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मानव जीवन विकास समिति की रजत जयंती

  मानव जीवन विकास समिति की रजत जयंती कटनी . सामाजिक परिवर्तन की ढाई दशकों की गूंज मानव जीवन विकास समिति (MJVS) ने अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए—यह सिर्फ एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की जिजीविषा, श्रम और विश्वास का उत्सव है, जिनके जीवन में इस समिति ने उम्मीद की रोशनी जगाई है. रजत जयंती समारोह का यह भव्य आयोजन प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक श्री राजगोपाल पी. वी. की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसने इस ऐतिहासिक क्षण को और भी गरिमामय बना दिया।समिति के सचिव निर्भय सिंह ने जब 250 से अधिक गाँवों में 25,000 परिवारों के साथ आजीविका निर्माण के निरंतर प्रयासों का विवरण साझा किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि MJVS का सफर सिर्फ सामाजिक सेवा का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का रहा है.    समिति के अध्यक्ष श्री बद्रीनारायण नरडिया ने गर्व के साथ कहा कि इन 25 वर्षों में संगठन ने आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी सार्थक पहचान स्थापित की है. यह यात्रा कठिन जरूर थी, लेकिन साथियों की प्रतिबद्धता और मार्गदर्शकों के स्नेह ने इसे संभव बनाया.समारोह के ...

'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना'

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  पटना . मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1, अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' से 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की 10 लाख लाभुक महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये प्रति लाभुक की दर से 1000 करोड़ रुपये की राशि अंतरण किया. इसके पूर्व 1 करोड़ 46 लाख लाभुक महिलाओं के खाते में 14 हजार 600 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है.     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज 'महिला रोजगार योजना' के तहत अपनी पसंद का रोजगार करने के लिए 10 लाख महिलाओं को दस-दस हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है. कुल मिलाकर 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को इसका फायदा मिल जायेगा. इस योजना में दी गयी सहायता से काफी संख्या में महिलाओं ने अपनी पसंद का रोजगार शुरू किया है. जो महिलाएं अपना रोजगार अच्छे से करेंगी, उन्हें आगे 2 लाख रुपये तक की सहायता दी जायेगी.     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप सभी महिलाओं को इस 10 हजार रुपये की राशि से अपना काम शुरू करने में काफी मदद मिलेगी. इससे आपका परिवार खुशहाल होगा तथा बिहार का और तेजी से विकास होगा. आज के कार्यक्रम में तीनों लाभार्थियों ने अपने-अपने अनुभव...

नागरिक चेतना के पुनर्जागरण का अवसर

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  पटना. 26 नवंबर—भारतीय लोकतंत्र का वह दिन, जब देश ने अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय की.1949 में इसी तारीख को संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकार किया था, और एक दशक पहले सरकार ने इसे संविधान दिवस के रूप में स्थापित कर नई पीढ़ी को संविधान की आत्मा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया.यह दिन केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि नागरिक चेतना के पुनर्जागरण का अवसर है.       हमारा संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत ग्रंथ है. यही वह शक्ति है जिसने सामाजिक पृष्ठभूमि को पार करते हुए एक साधारण परिवार के व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर दिया.लोकतंत्र की यह समावेशी क्षमता तब और भी स्पष्ट होती है जब देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाला व्यक्ति संसद की सीढ़ियों पर नतमस्तक होकर संस्थाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है—यह दृश्य संविधान की आत्मा का ही विस्तार है.      संविधान दिवस पर देश उन महान विभूतियों को नमन करता है, जिन्होंने संविधान के निर्माण में अपनी बुद्धि, दूरदृष्टि और तपस्या समर्पित की.डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ...

गुवाहाटी टेस्ट में बुमराह ने अपने टेस्ट करियर की 10,000वीं गेंद .....

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  पटना.भारतीय क्रिकेट में जसप्रीत बुमराह का नाम अब सिर्फ रफ्तार और सटीकता का पर्याय नहीं रहा, बल्कि निरंतरता और कसावट भरे प्रदर्शन का मानदंड भी बन चुका है. गुवाहाटी टेस्ट में बुमराह ने अपने टेस्ट करियर की 10,000वीं गेंद फेंक कर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जो किसी भी तेज गेंदबाज के लिए धैर्य, फिटनेस और उच्च स्तर की निरंतरता का प्रमाण होता है. दिलचस्प बात यह है कि बुमराह की पहली टेस्ट गेंद एबी डिविलियर्स को थी और 10,000वीं गेंद एडन मार्क्रम को—दोनों ही दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज। यह संयोग भी उनके करियर के उस दायरे को रेखांकित करता है, जिसमें उन्होंने अपना सबसे बेहतरीन क्रिकेट उन्हीं टीमों के खिलाफ खेला, जो तकनीकी रूप से विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत इकाइयों में रहती हैं. भारत की ओर से तेज गेंदबाजी में यह मुकाम हासिल करने वाले बुमराह छठे भारतीय तेज गेंदबाज हैं, जबकि कुल मिलाकर वे 17वें भारतीय गेंदबाज और दुनिया के 130वें गेंदबाज बने हैं जिन्होंने टेस्ट में 10,000 से अधिक गेंदें फेंकी हैं. तेज गेंदबाजों की वैश्विक सूची में वे 75 वें नंबर पर हैं—एक उपलब्धि जो उनके अपेक्षाकृत छोटे टेस्ट...

विज्ञापन हटाने के निर्देश दिए

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  गोवा.गोवा में प्रस्तावित ‘टेल्स ऑफ कामसूत्र एंड क्रिसमस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम पर उठा विवाद केवल एक आयोजन का विरोध नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना का संकेत है जो धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गरिमा और सार्वजनिक मर्यादा से जुड़े प्रश्नों पर बेहद सजग है.सोशल मीडिया पर जैसे ही इस कार्यक्रम का प्रचार सामने आया, समाज के विभिन्न वर्गों—सामाजिक संस्थाओं से लेकर धार्मिक संगठनों तक—ने इसकी तीखी प्रतिक्रिया दी.सार्वजनिक दबाव और शिकायतों के बाद गोवा पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए आयोजन पर रोक लगा दी. विज्ञापन हटाने के निर्देश दिए गए और पूरे राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई.     इस विवाद की जड़ केवल ‘कामसूत्र’ शब्द का प्रयोग नहीं है, बल्कि इसे क्रिसमस जैसे पवित्र पर्व के साथ जोड़कर प्रस्तुत करना है. शिकायतकर्ताओं को आपत्ति इसी बात से है कि धार्मिक उत्सव की आस्था और आध्यात्मिकता को बाजारू आकर्षण के साथ मिलाकर पेश किया गया. एनजीओ संस्थापक अरुण पांडे का तर्क है कि यह गोवा का सेक्स टूरिज्म के अड्डे की तरह प्रचारित करने की चाल है. वहीं, कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ गोवा ने इसे न सिर्फ अनुचित बताया ...

फादर किनले शेरिंग, भूटान के पहले और अब तक के एकमात्र मूल-निवासी कैथोलिक पादरी

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  भूटान .भूटान, जहाँ सदियों से बौद्ध धर्म सांस्कृतिक आत्मा की तरह समाज को संचालित करता आया है, वहाँ कैथोलिक समुदाय की उपस्थिति भले ही अल्पसंख्या में हो—लेकिन इसकी आध्यात्मिक गूंज अत्यंत गहरी है.रोम में पोप के आध्यात्मिक नेतृत्व से जुड़ा यह समुदाय दार्जिलिंग (भारत) के धर्मप्रांत के अधिकार क्षेत्र में आता है, और 2015 के अनुमान के अनुसार भूटान में कुल कैथोलिकों की संख्या मात्र 1,200 है. लेकिन इस छोटे से समुदाय की धड़कन एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी है, जिसकी कहानी भूटान के धार्मिक-सामाजिक इतिहास में अपूर्व स्थान रखती है—फादर किनले शेरिंग, भूटान के पहले और अब तक के एकमात्र मूल-निवासी कैथोलिक पादरी.      फादर शेरिंग की यात्रा एक साधारण धार्मिक कथा नहीं, बल्कि अंतरात्मा में उठी पुकार, सामाजिक दबावों से जूझते विश्वास, और आध्यात्मिक साहस की एक असाधारण दास्तान है। एक धर्मनिष्ठ बौद्ध परिवार में जन्मे और युवावस्था में उद्यमिता की राह पर बढ़ते हुए उन्होंने गुप्त रूप से ईसा मसीह की शिक्षाओं का अध्ययन शुरू किया—वह अध्ययन जो धीरे-धीरे उनके भीतर एक बेचैनी, एक अज्ञात खिंचाव और अंततः एक गहर...

बिहार का राजनीतिक तापमान कितना उबलने वाला है

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  पटना.बिहार की सियासी जमीन पर इन दिनों जो हलचल है, वह सिर्फ सत्ता परिवर्तन की नहीं, शासन-तरीकों की दिशा बदलने की चेतावनी भी है.भाकपा-माले की हाजीपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने जिस स्पष्टता और कड़वाहट से बातें रखीं, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आने वाले समय में बिहार का राजनीतिक तापमान कितना उबलने वाला है.     चुनाव के ठीक पहले 70 लाख नाम मतदाता सूची से गायब होना और 20–25 लाख नए नाम जोड़े जाना खुद में लोकतांत्रिक ढांचे की गंभीर विसंगति को उजागर करता है. दीपंकर का आरोप है कि यह सब एक संगठित साजिश की तरह हुआ—हर बूथ का संतुलन बदला गया, और इसके बाद जनता पर रुपये बिखेरकर चुनावी हवा को मोड़ा गया. यह आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल के साथ-साथ लोकतांत्रिक विश्वास को भी चोट पहुंचाता है.    सबसे बड़ा संकेत यह है कि बिहार अब “नीतीश मॉडल” नहीं, बल्कि “यूपी मॉडल” के रास्ते पर धकेला जा रहा है. मुख्यमंत्री तो नीतीश हैं, पर गृह मंत्रालय किसी और के पास है—और उसके पीछे बुलडोजर की छाया स्पष्ट दिखती है.जिस तरह उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कान...