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Bihar : लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया

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  दियारा के विकास की आवाज बना दियारा विकास संघर्ष समिति, 14 जून को होगा विशाल महाधरना पटना के दियारा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को लेकर लंबे समय से संघर्षरत दियारा विकास संघर्ष समिति एक बार फिर जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन की राह पर आगे बढ़ रही है। समिति ने शुरुआत से ही जनता की समस्याओं को सुनने, समझने और उन्हें प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का कार्य किया है। केवल शिकायत करने तक सीमित रहने के बजाय संगठन ने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया, उनकी भागीदारी सुनिश्चित की और फिर संवाद तथा संपर्क के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास किया। जब इन प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो समिति ने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में दिनांक 14 जून 2026, रविवार को अपराह्न 1 बजे से दीघा स्थित जेपी सेतु गोलंबर के समीप दियारा विकास संघर्ष समिति के तत्वावधान में एक विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा। यह धरना दियारा क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। समिति की मुख्य मांग है कि जेपी सेतु के समानांतर निर्मित एनएच-139डब्ल...

Bihar : नकटा दियारा की उम्मीदें और नेताओं के पत्र: क्या अब बनेगा एप्रोच रोड?

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  नकटा दियारा की उम्मीदें और नेताओं के पत्र: क्या अब बनेगा एप्रोच रोड? लोकतंत्र में जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देखती है। जब कोई समस्या वर्षों तक बनी रहती है और उसके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते हैं, तब लोगों में निराशा और असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है। कुछ ऐसी ही स्थिति पटना और सारण जिले के बीच स्थित नकटा दियारा क्षेत्र के लोगों की दिखाई दे रही है। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार अदालतों में किसी मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार "तारीख पर तारीख" मिलने से न्याय में देरी होती है, उसी प्रकार उनकी समस्या के समाधान के लिए केवल "लेटर पर लेटर" भेजे जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है। नकटा दियारा नया टोला से पिलर संख्या-16 के बीच एप्रोच रोड अथवा रैम्प निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग वर्षों से स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जाती रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों का मानना है कि यदि दीघा-सोनपुर छह लेन पुल के साथ इस स्थान पर एप्रोच रोड और रैम्प का निर्माण हो जाए तो हजारों ...

India : पत्रकारिता पर दबाव और सच बोलने की कीमत

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  पत्रकारिता पर दबाव और सच बोलने की कीमत लोकतंत्र के चार स्तंभों में पत्रकारिता को विशेष स्थान दिया गया है। पत्रकार का काम केवल समाचार लिखना या प्रसारित करना नहीं होता, बल्कि समाज और सत्ता के बीच एक सेतु का कार्य करना भी होता है। वह जनता की समस्याओं को सामने लाता है, प्रशासन से सवाल पूछता है और जनहित के मुद्दों को बहस का विषय बनाता है। लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारिता का यह आदर्श स्वरूप कई प्रकार के दबावों के बीच संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि आज के पत्रकार पहले की तरह निर्भीक नहीं रहे। वे सरकार से तीखे सवाल नहीं पूछते, बड़े संस्थानों के खिलाफ खबरें नहीं चलाते और कई बार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं। यह आलोचना पूरी तरह गलत भी नहीं है, लेकिन इसके पीछे की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। पत्रकारिता केवल कलम और कैमरे का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे नौकरी, परिवार, आर्थिक सुरक्षा और संस्थागत दबाव जैसी अनेक वास्तविकताएं भी जुड़ी होती हैं। एक उदाहरण के रूप में देखा जाए तो किसी अस्पताल, सरकारी विभाग या प्रभावशाली संस्था के खिलाफ प्रकाशित एक समाचार क...

World : ईसाई धर्म में संस्कारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है

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ये केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, आध्यात्मिक विकास और ईश्वर के साथ संबंध को सुदृढ़ करने के माध्यम माने जाते हैं ईसाई धर्म में संस्कारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, आध्यात्मिक विकास और ईश्वर के साथ संबंध को सुदृढ़ करने के माध्यम माने जाते हैं। इनमें बपतिस्मा (Baptism) और परमप्रसाद (Holy Communion या Eucharist) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। किसी भी ईसाई बच्चे के धार्मिक जीवन की शुरुआत बपतिस्मा से होती है, जबकि परमप्रसाद उसे मसीह के साथ गहरे आध्यात्मिक संबंध में प्रवेश कराने वाला संस्कार माना जाता है। यही कारण है कि विभिन्न ईसाई परंपराओं में बच्चों को परमप्रसाद देने की आयु, प्रक्रिया और नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं विकसित हुई हैं। बपतिस्मा संस्कार को ईसाई जीवन का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस संस्कार के माध्यम से व्यक्ति को पापों से शुद्ध माना जाता है और उसे कलीसिया का सदस्य स्वीकार किया जाता है। अधिकांश ईसाई संप्रदायों में बपतिस्मा के बाद ही व्यक्ति अन्य संस्कारों को ग्रहण करने का अधिकारी बनता है। हालांकि, परमप्रसाद प्राप्त ...

World : प्रत्येक वर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है

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  विश्व साइकिल दिवस: स्वास्थ्य, पर्यावरण और जागरूकता का संदेश प्रत्येक वर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस साइकिल जैसे सरल, सुलभ, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधन के महत्व को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त इस दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, प्रदूषण कम करने तथा सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना है। वर्ष 2026 में विश्व साइकिल दिवस की थीम “हरित भविष्य के लिए साइकिल चलाना” रखी गई है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को उजागर करती है। इसी अवसर पर कटिहार जिले के समेली प्रखंड में यूथ पावर स्वयंसेवी संगठन तथा मेरा युवा भारत (माय भारत) कटिहार के संयुक्त तत्वावधान में फिट इंडिया जागरूकता साइकिल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण तथा नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना था।                                          ...

World : हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

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  विश्व पर्यावरण दिवस : धरती को बचाने का संकल्प हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानव समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद इसकी शुरुआत की गई थी और 1973 से यह दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक बनाना है। आज जब हम विकास और आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं, तब पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के संतुलन को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट, वायु प्रदूषण और जैव विविधता के ह्रास जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। पर्यावरण केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है। इसमें हवा, पानी, मिट्टी, पर्वत, नदियाँ, जीव-जंतु और मनुष्य सहित सभी जैवि...

Kolkata: दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन से उत्पन्न शून्य को भरना आसान नहीं

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  दिलीप एंथनी रोजारियो : एक समर्पित संगीतकार और चर्च सेवक को श्रद्धांजलि कोलकाता महाधर्मप्रांत (आर्चडायोसिस ऑफ कलकत्ता) के लिए 2 जून 2026 का दिन अत्यंत दुखद रहा। चर्च, संगीत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन का समाचार मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई। वे केवल एक प्रतिभाशाली संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि एक समर्पित ले-विश्वासी (Lay Faithful) और चर्च के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। उनके निधन से चर्च समुदाय ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है जिसने अपना जीवन सेवा, संगीत और सुसमाचार के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। दिलीप एंथनी रोजारियो का जन्म 17 जून 1962 को हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत के प्रति विशेष लगाव था। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर चर्च संगीत के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके नेतृत्व और योगदान से अनेक धार्मिक कार्यक्रमों तथा प्रार्थना सभाओं को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। वे कोलकाता क्रिश्चियन कॉयर से भी जुड़े रहे और अपनी मधुर प्रस्तुति तथा संगीत निर्देशन के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किए जाते थे। चर्च के प्रति उनकी न...