नागपुर की रात: जब चोरी नहीं, आस्था पर आघात हुआ
नागपुर की रात: जब चोरी नहीं, आस्था पर आघात हुआ नागपुर की धरती पर 14 जनवरी 2026 की वह रात केवल एक चोरी की घटना नहीं थी—वह सीधे आस्था के केंद्र पर किया गया आघात थी.बुट्टीबोरी स्थित सेंट क्लेरेट स्कूल के प्रार्थना कक्ष से परमपवित्र यूखारिस्त के टैबरनेकल का अवैध रूप से उठा लिया जाना न सिर्फ़ कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि समाज की नैतिक चेतना को भी कटघरे में खड़ा करता है.जब मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर की दीवारें असुरक्षित होने लगें, तब केवल ईंट-पत्थर नहीं टूटते—विश्वास की नींव हिलती है. यह घटना इसलिए भी अत्यंत गंभीर है क्योंकि यहाँ केवल संपत्ति की चोरी नहीं हुई, बल्कि उस पवित्र उपस्थिति का अपमान हुआ, जिसे कैथोलिक विश्वास में ईश्वर की जीवित उपस्थिति माना जाता है.भले ही प्रत्यक्ष अपवित्रता के प्रमाण न मिले हों, किंतु परमपवित्र यूखारिस्त का जबरन हटाया जाना स्वयं में एक गंभीर धार्मिक अपराध है—ऐसा अपराध, जिसकी पीड़ा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहती. इस संदर्भ में महाधर्माध्यक्ष एलियास गोंसाल्वेस का तात्कालिक पास्तोरल संदेश घटना की गंभीरता को और गहराई देता है. उनका संदेश स्पष्ट...