संदेश

India : जब धर्म-शिक्षा संवाद बने, तभी चर्च सचमुच सहभागी बनेगा

चित्र
  जब धर्म-शिक्षा संवाद बने, तभी चर्च सचमुच सहभागी बनेगा क्या धर्म-शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित रहेगी, या वह लोगों को सुनने, समझने और साथ चलने की संस्कृति भी सिखाएगी? अहमदाबाद धर्मप्रांत में हुआ एक दिवसीय सेमिनार इसी सवाल का जवाब तलाशता दिखाई दिया। चर्च केवल उपदेश देने वाली संस्था नहीं, बल्कि साथ चलने वाला समुदाय है। यही Synodality की मूल भावना है—सुनना, सहभागिता और मिलकर आगे बढ़ना। इसी दृष्टि को धर्म-शिक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक रूप देने के लिए अहमदाबाद धर्मप्रांत ने 11 अगस्त 2026 को “Synodal Approaches in Catechetics and Introduction to YOUCAT” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया। इस आयोजन में 67 पुरोहितों, धर्मबहनों, धार्मिक समुदायों के सदस्यों और कैटेचिस्टों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन "फादर विजय मचाडो", CCBI Commission for Faith Formation के Executive Secretary, ने किया। लेकिन इस आयोजन की अहमियत केवल प्रतिभागियों की संख्या में नहीं, बल्कि उस सोच में है जिसे धर्म-शिक्षा के भविष्य के लिए सामने रखा गया। आज की पीढ़ी केवल यह सुनना नहीं चाहती कि उसे क्य...

Bihar : पल्ली परिषद की बैठक में क्या होता है? लोकधर्मियों को जानकारी क्यों नहीं मिलती?

चित्र
पल्ली परिषद की बैठक में क्या होता है? लोकधर्मियों को जानकारी क्यों नहीं मिलती? अगर पल्ली परिषद में पल्ली के विकास, कार्यक्रमों, समितियों और समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, तो यह सवाल स्वाभाविक है—जिस समुदाय के लिए फैसले लिए जाते हैं, क्या उस समुदाय को यह जानने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि बैठक में क्या चर्चा हुई और क्या निर्णय लिए गए? कैथोलिक चर्च की स्थानीय व्यवस्था में पल्ली परिषद (Parish Council) लोकधर्मियों की सहभागिता का एक महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है। इसका उद्देश्य केवल बैठक करना या कार्यक्रमों की सूची बनाना नहीं, बल्कि पल्ली के जीवन, मिशन, सामाजिक सेवा, धार्मिक गतिविधियों और विकास से जुड़े विषयों में लोकधर्मियों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल लगातार सामने आता है—पल्ली परिषद की बैठकों में आखिर क्या होता है और आम लोकधर्मियों को उसकी जानकारी कितनी मिलती है? यह सवाल किसी व्यक्ति, पुरोहित या किसी विशेष पल्ली को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं है। यह सवाल व्यवस्था की पारदर्शिता और समुदाय की सहभागिता से जुड़ा है। पल्ली...

India : 15 अगस्त से देशभर में चलेगा ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान

चित्र
 जेन अल्फा की स्कूली समस्याओं की जिम्मेदारी अब जेन जी के कंधों पर 15 अगस्त से देशभर में चलेगा ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, ग्रामीण सरकारी स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट आजादी के 80 साल बाद भी अगर गांव का बच्चा पानी, शौचालय और बिजली के लिए तरसे, तो सवाल सिर्फ स्कूल का नहीं—हमारी सामूहिक जवाबदेही का है। जेन अल्फा यानी आज की नई पीढ़ी के बच्चों की स्कूली समस्याओं को लेकर अब जेन जी के युवाओं ने जमीनी पहल की जिम्मेदारी उठाने का दावा किया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक **अभिजीत दीपके** ने स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त से ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रव्यापी **‘स्कूल ठीक करो’ अभियान** शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान का उद्देश्य केवल सरकारी स्कूलों की कमियां गिनाना नहीं, बल्कि गांव के लोगों को स्कूलों की निगरानी, सवाल पूछने और सुधार की प्रक्रिया से सीधे जोड़ना है। अभियान के तहत ग्रामीण सरकारी स्कूलों का **सोशल ऑडिट** करने और स्थानीय स्तर पर उनकी वास्तविक स्थिति सामने लाने की योजना है। साथ ही गांव के सरपंचों को **‘सरपंच चैलेंज’** दिया जाएगा, ताकि पंचायत ...

India : सवालों से भागती संसद या जवाबदेही से बचती सत्ता?

चित्र
 सवालों से भागती संसद या जवाबदेही से बचती सत्ता? राष्ट्रगीत का सम्मान जरूरी है, लेकिन क्या उसके बाद जनता के सवाल भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जा सकते हैं? 13 अगस्त 2026 का दिन भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए कई सवाल छोड़ गया। मानसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों का निर्धारित संस्करण प्रस्तुत किया गया और इसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता उस समय सदन में मौजूद थे। ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान होना चाहिए। यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा ऐतिहासिक गीत है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—**क्या राष्ट्रगीत के सम्मान के साथ-साथ संसद में उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब भी मिला?** यही लोकतंत्र की असली कसौटी है। संसद केवल रस्मों, नारों और औपचारिकताओं का मंच नहीं है। संसद वह जगह है जहां सरकार अपने फैसलों का हिसाब देती है, विपक्ष सवाल उठाता है और जनता की समस्याएं राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनती हैं। लोक...

India : NEET पर संसद में चर्चा का न्योता: टकराव से संवाद की ओर बढ़ता सरकार का कद

चित्र
 NEET पर संसद में चर्चा का न्योता: टकराव से संवाद की ओर बढ़ता सरकार का कदम NEET विवाद अब सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी का सवाल नहीं रहा, बल्कि लाखों छात्रों के भरोसे, संसद की जवाबदेही और सरकार-विपक्ष के बीच संवाद की परीक्षा भी बन गया है। अमित शाह का संसद में चर्चा का न्योता क्या इस टकराव को बातचीत में बदल पाएगा? NEET परीक्षा को लेकर देश में जारी विवाद अब सड़क से संसद तक पहुंच चुका है। छात्रों की चिंताओं, विपक्ष के सवालों और सरकार के जवाबों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार दिखाई देता रहा है। ऐसे समय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा पत्र एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में सामने आया है। शाह ने विपक्ष से आपसी सहमति बनाकर NEET परीक्षा और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर संसद में पर्याप्त समय देकर चर्चा कराने का आग्रह किया है। यह पहल ऐसे समय हुई है जब विपक्ष लगातार NEET को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है। सरकार का पक्ष है कि **लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026** पर संसद में चर्चा के दौरान विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिला था, ...

India : FCRA संशोधन विधेयक

चित्र
 FCRA संशोधन विधेयक: JPC के हवाले से टकराव का अंत नहीं, बहस के अगले चरण की शुरुआत FCRA संशोधन विधेयक का JPC के पास जाना सरकार की हार या विपक्ष की जीत नहीं, बल्कि विवादित प्रावधानों पर व्यापक संसदीय जांच का नया चरण है। अब असली सवाल यह है कि विदेशी धन की निगरानी और सामाजिक संस्थाओं की स्वायत्तता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का फैसला मौजूदा संसदीय गतिरोध को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। राजनीतिक नजरिए से इसे सरकार के पीछे हटने या विपक्ष के दबाव की जीत के रूप में पेश किया जा सकता है, लेकिन संसदीय प्रक्रिया की दृष्टि से तस्वीर अधिक जटिल है। विधेयक वापस नहीं लिया गया है। उसे व्यापक जांच, सुझावों और विचार-विमर्श के लिए समिति के पास भेजा गया है। यही कारण है कि JPC में विधेयक का जाना विवाद का अंत नहीं, बल्कि बहस के अगले चरण की शुरुआत है। विवाद की जड़ में क्या है? FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून का मूल उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी अंशदान को नियंत्रित करना, उसकी पारदर्शि...

chhattisgarh : पति की मौत के 42 दिन बाद आया ‘बधाई’ संदेश

चित्र
पति की मौत के 42 दिन बाद पत्नी के मोबाइल पर आया ‘स्वस्थ होकर घर लौटने’ का बधाई संदेश! आयुष्मान सिस्टम में मृत मरीज जीवित कैसे दिखा—डेटा एंट्री, अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल। छत्तीसगढ़ में एक परिवार को पति की मौत के 42 दिन बाद आयुष्मान योजना से मिला ऐसा संदेश, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के डिजिटल रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मृत व्यक्ति को ‘स्वस्थ होकर घर लौटने’ की सूचना कैसे मिली, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। रायपुर। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा, सुरक्षा और भरोसा देना है। लेकिन जब किसी सरकारी डिजिटल सिस्टम से ऐसी सूचना सामने आए, जो परिवार के वास्तविक अनुभव से बिल्कुल उलट हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। छत्तीसगढ़ में सामने आया एक मामला इसी वजह से चर्चा में है। एक महिला का दावा है कि उनके पति की अस्पताल में मृत्यु के करीब 42 दिन बाद आयुष्मान योजना से उनके मोबाइल पर ऐसा संदेश आया, जिसमें मरीज के अस्पताल से स्वस्थ होकर घर जाने की सूचना दी गई। मामला राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री आवास से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर रहने वाली स्टाफ नर्स ...