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ऐतिहासिक महारैली 14 दिसंबर को रामलीला मैदान,नई दिल्ली में

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दिल्ली रामलीला मैदान में SIR के मुद्दे पर 14 दिसंबर को बिहार से बड़ी संख्या में पहुंचेंगे कांग्रेसजन: राजेश राम *रामलीला मैदान में एसआईआर के खिलाफ बिहार से बड़ी संख्या शामिल होंगे कांग्रेसजन: राजेश राम पटना,(आलोक कुमार). आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम, पटना में एस.आई.आर. (SIR) से जुड़े गंभीर मुद्दे को लेकर आगामी 14 दिसंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक महारैली की पूर्ण सफलता के लिए प्रदेश कांग्रेस द्वारा नियुक्त सभी जिला पर्यवेक्षकों की महत्वपूर्ण बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने संबोधित करते हुए  कहा कि एस.आई.आर. के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी और जनता की चिंता को नज़रअंदाज़ करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. आगामी 14 दिसंबर की महारैली देशभर के पीड़ितों और चिंतित नागरिकों की आवाज़ को केंद्र सरकार तक शक्तिशाली रूप में पहुँचाएगी और चुनाव आयोग के द्वारा भेदभाव पूर्ण रूप से की जा रही इस प्रक्रिया के मनमानी को राष्ट्रीय स्तर पर रखा जाएगा. इस महारैली को लेकर बि...

सदाकत आश्रम में मनाई गई राजेंद्र बाबू की जयंती

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  सदाकत आश्रम में मनाई गई राजेंद्र बाबू की जयंती  पटना .भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डा0 राजेन्द्र प्रसाद की 141 वीं जयंती  आज सदाकत आश्रम में मनाई गई.बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम  के नेतृत्व में सदाकत आश्रम के उद्यान में स्थित डा0 राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा पर  कांग्रेसजनों ने माल्यार्पण किया.       इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संविधान निर्माण और राष्ट्र निर्माण के अतुलनीय पुरोधा थे. उनका सादा जीवन, उच्च विचार और देश के प्रति समर्पण आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है.कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी, जो डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्शों की सच्ची विरासत है.      राजेश राम ने कहा कि डा0 राजेन्द्र प्रसाद में विलक्षण प्रतिभा  के साथ साथ  उनका स्वाभाव भी बहुत ही  मृदुल था.देश के प्रथम राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने वाले राजेन्...

अनुशासित और अधिक मसीह-केंद्रित बनाता है

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  पटना .सिरो-मालाबार कलीसिया अपने पांच-वर्षीय पादरी अभियान के चौथे पड़ाव पर पहुंच चुकी है—कलीसियाई अनुशासन का वर्ष. यह संयोग नहीं, बल्कि आवश्यकता की मांग है. वैश्वीकरण के प्रवाह में जब पहचान धुंधली पड़ने लगती है, जब परंपरा केवल स्मृतियों में सिमटने लगती हैं, और जब विश्वास की जड़ें प्रवासी जीवन की भागदौड़ में खोने लगती हैं—तब अनुशासन ही वह आधार बनता है जो कलीसिया को स्थिर रखता है. लेकिन ‘अनुशासन’ शब्द को समझने की आवश्यकता है. अनुशासन किसी दंड की छाया नहीं, बल्कि प्रशिक्षण है; किसी बंधन की जंजीर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिपक्वता का मार्ग है. लैटिन शब्द disciplina यही सिखाता है—निर्देशन, शिक्षा और गठन.इसी शिक्षा के द्वार से होकर हम मसीह को गहराई से जानने, उनके साथ एकाकार होने और ईसाई जीवन को सच्चाई से जीने के योग्य बनते हैं. कैनन विधि: व्यवस्था नहीं, सहभागिता का सेतु कैथोलिक कलीसिया केवल एक संस्था नहीं—यह सहभागिता का जीवित शरीर है. ईश्वर त्रिएक के साथ हमारा संबंध तभी संभव है जब हम कलीसिया, उसके शिक्षण, उसकी परंपराओं और उसके अनुशासन के भीतर जीते हैं. संत पौलुस तिमोथियुस को बताते हैं: “य...

कैथोलिक रहस्यवाद में डूबे इन इलाकों की एक विशिष्ट पहचान

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 कोट्टायम ,केरल के कोट्टायम जिले की धार्मिक-सांस्कृतिक बनावट जितनी प्राचीन है, उतनी ही बहुरंगी भी। 2011 की जनगणना के अनुसार केरल में 64 लाख से अधिक ईसाई बसते हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत सेंट थॉमस परंपरा से आने वाले हैं—एक ऐसी परंपरा, जो भारतीय ईसाईयत की सबसे पुरानी धारा मानी जाती है.इनके अतिरिक्त लैटिन कैथोलिक, पेंटेकोस्टल, सीएसआई और अन्य प्रोटेस्टेंट समुदाय राज्य की धार्मिक संरचना को और विविधता देते हैं. इसी सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत के हृदय में स्थित है कोट्टायम जिले का मनमट्टम, जो कंजिरापल्ली तालुका का शांत, लेकिन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध इलाका है. यहां का सेंट जॉर्ज चर्च (सिरो-मालाबार) केवल एक पूजा का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की पहचान का स्तंभ है. यह चर्च पलाई डायोसिस के अंतर्गत आता है, जो रोमन विजयपुरम डायोसीस के क्षेत्राधिकार में स्थित एक महत्त्वपूर्ण कैथोलिक केंद्र है. कैथोलिक रहस्यवाद में डूबे इन इलाकों की एक विशिष्ट पहचान है—सिरो-मालाबार और सिरो-मलंकरा कैथोलिक चर्चों की दोहरी परंपरा.दोनों चर्च वेटिकन से संबद्ध हैं और अपने-अपने मेजर आर्कबिशप के नेतृत्व में चलते ह...

प्रभु यीशु के जन्म से जुड़ी आध्यात्मिक तैयारी का समय माना जाता है

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 पटना. ईसाई जगत में प्रतीक्षा, तैयारी और आशा का पवित्र मौसम—आगमनकाल —रविवार से आरंभ हो गया है. क्रिसमस से चार सप्ताह पूर्व मनाया जाने वाला यह काल केवल उत्सवों की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रभु यीशु के जन्म से जुड़ी आध्यात्मिक तैयारी का समय माना जाता है. इस वर्ष आगमनकाल के प्रथम रविवार 30 नवंबर का मुख्य विषय ‘आशा का संदेश’ रहा.परंपरा के अनुसार दूसरा सप्ताह विश्वास, तीसरा सप्ताह आनंद, और चौथा सप्ताह शांति व प्रेम का संदेश लेकर आता है—वही प्रेम जो क्रिसमस की रात प्रभु यीशु के आगमन के रूप में जगत पर बरसा था. आगमनकाल को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने वाली कैंडल्स का रंग भी गहरा धार्मिक अर्थ समेटे रहता है. प्रथम, द्वितीय और चौथे सप्ताह में बैंगनी रंग की कैंडल जलाई जाती है, जो प्रार्थना, प्रायश्चित और आध्यात्मिक गंभीरता का प्रतीक है.यह पछतावे से आत्मशुद्धि और तैयारी की ओर बढ़ने का रंग है. जबकि तीसरे सप्ताह में जलने वाली गुलाबी या गुलाबी रंग की कैंडल आनंद, उमंग और आशा के उजाले का उद्घोष करती है—यह बताती है कि अब मन पश्चाताप से उत्सव की ओर बढ़ रहा है. आगमनकाल के आरंभ के साथ ही देशभर के चर्चों और आराध...

मानव जीवन विकास समिति की रजत जयंती

  मानव जीवन विकास समिति की रजत जयंती कटनी . सामाजिक परिवर्तन की ढाई दशकों की गूंज मानव जीवन विकास समिति (MJVS) ने अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए—यह सिर्फ एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की जिजीविषा, श्रम और विश्वास का उत्सव है, जिनके जीवन में इस समिति ने उम्मीद की रोशनी जगाई है. रजत जयंती समारोह का यह भव्य आयोजन प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक श्री राजगोपाल पी. वी. की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसने इस ऐतिहासिक क्षण को और भी गरिमामय बना दिया।समिति के सचिव निर्भय सिंह ने जब 250 से अधिक गाँवों में 25,000 परिवारों के साथ आजीविका निर्माण के निरंतर प्रयासों का विवरण साझा किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि MJVS का सफर सिर्फ सामाजिक सेवा का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का रहा है.    समिति के अध्यक्ष श्री बद्रीनारायण नरडिया ने गर्व के साथ कहा कि इन 25 वर्षों में संगठन ने आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी सार्थक पहचान स्थापित की है. यह यात्रा कठिन जरूर थी, लेकिन साथियों की प्रतिबद्धता और मार्गदर्शकों के स्नेह ने इसे संभव बनाया.समारोह के ...

'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना'

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  पटना . मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने आज 1, अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' से 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की 10 लाख लाभुक महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये प्रति लाभुक की दर से 1000 करोड़ रुपये की राशि अंतरण किया. इसके पूर्व 1 करोड़ 46 लाख लाभुक महिलाओं के खाते में 14 हजार 600 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है.     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज 'महिला रोजगार योजना' के तहत अपनी पसंद का रोजगार करने के लिए 10 लाख महिलाओं को दस-दस हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है. कुल मिलाकर 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को इसका फायदा मिल जायेगा. इस योजना में दी गयी सहायता से काफी संख्या में महिलाओं ने अपनी पसंद का रोजगार शुरू किया है. जो महिलाएं अपना रोजगार अच्छे से करेंगी, उन्हें आगे 2 लाख रुपये तक की सहायता दी जायेगी.     मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप सभी महिलाओं को इस 10 हजार रुपये की राशि से अपना काम शुरू करने में काफी मदद मिलेगी. इससे आपका परिवार खुशहाल होगा तथा बिहार का और तेजी से विकास होगा. आज के कार्यक्रम में तीनों लाभार्थियों ने अपने-अपने अनुभव...