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India : न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की मांग

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वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था। देश के प्रधानमंत्री पंडित Jawaharlal Nehru थे और देश विकास, उद्योग, लोकतंत्र तथा सामाजिक न्याय की नई राह पर आगे बढ़ रहा था। उसी समय हिंदी सिनेमा भी समाज की भावनाओं को बड़े प्रभावशाली तरीके से व्यक्त कर रहा था। इसी दौर में आई थी प्रसिद्ध फिल्म Gunga Jumna, जिसका गीत “ढूंढो ढूंढो रे साजना” आज भी लोगों की जुबान पर है। यह गीत प्रेम और तलाश की भावनाओं को दर्शाता था, लेकिन आज के समय में यही पंक्ति एक अलग दर्द और विडंबना का प्रतीक बन गई है। आज देश के लाखों बुजुर्ग ईपीएफओ की न्यूनतम पेंशन व्यवस्था से जुड़े संघर्ष में मानो यही गीत गुनगुना रहे हैं — “ढूंढो ढूंढो रे साजना।” फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे अपने जीवनसाथी या प्रेम को नहीं, बल्कि 2014 से पहले के पुराने कागजात, वेतन रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र, पीएफ खाते की जानकारियां और सेवा प्रमाणपत्र ढूंढने को मजबूर हैं। कई पेंशनधारियों का कहना है कि ईपीएफओ द्वारा उच्च पेंशन या न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की ...

India : एक संपूर्ण पुरोहित का दायित्व निभाकर प्रभु के घर जाने वाले पुरोहित बन गए

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  डॉ. फादर पीटर लूर्डेस: एक महान दूरदर्शी, शिक्षाविद् और मनोवैज्ञानिक का जीवन सफर एक प्रख्यात सेल्सियन पुरोहित, मनोवैज्ञानिक, असाधारण शिक्षाविद् और सेल्सियन कॉलेज सोनादा (Salesian College Sonada) के पूर्व प्राचार्य डॉ. फादर पीटर लूर्डेस का 28 मई 2026 को कोलकाता के पार्क क्लिनिक अस्पताल में निधन हो गया। वह 101 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल सेल्सियन समुदाय में बल्कि शिक्षा, मनोविज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में भी एक युग का अंत हो गया है। उनका संपूर्ण जीवन ज्ञान की खोज, आध्यात्मिक साधना और मानवता की निःस्वार्थ सेवा को समर्पित रहा। अंतिम विदाई और मानवता के लिए आखिरी उपहार फादर लूर्डेस के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए कोलकाता के नीतिका चैपल (Nitika Chapel) में एक विदाई प्रार्थना सभा (Requiem Mass) का आयोजन किया गया। यह वही स्थान था जहाँ फादर लूर्डेस ने वर्ष 1989 से अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। इस प्रार्थना सभा की अध्यक्षता सेल्सियन प्रोविंशियल फादर सुनील केरकेट्टा ने की। इस भावुक क्षण में बड़ी संख्या में सेल्सियन बंधु, पादरी, धार्मिक नेता, उनके पूर्व छात्र और उनके...

World : मई माह और माता मरियम के आनंदमय भेद

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  मई माह और माता मरियम के आनंदमय भेद ईसाई माता कलीसिया अर्थात कैथोलिक चर्च में मई का महीना अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है, क्योंकि यह महीना पूर्ण रूप से धन्य कुँवारी माता मरियम को समर्पित होता है। संसार भर के कैथोलिक विश्वासी इस महीने को “मरियम माह” के रूप में मनाते हैं। इस दौरान गिरजाघरों, परिवारों और प्रार्थना समूहों में माता मरियम के सम्मान में विशेष प्रार्थनाएँ, भजन, जुलूस और रोज़री माला की विनतियाँ की जाती हैं। मई माह विश्वासियों को यह याद दिलाता है कि जैसे माता मरियम ने अपने जीवन को पूर्ण रूप से परमेश्वर की इच्छा के अनुसार समर्पित किया, वैसे ही प्रत्येक विश्वासी को भी विश्वास, प्रेम, आज्ञाकारिता और शांति के मार्ग पर चलना चाहिए। माता मरियम को शांति की रानी कहा जाता है। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण परमेश्वर के प्रति विश्वास और समर्पण से भरा हुआ था। यही कारण है कि कलीसिया मई महीने में विशेष रूप से रोज़री माला के माध्यम से माता मरियम के जीवन की घटनाओं पर मनन करने के लिए प्रेरित करती है। रोज़री केवल शब्दों की प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह येसु और मरियम के जीवन के रहस्यों पर ध्यान...

World : “माउंट एवरेस्ट दिवस” आज

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इतिहास, प्रेरणा और जागरूकता का विशेष दिवस 29 मई का दिन विश्व इतिहास, खेल, विज्ञान, समाज और मानवता के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को अपने भीतर समेटे हुए है। यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा, संघर्ष, उपलब्धि और जागरूकता का प्रतीक माना जाता है। भारत सहित विश्व के कई देशों में 29 मई को अलग-अलग घटनाओं और महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों के साथ याद किया जाता है। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने और भविष्य के लिए सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। सबसे पहले यदि खेल जगत की बात करें तो 29 मई को “माउंट एवरेस्ट दिवस” के रूप में भी विशेष महत्व प्राप्त है। वर्ष 1953 में इसी दिन न्यूजीलैंड के पर्वतारोही Edmund Hillary और नेपाल के प्रसिद्ध शेरपा Tenzing Norgay ने पहली बार विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक कदम रखा था। यह उपलब्धि केवल दो व्यक्तियों की जीत नहीं थी, बल्कि पूरे मानव साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की विजय थी। उस समय पर्वतारोहण अत्यंत कठिन और जोखिमभरा माना जाता था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद एवरेस्ट पर विजय प्राप्त कर...

India : भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद गौरवपूर्ण खबर

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बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के होनहार छात्र सांचित पटेल  भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया के होनहार छात्र सांचित पटेल ने इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड (IJSO) 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर पूरे बिहार का नाम रोशन कर दिया है। यह उपलब्धि केवल सांचित और उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है। इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों की वैज्ञानिक क्षमता, तार्किक सोच और समस्या समाधान कौशल की कठिन परीक्षा होती है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए छात्रों को कई स्तरों की कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पूरे भारत से लाखों छात्र इस प्रतियोगिता के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन अंततः केवल छह सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन भारतीय टीम के लिए किया जाता है। ऐसे में सांचित पटेल का चयन यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे स...

India : वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा

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गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A गोवा इस समय सिर्फ एक पर्यटन स्थल या समुद्री तटों के लिए ही चर्चा में नहीं है, बल्कि वहाँ का पर्यावरण, भूमि और विकास नीति एक बड़े जनआंदोलन का कारण बन चुकी है। विवाद का केंद्र है गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A। यह धारा इतनी विवादित हो चुकी है कि सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी, किसान, स्थानीय निवासी और चर्च से जुड़े लोग तक इसके विरोध में सड़क पर उतर आए हैं। आंदोलन के दौरान नेतृत्व कर रहे फादर बोलमैक्स का निधन भी हो गया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन थमा नहीं है। लोगों की मांग आज भी स्पष्ट है—धारा 39A को पूरी तरह समाप्त किया जाए। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि धारा 39A आखिर है क्या। वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा। इस संशोधन के तहत “मुख्य नगर नियोजक” (Chief Town Planner) को अत्यधिक अधिकार दे दिए गए। अब वे किसी भी जमीन के टुकड़े का “लैंड यूज़” यानी उपयोग बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई जमीन कृषि क्षे...

World :दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला पवित्र पर्व

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आज 28 मई को पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला पवित्र पर्व ईद-उल-अजहा यानी बकरीद आस्था, त्याग, समर्पण और इंसानियत का महान संदेश लेकर आया है। यह इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में मुस्लिम भाई-बहन इस पर्व को पूरे उत्साह, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के साथ मना रहे हैं। बकरीद केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह त्याग, बलिदान, करुणा और मानवता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग और सेवा से सिद्ध होती है। इस दिन लोग अल्लाह के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं तथा समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। इस पर्व का संबंध हजरत इब्राहिम और उनके पुत्र हजरत इस्माइल की महान कुर्बानी से जुड़ा हुआ है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनके सबसे प्रिय पुत्र की कुर्बानी मांगी। हजरत इब्राहिम ने बिना किसी संकोच के अल्लाह की आज्ञा का पालन करने का निश्चय किया। जब वे अपने पुत्र की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब अल्लाह ने उनकी...