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India : दीवारें नहीं, पुल बनाइए: एशिया के लिए FABC का ऐतिहासिक संदेश

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जब दुनिया दीवारें ऊंची कर रही है, तब एशिया के कैथोलिक बिशपों का संदेश है—अगर भविष्य सुरक्षित करना है, तो पुल बनाइए, क्योंकि संवाद ही शांति का सबसे मजबूत रास्ता है। "तुम इससे भी बड़े कार्य देखोगे।" (यूहन्ना 1:50) यही बाइबिल वचन एशिया के कैथोलिक बिशपों के महासंघ (FABC) की 12वीं महासभा का केंद्रीय संदेश बना। 20 से 26 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित इस महासभा ने केवल कलीसिया के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया के समाज के लिए एक ऐसी दिशा प्रस्तुत की है, जिसकी प्रासंगिकता आज पहले से कहीं अधिक है। आज का एशिया अभूतपूर्व चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। युद्ध और हिंसा, धार्मिक ध्रुवीकरण, आर्थिक असमानता, जलवायु संकट, तेज़ तकनीकी बदलाव, पलायन और लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण समाज को भीतर से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में FABC ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कलीसिया का मिशन केवल अपने अनुयायियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे "पुल बनाने वाली कलीसिया" बनना होगा। यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया आज दीवारें खड़ी करने की राजनीति से जूझ रही है। जाति, धर्म, भा...

India : क्रिकेट में प्रतिभा की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती

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33 साल का इंतजार, हजारों घंटे की मेहनत और आखिरकार टीम इंडिया की टेस्ट कैप—सारांश जैन ने साबित कर दिया कि क्रिकेट में प्रतिभा की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। हर खिलाड़ी 19 या 21 साल की उम्र में टीम इंडिया नहीं पहुंचता। कुछ सपनों को 33 साल तक पसीने, संघर्ष और इंतजार की आग में तपना पड़ता है। सारांश जैन की कहानी यही बताती है कि क्रिकेट में सफलता का कोई तय कैलेंडर नहीं होता। प्रतिभा, धैर्य और निरंतर प्रदर्शन यदि साथ हों, तो मंजिल देर से सही, लेकिन मिलती जरूर है। भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से कम उम्र के खिलाड़ियों की सफलता सबसे बड़ी चर्चा का विषय रही है। 18-19 साल के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखते हैं और उन्हें भविष्य का सुपरस्टार घोषित कर दिया जाता है। यह बदलते दौर की वास्तविकता भी है, क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस, आक्रामकता और तेजी से प्रदर्शन करने की अपेक्षा बढ़ गई है। लेकिन इसी माहौल में जब 33 वर्षीय मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिलती है, तो यह केवल एक खिलाड़ी के चयन की खबर नहीं रहती, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सोच और व्यव...

India: जंतर-मंतर की गूंज: क्या विपक्षी एकजुटता से बदलेगी देश की राजनीति?

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जंतर-मंतर आंदोलन के बाद वाम दलों ने विपक्षी एकजुटता को नई दिशा देने का संकेत दिया है। सवाल यह है कि क्या यह राजनीतिक तालमेल शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों पर देशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले पाएगा, या फिर यह केवल बैठकों और बयानों तक सीमित रह जाएगा? नई दिल्ली में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) [CPI(ML)] के शीर्ष नेताओं की बैठक केवल एक औपचारिक राजनीतिक मुलाकात नहीं थी। यह उस बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत भी है, जिसमें छात्र-युवा आंदोलन, रोजगार, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। सीपीआई(एमएल) के केंद्रीय कार्यालय चारु भवन में आयोजित इस बैठक में तीनों दलों के नेताओं ने सबसे पहले कॉमरेड चारु मजूमदार की 54वीं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्षी एकजुटता पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जंतर-मंतर आंदोलन को मिली ऐतिहासिक सफलता को बताया गया। वाम दलो...

Bihar : NEET आंदोलन पर बिहार सरकार का बड़ा यू-टर्न

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  NEET आंदोलन पर बिहार सरकार का बड़ा यू-टर्न! एफआईआर वापस लेने का ऐलान, लेकिन क्या तेज प्रताप यादव को भी मिलेगा राहत? यही है सबसे बड़ा सवाल  NEET/UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बिहार में हुए छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग ने 27 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में घोषणा की कि आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर, परिवाद और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार के इस फैसले ने जहां आंदोलनकारियों को राहत की उम्मीद दी है, वहीं राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या गांधी मैदान थाना में दर्ज मामले में गिरफ्तार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेज प्रताप यादव को भी इस निर्णय का लाभ मिलेगा। यही प्रश्न अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस का केंद्र बन गया है। गृह विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, **26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक** NEET/UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने चार महत्वपूर्ण आश्वास...

Bihar : बेतिया की 'मदर टेरेसा' सिस्टर मेरी एलिस को सर्वधर्म श्रद्धांजलि

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कुछ लोग अपने जीवन से यह साबित कर जाते हैं कि धर्म की सबसे बड़ी पहचान पूजा नहीं, बल्कि पीड़ित इंसान के चेहरे पर लौटती मुस्कान है। बेतिया की 'मदर टेरेसा' कही जाने वाली सिस्टर मेरी एलिस ऐसी ही शख्सियत थीं, जिनकी विदाई पर हर धर्म, हर वर्ग और हर समुदाय एक साथ खड़ा दिखाई दिया। बेतिया की 'मदर टेरेसा' सिस्टर मेरी एलिस को सर्वधर्म श्रद्धांजलि, मानव सेवा के उनके मिशन को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प । समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान किसी पद, पुरस्कार या प्रचार से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में किए गए सकारात्मक बदलाव से बनती है। पश्चिम चंपारण के बेतिया क्षेत्र में सिस्टर मेरी एलिस ऐसा ही एक नाम थीं। गरीबों, असहायों, अनाथ बच्चों, कुष्ठ रोगियों और समाज के वंचित वर्गों की दशकों तक निस्वार्थ सेवा करने वाली सिस्टर मेरी एलिस को रविवार को बानुछापर स्थित "सेव" (SAVE) संस्था के प्रांगण में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। यह केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं था, बल्कि मानवता, सामाजिक सद्भाव और सेवा के मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का ...

Patna : दीघा मुसहरी: राजधानी के साये में मौत, बीमारी और उपेक्षा का सच

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  दीघा मुसहरी: राजधानी के साये में मौत, बीमारी और उपेक्षा का सच पटना को बिहार के विकास का चेहरा कहा जाता है। चौड़ी सड़कें, आधुनिक अस्पताल, सरकारी कार्यालय और तेजी से फैलता शहरी विस्तार राजधानी की नई पहचान बन चुके हैं। लेकिन इसी राजधानी की चमक से कुछ ही किलोमीटर दूर एक ऐसी बस्ती भी है, जहां आज भी गरीबी, बीमारी और उपेक्षा लोगों की नियति बनी हुई है। यह है **दीघा मुसहरी**, जहां टीबी, कुपोषण, अशिक्षा और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था वर्षों से लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच यह बस्ती आज भी उन सवालों का जवाब मांग रही है, जिनका संबंध सीधे जीवन और सम्मान से है। खबर बनी बदलाव की वजह दीघा मुसहरी की त्रासदी कोई नई कहानी नहीं है। वर्षों पहले इस बस्ती में टीबी से लगातार हो रही मौतों और गंभीर स्वास्थ्य संकट को प्रमुखता से समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री और पटना के जिलाधिकारी को ई-मेल के माध्यम से पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। खबर का असर हुआ। प्रशासन हरकत में आया और दीघा मुसहरी के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति मिली। यह पत्रकार...

Bihar : 14 अगस्त तक बिहार में चलेगा विशेष अभियान

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  दो हफ्ते की खांसी को न करें नजरअंदाज, यह टीबी का संकेत हो सकता है; 14 अगस्त तक बिहार में चलेगा विशेष अभियान   क्षय रोग (टीबी) आज भी भारत के सामने सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। आधुनिक चिकित्सा और सरकारी प्रयासों के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे कारगर तरीका है—समय पर पहचान, नियमित इलाज और समाज में जागरूकता। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बिहार में 14 अगस्त 2026 तक विशेष सक्रिय टीबी खोज (Active Case Finding) एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का लक्ष्य ऐसे लोगों की पहचान करना है, जो टीबी से संक्रमित होने के बावजूद अब तक जांच और उपचार की प्रक्रिया से बाहर हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रहे हैं। जिन लोगों में टीबी के शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें तुरंत जांच के लिए निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जा रहा है। सरकार का मानना है कि जितन...