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14वीं पुण्यतिथि पर विशेष:

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 14वीं पुण्यतिथि पर विशेष: कुष्ठ रोगियों के मसीहा ‘बाबा’ ब्रदर क्रिस्टुदास को श्रद्धांजलि बाबा क्रिस्टुदास की विरासत आज भी जीवित है रक्सौल.सुंदरपुर, बिहार. कुष्ठ रोगियों के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देने वाले समाजसेवी और "कुष्ठ रोगियों के मसीहा" के रूप में विख्यात ब्रदर क्रिस्टुदास की 14वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. 27 जुलाई 2011 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था. केरल के कोट्टायम जिले के एडमावुकु गांव में 1937 में जन्मे ब्रदर क्रिस्टुदास ने जीवन के शुरुआती दिनों में ही मानव सेवा का मार्ग चुना.1970 के दशक में वे कोलकाता के पास टीटागढ़ स्थित सेंट मदर टेरेसा के कुष्ठ रोग केंद्र में निदेशक रहे. वहीं से प्रेरित होकर वे बिहार आए, जो उस समय कुष्ठ रोग से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में था. लिटिल फ्लावर अस्पताल की स्थापना 1982 में ब्रदर क्रिस्टुदास ने पूर्वी चंपारण के रक्सौल प्रखंड के सुंदरपुर गांव में लिटिल फ्लावर लेप्रोसी वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना की. इस संस्था के तहत 200 बेड वाले लिटिल फ्लावर लेप्रोसी हॉस्पिटल ने हजारों कुष्ठ रोगियों को मुफ्त इलाज और प...

फादर जेरोम डिसूजा का निधन

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कैपुचिन फादर जेरोम डिसूजा का अंतिम संस्कार संपन्न फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था  लखनऊ. फादर जेरोम डिसूजा का निधन 23 जुलाई को बरेली में हो गया था.आज 25 जुलाई को लखनऊ में फादर जेरोम डिसूजा, कैपुचिन का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ.जिसका संचालन बरेली, उत्तर प्रदेश, भारत के बिशप इग्नाटियस डिसूजा और कई कैपुचिन, डायोकेसन पुरोहित और कई शिक्षकों और विश्वासियों द्वारा किया गया था. दुःखद निधन फादर जेरोम डिसूजा कैपुचिन (87) का  23 जुलाई को बरेली में निधन हो गया.वे एक संत पुरोहित थे और उन्होंने कैपुचिन संप्रदाय, चर्च और समाज की अनेक पदों पर सेवा की. वे गोवा के मोंटे दे गिरिम में एक कुशल शिक्षक, आगरा के सेंट पीटर्स कॉलेज में प्रधानाचार्य और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित हार्टमैन कॉलेज में भी प्रधानाचार्य थे; वे न्यूज़ीलैंड में एक मिशनरी और बांग्लादेश के मैमनसिंह में क्लोइस्टर्ड सिस्टर्स के पादरी थे, और बरेली, उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त हुए.      Publisher ID: pub-4394035046473735

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन

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  ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन कर दिया जाता है. मिशनरी प्रबंधन की सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति उजागर,दर्जनों कर्मचारियों को इस रणनीति के तहत नौकरी से बाहर कर देने की खबर...... पटना.राजधानी पटना में है मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा संचालित कुर्जी होली फैमिली अस्पताल.यहां कार्यरत कर्मी हलकान और परेशान हैं.यहां के कर्मी जानते हैं कि कभी भी यहां की प्रबंधन की मनमर्जी के शिकार होकर स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन नौकरी से निष्कासन कर दिया जाएगा.यहां के अगस्टीन,वर्गीस,अशोक,सत्यनारायण आदि कर्मियों पर निष्कासन की कैची चल गई है.ये सबके सब ईसाई मिशनरी संस्था की प्रबंधक की ‘सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति‘ के शिकार हो चुके हैं.         जानकार लोगों का कहना है कि कुर्जी होली फैमिली अस्पताल की प्रबंधक ने तारा टोप्पों को जबरन नौकरी से निकालने के बाद काफी बवाल हुआ था,तब से कर्मचारियों को  प्रत्यक्ष रूप से नहीं निकाला जाता हैं.उनको मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उनसे इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया जाता है.यहां तक घरेलू जांच कमिटी गठित कर जबरन मानसिक प्रताड़ना ...

उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर

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  बिहार में फिर गूंजा भूमि अधिकार का सवाल: तीन डिसमिल को लेकर जन सुराज का प्रदर्शन तेज 17 साल बाद भी लागू नहीं हुई बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें, चुनावी मौसम में गरमाया मुद्दा पटना. बिहार में आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने का वादा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि सुधार के लिए डी. बंदोपाध्याय आयोग का गठन किया था, जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी. रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन दी जानी चाहिए. प्रारंभ में सरकार ने दस डिसमिल जमीन देने की बात कही, जिसे बाद में पांच डिसमिल और अंततः तीन डिसमिल तक सीमित कर दिया गया.मगर 17 साल बाद भी इन सिफारिशों को जमीन पर उतारने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है. अब ‘जन सुराज’ ने उठाया मोर्चा राज्य में चुनावी माहौल के बीच ‘जन सुराज’ संगठन ने इस मुद्दे को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है.संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन डिसमिल भूमि आवंटन को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. जन सुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अ...

विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा

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  पटना. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) द्वारा बेरोजगार, पेपर लीक, पलायन और छात्रावासों सहित शिक्षण संस्थानों की जर्जर स्थिति के खिलाफ व निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर कल दिनांक 24 जुलाई, 2025 को मध्याह्न 12-00 बजे प्रदेश काग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम से राजापुर पुल, बोरिंग रोड होते हुए विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा. उक्त कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) के प्रभारी श्री सत्यम कुशवाहा जी अलावे कई गणमान्य नेतागण के साथ-साथ हजारों की संख्या में एन.एस.यू.आई के छात्रगण भी उपस्थित रहेंगे।   आलोक कुमार 

आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक

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  आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक जन सत्याग्रह, पी. वी. राजगोपाल के नेतृत्व में देशभर से हजारों लोगों की पदयात्रा होती थी पटना. आवासीय भूमिहीनों को न्यूनतम तीन डिसमिल भूमि दिलाने की मांग को लेकर जन संगठन एकता परिषद ने बीते दो दशकों में कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है.इस आंदोलन की अगुवाई देश के वरिष्ठ गांधीवादी नेता पी. वी. राजगोपाल ने की, जिसका उद्देश्य था – शांतिपूर्ण सत्याग्रह के माध्यम से गरीबों और हाशिए पर खड़े समुदायों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करना. 2007 से लगातार उठती रही आवाज 2007 में जनादेश यात्रा के नाम से पहला बड़ा अभियान शुरू हुआ, जिसमें देशभर के हजारों भूमिहीनों ने भाग लिया.इस अभियान के तहत सरकार से आवास और आजीविका के लिए भूमि देने की नीति तैयार करने की मांग की गई. 2012 में ‘जन सत्याग्रह’ बनी निर्णायक घड़ी इस आंदोलन की सबसे अहम कड़ी 2012 में देखने को मिली, जब ग्वालियर से दिल्ली तक लगभग 50,000 लोगों ने पैदल मार्च किया। इसे जन सत्याग्रह का नाम दिया गया. शांतिपूर्ण पदयात्रा के इस आयोजन ने देश का ध्यान आकर्षित किया.अं...

भारतीय जनता पार्टी के नेता राजन क्लेमेंट साह नेआरोप को एक सिरे से नकारा

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  पटना. यह आरोप ईसाई समुदाय के द्वारा लगाया जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ईसाइयों पर हमले बढ़े है. बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह ने खुद ईसाई होकर आरोप को खारिज कर रहे हैं हम अल्पसंख्यक को निशाना बनाया जा रहा है.      भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, तथा विगत कई वर्षों से अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय के हितों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं.इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में ईसाई समुदाय पर हमलों की संख्या में वृद्धि हुई है.यह गंभीर आरोप देश के  तथाकथित ईसाई संगठनों और धार्मिक नेताओं के द्वारा लगाया जाता हैं.        मीडिया में बने रहने और मिशनरी कर्ताधर्ताओं के सामने चमकने के लिए समय समय पर अखिल भारतीय ईसाई परिषद, यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम और अन्य संगठनों के द्वारा कहा जाता रहा है कि पिछले दस वर्षों में चर्चों पर हमलों, प्रार्थना सभाओं में तोड़फोड़, और पादरियों की गिरफ्तारी की घटनाएं तेजी ...