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Bihar : मेरा भारत, ग्रीन भारत

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  मेरा भारत, ग्रीन भारत : जलवायु संरक्षण के युवा सहभागिता विषय पर संत लौरेंस स्कूल चुहड़ी में भव्य कार्यक्रम आयोजित बेतिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माय भारत (My Bharat) के तत्वावधान में संत लौरेंस स्कूल, चुहड़ी में "मेरा भारत, ग्रीन भारत : जलवायु संरक्षण हेतु युवा सहभागिता" विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला युवा अधिकारी, माय भारत, पश्चिम चम्पारण श्री शशांक मित्तल, यूथ आइकन बिहार श्री आदित्य कुमार मधुकर तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री रोनाल्ड कुँअर सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों का बुके एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गान ने कार्यक्रम के वातावरण को और भी गरिमामय बना दिया। अपने संबोधन में जिला युवा अधिकारी श्री शशांक मित्तल ने पर्यावरण संरक...

World : खिलाड़ी से विश्वविजेता कोच बनने तक का सफर

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  एंडी फ्लावर : खिलाड़ी से विश्वविजेता कोच बनने तक का सफर क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो खिलाड़ी के रूप में जितने सफल होते हैं, उससे कहीं अधिक ऊंचाई वे कोच के रूप में प्राप्त करते हैं। जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज Andy Flower उन्हीं चुनिंदा महान हस्तियों में शामिल हैं। क्रिकेट जगत में आज उनकी पहचान केवल एक शानदार बल्लेबाज या कप्तान की नहीं, बल्कि ऐसे कोच की है जिसने अनेक टीमों को सफलता की राह दिखाई और कई प्रतिष्ठित ट्रॉफियां जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एंडी फ्लावर का जन्म 28 अप्रैल 1968 को जिम्बाब्वे में हुआ था। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने जिम्बाब्वे क्रिकेट को नई पहचान दिलाई। अपनी तकनीकी दक्षता, धैर्य और नेतृत्व क्षमता के कारण वे लंबे समय तक जिम्बाब्वे टीम की रीढ़ बने रहे। उस दौर में जब जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम विश्व क्रिकेट में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी, तब फ्लावर ने बल्ले और कप्तानी दोनों से टीम को मजबूती प्रदान की। हालांकि, क्रिकेट प्रेमियों के बीच उनकी वास्तविक लोकप्रियता तब और बढ़ी जब उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी...

Bihar : पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को नई ऊर्जा

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              "इस एक फैसले ने पूरे सिस्टम में हलचल मचा दी है..." कटिहार जिले के समेली प्रखंड में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर युवाओं ने ऐसा संकल्प लिया, जिसने पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को नई ऊर्जा दे दी। सैकड़ों पौधे लगाने और उनकी देखभाल का प्रण लेकर युवाओं ने यह संदेश दिया कि प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की है। मेरा युवा भारत (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) तथा यूथ पावर स्वयंसेवी संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता का नया अध्याय लिख दिया। नेहरू सेवा सदन पुस्तकालय, भरेली के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं, स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का आयोजन मेरा युवा भारत, कटिहार के जिला युवा अधिकारी नीरज कुमार झा के दिशा-निर्देश में किया गया, जबकि इसकी अध्यक्षता यूथ पावर संगठन के अध्यक्ष हरि प्रसाद मंडल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश...

India : परंपरा, सम्मान और बदलता समय

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            "जो खबर आपको टीवी पर नहीं दिखाई गई, उसका पूरा सच अब सामने आ चुका है..." भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं में आदिवासी समाज की रीति-रिवाज एक अलग ही आत्मा लिए हुए हैं। छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल और झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में प्रचलित मेहमानों के पैर धोकर स्वागत करने की परंपरा इसी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उदाहरण है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें अतिथि को देवतुल्य माना जाता है। सदियों से आदिवासी समुदाय अपने मेहमानों का स्वागत विनम्रता और सम्मान के साथ करते आए हैं। किसी अतिथि के घर आने पर उसके पैर धोना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि वह व्यक्ति उनके लिए आदरणीय है। यह परंपरा समाज में आपसी विश्वास, प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती रही है। ग्रामीण जीवन में यह सम्मान का सर्वोच्च रूप माना जाता था। हाल के दिनों में जब कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का इसी तरह स्वागत किया गया, तो इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे आदिवासी संस्कृति और परंपरा का सम्मान बताया, जबकि कुछ ने बदलते सामाजिक पर...

Bihar : बिहार में भूमिहीनों को जमीन दिलाने की दिशा में बड़ा कदम

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"ब्रेकिंग न्यूज़ से आगे बढ़िए, अब जानिए उसके पीछे की पूरी कहानी..." बिहार सरकार ने राज्य के आवासीय भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अंचलाधिकारियों (सीओ) को एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि प्रत्येक अंचलाधिकारी अपने क्षेत्र का व्यापक सर्वेक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि उनके अंचल में कोई भी पात्र परिवार आवासीय भूमि से वंचित न रहे। इतना ही नहीं, अंचलाधिकारियों को शपथ पत्र देकर यह घोषणा भी करनी होगी कि उनके अंचल में अब एक भी आवासीय भूमिहीन परिवार शेष नहीं है। यह निर्देश राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “अभियान बसेरा-दो” की समीक्षा बैठक के दौरान दिया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों को चिन्हित करना है जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है। सरकार चाहती है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को कम से कम तीन डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने घर का निर्माण कर सकें और विभिन्न आवास योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। समीक्षा...

Bihar : फादर सेराफिम जॉन लाल के परिवार पर दुखों का पहाड़

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  बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त है। चर्च रोड स्थित सेंट मैरी स्कूल के निकट, डॉ. ओसवाल्ड आनंद के घर के सामने स्थित फादर सेराफिम जॉन लाल के पैतृक निवास पर लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और परिचित इस कठिन समय में परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। घर के वातावरण में गहरी उदासी और भावुकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। फादर सेराफिम जॉन लाल लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े रहे हैं। उनके परिवार की पहचान न केवल बेतिया बल्कि व्यापक ईसाई समाज में भी सम्मान के साथ की जाती रही है। ऐसे प्रतिष्ठित परिवार पर जब दुखों का पहाड़ टूटता है तो स्वाभाविक रूप से पूरा समाज उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। परिवार के सदस्य आयुष गौरव रोड्रिगेज ने भावुक स्वर में अपने संबंधों को याद करते हुए बताया कि फादर सेराफिम जॉन लाल उनके मामा हैं। उन्होंने परिवार की वंशावली का उल्लेख करते हुए बताया कि फादर के ...

India : विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की डगर आसान नहीं

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 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की डगर आसान नहीं, नौ में से सात टेस्ट जीतना लगभग अनिवार्य भारतीय क्रिकेट टीम के सामने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के वर्तमान चक्र में एक बड़ी चुनौती खड़ी दिखाई दे रही है। यदि टीम को फाइनल की दौड़ में मजबूती से बने रहना है तो आने वाले नौ टेस्ट मैचों में कम-से-कम सात जीत दर्ज करनी होगी। कागज पर यह लक्ष्य जितना सरल दिखाई देता है, मैदान पर उतना ही कठिन है। क्रिकेट सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन का खेल नहीं है, बल्कि इसमें परिस्थितियां, मौसम, फिटनेस, रणनीति और किस्मत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत को अपने आगामी कार्यक्रम में इंग्लैंड के खिलाफ पांच, श्रीलंका के खिलाफ दो और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलने हैं। इन तीनों टीमों की अपनी अलग ताकत और शैली है। इसलिए भारतीय टीम के लिए प्रत्येक श्रृंखला एक अलग परीक्षा साबित होने वाली है। सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला होगी। इंग्लैंड की धरती पर खेलना किसी भी एशियाई टीम के लिए आसान नहीं माना जाता। वहां की पिचों पर गेंद अधिक स्विंग और सीम करती है। बादलों से घिरे मौसम में बल्लेबाजों...