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कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला

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कांग्रेस का विरोध मार्च, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर केंद्र सरकार पर हमला पटना.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने के आरोप लगाते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में आयकर गोलंबर से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला. यह प्रदर्शन नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद आयोजित किया गया.       विरोध मार्च को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है.उन्होंने आरोप लगाया कि मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर दोनों नेताओं को बेवजह परेशान किया गया और यह पूरा मामला केवल गांधी परिवार को बदनाम करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह सत्ताधारी भाजपा सरकार की राजनीतिक बदले की भावना का परिणाम है.       राजेश राम ने सुप्र...

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26

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  सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 पटना . भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे रोमांचक टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) के 2025-26 संस्करण में इस बार नया प्रयोग देखने को मिला है। पारंपरिक नॉकआउट स्टेज की जगह सुपर लीग फॉर्मेट अपनाया गया, जिसमें ग्रुप स्टेज की टॉप-8 टीमें दो ग्रुप्स में बंटकर राउंड-रॉबिन खेलती हैं और दोनों ग्रुप के विजेता सीधे फाइनल में पहुंचे हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 18 दिसंबर को पुणे के MCA स्टेडियम में खेला जाएगा। प्रश्न है ग्रुप ए से फाइनल में पहुंचने वाली टीम का। एलीट ग्रुप स्टेज में चार ग्रुप (A, B, C, D) थे, जिनमें से हर ग्रुप की टॉप-2 टीमें सुपर लीग के लिए क्वालीफाई की.ग्रुप ए से मुंबई और आंध्र प्रदेश ने सुपर लीग में जगह बनाई। मुंबई ने ग्रुप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया, जबकि आंध्र प्रदेश ने दूसरे स्थान पर रहकर क्वालीफाई किया. सुपर लीग में ये आठ टीमें थीं: मुंबई, आंध्र प्रदेश (ग्रुप A से), हैदराबाद, मध्य प्रदेश (ग्रुप B से), हरियाणा, राजस्थान (ग्रुप C से), झारखंड, पंजाब (ग्रुप D से)। इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया: सुपर लीग ग्रुप A: मध्य प्रदेश, ...

जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट

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  पटना.उत्तरी भारत के एक छोटे से गाँव में 45 वर्षीय शीला देवी की कहानी आज भी सवालों से भरे हमारे समय का आईना है. मसीही विश्वास का पालन करते हुए अपने घर में एक छोटी-सी मंडली चलाने की वजह से उन्हें लगभग तीन महीने जेल में रहना पड़ा.आरोप था—धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन.बीमारी के चलते ज़मानत मिली, पर जेल के दिनों ने उनके शरीर पर गहरी चोट छोड़ी; बाद में कैंसर का पता चला. पिछले दो वर्षों से शीला अपने घर में प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर रही थीं. यह पहल उनके लिए सेवा थी, पर गाँव के कुछ लोगों के लिए असहजता. विरोध बढ़ा, शिकायत हुई और 20 जुलाई की रविवार आराधना के दौरान पुलिस ने घर में प्रवेश कर पूछताछ की. बाइबिल, क्रॉस, भजन की किताबें, दीवार पर टंगा दस आज्ञाओं का पोस्टर, एम्प्लीफायर—सब ज़ब्त कर लिया गया. यहाँ तक कि उनका मोबाइल फ़ोन भी, जो उनके लिए परमेश्वर के वचन से जुड़े रहने का माध्यम था. शीला का कहना है कि वे सभाएँ बंद नहीं कर सकती थीं. उनका विश्वास था कि ये मुलाक़ातें लोगों को शांति और चंगाई देती हैं—बीमारी और अकेलेपन के बीच आशा का सहारा बनती हैं. इसी दृढ़ता की कीमत उन्हें कैद के रूप में चु...

शहादत की अमर विरासत

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 संसद पर हमला: शहादत की अमर विरासत नई दिल्ली.13 दिसंबर 2001 का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक अध्याय है. इसी दिन आतंकवादियों ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था—संसद—पर हमला कर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का दुस्साहस किया। किंतु उनके मंसूबों को हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विफल कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि राष्ट्र आज भी उन शहीदों के बलिदान को एकजुट होकर नमन करता है.यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस कर्तव्यबोध की पुनः स्मृति है, जिसने देश को एक अडिग सुरक्षा कवच प्रदान किया. संसद की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों का साहस, सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठा आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है.उनका बलिदान यह संदेश देता है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संकल्प और त्याग से होती है. आज जब आतंकवाद नए-नए रूपों में वैश्विक चुनौती बना हुआ है, तब 13 दिसंबर 2001 के शहीद हमें सतत स...

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया

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  पटना. पटना नगर निगम का वार्ड संख्या–1, जो राजधानी के विकास की चमक के बीच स्थित है, आज भी सामाजिक हाशिए पर खड़े समुदायों की उपेक्षा का जीवंत उदाहरण बन गया है.इस वार्ड की निर्वाचित प्रतिनिधि छठिया देवी स्वयं महादलित मुसहर समुदाय से आती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि उन्हीं की बिरादरी आज सबसे अधिक उपेक्षा और अव्यवस्था का दंश झेल रही है.दीघा मुसहरी के लोग समस्याओं के ऐसे मकड़जाल में उलझे हैं, वहां से निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं देता.      दीघा मुसहरी में कभी सरकारी स्कूल की व्यवस्था थी. भवन के अभाव में शिक्षक केदार मांझी की झोपड़ी में पढ़ाने को विवश थे, जहां पास ही सूअरों का बखौर था. यह दृश्य ही बताता है कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत को किस हद तक नजरअंदाज किया गया. वर्षों बाद सड़क किनारे स्कूल भवन बना, जिसने बच्चों और अभिभावकों में उम्मीद जगाई. लेकिन जैसे ही दीघा–पटना रेलखंड पर अटल पथ निर्माण की योजना आई, स्कूल भवन को विकास की भेंट चढ़ा दिया गया.सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शिक्षा का वह एकमात्र ठिकाना मिट्टी में मिला दिया गया.     इसी क्रम में वार्ड पार्षद...

पश्चिम चंपारण के नये जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह

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  पश्चिम चंपारण के नये जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने किया पदभार ग्रहण.जिले के विकास के लिए टीम भावना अनिवार्य ताकि सरकार की प्राथमिकताएं पूरी शिद्दत के साथ धरातल पर उतारी जा सके.सभी योजनाओं और परियोजनाओं को पूरी तत्परता और तेज गति से लक्ष्य तक पहुंचाया जाएगा..... बेतिया. पश्चिम चम्पारण जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी का नया अध्याय आज गुरुवार को शुरू हो गया, जब भा.प्र.से. के अधिकारी श्री तरनजोत सिंह ने समाहरणालय बेतिया पहुंचकर विधिवत रूप से जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण किया.पदभार ग्रहण के बाद उन्होंने जिले के सभी प्रमुख पदाधिकारियों से एक-एक कर परिचय प्राप्त किया और जिले में चल रही योजनाओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों की स्थिति पर प्रारंभिक जानकारी ली.     उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में वे प्रत्येक विभाग की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन कर जिला प्रशासन की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर देंगे.जिला पदाधिकारी ने पदभार ग्रहण करते ही जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं के बारे में दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज...

कैथोलिक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात

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  पटना.बिहार की राजनीति में 8 दिसंबर 2025 का दिन केवल एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं था, बल्कि यह उस विश्वास और संवाद की परंपरा का प्रतीक था जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था अपने भीतर संजोए रहती है. पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा के नेतृत्व में कैथोलिक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उन्हें रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी—एक उपलब्धि जिसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (लंदन) ने भी दर्ज कर इतिहास का हिस्सा बना दिया है.      इस प्रतिनिधिमंडल में विकार जनरल फादर जेम्स जॉर्ज, एक्सलरीज यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मार्टिन पोरस, पटना वीमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. एम. रश्मि ए.सी., तथा अन्य प्रमुख शिक्षाविद और सामाजिक नेता शामिल थे। स्पष्ट है कि यह मुलाकात केवल राजनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं थी, बल्कि बिहार के सामाजिक ताने-बाने और सामुदायिक विश्वास को मजबूती देने की एक पहल भी थी.      नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल को लेकर आम राय यही रही है कि अल्पसंख्यक समुदाय—विशेषकर ईसाई—खुद को सुरक्षित और संरक्षित महसूस करते है...