बुर्का–नकाब पर ‘नो एंट्री’ का आह्वान और संविधान के सामने खड़े सवाल
जब सुरक्षा के नाम पर पहचान कटघरे में खड़ी हो जाए बुर्का–नकाब पर ‘नो एंट्री’ का आह्वान और संविधान के सामने खड़े सवाल जब सुरक्षा के नाम पर किसी की पहचान पर पहरा लगाया जाने लगे, तब सवाल केवल अपराध का नहीं रहता—वह सीधे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ जाता है. बिहार की ज्वेलरी दुकानों में बुर्का या नकाब पहनकर आने वाली महिलाओं के लिए “No Entry” का आह्वान इसी चिंता को जन्म देता है. यह महज़ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकारों पर पड़ने वाला गहरा असर है. ऑल इंडिया ज्वेलर्स एवं गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिया गया यह वक्तव्य राज्य के उस सामाजिक ताने-बाने पर अनावश्यक दबाव डालता है, जो पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. सुरक्षा बनाम संदेह: रेखा कहां खिंचनी चाहिए? ...