समान नागरिक संहिता पर लोकतांत्रिक जन पहल का स्टैंड
समान नागरिक संहिता पर लोकतांत्रिक जन पहल का स्टैंड लोकतांत्रिक जन पहल का मानना है कि समान नागरिक संहिता न तो जरूरी है और न अपेक्षित। इसलिए केन्द्र में काबिज मौजूदा भाजपा सरकार जिस तरीके से इस मामले को लाना चाह रही है उससे स्पष्ट है कि उसकी मंशा इस बहाने अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को नीचा दिखाते हुए निशाना बनाना है और आगामी लोकसभा चुनाव में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर ख़ासकर मुसलमानों के खिलाफ घृणा और नफ़रत फैला कर हिंन्दु वोट बैंक बनाना है। लोकतांत्रिक जन पहल भाजपा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस रवैये की घोर निंदा और विरोध करता है। हमारा संविधान और लोकतंत्र पर्सनल लॉ की इजाजत देता है। इसलिए ये कानून कहीं से भी संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ नहीं है।हमारे संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को नीति निर्देशक तत्व के तहत रखना उचित समझा। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वे इस मुद्दे पर संवेदनशील थे और सत्ता के जबरन हस्तक्षेप के खिलाफ थे। समान नागरिक संहिता का विरोध केवल मुस्लिम समाज के इदारे ही नहीं कर रहे हैं बल्कि आदिवासी, क्रिश्चियन और प्रगतिशील समूहों से जु...