India : न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की मांग
वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था। देश के प्रधानमंत्री पंडित Jawaharlal Nehru थे और देश विकास, उद्योग, लोकतंत्र तथा सामाजिक न्याय की नई राह पर आगे बढ़ रहा था। उसी समय हिंदी सिनेमा भी समाज की भावनाओं को बड़े प्रभावशाली तरीके से व्यक्त कर रहा था। इसी दौर में आई थी प्रसिद्ध फिल्म Gunga Jumna, जिसका गीत “ढूंढो ढूंढो रे साजना” आज भी लोगों की जुबान पर है। यह गीत प्रेम और तलाश की भावनाओं को दर्शाता था, लेकिन आज के समय में यही पंक्ति एक अलग दर्द और विडंबना का प्रतीक बन गई है। आज देश के लाखों बुजुर्ग ईपीएफओ की न्यूनतम पेंशन व्यवस्था से जुड़े संघर्ष में मानो यही गीत गुनगुना रहे हैं — “ढूंढो ढूंढो रे साजना।” फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे अपने जीवनसाथी या प्रेम को नहीं, बल्कि 2014 से पहले के पुराने कागजात, वेतन रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र, पीएफ खाते की जानकारियां और सेवा प्रमाणपत्र ढूंढने को मजबूर हैं। कई पेंशनधारियों का कहना है कि ईपीएफओ द्वारा उच्च पेंशन या न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की ...