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राजनीति में बाहुबल और जनाधार

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मोकामा विधानसभा : बाहुबलियों की परंपरा, जनता की परीक्षा पटना.बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही एक बार फिर मोकामा सीट सुर्खियों में है. 243 सीटों वाले इस राज्य में दो चरणों में चुनाव होने हैं — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को, जबकि परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. लेकिन बिहार की निगाहें मोकामा पर टिकी हैं, जहाँ राजनीति, जातीय समीकरण और बाहुबल का अनोखा संगम देखने को मिलता है.गंगा नदी के दक्षिण तट पर स्थित मोकामा क्षेत्र में घोसवरी, मोकामा और पंडारक प्रखंड के कुछ गांव शामिल हैं. यह सीट अपने इतिहास और बाहुबली नेताओं के प्रभाव के लिए प्रसिद्ध रही है. यहाँ की राजनीति में बाहुबल और जनाधार का अद्भुत संतुलन हमेशा चर्चा में रहा है.         बाहुबलियों की परंपरा और मुकाबले की विरासत मोकामा का नाम आते ही अनंत सिंह उर्फ "छोटे सरकार" की याद आती है. यह सीट लंबे समय से उनके नाम से जुड़ी रही है. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में हालात पहले जैसे नहीं हैं.इस बार मैदान में दो बाहुबलियों का आमना-सामना होने जा रहा है — एक ओर जदयू के उम्मीदवार अनंत सिंह, तो दूसरी ओर राजद से सूर...

“खरना” छठ महापर्व का दूसरा और अत्यंत पवित्र दिन

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 पटना.“खरना” छठ महापर्व का दूसरा और अत्यंत पवित्र दिन आस्था का आलोक : जब घर-आंगन में उतरता है ‘खरना’ का उजासरविवार की सांझ है.आसमान पर हल्की केसरिया आभा फैली हुई है.दिनभर की भागदौड़, बाजार की रौनक, घाटों की तैयारियां और घरों में उत्साह की हलचल—सब कुछ एक अदृश्य आस्था की डोर से बंधा प्रतीत होता है. आज खरना है—छठ महापर्व का दूसरा दिन. वही दिन जब सूर्यास्त के साथ व्रती अपने निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं.      मैं खड़ा हूँ पटना के दीघा घाट की ओर जाने वाली एक गली में. हर घर से धुएँ की पतली लकीरें उठ रही हैं.धूप, कपूर, अरवा चावल और गुड़ की सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा है. लगता है जैसे पूरा शहर श्रद्धा में डूब गया हो—हर चेहरा, हर दीया, हर अर्घ्य पात्र सूर्यदेव की प्रतीक्षा में शांत और विनम्र है. खरना : आस्था का अनुशासन, शुद्धता का पर्वछठ महापर्व के चार दिन होते हैं—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य.खरना इन चारों में सबसे संयमित और अनुशासित दिन है. यह दिन भक्ति की शुरुआत नहीं, बल्कि भक्ति के परिपक्व रूप का उद्घोष है. व्रती सुबह से जल भी ग्रहण नहीं करते....

आस्था, संस्कृति और स्वच्छता का महायज्ञ

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 आस्था, संस्कृति और स्वच्छता का महायज्ञ प्रस्तावना : सूर्योपासना की अनोखी परंपरा भारतवर्ष की मिट्टी में जितनी विविधताएं हैं, उतनी ही उसमें आस्थाओं की गहराई भी है. हर प्रदेश, हर जनपद, हर बोली अपने भीतर लोकजीवन का एक अध्याय समेटे हुए है. इन्हीं अध्यायों में एक उज्ज्वल पृष्ठ है — छठ महापर्व. यह पर्व केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि मानव, प्रकृति और संस्कृति के मध्य संतुलन का अनुपम प्रतीक है.  बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह पर्व आज देश की सीमाओं को लांघकर विश्व के हर कोने तक पहुँच चुका है. जहाँ-जहाँ भोजपुरी, मैथिली, मगही या हिंदी बोलने वाले बसे हैं, वहाँ-वहाँ डूबते और उगते सूर्य की आराधना में डूबे लोगों की झिलमिलाती आरतियाँ दिखाई देते हैं.      छठ केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पर्यावरण, श्रम, अनुशासन और समर्पण का जीवंत उत्सव है.यह पर्व समाज को वह सीख देता है, जो शायद किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं मिलती — शुद्धता ही पूजा है, निष्ठा ही साधना है और सूर्य ही साक्षात् जीवन है.     छठ का ऐतिहासिक और पौराण...

छठ पर्व को लेकर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न

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 छठ घाटों पर स्वच्छता, प्रकाश और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें : जिला पदाधिकारी छठ व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका रखें विशेष ध्यान छठ व्रतियों की सुविधा के मद्देनजर चेंजिंग रूम की करें व्यवस्था छठ पर्व को लेकर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न बेतिया .छठ महापर्व को लेकर जिला प्रशासन पश्चिम चम्पारण पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। जिला पदाधिकारी, श्री धर्मेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें छठव्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.      जिला पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी छठ घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएँ. उन्होंने कहा कि घाटों तक जाने वाले मार्गों की मरम्मत, कीचड़ की सफाई और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.   ...

बरौली में महिलाओं की टोली ने मतदाताओं को किया जागरूक

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 बरौली में महिलाओं की टोली ने मतदाताओं को किया जागरूक बरौली.आगामी 6 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है, ताकि मतदान के प्रतिशत को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके. इस क्रम में इस जागरूकता अभियान में महिलाओं की भी अहम भागीदारी है. जिला स्वीप कोषांग की ओर से आयोजित हो रही विभिन्न गतिविधियों में महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है. बुधवार को बरौली विधानसभा क्षेत्र के बरौली प्रखंड मुख्यालय में जीविका से जुड़ी दो दर्जन से अधिक महिलाओं ने अभियान चलाकर महिला व पुरुष मतदाताओं को जागरूक किया तथा 6 नवंबर को मतदान करने का संकल्प दिलाया. जागरूकता बैनर के साथ निकली महिलाओं ने जागरूकता से संबंधित कई नारे लगाए तथा लोगों से मतदान करने की अपील की. आलोक कुमार

स्व. श्रीकृष्ण सिंह के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की

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  स्व. श्रीकृष्ण सिंह के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की पटना. आधुनिक बिहार के निर्माता और बिहार के पहले मुख्यमंत्री बिहार केसरी स्व. श्रीकृष्ण सिंह की 138 वीं जयंती प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनाई गई। स्व. श्रीकृष्ण सिंह  के तैल चित्र पर कांग्रेसजन ने पुष्पांजलि अर्पित की.     इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू आधुनिक बिहार के निर्माता रहें हैं और देश की आजादी के लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के नेता रहें हैं. उन्होंने बिहार के विकास को राह प्रदान किया। बरौनी और पतरातू थर्मल पावर स्टेशन से लेकर बरौनी तेल शोधक कारखाना, बोकारो स्टील कारखाना, बरौनी व सिंदरी सीमेंट कारखाना, हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन आदि प्रमुख कारखानों को उन्होंने अविभाजित बिहार लगने का मार्ग प्रशस्त किया। श्रीकृष्ण बाबू आजादी के लड़ाई में देश को दिशा देने वाले नेताओं में से एक रहें हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिक बिहार के निर्माण में श्रीकृष्ण बाबू का योगदान अविस्मरणीय है.       बिहार को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में उ...

जो हर नए वादे के साथ बस “कल तक” का इंतज़ार करते रहते

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 सरकार के फैसलों और घटती पेंशनभोगियों की संख्या से जुड़ा ताज़ा अपडेट सामने आया है। EPS-95 के लाखों बुजुर्गों को राहत की उम्मीद, लेकिन क्या सच में ₹7500 न्यूनतम पेंशन मिल पाएगी? पेंशन में बढ़ोतरी के पीछे छिपे असर और ताज़ा हालात जानकर आप चौंक जाएंगे! पटना . ईपीएस-95 पेंशन : उम्मीदें, वादे और हकीकत 1995 में जब आजतक ने दूरदर्शन पर एक 20 मिनट के समाचार कार्यक्रम के रूप में शुरुआत की थी, तब हर बुलेटिन के अंत में ऐंकर कहते थे — “इंतज़ार करिए कल तक.” उस समय यह वाक्य सिर्फ समाचारों की निरंतरता का प्रतीक था, पर आज यह पंक्ति लाखों ईपीएस-95 पेंशनधारियों की ज़िंदगी का पर्याय बन चुकी है — जो हर नए वादे के साथ बस “कल तक” का इंतज़ार करते रहते हैं.           ईपीएस-95 पेंशन योजना से जुड़े करीब 75 लाख पेंशनधारी वर्षों से अपनी न्यूनतम पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि ₹7500 मासिक पेंशन, महंगाई भत्ता और पति-पत्नी के लिए चिकित्सा सुविधा लागू हो. पर हर बार उम्मीदें बंधती हैं, घोषणा होती हैं, और फिर सब “फाइल प्रक्रिया में है” कहकर टाल दिया जाता है. जब ...