आज की सबसे बड़ी सच्चाई: महंगाई नहीं बढ़ी, आम आदमी की सांसें छोटी हुई हैं
आज की सबसे बड़ी सच्चाई: महंगाई नहीं बढ़ी, आम आदमी की सांसें छोटी हुई हैं आज जब सुबह एक आम नागरिक घर से निकलता है, तो उसके हाथ में सिर्फ चाबी और मोबाइल नहीं होता—उसके कंधों पर महंगाई का बोझ भी लदा होता है। दूध, सब्ज़ी, दाल, गैस, दवा, शिक्षा—ऐसा शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो, जहां दाम चुपचाप न बढ़े हों. सवाल यह नहीं है कि महंगाई बढ़ रही है या नहीं, सवाल यह है कि क्या आम आदमी की आमदनी भी उसी रफ्तार से बढ़ी है?यही आज का सबसे बड़ा मुद्दा है। यही आज की सबसे कड़वी सच्चाई है. आंकड़े कहते हैं “कंट्रोल में”, ज़िंदगी कहती है “मुश्किल में” सरकारी आंकड़े अक्सर बताते हैं कि महंगाई दर “काबू में” हैलेकिन किचन का बजट कुछ और कहानी कहता है. सब्ज़ी मंडी, मेडिकल स्टोर और स्कूल की फीस—इन तीन जगहों पर खड़े होकर कोई भी समझ सकता है कि महंगाई सिर्फ प्रतिशत नहीं, अनुभव है.आज की महंगाई सबसे ज्यादा असर डाल रही है उस वर्ग पर, जो न गरीब है और न अमीर—मिडिल क्लास. न उसे सब्सिडी पूरी मिलती है, न उसकी आय इतनी है कि बढ़ते खर्च को नज़रअंदाज़ कर सके. वेतन वहीं का वहीं, खर्च आसमान पर नौकरीपेशा वर्ग की सैलरी साल में एक बा...