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बुर्का–नकाब पर ‘नो एंट्री’ का आह्वान और संविधान के सामने खड़े सवाल

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  जब सुरक्षा के नाम पर पहचान कटघरे में खड़ी हो जाए बुर्का–नकाब पर ‘नो एंट्री’ का आह्वान और संविधान के सामने खड़े सवाल जब सुरक्षा के नाम पर किसी की पहचान पर पहरा लगाया जाने लगे, तब सवाल केवल अपराध का नहीं रहता—वह सीधे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ जाता है. बिहार की ज्वेलरी दुकानों में बुर्का या नकाब पहनकर आने वाली महिलाओं के लिए “No Entry” का आह्वान इसी चिंता को जन्म देता है. यह महज़ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकारों पर पड़ने वाला गहरा असर है. ऑल इंडिया ज्वेलर्स एवं गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिया गया यह वक्तव्य राज्य के उस सामाजिक ताने-बाने पर अनावश्यक दबाव डालता है, जो पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. सुरक्षा बनाम संदेह: रेखा कहां खिंचनी चाहिए?                                                                        ...

यात्राओं का मुख्यमंत्री: 21 साल में 15 यात्राएं

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  सत्ता, संघर्ष और सड़कें: फिर यात्रा पर निकल रहे हैं नीतीश कुमार 10 बार मुख्यमंत्री, 21 साल की सियासत और अब ‘समृद्धि यात्रा’ का नया अध्याय बि हार की राजनीति में अगर कोई चेहरा लगातार दो दशकों से केंद्र में रहा है, तो वह हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. सत्ता बदली, गठबंधन बदले, राजनीति के मौसम बदले—लेकिन नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद पर बने रहना अपने आप में एक राजनीतिक रिकॉर्ड है. अब एक बार फिर वे जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं.17 जनवरी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘समृद्धि यात्रा’ पर निकल रहे हैं, जो 22 मार्च तक चलेगी. 10 बार मुख्यमंत्री, सबसे लंबा कार्यकाल                                                                                                         नीतीश कुमार ने अब तक 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है ...

आज़ादी की कहानी फिर बहस के कटघरे में

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  “आज़ादी की कहानी फिर बहस के कटघरे में” एनएसए अजीत डोभाल के बयान ने छेड़ा आज़ादी के इतिहास पर नया विमर्श क्या भारत की आज़ादी की कहानी वह है, जो दशकों से हमें पढ़ाई और राजनीति में सुनाई जाती रही है—या फिर इसके कुछ अध्याय अब भी अधूरे हैं? राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया बयान ने इसी सवाल को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है. डोभाल का कहना है कि भारत को आज़ादी महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलनों से नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के दबाव के कारण मिली.यह बयान केवल एक ऐतिहासिक व्याख्या नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की प्राथमिकताओं को लेकर चली आ रही बहस को नए संदर्भ और नई धार देता है. INA बनाम अहिंसा: पुराना विवाद, नया संदर्भ                                                                                          ...

दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गोपालगंज से पूर्वी चंपारण पहुंचा

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  दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गोपालगंज से पूर्वी चंपारण पहुंचा नारायणी नदी पार कर विराट रामायण मंदिर केसरिया की ओर ऐतिहासिक यात्रा दु निया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब गोपालगंज से नारायणी नदी पार कर पूर्वी चंपारण पहुंच चुका है. करीब 210 टन वजनी इस विशाल शिवलिंग को डुमरिया घाट सेतु के रास्ते प्रशासन की निगरानी में सुरक्षित तरीके से नदी के उस पार ले जाया गया.इस ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण अभियान के सफल होने के बाद श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. शिवलिंग को पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाना है. प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती, लेकिन सफल अभियान                                                                                    इतने भारी-भरकम 210 टन शिवलिंग बिहार को पुल से सुरक्षित पार कराना जिला प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं...

संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार बंद

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  संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार बंद जयंती वर्ष का समापन, पर ईश्वर की दया अब भी खुली रोम से उठी एक ऐतिहासिक गूंज—                                                                         6 जनवरी 2026 को, प्रभु प्रकाश महापर्व के पावन अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर का पवित्र द्वार औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया. इसके साथ ही 24 दिसंबर 2024 से आरंभ हुए पवित्र जयंती वर्ष का भी विधिवत समापन हो गया.यह विशेष धर्मविधि संत पापा लियो चौदहवें (Pope Leo XIV) के नेतृत्व में सम्पन्न हुई.संत पेत्रुस महागिरजाघर का यह पवित्र द्वार रोम के चार प्रमुख पोप महागिरजाघरों में अंतिम था, जो अब तक खुला हुआ था. लाखों तीर्थयात्रियों के लिए यह द्वार केवल एक प्रवेश मार्ग नहीं, बल्कि आशा, पश्चाताप और नवीकरण का प्रतीक रहा. पवित्र द्वार बंद, लेकिन दया का द्वार नहीं                 ...

चुल्लू से गिलास तक: क्या आज़ाद भारत में छुआछूत अब भी ज़िंदा है?

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  चुल्लू से गिलास तक: क्या आज़ाद भारत में छुआछूत अब भी ज़िंदा है? भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है.हमारा संविधान समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की बात करता है.लेकिन ज़मीनी हकीकत कई बार इन आदर्शों से टकराती नज़र आती है. आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी यदि किसी नागरिक को जाति के आधार पर गिलास में पानी न मिले, तो यह सिर्फ सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि संविधान पर सीधा प्रहार है. डॉ. अंबेडकर और ‘चुल्लू’ की पीड़ा यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर ने अपने बचपन और युवावस्था में गंभीर जातिगत भेदभाव झेला.1900 के दशक की शुरुआत में उन्हें और उनके भाई-बहनों को स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर पानी तक नहीं दिया जाता था. कई बार उन्हें अपने हाथों को कप की तरह बनाकर—जिसे आम भाषा में ‘चुल्लू’ कहा जाता है—पानी पीना पड़ता था, या फिर किसी ऊँची जाति के व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़ता था, जो ऊपर से उनके हाथों में पानी डालता था.यह अपमान केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि उस दौर की कठोर जाति व्यवस्था का प्रतीक था. महाड़ सत्याग्रह: पानी नहीं, सम्मान की लड़ाई      ...

आम जनता तक पहुँच और जमीनी सच्चाई

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 सरकारी योजनाएँ: आम जनता तक पहुँच और जमीनी सच्चाई भारत सरकार द्वारा समय-समय पर देश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएँ, युवा और वंचित वर्गों के लिए अनेक सरकारी योजनाएँ शुरू की जाती हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक असमानता को कम करना, जीवन स्तर में सुधार लाना और हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है. कागज़ों में ये योजनाएँ बहुत प्रभावशाली दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर हर जगह एक जैसा नहीं दिखता. सरकारी योजनाओं का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश का कोई भी नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे.चाहे बात शिक्षा की हो, स्वास्थ्य की, रोजगार की या आवास की—हर क्षेत्र के लिए योजनाएँ बनाई गई हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मनरेगा जैसी योजनाएँ इसी सोच का परिणाम हैं.     इन योजनाओं के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक सुरक्षा मिले और वे आत्मनिर्भर बन सकें. ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की स्थिति ग्रामीण भारत में सरकारी योजनाओं की भूमि...