहले उनके काफिले पर लगातार हमले हो रहे हैं। जिसमें असम कांग्रेस अध्यक्ष के अलावे अनेक नेता व न्याय योद्धा घायल हो चुके है।   जिस तरह सुनियोजित ढंग से हिंसात्मक वारदात को अंजाम दिया जा रहा है उससे कांग्रेस में बेहद आक्रोश व्याप्त है। इसके खिलाफ सोमवार को पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता व न्याय यात्रा के लिए गठित प्रदेश मीडिया कमेटी के अध्यक्ष प्रेमचंद्र मिश्रा ने संबोधित किया। मिश्रा ने असम की हेमन्त विश्व शर्मा की भाजपा सरकार पर हमला बोला ।                        ...
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बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया बक्सर. बक्सर धर्मप्रांत के शाहपुर पैरिश के संस्थापक फादर निकोलस पोलार्ड,एस.जे.को बड़ी शिद्दत से पुण्यतिथि के अवसर पर याद किया गया.आज पोलार्ड दिवस के रूप में मनाया गया.     आज शाहपुर पैरिश के पल्ली पुरोहित फादर विजय भास्कर बोज्जा ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया.इस अवसर पर फादर ने धर्मोपदेश दिया. धर्मोपदेश का थीम था फादर पोलार्ड का जीवन और मिशन.इस पर बोलते हुए फादर विजय भास्कर बोज्जा ने कहा कि फादर पोलार्ड का जन्म कनाडा में हुआ मगर दिल हिंदुस्तानी बनकर रह गया.    उनका जन्म माह मार्च 1905 में कनाडा में हुआ था.जब 21 साल के तब विश्व विख्यात येसु समाज के बिहार के पटना प्रोविंस में 1926 में प्रवेश किये.बाद में 1947 में पुरोहित बने. पुरोहित बनने के बाद में एक मिशनरी पुरोहित के रूप में  1945 में शाहपुर मिशन में आये और लोगों के जीवन को बदलने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे. वे शाहपुर मिशन के पहले पल्ली पुरोहित थे. फादर पोलार्ड शाहपुर मिशन में लगभग 35 साल तक थे. फादर भास्कर बोज्जा...
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कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता अपने बाकी परिवार और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया पटना.एक गांव में गणेश नाम का एक जवान लड़का रहता था.मगर गणेश लापरवाह था और अक्सर अपना खाना बर्बाद करता था.इस महंगी में भी वह अक्सर अपने खाने में से कुछ निवाले ही खाता और बाकी को फेंक देता था.    एक दिन गणेश का परिवार एक गरीब गांव की यात्रा पर गया था.जब वे पहुंचे, तो उन्होंने बहुत से बच्चों को देखा जो भूखे थे और उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. गणेश भूखे बच्चों को देखकर दुखी हो गया और महसूस करने लगा कि वह कितना भाग्यशाली है कि उसे कम से कम खाने के लिए भोजन तो मिल जा रहा है.     अगले दिन गांव में , गणेश का परिवार एक संस्था में जाता है जहाँ स्वयंसेवक गाँव में भूखे लोगों को भोजन परोसते दिखे गणेश यह देखकर चैंक गया कि कितने सारे लोग एक समय के भोजन के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं. उसने महसूस किया कि भोजन को बर्बाद करना न केवल अपमानजनक है बल्कि दूसरों के लिए भी हानिकारक है. जब गणेश घर वापस गया, तो उसने खुद से वादा किया कि वह फिर कभी खाना बर्बाद नहीं करेगा.अब वह उस भोज...