संदेश

जेडीयू, बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा

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  पटना .बिहार की राजनीतिक दिशा एक बार फिर स्पष्ट होती दिखाई दे रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल ने आकार ले लिया है और विभागों का ब्योरा यह संकेत देता है कि सत्ता-साझेदारी का संतुलन, अनुभव का उपयोग और राजनीतिक संदेश—तीनों को केंद्र में रखा गया है.जेडीयू, बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा आने वाले दिनों की प्रशासनिक प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करता है.       सबसे पहले स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय और निगरानी जैसे अहम विभाग अपने पास रखकर यह साफ कर दिया है कि शासन की धुरी अभी भी उन्हीं के हाथ में है. इसके साथ ही निर्वाचन और वे सभी विभाग जो किसी अन्य को आवंटित नहीं हैं, यह दिखाता है कि वे प्रशासनिक नियंत्रण को केंद्रीकृत रखना चाहते हैं.     दो उपमुख्यमंत्रियों—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—को सौंपे गए विभाग स्पष्ट रूप से बीजेपी की प्राथमिकता और ताकत दोनों को इंगित करते हैं.सम्राट चौधरी को वित्त और वाणिज्य-कर जैसे निर्णायक आर्थिक विभाग सौंपे गए हैं, जो राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक प्रब...

बिहार का सत्ता-चक्र: नीतीश कुमार का दसवां अवतार

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  बिहार का सत्ता-चक्र: नीतीश कुमार का दसवां अवतार पटना. लोक नायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की धुंधली छाया में जन्मे बिहार के राजनीतिक परिदृश्य ने एक बार फिर अपनी चक्रीयता का प्रमाण दिया है. वह दौर जब लालू प्रसाद यादव अधिवक्ता की वकालत छोड़कर जननायक बने, नीतीश कुमार इंजीनियरिंग की डिग्री को सत्ता की कुर्सी पर चढ़ने का हुनर सीख चुके थे. आज, पटना इंजीनियरिंग कॉलेज के उत्तीर्ण छात्र नीतीश कुमार न केवल 'कुर्सी बचाने के इंजीनियर' सिद्ध हुए हैं, बल्कि बिहार के इतिहास में सबसे अधिक दफा शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में अमर हो चुके हैं.      2025 विधानसभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत के साथ ही नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं—एक ऐसा क्षण जो बिहार की राजनीति की अस्थिरता और स्थिरता के द्वंद्व को उजागर करता है.बिहार में मुख्यमंत्री पद की शुरुआत स्वतंत्र भारत के नवजात लोकतंत्र के साथ ही हुई. 1947 में, जब भारत गणराज्य बना, तो बिहार का पहला मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा बने. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिग्गज नेता थे औ...

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी दृढ़ इच्छाशक्ति की विश्व की नेता थी: राजेश राम

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 *कांग्रेस ने मनाया पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी की 108 वीं जयंती *पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी दृढ़ इच्छाशक्ति की विश्व की नेता थी: राजेश राम   पटना .देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती  आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनाई गई.कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने की.   इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि स्व. इंदिरा गांधी देश की ही नहीं विश्व की नेता थी और उनके मनोबल ने देश को वैश्विक स्तर पर मजबूत देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया था. 1971 के युद्ध में उन्होंने विश्व का भूगोल बदल दिया और पाकिस्तान के एक लाख सैनिकों को आत्मसमर्पण करने को मजबूर कर दिया. इतिहास में इससे बड़ा कोई सैन्य आत्मसमर्पण नहीं दर्ज है. 1971 के बाद स्व. गांधी ने भारतीय सैन्य ताकत को विश्व स्तर का बना दी. देश के नवनिर्माण में आयरन लेडी के नाम से प्रसिद्ध देश की इकलौते महिला प्रधानमंत्री स्व. गांधी की अहम भूमिका रही है.आज लोग आतंकवाद और राष्ट्र के अखंडता के लिए लड़ने की बात करते हैं जबकि स्व. इंदिरा ...

सत्ता सिर्फ जीत का नाम नहीं

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  पटना .बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का परिवार सिर्फ एक राजनीतिक घराना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की उस लंबी लड़ाई का प्रतीक रहा है जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया. परंतु हालिया चुनावी झटका इस विशाल परिवार में गहरी दरारें उभारता दिख रहा है—ऐसी दरारें, जिनके संकेत वर्षों से भीतर ही भीतर पनप रहे थे. लालू प्रसाद और राबड़ी देवी—यह जोड़ी बिहार की राजनीति में ‘कठोर निर्णय’ और ‘मां-की ममता’ का असाधारण संगम मानी जाती है. एक ओर लालू की जन-नेतृत्व क्षमता, दूसरी ओर राबड़ी देवी की सादगी पर आधारित राजनीतिक उपस्थिति—इन दोनों ने मिलकर बिहार में एक वैकल्पिक राजनीति धारा तैयार की.परंतु नेतृत्व जब अगली पीढ़ी की ओर बढ़ा, तो परिवार की विविधता एकता पर भारी पड़ने लगीं. पुत्रियाँ: त्याग, मौन और विद्रोह की तीन छवियाँ मीसा भारती हमेशा पार्टी की वैचारिक धुरी के रूप में सामने आईं, लेकिन लोकसभा में दो लगातार हारों ने उनके राजनीतिक ग्राफ को धूमिल किया.रोहिणी आचार्य—वही बेटी जिन्होंने पिता को किडनी देकर देशभर में मिसाल कायम की—अब राजनीति से दूर जाने का फैसला कर चुकी हैं। यह निर्णय सिर्फ व्य...

लोगों के सुख-दुख में शरीक रहे और इसी की बदौलत तीसरे प्रयास में जनता ने उन्हें विधायक बनाकर सम्मान दिया

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 लोगों के सुख-दुख में शरीक रहे और इसी की बदौलत तीसरे प्रयास में जनता ने उन्हें विधायक बनाकर सम्मान दिया

रोमन कैथोलिक चर्च चुहड़ी पल्ली में सालाना यूखरिस्तिय यात्रा निकाली गई

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रोमन कैथोलिक चर्च चुहड़ी पल्ली में सालाना यूखरिस्तिय  यात्रा निकाली गई चुहड़ी .चुहड़ी की शांत धरती आज प्रभु-भक्ति के स्वर से गूंज उठी. बेतिया धर्मप्रांत के अंतर्गत स्थित आवर लेडी असम्प्शन चर्च से निकली वार्षिक यूखरिस्तिय यात्रा ने पूरे क्रिश्चियन क्वार्टर को आस्था के उजाले से आलोकित कर दिया। येसु ख्रीस्त के सम्मान में उठते स्वर— “राजा तेरा राज्य आवे”—मानो आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँच रहे थे और हर सुनने वाले हृदय में आध्यात्मिक अनुराग जगाते जा रहे थे. इस पवित्र यात्रा की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस तथा विकार जनरल फादर फिनटन ने श्रद्धालुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कदम बढ़ाए। उनके साथ अनेक पुरोहितों, सिस्टरों तथा बेतिया, दुसैया, चखनी, चनपटिया, रामनगर, सिरिसिया बगहा, सिवान, छपरा, गोपालगंज और नरकटियागंज से आए ईसाई समुदाय के सैकड़ों बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. पल्ली पुरोहित फादर हरमन ने यात्रा में शामिल प्रत्येक श्रद्धालु के प्रति आभार व्यक्त किया और ईश्वर के प्रेम, एकता एवं त्याग के संदेश को जीवन में आत्मसात करने का आग्...

कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था

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  पटना. कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था — कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) — अब अपने लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक राहत भरी खबर लाने की तैयारी में है. नवंबर में प्रस्तावित सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में पेंशन बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है.वर्तमान में EPFO के लगभग 75 लाख पेंशनभोगी हैं, जिनमें अधिकांश को न्यूनतम ₹1000 मासिक पेंशन मिल रही है — एक ऐसी राशि जो मौजूदा महंगाई दर और जीवन-यापन की लागत के सामने लगभग प्रतीकात्मक ही है। सरकार और संगठन अब इस रकम को ₹2000 या ₹2500 तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। यह सुधार यदि स्वीकृत होता है, तो इसे 1 जनवरी 2026 या 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है. वित्तीय ढांचा और सरकार की भूमिका EPFO की पेंशन योजना का ढांचा इस तरह बनाया गया है कि कर्मचारी और नियोक्ता — दोनों अपनी ओर से 12-12 प्रतिशत योगदान करते हैं। इसमें से 8.33 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है, जिससे पेंशन फंड बनता है. सरकार इस फंड के संचालन में सहयोगी भूमिका निभाती है और समय-समय पर अनुदान (subsidy) क...